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निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में चिराग पासवान की सफाई, बोले- स्वतंत्र भारद्वाज ने मेरे नाम का गलत इस्तेमाल किया

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा अपने नाम का इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका नाम गलत तरीके से इस विवाद से जोड़ा गया है। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज चिराग पासवान ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच करने और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने की मांग की है। ‘ऐसी घटना बेहद गंभीर’ पासवान ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुले तौर पर किसी को इतनी गंभीर चोट पहुंचाने का दावा करता है और उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा के मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। Podcast में लिया गया था चिराग पासवान का नाम विवाद उस समय बढ़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक podcast clip सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित तौर पर निशु आजाद के पिता पर हमला करने की बात कहते हुए कई राजनीतिक नेताओं का नाम लेते नजर आए। इसी दौरान उन्होंने चिराग पासवान को भी अपना ‘बड़ा भाई’ बताया था। LJP ने किसी संबंध से किया इनकार Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने भी भारद्वाज के साथ किसी तरह के संबंध से इनकार किया है। पार्टी की शिकायत में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री के नाम का इस्तेमाल कथित राजनीतिक प्रभाव दिखाने के लिए किया गया, जिसे पार्टी ने गलत और भ्रामक बताया है। दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि पुलिस बिना किसी दबाव के मामले की जांच करे। उन्होंने कहा कि उनके या अन्य नेताओं के नाम का सहारा लेकर किसी कानूनी कार्रवाई से बचने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। हिरासत में लिया जा चुका है स्वतंत्र भारद्वाज विवाद बढ़ने और प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया। मामले में जांच जारी है और पुलिस पहले ही राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुकी है। source – Times of India / Moneycontrolजय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज के इंटरव्यू में गंभीर दावे, वायरल वीडियो के बाद उठे नए सवाल; पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोप नकारे

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के वीडियो सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर हुई मारपीट का मामला फिर चर्चा में आ गया है। इंटरव्यू में भारद्वाज ने एक प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला करने और राजनीतिक संपर्कों को लेकर कई गंभीर दावे किए। इसके बाद विपक्षी नेताओं और Cockroach Janta Party (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले को लेकर दावा वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार को मारा था। उन्होंने चोट की गंभीरता को लेकर भी बड़ा दावा किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी कही बातें इंटरव्यू में भारद्वाज ने कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ अपने संबंधों का दावा किया और कथित तौर पर कहा कि इन संपर्कों के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। इन्हीं बयानों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा और कई नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। दिल्ली पुलिस ने दावों को बताया बेबुनियाद दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की गई और किसी नेता के दबाव में कार्रवाई रोकने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। पुलिस ने यह भी कहा कि medical reports में संजय कुमार की skull fracture की पुष्टि नहीं हुई और चोट को simple injury बताया गया। भारद्वाज ने बाद में कहा—Self Defence में किया था हमला विवाद बढ़ने के बाद भारद्वाज ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह भीड़ से घिर गए थे और उन्होंने जो किया, वह self-defence में किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे कई आरोपों से भी इनकार किया। गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन शुक्रवार को CJP समर्थकों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। आरोप और पुलिस के बयान में बड़ा अंतर मामले में सबसे बड़ा सवाल भारद्वाज के वायरल इंटरव्यू में किए गए दावों और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक version के बीच अंतर को लेकर है। जहां भारद्वाज ने गंभीर चोट और राजनीतिक संरक्षण जैसी बातें कहीं, वहीं पुलिस ने skull fracture और political interference—दोनों दावों को नकार दिया है। अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। source – The Indian Express / Delhi Police / NDTVजय राष्ट्र न्यूज़

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Greater Noida-Delhi Sleeper Bus में नाबालिग छात्रा से कथित Gangrape; Driver-Conductor गिरफ्तार, Police Jurisdiction पर भी विवाद

नई दिल्ली: Delhi-NCR में एक नाबालिग Class 11 छात्रा से चलती sleeper bus में कथित gangrape के मामले ने public transport की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Police के मुताबिक घटना 4 अगस्त 2026 की रात हुई थी। मामले में bus driver और conductor को गिरफ्तार किया गया है, जबकि vehicle को जब्त कर forensic examination के लिए भेजा गया है। मामले की जानकारी 31 अगस्त को प्रमुखता से सामने आई, जबकि आज 1 सितंबर को Delhi Police और Gautam Buddh Nagar Police के बीच jurisdiction को लेकर विवाद सामने आया है। National Human Rights Commission यानी NHRC ने भी मामले का संज्ञान लिया है। Pari Chowk से Bus में सवार हुई थी छात्रा Police के मुताबिक नाबालिग छात्रा भारी बारिश के दौरान Greater Noida के Pari Chowk पर फंस गई थी और Noida Sector 63 पहुंचने के लिए transport तलाश रही थी। इसी दौरान एक खाली sleeper bus वहां पहुंची। Driver और conductor ने कथित तौर पर छात्रा को बताया कि वे Sector 63 की तरफ जा रहे हैं और उसे bus में बैठा लिया। इसके बाद छात्रा ने police complaint में दोनों पर चलती bus में sexual assault करने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया। नाबालिग की privacy को देखते हुए उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। Kashmere Gate के पास छोड़ा गया Delhi Police की DCP North Niharika Bhatt के मुताबिक alleged crime का location Pari Chowk से Sector 63, Noida के बीच का route था। इसके बाद आरोपियों ने छात्रा को Delhi में Kashmere Gate के पास Ring Road पर छोड़ दिया। वह वहां से Kashmere Gate Police Station पहुंची और घटना की शिकायत दर्ज कराई। इसलिए घटना को केवल “Kashmere Gate में gangrape” कहना misleading हो सकता है। Driver और Conductor गिरफ्तार Police ने CCTV footage और technical तथा local intelligence की मदद से sleeper bus को trace किया। दोनों आरोपियों—bus driver और conductor—को Timarpur के bus parking area से गिरफ्तार किया गया। Delhi Police के मुताबिक दोनों arrests complaint मिलने के कुछ घंटों के भीतर की गईं। Bus को भी seize कर forensic investigation के लिए भेजा गया है। BNS और POCSO Act के तहत Case मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) और Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act की relevant provisions के तहत मामला दर्ज किया गया है। Reports के मुताबिक FIR में gangrape, kidnapping और assault से संबंधित allegations भी शामिल हैं। Police investigation अभी जारी है और आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। 47 Km तक नहीं हुई Bus की Checking इस मामले में सबसे बड़ा सवाल passenger-vehicle monitoring पर उठ रहा है। Reports के मुताबिक sleeper bus ने Greater Noida से Delhi तक करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय की और रास्ते में किसी police checkpoint पर उसे रोका नहीं गया। Bus के CCTV system को लेकर भी सवाल उठे हैं। Reports में कहा गया है कि vehicle repair process में थी और onboard CCTV पूरी तरह operational नहीं था। Delhi और UP Police में Jurisdiction को लेकर विवाद आज, 1 सितंबर, मामले में नया विवाद सामने आया। Gautam Buddh Nagar Police ने कहा कि alleged crime उसके jurisdiction में हुआ था, लेकिन Delhi Police ने arrests की जानकारी public होने से पहले उसे मामले की सूचना नहीं दी थी। Delhi Police ने जवाब दिया कि sensitive nature और नए criminal laws को देखते हुए jurisdiction dispute में समय गंवाने के बजाय Kashmere Gate Police ने तुरंत medical examination कराया, FIR दर्ज की और investigation शुरू कर दी। NHRC ने लिया Cognisance 1 सितंबर को सामने आई latest reporting के मुताबिक National Human Rights Commission ने मामले का cognisance लिया है और संबंधित authorities को notices जारी किए हैं। इसके साथ passenger buses में CCTV, police checking और safety regulations के implementation को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। Rahul Gandhi ने सरकार पर साधा निशाना Leader of Opposition Rahul Gandhi ने भी आज मामले को लेकर Centre और Uttar Pradesh सरकार पर हमला किया। उन्होंने सवाल उठाया कि Greater Noida से Delhi तक करीब 47 km चलने वाली bus किसी checkpoint पर क्यों नहीं रोकी गई और public transport safety rules का पालन क्यों नहीं किया गया। यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है; मामले की criminal investigation Delhi Police कर रही है। 1 September की Latest Situation आज 1 सितंबर 2026 तक verified स्थिति यह है: इसलिए सबसे accurate headline होगी: Greater Noida-Delhi Sleeper Bus में नाबालिग छात्रा से कथित Gangrape; Driver-Conductor गिरफ्तार, NHRC ने लिया संज्ञान नोट: कई reports छात्रा की उम्र 16 वर्ष बताती हैं, जबकि Delhi Police के एक quoted video statement में उम्र 17 बताई गई है। इसलिए publication में “नाबालिग Class 11 छात्रा” लिखना सबसे सुरक्षित और accurate wording है। स्रोत – Delhi Police, PTI, The Indian Express, The Tribune, Moneycontrol जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प का दावा; DCP ऑफिस में जबरन घुसने का VIDEO वायरल?

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी DCP ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों से इस दावे की स्पष्ट पुष्टि नहीं होती। इतना जरूर सामने आया है कि बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस कार्यालय के बाहर जमा हुए, नारेबाजी हुई और DCP ऑफिस की एक दीवार के हिस्से को नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है। यह पूरा घटनाक्रम छात्र साहिल लोचब को कथित pellet injuries के मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर हुए राहुल गांधी के धरने से जुड़ा है। राहुल गांधी क्यों पहुंचे थे DCP ऑफिस? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 21 अगस्त 2026 को साहिल लोचब के साथ दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे। साहिल का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन के दौरान उन्हें pellets लगे थे। राहुल गांधी ने मामले में अलग FIR दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। राहुल गांधी पहले संबंधित पुलिस स्टेशन पहुंचे और बाद में Parliament Street Police Station परिसर में स्थित DCP ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की। बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया। Priyanka Gandhi समेत कई कांग्रेस नेता पहुंचे राहुल गांधी के धरने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी मौके पर पहुंचे। जयराम रमेश, कुमारी शैलजा और अन्य पार्टी नेताओं की मौजूदगी के बीच पुलिस कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ने लगी। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और Rapid Action Force (RAF) के जवान भी तैनात किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव धरने के दौरान पुलिस कार्यालय के बाहर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की। NDTV की 22 अगस्त की वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने DCP ऑफिस की दीवार के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया। घटनास्थल पर कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति भी दिखाई दी। वहीं India Today की ग्राउंड रिपोर्ट में पूरे इलाके में बैरिकेडिंग, भारी पुलिस मौजूदगी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जमा होने का जिक्र किया गया है। क्या प्रदर्शनकारी जबरन DCP ऑफिस में घुसे? सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस को धक्का देते हुए DCP ऑफिस में जबरन प्रवेश किया। हालांकि अभी तक उपलब्ध प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं द्वारा DCP ऑफिस के अंदर जबरन घुस जाने की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्टों से यह जरूर पुष्ट होता है कि पुलिस कार्यालय के बाहर भीड़ जमा थी, नारेबाजी हुई, तनाव की स्थिति बनी और कार्यालय की दीवार के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया गया। इसलिए वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे “जबरन घुसने” के दावे को आधिकारिक पुष्टि मिलने तक सावधानी से देखा जाना चाहिए। क्या है Sahil Lochab Pellet Case? साहिल लोचब ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें कई metal pellets लगे थे और उनकी आंख भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। उनकी शिकायत में इलाज से जुड़े दस्तावेज और शरीर से निकाले गए pellets की जांच कराने की भी मांग की गई। यह मामला राजनीतिक रूप से तब और बड़ा हो गया जब राहुल गांधी ने इसे पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जोड़ते हुए FIR दर्ज करने की मांग की। दिल्ली पुलिस की ओर से पहले pellet gun के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर सवाल उठाए गए थे, जबकि पूरा घटनाक्रम पहले से जांच के दायरे में था। धरने के बाद Delhi Police ने दर्ज की FIR करीब छह घंटे चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। पुलिस के अनुसार केस Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 118 और 25 के तहत दर्ज किया गया है। ये प्रावधान खतरनाक साधनों से चोट पहुंचाने और जीवन अथवा व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित हैं। FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी का धरना समाप्त हुआ। BJP और Congress आमने-सामने पूरे मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप भी ले लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि घायल छात्र को न्याय दिलाने के लिए लंबे समय तक FIR की मांग करनी पड़ी। वहीं BJP नेताओं ने राहुल गांधी पर मामले का राजनीतिकरण करने और कानून-व्यवस्था पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। NDTV के मुताबिक BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मामले को राजनीतिक तमाशा बनाने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी छात्र को न्याय दिलाने की मांग कर रही थी। फिलहाल छात्र को pellets कैसे लगे और इसके लिए कौन जिम्मेदार था, यह जांच का विषय है। इसी तरह सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे DCP ऑफिस में जबरन घुसने के दावे की भी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो को पूरे संदर्भ और जांच के अंतिम नतीजों के बिना निर्णायक सबूत मानना उचित नहीं होगा। स्रोत – एनडीटीवी, इंडिया टुडे, पीटीआई, द वीक जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, कहा- हालात बिगड़ने पर किया गया बल प्रयोग

नई दिल्ली: 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अदालत में कहा कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने अत्यधिक बल के आरोपों को नकारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने “maximum restraint” बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आवश्यक न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल थे और स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी हो गया था। दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसके 240 से अधिक जवान घायल हुए। ‘मार्च की अनुमति नहीं थी’ दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि संसद की ओर जाने वाले इस मार्च को अनुमति नहीं दी गई थी। इससे पहले भी पुलिस ने स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और बिना अनुमति मार्च या सभा की इजाजत नहीं थी। पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शामिल होने के बाद हालात और बिगड़े। इसी आधार पर पुलिस ने अपने बल प्रयोग को उचित ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई-पावर कमेटी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज, पूर्व हाई कोर्ट चीफ जस्टिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल किए जा सकते हैं। कमेटी पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की भूमिका और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे आरोपों की भी जांच करेगी। अदालत के सामने उपलब्ध वीडियो फुटेज, CCTV और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। अब जांच से तय होगी जिम्मेदारी संसद मार्च को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। दिल्ली पुलिस अपने बल प्रयोग को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ रही है, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई को हुई कार्रवाई में किस पक्ष की क्या भूमिका थी और क्या पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के दौरान तय नियमों के अनुरूप बल का इस्तेमाल किया। स्रोत: Supreme Court proceedings, Times of India, Economic Times Jai Rashtra News

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जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर संसद में विपक्ष का हंगामा तेज़, सरकार से जवाब की मांग

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज़ कर दिया है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाज़ी की और सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आदेश किसने दिया। लगातार विरोध के कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। विपक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल चिंताजनक है और इस पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। सरकार का पक्ष सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ समूहों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के लिए केवल जंतर-मंतर पर बैठने की अनुमति थी और संसद की ओर मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए, इसलिए न्यूनतम आवश्यक बल का उपयोग किया गया। संसद में गतिरोध जारी विपक्ष इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री से विस्तृत बयान की मांग कर रहा है। लगातार विरोध के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को संसद में जवाब देना चाहिए। वहीं भाजपा ने विपक्ष पर छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया और कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। निष्कर्ष जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई अब संसद के भीतर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्ष इस मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की। इस मुद्दे पर आगे भी संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने की संभावना है. Source: Parliament Proceedings | Delhi Police | Ministry of Home Affairs जय राष्ट्र न्यूज़

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E20 ईंधन नीति के विरोध में केजरीवाल का प्रदर्शन तेज़, PM आवास मार्च रोका गया, सरकार से तीन बड़ी मांगें

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के खिलाफ अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है। मंगलवार को उन्होंने पार्टी नेताओं और समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मार्च रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं ने फिरोजशाह रोड पर धरना दिया। 2.3 लाख से अधिक हस्ताक्षर वाला ज्ञापन AAP के अनुसार पार्टी ने देशभर से 2.3 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर एकत्र किए हैं। इन हस्ताक्षरों वाले ज्ञापन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचाने के लिए यह मार्च आयोजित किया गया था। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया। केजरीवाल ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। AAP की तीन प्रमुख मांगें केजरीवाल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— सरकार का पक्ष केंद्र सरकार का कहना है कि E20 नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाना, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। सरकार का दावा है कि चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही यह नीति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि विपक्ष और कुछ परिवहन संगठनों ने पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। राजनीतिक बहस हुई तेज़ BJP ने केजरीवाल के प्रदर्शन को “राजनीतिक ड्रामा” बताते हुए कहा कि E20 से वाहनों को नुकसान पहुँचने का कोई आधिकारिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। वहीं AAP का कहना है कि सरकार को लोगों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए और उपभोक्ताओं पर किसी एक ईंधन विकल्प को अनिवार्य नहीं बनाना चाहिए। निष्कर्ष E20 ईंधन नीति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं AAP और कई वाहन संगठनों की मांग है कि उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार दिया जाए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज़ होने की संभावना है. Source: Ministry of Petroleum & Natural Gas | Delhi Police | Aam Aadmi Party जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों पर कार्रवाई की समीक्षा शुरू की, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने की पहल

नई दिल्ली: छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े हालिया प्रदर्शनों के बाद दिल्ली सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि जंतर-मंतर और संसद मार्च से जुड़े छात्र प्रदर्शनों में दर्ज 13 मामलों (FIRs) की समीक्षा की जाए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई न की जाए। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि या हिंसा के आरोप हैं, उनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। यह निर्णय उस समय आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में देशभर के छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। दिल्ली में हुए “चलो संसद” मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। सरकार का क्या कहना है? दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। इसलिए पुलिस को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक मामले की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्दोष और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। वहीं जिन मामलों में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या गंभीर अपराध के आरोप हैं, उनमें कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। 13 मामलों की होगी समीक्षा दिल्ली पुलिस ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े 13 मामले दर्ज किए थे। सरकार के निर्देश के बाद अब इन सभी मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी, हिरासत और एफआईआर से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी ताकि किसी निर्दोष छात्र के साथ अन्याय न हो। छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया छात्र संगठनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, लेकिन उनका कहना है कि केवल कार्रवाई रोकना पर्याप्त नहीं है। कई संगठनों ने मांग की है कि दर्ज एफआईआर को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए ताकि भविष्य में छात्रों को नौकरी, पासपोर्ट या अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। कुछ संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मामलों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल विपक्षी नेताओं ने छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग दोहराई। परीक्षा सुधार से जुड़ा मुद्दा छात्र आंदोलन मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों की घोषणा की और एंटी-पेपर लीक कानून को भी आगे बढ़ाया। अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा को उसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। निष्कर्ष दिल्ली सरकार द्वारा छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा का निर्णय लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि समीक्षा के बाद कितने मामलों में राहत मिलती है और क्या दर्ज एफआईआर को औपचारिक रूप से वापस लिया जाता है। Source: Delhi Government | Delhi Police | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रदर्शनों के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील इलाकों, प्रमुख सरकारी भवनों, प्रदर्शन स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग बढ़ाई है और आवश्यकतानुसार यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक ट्रैफिक और सुरक्षा सलाह का पालन करें। कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई दिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से— अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। कई स्थानों पर पुलिस की नियमित गश्त भी बढ़ा दी गई है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग कर रही है। कई संवेदनशील क्षेत्रों में— जैसे उपाय लागू किए गए हैं। यातायात पर भी असर सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर वैकल्पिक मार्गों की जानकारी जारी कर रही है। यात्रियों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। पुलिस की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष या हेल्पलाइन पर देने को कहा गया है। स्थिति पर लगातार नजर अधिकारियों के अनुसार राजधानी में स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल भी तैनात किया जा सकता है। निष्कर्ष दिल्ली में प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल, आधुनिक निगरानी व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के जरिए राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। Source: Delhi Police | Ministry of Home Affairs (MHA) | PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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