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होगी रिलीज, निजी जीवन से राजनीति तक की कहानी

नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ भारत में 10 नवंबर 2026 को रिलीज होगी। किताब का प्रकाशन HarperCollins India करेगा। प्रकाशक के मुताबिक यह memoir सोनिया गांधी के निजी जीवन, पहचान, परिवार, कर्तव्य और भारत की राजनीतिक यात्रा पर एक अंदरूनी नजर पेश करेगी। निजी जीवन से राजनीति तक का सफर किताब में सोनिया गांधी अपने इटली के बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी से विवाह और नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक की यात्रा पर लिखेंगी। इसके साथ ही भारतीय राजनीति में उनके प्रवेश और कांग्रेस नेतृत्व के वर्षों का भी जिक्र होगा। 2004 के चुनाव और प्रधानमंत्री पद ठुकराने पर भी चर्चा ‘Belonging’ में 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत, UPA गठबंधन के निर्माण और सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के फैसले पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। किताब उनके राजनीतिक फैसलों और निजी संघर्षों के पीछे की सोच सामने ला सकती है। मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के दौर का भी जिक्र रिपोर्ट्स के मुताबिक memoir में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ सोनिया गांधी के कामकाजी रिश्तों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद बदले राजनीतिक माहौल पर भी उनका नजरिया शामिल होगा। Penguin के बाद HarperCollins ने संभाला प्रकाशन किताब को पहले भारत में Penguin Random House India द्वारा प्रकाशित किया जाना था, लेकिन manuscript में सुझाए गए कुछ editorial changes और deletions को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद HarperCollins India ने पुस्तक के भारतीय प्रकाशन की जिम्मेदारी संभाली। वैश्विक स्तर पर भी 10 नवंबर को रिलीज अमेरिका में Alfred A. Knopf ने भी किताब की global release 10 नवंबर के लिए तय की है। शुरुआती घोषणा में किताब की पहली print run 1 लाख copies रखने की बात सामने आई थी। Sonia Gandhi ने दिखाई किताब की पहली झलक हाल ही में सोनिया गांधी ने Instagram पर debut करते हुए अपनी किताब की पहली copies का वीडियो साझा किया। उन्होंने इसे प्रेम, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की तलाश से जुड़ी कहानी बताया। क्यों खास मानी जा रही है किताब? सोनिया गांधी दशकों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में रही हैं और कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाली नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनकी आत्मकथा से UPA दौर, कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गांधी परिवार से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर उनका निजी दृष्टिकोण सामने आने की उम्मीद है। स्रोत – HarperCollins India, Associated Press, Indian Express, NDTV, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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कर्नाटक MLC चुनाव में NDA का क्लीन स्वीप, BJP ने 3 और JD(S) ने 1 सीट जीती; कांग्रेस खाली हाथ

बेंगलुरु: कर्नाटक में हुए MLC चुनावों में NDA ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की है। परिणामों में BJP ने 3 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी JD(S) ने 1 सीट अपने नाम की। कांग्रेस इन चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। किन सीटों पर हुआ चुनाव? यह चुनाव कर्नाटक विधान परिषद की उन सीटों के लिए हुआ था जहां अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं। NDA ने चारों सीटों पर संयुक्त रणनीति के साथ उम्मीदवार उतारे और नतीजों में गठबंधन को पूरा फायदा मिला। BJP ने जीतीं 3 सीटें BJP उम्मीदवारों ने तीन सीटों पर जीत हासिल की। पार्टी ने नतीजों को सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ जनमत और संगठनात्मक मजबूती का संकेत बताया है। JD(S) को मिली एक सीट NDA की सहयोगी JD(S) ने भी एक सीट जीतकर गठबंधन का क्लीन स्वीप पूरा किया। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने परिणाम को BJP-JD(S) गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश बताया। कांग्रेस को नहीं मिली एक भी सीट राज्य में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस चारों सीटों पर जीत से दूर रही। परिणाम के बाद BJP और JD(S) नेताओं ने दावा किया कि यह नतीजा सरकार की नीतियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। हालांकि कांग्रेस ने MLC चुनाव परिणाम को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानने से इनकार किया है। कुमारस्वामी बोले—2028 के लिए जनादेश एचडी कुमारस्वामी ने जीत के बाद कहा कि यह परिणाम 2028 के विधानसभा चुनाव की दिशा का संकेत है। उन्होंने BJP और JD(S) कार्यकर्ताओं को जीत का श्रेय दिया और गठबंधन की रणनीति को सफल बताया। NDA के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत? कर्नाटक में BJP और JD(S) का गठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद भी राज्य की राजनीति में साथ काम कर रहा है। MLC चुनावों में 4-0 की जीत से दोनों दलों को विधानसभा से बाहर भी राजनीतिक और संगठनात्मक बढ़त मिली है। कांग्रेस के लिए बढ़ा राजनीतिक दबाव नतीजों के बाद कांग्रेस पर अपनी चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन की समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है। विपक्ष इस परिणाम को सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ संदेश के रूप में पेश कर रहा है, जबकि आने वाले चुनावों से पहले गठबंधन राजनीति और तेज होने की संभावना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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Jeffrey Epstein विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—मुलाकातें professional थीं; “धोखे में रखकर मिलवाया गया” quote की पुष्टि नहीं

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर फिर उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपनी पुरानी सफाई दोहराई है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे पूछा है कि क्या ये मुलाकातें private थीं और उनके पहले दिए गए बयान से मेल खाती हैं। Puri ने पहले क्या कहा था? Puri ने फरवरी 2026 में कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और ये interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से इनकार किया था। नई तस्वीरों से क्यों बढ़ा विवाद? 21 अक्टूबर को सामने आई एक तस्वीर में Puri और Epstein एक meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस दावे से मेल खाता है कि meetings delegation/professional setting में हुई थीं। Opposition ने emails और meetings का भी मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में दावा किया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनकी interactions का Epstein के crimes से कोई लेना-देना नहीं था। “मुझे धोखे में रखकर मिलवाया गया” वाली line पर सावधानी अभी उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे Puri का यह exact verified statement नहीं मिला कि “मुझे धोखे में रखकर मिलवाया गया।” इसलिए इस line को direct quote के रूप में publish करना safe नहीं होगा। Verified position यही है कि Puri contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में minors की sex trafficking के federal charges का सामना करना पड़ा। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई। किसी व्यक्ति का Epstein के records या emails में नाम होना अपने आप criminal wrongdoing साबित नहीं करता। जय राष्ट्र न्यूज़

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Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था

Jeffrey Epstein से मुलाकात विवाद पर Hardeep Singh Puri की सफाई, बोले—संपर्क पूरी तरह professional था नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026: Jeffrey Epstein से मुलाकातों को लेकर दोबारा उठे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri ने अपने पुराने संपर्कों पर सफाई दी है। Puri का कहना है कि Epstein के साथ उनकी मुलाकातें सीमित और पूरी तरह professional context में हुई थीं तथा उनका Epstein के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था। हाल में सामने आई तस्वीरों के बाद विपक्ष ने उनसे दोबारा जवाब मांगा है। विवाद फिर क्यों उठा? हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें Puri और Epstein एक private meeting में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद Congress, TMC और NCP (SP) नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह Puri के उस पुराने बयान से मेल खाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकातें delegation और professional engagements का हिस्सा थीं। Puri ने पहले क्या कहा था? फरवरी 2026 में Puri ने कहा था कि उन्होंने Epstein से “तीन या अधिकतम चार बार” मुलाकात की और सभी interactions Independent Commission on Multilateralism तथा अन्य international work से जुड़े थे। उन्होंने किसी wrongdoing से साफ इनकार किया था। Opposition ने 62 emails और 14 meetings का मुद्दा उठाया Congress ने फरवरी में आरोप लगाया था कि 2014 से 2017 के बीच Puri और Epstein के बीच 62 email exchanges और 14 meetings के records मौजूद हैं। Puri ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष public records को context से बाहर पेश कर रहा है। “धोखे में रखकर मिलवाया गया” दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ posts में Puri के नाम से यह दावा चल रहा है कि उन्हें “धोखे में रखकर Epstein से मिलवाया गया”। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय reports में मुझे इस exact wording की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। Verified position फिलहाल यही है कि Puri अपने contacts को professional बताते हैं और किसी criminal association से इनकार करते हैं। Epstein कौन था? Jeffrey Epstein एक अमेरिकी financier था जिसे 2008 में prostitution-related offence में दोषी ठहराया गया था और 2019 में उस पर minors की sex trafficking के federal charges लगे। 2019 में जेल में उसकी मौत हुई, जिसे suicide बताया गया। किसी व्यक्ति का Epstein के emails या records में नाम होना अपने आप में criminal wrongdoing का प्रमाण नहीं है। राजनीतिक विवाद जारी नई तस्वीरों के बाद विपक्ष Puri से मुलाकातों की संख्या, context और correspondence पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांग रहा है। Puri पहले ही सभी आरोपों को “baseless” बताते हुए अपनी भूमिका को professional engagements तक सीमित बता चुके हैं। Source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Kharge PM Modi के सामने उठाएंगे SIR, Delimitation और Women’s Reservation के मुद्दे

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ प्रस्तावित बैठक में Special Intensive Revision (SIR), परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाएंगे। खड़गे के मुताबिक, वह इन विषयों पर विपक्ष की चिंताओं को सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे। SIR को लेकर विपक्ष की चिंताएं Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने, दस्तावेजों के सत्यापन और पात्र मतदाताओं के सूची से बाहर होने की आशंकाओं पर सवाल उठा रहे हैं। खड़गे ने संकेत दिया है कि वह बैठक में इन चिंताओं को विस्तार से रखेंगे। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से न हटे। Delimitation क्यों है अहम मुद्दा? परिसीमन का अर्थ निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और संसदीय प्रतिनिधित्व का पुनर्निर्धारण है। इस मुद्दे पर कई विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारत के कुछ राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है। उनकी आशंका है कि भविष्य में जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से राज्यों के बीच संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति और राज्यों के साथ परामर्श की मांग कर रहा है। Women’s Reservation के क्रियान्वयन पर भी चर्चा महिला आरक्षण भी प्रस्तावित बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। कांग्रेस महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी समय-सीमा को लेकर सवाल उठाती रही है। कानून के तहत आरक्षण के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। विपक्ष इस विषय पर सरकार से स्पष्टता और जल्द क्रियान्वयन की मांग कर रहा है। PM Modi के सामने सीधे रखेंगे अपनी बात खड़गे ने कहा है कि वह इन मुद्दों पर अपनी चिंताओं को प्रधानमंत्री के सामने स्पष्ट रूप से रखेंगे। SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां विपक्ष इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और व्यापक परामर्श पर जोर दे रहा है, वहीं संबंधित सरकारी कदम संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाए जाने हैं। प्रस्तावित बैठक में इन मुद्दों पर क्या चर्चा होती है, इस पर नजर रहेगी। Source: Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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कोलकाता पंडाल हादसे के बाद अमित शाह के भव्य स्वागत पर सवाल, विपक्ष ने BJP को घेरा

कोलकाता, 19 अक्टूबर 2026: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हादसे के कुछ ही समय बाद ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ अमित शाह का स्वागत किया गया, जो संवेदनहीनता को दर्शाता है। हादसे और स्वागत के बीच करीब 35 मिनट का अंतर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंडाल में भगदड़ की घटना शाम करीब 7:40 बजे हुई, जबकि अमित शाह लगभग 8:15 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस आयोजन के समय और तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने साधा निशाना कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर हादसे और एयरपोर्ट स्वागत से जुड़े वीडियो साझा करते हुए BJP नेतृत्व की आलोचना की। विपक्ष का कहना था कि जिस समय शहर में लोग हादसे का शिकार हुए थे, उसी दौरान गृह मंत्री के स्वागत में समारोह आयोजित किया जा रहा था। हालांकि, ये राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। TMC ने भी BJP को घेरा तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी भगदड़ की घटना के बाद BJP और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पार्टी ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच की मांग की। घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अमित शाह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की एयरपोर्ट स्वागत को लेकर उठे विवाद के बीच अमित शाह ने अगले दिन अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने घटना पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भगदड़ में 19 लोगों की मौत, जांच जारी चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल (SIT) भीड़ प्रबंधन में संभावित लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और उस घोषणा की भूमिका की जांच कर रहा है, जिससे कथित तौर पर लोगों में घबराहट फैल गई थी। एयरपोर्ट स्वागत बना राजनीतिक विवाद का मुद्दा कोलकाता हादसे के बाद अमित शाह के स्वागत का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इसे संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़कर BJP की आलोचना कर रहा है। वहीं, हादसे से जुड़े तथ्यों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक चूक की जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। Source – Aaj Tak, Economic Times, Lagatar News, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Rajnath Singh का CJP-Opposition protest पर हमला, बोले—“Gandhis ने Gandhi नाम इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: Defence Minister Rajnath Singh ने CJP और Opposition के हालिया protests पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व और Gandhi परिवार ने ऐसा राजनीतिक रास्ता चुना है, जिससे उन्होंने “Gandhi नाम इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।” उनका बयान CJP-led anti-CEC protests और Opposition के समर्थन के बीच आया है। Rajnath Singh ने क्या कहा? Rajnath Singh ने Opposition पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा करने के बजाय सड़क के protests को political pressure के tool की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने Gandhi परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा कि Mahatma Gandhi के नाम से जुड़ी राजनीति करने वालों को पहले अपने conduct पर विचार करना चाहिए। Bangladesh का भी किया जिक्र अपने बयान में Rajnath Singh ने Opposition और CJP के protest model की तुलना Bangladesh जैसे street-mobilisation scenarios से की और संकेत दिया कि इस तरह की राजनीति India के democratic framework के लिए सही नहीं है। CJP protest को मिला Opposition का समर्थन पिछले कुछ दिनों से CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, SIR process और police action के खिलाफ लगातार protests कर रही है। Rahul Gandhi समेत कई Opposition leaders ने इन protests को समर्थन दिया है, जिससे मामला अब बड़ा political flashpoint बन गया है। BJP बनाम Opposition narrative तेज BJP का कहना है कि Election Commission और constitutional institutions पर pressure बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि Opposition का आरोप है कि electoral process और voter-list revision में गंभीर irregularities हैं और peaceful protest उनका democratic right है। बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना Rajnath Singh की “Gandhi नाम” वाली टिप्पणी के बाद Congress की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। इससे CJP protest, voter-list controversy और Opposition unity पर चल रही political battle और तेज हो सकती है। source – The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का बड़ा दावा—“मोदी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में”, ED-CBI और विदेश मंत्रालय के अफसरों का भी किया जिक्र

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और अंदरूनी जानकारी साझा कर रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, इन अधिकारियों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विदेश मंत्रालय से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह बयान 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। राहुल गांधी ने क्या कहा? Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और लगातार जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अधिकारियों की ओर से नियमित रूप से संदेश और इनपुट मिल रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अब तक कोई सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। ED, CBI और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का जिक्र राहुल गांधी ने कहा कि उनके संपर्क में रहने वाले अधिकारियों में Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI) और Ministry of External Affairs (MEA) से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन अधिकारियों ने किस तरह की जानकारी साझा की है या वे किन विभागों में कार्यरत हैं। इसलिए इस दावे को फिलहाल कांग्रेस नेता के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है। CEC और ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच आया बयान यह बयान उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जिसमें राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप भी लगाया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं राहुल गांधी के 200 अधिकारियों के संपर्क में होने संबंधी दावे को लेकर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों के नाम, साझा की गई जानकारी और संपर्क की प्रकृति का विवरण भी सामने नहीं आया है। ऐसे में इस बयान को एक राजनीतिक दावा मानना जरूरी है, जिसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अहम होगी। स्रोत – The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली रामलीला में CM Rekha Gupta की जुबान फिसलने पर विवाद, “हर एक राम मारा न जाए” बयान को लेकर AAP-Congress का हमला

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) का रामलीला कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में मुख्यमंत्री कथित तौर पर “जब तक हर एक रावण मारा न जाए” कहने के बजाय “जब तक हर एक राम मारा न जाए” बोलती सुनाई देती हैं। इस कथित बयान को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। वहीं, रेखा गुप्ता ने वायरल वीडियो और विपक्ष की आलोचना पर पलटवार किया है। कहां का है वायरल वीडियो? रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 13 अक्टूबर को दिल्ली के आजादपुर स्थित केवल पार्क इलाके में आयोजित श्री आदर्श कला केंद्र की रामलीला की है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ भाजपा विधायक राज कुमार भाटिया भी मौजूद थे। क्या कहा रेखा गुप्ता ने? सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर ‘रावण’ की जगह ‘राम’ शब्द सुनाई देता है। इसी हिस्से को विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने साझा करते हुए सवाल उठाए हैं। वीडियो में दिखाई देने वाली टिप्पणी को जुबान फिसलने की घटना बताया जा रहा है। हालांकि, बयान के आशय को समझने के लिए पूरे भाषण और उसके संदर्भ को देखना जरूरी है। AAP और कांग्रेस ने साधा निशाना वायरल वीडियो को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और मुख्यमंत्री के कथित बयान को भगवान राम के प्रति पार्टी की सोच से जोड़ने की कोशिश की। कांग्रेस नेताओं ने भी इस टिप्पणी पर सवाल उठाए। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि, विपक्ष की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें मुख्यमंत्री की मंशा का प्रमाण नहीं माना जा सकता। रेखा गुप्ता ने क्या दिया जवाब? विवाद के बीच रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी इस बात पर नजर रखते हैं कि वह क्या बोलती हैं और क्या पहनती हैं। उन्होंने वायरल सामग्री को लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया। वायरल वीडियो की जांच क्यों जरूरी? वीडियो को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे AI से बनाया गया या एडिट किया हुआ होने का दावा किया है। हालांकि, किसी वीडियो के संपादित होने या AI से तैयार किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर हुई जुबान की चूक का जिक्र है। ऐसे में वीडियो के छोटे हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल और पूरा वीडियो देखना महत्वपूर्ण है। इस मामले में वीडियो की प्रामाणिकता और पूरे संदर्भ की पुष्टि विवाद को समझने के लिए अहम होगी। स्रोत – Live Hindustan, ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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