दिल्ली पुलिस की हिरासत में NSUI महिला कार्यकर्ता से कथित मारपीट, राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: दिल्ली में NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और कथित कस्टोडियल हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घायल छात्र-कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को उठाया। इस दौरान NSUI से जुड़ी छात्रा अथिरा (Athira) ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में उसे चोटें आईं और उसकी एक कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों से वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की अपील की। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। महिला कार्यकर्ता अथिरा ने क्या आरोप लगाए? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अथिरा ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में उसके साथ मारपीट हुई और उसे गंभीर चोटें आईं। राहुल गांधी ने भी उसकी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अब एक कान से ठीक से सुन नहीं पा रही है। यह मामला कथित हिरासत में हिंसा और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, सुनने की क्षमता प्रभावित होने के दावे की चिकित्सकीय पुष्टि और घटना की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। महिला प्रदर्शनकारी को बालों से खींचने का वीडियो हुआ था वायरल इस घटना से एक दिन पहले दिल्ली के राजीव चौक के पास मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला NSUI कार्यकर्ता को कथित तौर पर बालों से खींचे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। NSUI ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो पुलिस के सत्यापन के दायरे में था। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच से घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के बारे में अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है। राहुल गांधी ने वीडियो और सबूत सुरक्षित रखने की अपील की राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से पुलिस कार्रवाई से संबंधित वीडियो, तस्वीरें और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और जवाबदेही तय करने के लिए सबूत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप कांग्रेस नेता और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं; मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय की जा सकती है। घायल छात्रा को बताया ‘हमारी शेरनी’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने घायल महिला कार्यकर्ता के साहस की सराहना करते हुए उसे “हमारी शेरनी” कहा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने और हिंसा के बजाय प्रेम तथा अहिंसक तरीकों से जवाब देने की बात कही। उनकी यह टिप्पणी छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताने और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाने के संदर्भ में आई। किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे NSUI कार्यकर्ता? NSUI समेत कई छात्र और विपक्षी समूह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में इन प्रदर्शनों को लेकर पुलिस प्रतिबंधों और हिरासत में लिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। पुलिस पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच अहम NSUI कार्यकर्ताओं के आरोपों ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार, महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और जवाबदेही की आवश्यकता पर बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा। घटना की निष्पक्ष जांच, संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन, चिकित्सकीय दस्तावेजों की समीक्षा तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है। मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित घटनाक्रम में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी बनती है। Source – The New Indian Express, The Indian Express, The Times of India और Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

