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BRICS Summit से पहले Delhi की झुग्गियों पर पर्दे, Pawan Khera ने Centre को घेरा

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: 18th BRICS Summit के बीच Congress के Rajya Sabha MP Pawan Khera ने Delhi में कुछ slum clusters और low-income areas के सामने बड़े पर्दे और temporary barricades लगाए जाने को लेकर Centre पर हमला बोला है। Khera ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबी की वास्तविकता से निपटने के बजाय उसे विदेशी मेहमानों की नजरों से छिपाने की कोशिश कर रही है। ‘Modi की नाकामियों पर पड़ा पर्दा पसंद है’ Pawan Khera ने social media platform X पर एक video share करते हुए BJP पर तंज कसा। उन्होंने ‘hijab’ का जिक्र करते हुए कहा कि BJP को हर तरह का पर्दा आपत्तिजनक नहीं लगता और सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने वाले पर्दे को पसंद करती है। प्रमुख Routes पर लगाए गए Screens Reports के मुताबिक BRICS Summit से पहले Delhi के कुछ प्रमुख transit routes के आसपास large curtains और temporary barriers लगाए गए हैं, जिनके पीछे slum clusters और low-income neighbourhoods मौजूद हैं। इस कदम को लेकर Congress और AAP दोनों ने Centre पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि international delegates के सामने Delhi की गरीबी को छिपाने की कोशिश की जा रही है। AAP भी उठा चुकी है सवाल इससे पहले Aam Aadmi Party ने भी screens लगाए जाने पर Centre की आलोचना की थी। AAP ने कहा था कि पर्दे लगाने से जमीन पर मौजूद वास्तविकता नहीं बदल सकती। Delhi में बड़े international events से पहले slum areas के सामने screens या covers लगाए जाने को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। Delhi में जारी है 18th BRICS Summit India 12 और 13 सितंबर को New Delhi में 18th BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। Summit में expanded BRICS grouping के नेताओं की बैठकें हो रही हैं और global governance, cooperation तथा sustainability जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। Centre की प्रतिक्रिया का इंतजार Pawan Khera के आरोपों पर इस report के प्रकाशित होने तक Centre की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार गरीबी को पर्दे के पीछे छिपाने के बजाय लोगों की living conditions सुधारने पर ध्यान दे। source – Times of India / Pawan Khera X Post जय राष्ट्र न्यूज़

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Parliament Prorogation में देरी पर Congress ने Centre को घेरा, Delimitation Bill को लेकर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026: Parliament के Monsoon Session को adjourned sine die किए जाने के 29 दिन बाद भी prorogue नहीं किए जाने को लेकर Congress ने Centre पर निशाना साधा है। Congress महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि सरकार Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill को पास कराने के लिए Lok Sabha में जरूरी two-thirds majority जुटाने की कोशिश कर रही है। Prorogation में 29 दिन की देरी Jairam Ramesh के मुताबिक Parliament को 13 अगस्त को adjourned sine die किया गया था, लेकिन 11 सितंबर तक formal prorogation नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर adjournment और prorogation के बीच केवल तीन से चार दिन का अंतर रहता है। उन्होंने 2015 के Monsoon Session का भी जिक्र किया, जब यह अंतर 28 दिन था। इस बार यह अवधि बढ़कर 29 दिन हो गई है। Delimitation Bill से जोड़ा मामला Congress ने आरोप लगाया कि Home Minister Lok Sabha में Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। Jairam Ramesh ने दावा किया कि 17 अप्रैल को Bill के खिलाफ वोट करने वाली तीन पार्टियों में विभाजन हुआ है और कुछ अन्य सांसदों का रुख बदलवाने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप Congress की ओर से लगाए गए हैं। April में Bill को नहीं मिला था जरूरी बहुमत 17 अप्रैल 2026 को Delimitation से जुड़े Constitution Amendment Bill पर Lok Sabha में हुए मतदान में 528 MPs ने वोट किया था। इनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध किया था। Bill को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, इसलिए प्रस्ताव पास नहीं हो सका। All-Party Meeting की मांग Congress ने Centre से Delimitation के मुद्दे पर All-Party Meeting बुलाने की मांग दोहराई है। पार्टी का कहना है कि देश के प्रतिनिधित्व से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जानी चाहिए। source – Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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Mallikarjun Kharge ‘Shuddhikaran’ विवाद में Uttarakhand Police की कार्रवाई, अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

देहरादून, 9 सितंबर 2026: Congress President Mallikarjun Kharge की Haldwani rally के बाद Ramlila Maidan में कथित “shuddhikaran” को लेकर चल रहे विवाद में Uttarakhand Police ने करीब एक महीने बाद FIR दर्ज की है। Haldwani Kotwali में मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। करीब 80 शिकायतें मिलीं Nainital SSP Manjunath TC के मुताबिक इस मामले को लेकर पूरे Uttarakhand से करीब 80 complaints और petitions मिली थीं। इनमें अकेले Nainital district से 19 शिकायतें थीं। Police ने legal scrutiny के बाद Haldwani की social activist और lawyer Anju की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। उन्होंने police को घटना से जुड़े videos भी उपलब्ध कराए थे। SC/ST Act समेत इन धाराओं में Case FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita की Sections 196 और 299 तथा SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की Section 3(1)(r) लगाई गई है। ये provisions groups के बीच कथित वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाएं आहत करने और caste-based insult या humiliation से संबंधित हैं। FIR में फिलहाल किसी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है। क्या है पूरा ‘Shuddhikaran’ विवाद? Mallikarjun Kharge ने 8 अगस्त को Haldwani के Ramlila Maidan में Congress rally को संबोधित किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इसके बाद venue पर cleaning और कथित “shuddhikaran” ritual किया गया और इसके videos तथा photographs social media पर circulate किए गए। Congress ने इसे Kharge की Dalit identity से जोड़ते हुए caste discrimination और untouchability का मामला बताया है। आयोजकों ने Caste Motive से किया इनकार “Shuddhi Yagya” आयोजित करने वाले Shri Ram Sena Dharmarth Seva Nyas ने आरोपों से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम का Mallikarjun Kharge की caste से कोई संबंध नहीं था और उसका उद्देश्य venue की सफाई तथा धार्मिक-सांस्कृतिक पवित्रता बहाल करना था। BJP ने भी इस आयोजन को करने वाले संगठन से दूरी बनाई है। Kharge ने Rajya Sabha में भी उठाया था मुद्दा Mallikarjun Kharge ने इस विवाद को Rajya Sabha में उठाते हुए कहा था कि इस घटना से उन्हें untouchability और humiliation का अहसास हुआ। उन्होंने BJP President J. P. Nadda को भी पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। Senior Officer करेंगे Investigation मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच SP Crime Jagdish Chandra को सौंपी गई है। Police अब complaints, उपलब्ध videos और अन्य material की जांच कर यह पता लगाएगी कि कथित ritual के पीछे कौन लोग थे और क्या इसमें caste-based offence बनता है। source – The Indian Express / Uttarakhand Police जय राष्ट्र न्यूज़

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Tamil Nadu Alliance पर Congress की Red Line—Rahul Gandhi ही PM Face, Vijay को लेकर अटकलों के बीच बड़ा बयान

चेन्नई, 7 सितंबर 2026: Tamil Nadu की सत्तारूढ़ गठबंधन राजनीति में 2029 के Prime Minister face को लेकर नई बहस तेज हो गई है। Congress ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले Lok Sabha चुनाव में Rahul Gandhi ही पार्टी और विपक्षी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के कुछ नेता मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। K.C. Venugopal ने साफ किया Congress का रुख Congress General Secretary K.C. Venugopal ने कहा कि Rahul Gandhi 2029 में INDIA bloc का नेतृत्व करेंगे। Vijay को PM candidate के रूप में पेश किए जाने से जुड़ी चर्चाओं को उन्होंने Congress के आधिकारिक रुख से अलग बताया। Manickam Tagore ने भी दोहराई Rahul Gandhi की दावेदारी Tamil Nadu Congress President Manickam Tagore ने भी कहा कि Rahul Gandhi ही Congress के Prime Ministerial candidate हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर alliance arrangements और national leadership के सवाल को आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। TVK में उठ रही ‘Vijay for PM’ की मांग TVK के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने Vijay को 2029 के लिए संभावित PM candidate के रूप में project करना शुरू किया है। इसी वजह से Congress और TVK के बीच national leadership को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हुई है। हालांकि Vijay की ओर से इस पर कोई formal PM candidature announcement नहीं की गई है। 9 सितंबर की Alliance Meeting अहम Vijay ने 9 सितंबर को alliance partners की बैठक बुलाई है। इस meeting में गठबंधन के formal नाम और Common Minimum Programme पर चर्चा होने की उम्मीद है। Congress ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। Left Parties ने बनाई दूरी Reports के मुताबिक CPI और CPI(M) ने इस बैठक में शामिल होने को लेकर दूरी बनाई है। इससे alliance के अंदर आगे की राजनीतिक दिशा और 2029 की national strategy पर नए सवाल खड़े हुए हैं। Congress के लिए Rahul Gandhi पर कोई समझौता नहीं Congress का संदेश साफ है कि Tamil Nadu में Vijay के साथ सत्ता साझेदारी होने के बावजूद national level पर party Rahul Gandhi की leadership से पीछे नहीं हटेगी। इसी वजह से इसे Congress की political “red line” के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल Alliance टूटने के संकेत नहीं मतभेद के बावजूद फिलहाल Congress ने TVK-led सरकार या alliance से अलग होने का कोई संकेत नहीं दिया है। दोनों पक्ष 9 सितंबर की meeting से पहले बातचीत जारी रखे हुए हैं। इसलिए मौजूदा विवाद को alliance breakdown की बजाय leadership positioning के रूप में देखना ज्यादा सही होगा। source – The Indian Express / Economic Timesजय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का पुणे दौरा; ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों से सीधा संवाद

पुणे: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। इस बार कार्यक्रम का खास फोकस छात्राओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला सुरक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और आदिवासी छात्रों की समस्याओं समेत कई विषय उठे। राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय छात्रों की बातें सुनने और उनके सवालों का जवाब देने पर जोर दिया। छात्राओं ने उनके सामने उच्च शिक्षा में आने वाली बाधाओं, परिवार और समाज के दबाव, आर्थिक समस्याओं तथा सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा किए। महिला छात्राओं पर रहा कार्यक्रम का खास फोकस ‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस की छात्र और युवा outreach initiative का हिस्सा है। पुणे में आयोजित इस संस्करण को मुख्य रूप से महिला छात्राओं के संवाद पर केंद्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि वह लंबा राजनीतिक भाषण देने के बजाय वहां मौजूद महिलाओं और छात्राओं की समस्याओं को सुनना चाहते हैं। कार्यक्रम में छात्राओं ने sexual harassment, personal safety, शिक्षा जारी रखने में आर्थिक दिक्कत और विवाह तथा घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई प्रभावित होने जैसे विषय उठाए। महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर राहुल गांधी का जोर अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल बेटी, बहन, पत्नी या मां के रूप में सीमित नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं को अपने फैसले लेने, शिक्षा हासिल करने, रोजगार चुनने और सामाजिक जीवन में अपनी जगह बनाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की बात कही। राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान Manusmriti का जिक्र करते हुए महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों पर निर्भर मानने वाली सोच की आलोचना भी की। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। MPSC अभ्यर्थी ने राहुल गांधी के सामने रखी समस्या कार्यक्रम में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की तैयारी कर रही एक छात्रा ने भी अपनी परेशानी राहुल गांधी के सामने रखी। छात्रा ने हालिया परीक्षा से जुड़े कथित paper leak और दोबारा परीक्षा कराने की मांग का जिक्र किया। उसने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी और कथित अनियमितताओं के कारण महिला अभ्यर्थियों को परिवार और विवाह से जुड़े अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी ने MPSC उम्मीदवारों की मांग को समर्थन देने का भरोसा दिया। आदिवासी छात्राओं ने भी उठाए गंभीर मुद्दे पुणे कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। एक आदिवासी छात्रा ने राहुल गांधी को बताया कि पुणे के मांजरी क्षेत्र में छात्र सरकारी आदिवासी हॉस्टलों से जुड़े नियमों और सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रा ने सरकारी हॉस्टलों में रहने की age limit बढ़ाने, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पीने के पानी, beds और healthcare facilities जैसे मुद्दे उठाए। उसने आश्रम स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल किए। इस पर राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही और जरूरत पड़ने पर उनके साथ आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई। शिक्षा और रोजगार भी चर्चा के केंद्र में कार्यक्रम में केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। छात्राओं और professional women ने शिक्षा, courses, employment opportunities और financial independence से जुड़े सवाल भी रखे। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए और सामाजिक दबाव उनके करियर की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा और सामाजिक भेदभाव भी प्रमुख विषय रहे। कार्यक्रम से पहले 30 शर्तों के साथ मिली थी अनुमति राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को लेकर आयोजन से पहले भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पुणे पुलिस ने 22 अगस्त के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी। इनमें noise pollution नियमों का पालन, drones के इस्तेमाल पर रोक और आपत्तिजनक banners या सामग्री न लगाने जैसी शर्तें शामिल थीं। कांग्रेस की पुणे इकाई ने दावा किया था कि कार्यक्रम के लिए 30,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन registration कराया था। यह संख्या कांग्रेस की ओर से किया गया दावा था। BJP ने कार्यक्रम को लेकर उठाए सवाल राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर BJP और Congress के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। महाराष्ट्र BJP ने कार्यक्रम की funding को लेकर सवाल उठाए और कांग्रेस पर आयोजन में लोगों को जुटाने के लिए पैसे खर्च करने के आरोप लगाए। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम को युवाओं से मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है। कार्यक्रम के एक दिन पहले पुणे की COEP Technological University के hostel के बाहर ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच तनाव और झड़प की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच की कोशिश राजनीतिक दृष्टि से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस की युवा और छात्र वर्ग से सीधे जुड़ने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पुणे के कार्यक्रम में खास तौर पर महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और स्वतंत्रता को केंद्र में रखा गया। राहुल गांधी ने छात्राओं के सवालों को सीधे सुनकर उनके जवाब दिए और कुछ आंदोलनों को समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। अब इस कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के Manusmriti, महिला अधिकारों और छात्र समस्याओं पर दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJP नेताओं ने कार्यक्रम और राहुल गांधी के बयानों की आलोचना की है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश बता रही है। फिलहाल 22 अगस्त को पुणे में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम छात्राओं के साथ राहुल गांधी के सीधे संवाद, MPSC परीक्षा विवाद और आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों के कारण चर्चा में बना हुआ है। स्रोत – पीटीआई, इंडिया टुडे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राजनीतिक | Shashi Tharoor ने Rahul Gandhi के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान पर टिप्पणी को लेकर दी सफाई, बोले—मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया गया

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने राहुल गांधी के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान को लेकर अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई दी है। Tharoor ने कहा कि उनकी बात को कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत तरीके से पेश किया गया और उनकी टिप्पणी का उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व या राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला करना नहीं था। Tharoor ने स्पष्ट किया कि वह केवल इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि छात्र और युवा किस तरह के राजनीतिक संदेशों और आंदोलनों से अधिक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को अगली पीढ़ी के लिए अपने दरवाजे और अधिक खोलने की जरूरत है। ‘Chhatron Ki Goonj’ को लेकर क्या कहा था Tharoor ने? Shashi Tharoor ने राहुल गांधी के छात्र-केंद्रित ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम और हाल के छात्र आंदोलनों के प्रभाव की तुलना करते हुए सवाल उठाया था कि कांग्रेस का अभियान छात्रों के बीच उतना प्रभाव क्यों नहीं पैदा कर सका। उन्होंने संकेत दिया था कि कुछ अन्य छात्र आंदोलनों को युवाओं के बीच ज्यादा प्रतिक्रिया मिली। Tharoor के मुताबिक, कांग्रेस ने छात्र मुद्दों को पहले भी उठाया था, लेकिन उसके अभियान को उतना व्यापक जनसमर्थन या resonance नहीं मिला। Tharoor बोले—मेरी टिप्पणी को राजनीतिक हमला न माना जाए अपनी नई सफाई में Tharoor ने कहा कि उनकी टिप्पणी को कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बताना सही नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि उनका उद्देश्य पार्टी की कमियों पर सार्वजनिक बहस करना और यह समझना था कि युवाओं तक राजनीतिक संदेश प्रभावी तरीके से क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी के साथ जुड़ने के नए तरीके खोजने होंगे और युवाओं को पार्टी की decision-making प्रक्रिया में अधिक अवसर देने होंगे। राहुल गांधी का ‘Chhatron Ki Goonj’ कार्यक्रम क्या है? राहुल गांधी का ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने पर केंद्रित है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया और शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। हालिया कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को केवल सोशल मीडिया content तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। CJP के छात्र आंदोलन से तुलना क्यों हुई? Tharoor की टिप्पणी उस समय सामने आई जब CJP के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा तेज थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिन छात्र मुद्दों को पहले उठाया था, उन्हीं मुद्दों पर बाद में हुए विरोध प्रदर्शन ने युवाओं के बीच ज्यादा प्रभाव पैदा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने युवाओं की चिंताओं को पर्याप्त रूप से समझने और उनके साथ प्रभावी तरीके से संवाद करने में कहीं कमी की। कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत? Tharoor की टिप्पणी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि राजनीतिक दलों को केवल युवाओं के मुद्दे उठाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि युवा यह महसूस करें कि उनकी बात वास्तव में सुनी जा रही है। उन्होंने राजनीतिक संगठनों से यह सोचने की जरूरत बताई कि उनकी outreach किस तरह की होनी चाहिए और युवाओं को संगठन के भीतर वास्तविक भूमिका कैसे दी जा सकती है। BJP ने Tharoor की टिप्पणी को बनाया मुद्दा Tharoor की शुरुआती टिप्पणी के बाद BJP नेताओं ने इसे कांग्रेस के भीतर असंतोष और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल के तौर पर पेश किया। वहीं कांग्रेस की ओर से यह कहा गया कि राहुल गांधी का फोकस केवल तत्काल राजनीतिक प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि systemic reforms और युवाओं से जुड़े मूल मुद्दों पर है। इस तरह Tharoor की टिप्पणी ने कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया। Tharoor की सफाई के बाद क्या बदला? नई सफाई के बाद Tharoor ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनकी टिप्पणी को राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत या संगठनात्मक बगावत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मुख्य तर्क यह है कि राजनीतिक दलों को युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच और उनकी अपेक्षाओं को समझना होगा। इसके लिए केवल campaign आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक ढांचे में भी जगह देनी होगी। कांग्रेस के लिए युवा वोट बैंक क्यों महत्वपूर्ण है? भारत में युवा और छात्र वर्ग राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मतदाता समूह है। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे युवाओं को प्रभावित करते हैं। ऐसे में कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के सामने चुनौती है कि वे युवाओं से केवल चुनावी समय में संपर्क न करें, बल्कि लगातार संवाद और संगठनात्मक भागीदारी का रास्ता बनाएं। निष्कर्ष Shashi Tharoor ने Rahul Gandhi के ‘Chhatron Ki Goonj’ अभियान को लेकर अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका कहना है कि वह कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत हमला नहीं कर रहे थे, बल्कि यह सवाल उठा रहे थे कि राजनीतिक दल युवाओं के साथ अधिक प्रभावी संवाद कैसे स्थापित कर सकते हैं। Tharoor की टिप्पणी ने कांग्रेस के युवा outreach और राहुल गांधी की रणनीति को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है। अब देखना होगा कि यह बहस कांग्रेस के भीतर युवाओं की भूमिका और पार्टी की भविष्य की outreach strategy में किस तरह का बदलाव लाती है। Source: Outlook India, Hindustan Times, The Statesman, NDTV, Indian political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राजस्थान और अन्य राज्यों की राज्यसभा सीटों पर आज राजनीतिक नजरें

जय राष्ट्र न्यूज़ | स्टेट्स डेस्क | 22 जून 2026 मुख्य समाचार राजस्थान सहित कई राज्यों की राज्यसभा सीटों को लेकर आज राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल आगामी संसदीय समीकरणों और अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। हालिया राज्यसभा चुनावों और बदलते राजनीतिक गणित ने इन सीटों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में संख्या बल आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण विधायी और राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। राजस्थान बना चर्चा का केंद्र राजस्थान की राज्यसभा सीटों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों विशेष रुचि दिखा रहे हैं। राज्य की राजनीतिक स्थिति और विधानसभा में दलों की संख्या को देखते हुए यहां के परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। अन्य राज्यों में भी सक्रियता राजस्थान के अलावा कई अन्य राज्यों में भी राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीतिक बैठकें और चर्चा जारी हैं। विभिन्न दल अपने समर्थन आधार को मजबूत करने और भविष्य के समीकरणों को साधने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी कई राज्यों में निर्णायक साबित हो सकती है। संसद के समीकरणों पर असर राज्यसभा की सीटें केवल राज्यों तक सीमित मुद्दा नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति और संसद की कार्यवाही पर पड़ता है। ऊपरी सदन में संख्या बल किसी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण विभिन्न दल राज्यसभा के गणित को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। राजनीतिक रणनीतियां तेज सूत्रों के अनुसार कई दल आगामी संसद सत्र और भविष्य के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। राजनीतिक दलों के बीच संपर्क और संवाद का दौर भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में राज्यसभा से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। क्षेत्रीय दलों की भूमिका राज्यसभा चुनावों और सीटों के समीकरण में क्षेत्रीय दल अक्सर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई मामलों में उनकी स्थिति सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने वाली साबित होती है। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय दलों का समर्थन कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकता है। राष्ट्रीय राजनीति पर नजर राज्यसभा की सीटों को लेकर चल रही गतिविधियों पर राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल भी नजर बनाए हुए हैं। संसद के आगामी सत्र और संभावित विधायी एजेंडे को देखते हुए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा का गणित अगले कुछ महीनों तक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है। निष्कर्ष राजस्थान और अन्य राज्यों की राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। सत्ता पक्ष, विपक्ष और क्षेत्रीय दल सभी आगामी राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखे हुए हैं। राज्यसभा में संख्या बल का महत्व देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। स्रोत: Election Commission of India मूल रिपोर्ट:https://eci.gov.in जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल विपक्षी दलों के नेता

INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक, सामने आया नया 5-सूत्रीय प्लान

विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति, जनहित के मुद्दों और संसद के भीतर तथा बाहर विपक्ष की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक के बाद गठबंधन के नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में वे पांच प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रणनीति के साथ जनता के बीच जाएंगे। बैठक में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और देश के मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक हालात पर विचार-विमर्श किया। गठबंधन का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाना और साझा मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाना बताया गया। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। नेताओं ने माना कि आम जनता से जुड़े इन मुद्दों को लेकर व्यापक संवाद की आवश्यकता है। बैठक में यह भी विचार किया गया कि विभिन्न राज्यों में गठबंधन की रणनीति को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कैसे मजबूत किया जाए। कई नेताओं ने जमीनी स्तर पर संगठनात्मक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। क्या है 5-सूत्रीय प्लान? गठबंधन की चर्चा से जो प्रमुख बिंदु सामने आए, उनमें निम्नलिखित मुद्दों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है: हालांकि गठबंधन की ओर से विस्तृत आधिकारिक दस्तावेज जारी होने की प्रतीक्षा की जा रही है, लेकिन इन मुद्दों को आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों का आधार माना जा रहा है। गठबंधन की पृष्ठभूमि INDIA गठबंधन का गठन विभिन्न विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से किया गया था। समय-समय पर गठबंधन की बैठकों में चुनावी रणनीति, संसद में समन्वय और जनहित के मुद्दों पर साझा रुख तय करने की कोशिश की जाती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल गठबंधन की प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है। हालांकि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के कारण चुनौतियां भी बनी हुई हैं। जनता पर क्या असर पड़ सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गठबंधन अपने घोषित मुद्दों पर लगातार अभियान चलाता है, तो महंगाई, रोजगार और किसानों से जुड़े सवाल राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में अधिक प्रमुखता से उभर सकते हैं। इसके अलावा विपक्षी दलों की एकजुटता संसद और अन्य लोकतांत्रिक मंचों पर भी प्रभाव डाल सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि गठबंधन अपने एजेंडे को कितनी प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा पाता है।

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