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भारत में प्रदर्शनों पर कथित ‘Excessive Force’ के आरोप, UN experts ने स्वतंत्र जांच की मांग की

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों से निपटने के दौरान सुरक्षा बलों पर लगे कथित अत्यधिक बल प्रयोग और बड़े पैमाने पर हिरासत में लेने के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। विशेषज्ञों ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करने और अहिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग से बचने की अपील की है। UN experts ने क्या चिंताएं जताईं? Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने ऐसी खबरों पर चिंता जताई है जिनमें प्रदर्शनकारियों के घायल होने, कथित दुर्व्यवहार, लाठीचार्ज और प्रदर्शनों तक पहुंच सीमित किए जाने के आरोप शामिल हैं। विशेषज्ञों ने इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया है, ताकि घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। किन प्रदर्शनों का है जिक्र? हाल के विरोध प्रदर्शनों में विपक्षी दलों और छात्र एवं युवा संगठनों के प्रदर्शन शामिल रहे हैं। इनमें निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मुद्दों पर विरोध भी शामिल है। अक्टूबर में दिल्ली में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और पुलिस प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठे थे। इन घटनाओं के संदर्भ में प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन पर बहस तेज हुई है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल UN experts ने प्रदर्शन पर रोक, एहतियाती हिरासत और डिजिटल निगरानी के कथित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लागू अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप होने चाहिए। ऐसे प्रतिबंधों का कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए और वे आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होने चाहिए। विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण असहमति जताने वालों के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया है। भारत सरकार और निर्वाचन आयोग का पक्ष भारतीय अधिकारियों का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली कार्रवाई कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक सुरक्षा की जरूरतों के तहत होती है। वहीं, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताता रहा है। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं तथा आयोग के पक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। इन राजनीतिक और प्रशासनिक दावों का आकलन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है। आरोपों और स्थापित तथ्यों में अंतर जरूरी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, दुर्व्यवहार और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन मामलों में स्वतंत्र जांच का उद्देश्य घटनाओं की पुष्टि करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना और यदि उल्लंघन साबित हों तो उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। Protest policing पर अंतरराष्ट्रीय नजर भारत में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस की रणनीति, हिरासत में लेने की प्रक्रिया, बैरिकेडिंग और बल प्रयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। Reuters की रिपोर्टिंग में प्रदर्शन प्रबंधन से जुड़े नियमों और पुलिस की कार्रवाई के तरीकों पर सवालों का उल्लेख किया गया है। इस मामले में आगे की जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा। Source: Reuters, UN Human Rights Office (OHCHR) जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रकाश राज ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की, कहा—विरोध की आवाज दबाना ठीक नहीं

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बीच प्रकाश राज ने शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति और विरोध प्रदर्शनों को अपराध की तरह देखे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। प्रेस क्लब में उठी थी रिहाई की मांग 15 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की थी। ‘पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’ प्रकाश राज ने एक वीडियो संदेश में दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि असहमति की आवाज को रोकने की कोशिश की गई, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।” उनका संदेश शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित था। दो दिन और बढ़ी न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो और दिनों के लिए बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया, जबकि दोनों नेताओं के वकीलों ने हिरासत के आधारों को अस्पष्ट बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। किस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला? दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बैरिकेड पार किए और पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। वहीं, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक असहमति से जुड़ा मामला बता रही है। ममता बनर्जी ने भी की रिहाई की मांग 20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं की हिरासत का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से सामने आया है। रिहाई में देरी पर आरोप-प्रत्यारोप CJP ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जमानतदारों के दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और आवश्यक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है; देरी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। स्रोत: Reuters, Reuters Connect, ABP Live और Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहने पर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, दिल्ली पुलिस बोली—पुराना वीडियो, जुबान फिसली थी

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की एक पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा कर सवाल उठाए हैं। इस क्लिप में एक DCP गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को कथित तौर पर “साहब” कहते सुनाई देते हैं। दीपके ने इस टिप्पणी को कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार से जोड़ते हुए कथित दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके ने क्या सवाल उठाए? अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि एक कुख्यात गैंगस्टर के लिए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर सख्ती बरती जाती है। उन्होंने पुलिस की भाषा और व्यवहार में इस अंतर को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वीडियो एक साल से भी अधिक पुराना है। पुलिस के मुताबिक, DCP के मुंह से लॉरेंस बिश्नोई के नाम के साथ “साहब” शब्द निकलना केवल जुबान फिसलने का मामला था। पुलिस ने इस टिप्पणी को किसी विशेष सम्मान या तरजीही व्यवहार के तौर पर देखे जाने से इनकार किया। पुराना वीडियो अब क्यों चर्चा में है? टाइगर श्रॉफ के वाहन पर कथित गोलीबारी के मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इसी बीच दीपके द्वारा पुराना वीडियो साझा किए जाने के बाद पुलिस की भाषा और उसके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस बिश्नोई लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामलों में आरोप हैं। उसके कथित गिरोह के नेटवर्क को लेकर विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां भी जांच करती रही हैं। पुलिस के व्यवहार को लेकर फिर उठी बहस यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब CJP और दिल्ली पुलिस के बीच हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। अभिजीत दीपके को हाल ही में कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। फिलहाल, इस मामले में दीपके की आलोचना और दिल्ली पुलिस की सफाई दोनों चर्चा में हैं। वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने इसे पुरानी रिकॉर्डिंग और जुबान फिसलने की घटना बताया है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP ने Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर देरी का लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) ने अपने नेताओं Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर प्रक्रियात्मक देरी किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कई जमानतदारों के दस्तावेज और श्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बावजूद दोनों की रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। CJP ने क्या आरोप लगाए? CJP की कानूनी टीम के मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया के दौरान बार-बार नई प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई श्योरिटी को बिना स्पष्ट कारण स्वीकार नहीं किया गया और जरूरी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने में भी देरी हुई। पार्टी का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई में बाधाएं बनी रहीं। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, जमा किए गए श्योरिटी बॉन्ड में कुछ समस्याएं थीं और संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इस तरह, रिहाई में देरी को लेकर CJP और पुलिस के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकियों का मामला मामले में उस समय एक और घटनाक्रम सामने आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालांकि, धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। जमानत और रिहाई की सुनवाई भी टली रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों नेताओं की जमानत या रिहाई से संबंधित सुनवाई टल गई। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के मामले से अलग होने की खबर सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इन घटनाक्रमों के कारण रिहाई की प्रक्रिया और लंबी हो गई। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला Ashutosh Ranka और Saurav Das को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रही है। 19 अक्टूबर को रिहाई पर नजर 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के करीब होने के बीच उनकी रिहाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है, जबकि CJP दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई पर जोर दे रही है। फिलहाल, रिहाई में देरी को लेकर पार्टी और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, Hindustan Times, India Today, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष Neha Bora को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, Delhi Police Act की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। रिहाई के बाद Bora ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने की आवश्यकता और पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Neha Bora ने हिरासत पर क्या सवाल उठाए? रिहाई के बाद Neha Bora ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को पूरी रात हिरासत में रखने की कानूनी जरूरत क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें कई घंटों तक वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उनके बयानों ने पुलिस हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता तक पहुंच और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने पर सवाल Bora ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी आपत्ति हिरासत की अवधि और उसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर थी। हालांकि, हिरासत की वैधता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। ‘Lehra Do Tiranga’ प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिरासत Neha Bora को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा तथा भीड़ नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू किए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में कम से कम तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। इन मामलों में दर्ज आरोपों की जांच जारी है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। Abhijeet Dipke भी रिहा CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke को भी निवारक हिरासत के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरी ओर, Neha Bora और अन्य प्रदर्शनकारियों ने हिरासत की अवधि, वकील तक पहुंच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान कानूनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। स्रोत: The Indian Express, The Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP founder Abhijeet Dipke गिरफ्तार, ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action; Neha Bora detention के बाद रिहा

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: CJP founder Abhijeet Dipke को Delhi Police ने ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action के तहत हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। Police का कहना है कि यह कदम law-and-order situation और संभावित breach of peace को देखते हुए उठाया गया। वहीं student activist Neha Bora को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। Rally से पहले बढ़ी police कार्रवाई Connaught Place और Central Delhi में CJP की rally को लेकर पहले से heavy security deployment किया गया था। Police ने organisers को बिना permission gathering या march न करने की चेतावनी दी थी। इसी backdrop में Dipke के खिलाफ preventive action लिया गया। Abhijeet Dipke की गिरफ्तारी क्यों हुई? Police sources के मुताबिक Dipke को breach of peace रोकने के मकसद से पकड़ा गया। CJP ने इसे political suppression बताया है और कहा कि उनका programme peaceful था। Neha Bora को भी लिया गया detention में AISA president Neha Bora को भी police ने rally से जुड़े security arrangements के दौरान detention में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें release कर दिया गया। Connaught Place बना security zone Central Park, Rajiv Chowk, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और police deployment बढ़ाई गई। ‘Lehra Do Tiranga’ programme के चलते Central Delhi में traffic restrictions भी लागू रहे। CJP की मुख्य मांगें क्या हैं? CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे, voter-list revision पर जवाबदेही और हाल के police action के खिलाफ protest कर रही है। Group ने Jantar Mantar और Connaught Place पर लगातार demonstrations की कोशिश की है। राजनीतिक विवाद और तेज Dipke की गिरफ्तारी के बाद opposition leaders ने police action पर सवाल उठाए हैं, जबकि Delhi Police का कहना है कि उसका focus public order और safety बनाए रखना है। source – Reuters, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमध्ये घरातच शाब्दिक वाद? VIDEO व्हायरल

नवी दिल्ली, 17 ऑक्टोबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) चे संस्थापक अभिजीत दिपके यांच्या घरी दिल्ली पोलीस पोहोचल्यानंतर झालेल्या शाब्दिक वादाचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर व्हायरल झाला आहे. CJP च्या ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमापूर्वी हा प्रकार घडला. पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथे परवानगीशिवाय मोर्चा किंवा मोठा जमाव आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. “माझ्या घरी कोण येईल, हे तुम्ही ठरवणार नाही” व्हायरल व्हिडिओमध्ये अभिजीत दिपके आणि पोलीस अधिकाऱ्यांमध्ये तीव्र शाब्दिक वाद होताना दिसत आहे. दिपके पोलिसांच्या उपस्थितीवर आणि त्यांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित करताना दिसतात. दुसऱ्या व्हिडिओमध्ये दिपके यांनी “मी एकटाच आहे” असे सांगत ताब्यात घेण्याच्या कारवाईवर आक्षेप घेतल्याचे दिसते. या व्हिडिओंमुळे सोशल मीडियावर या प्रकरणाची चर्चा सुरू झाली आहे. दिल्ली पोलिसांनी दिली होती नोटीस दिल्ली पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथील सेंट्रल पार्कमध्ये प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. संबंधित परिसरात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) च्या कलम 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू असल्याचे पोलिसांनी स्पष्ट केले होते. तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नाही, मात्र मोर्चाला आक्षेप पोलिसांच्या नोटीसमध्ये तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नसल्याचे स्पष्ट करण्यात आले होते. मात्र, आवश्यक परवानगीशिवाय मोठा जमाव किंवा मोर्चा आयोजित केल्यास कायदेशीर कारवाई होऊ शकते, असा इशाराही देण्यात आला होता. दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले 16 ऑक्टोबर रोजी कार्यक्रमासाठी घरातून बाहेर पडताना दिल्ली पोलिसांनी अभिजीत दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले. या कारवाईचा व्हिडिओही सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणावर शेअर झाला. व्हिडिओमुळे राजकीय वादाला पुन्हा हवा CJP समर्थकांनी पोलिसांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित केले आहेत. दुसरीकडे, दिल्ली पोलिसांनी कायदा-सुव्यवस्था राखणे, वाहतूक सुरळीत ठेवणे आणि गर्दीवर नियंत्रण ठेवणे या कारणांचा हवाला दिला आहे. ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमाच्या पार्श्वभूमीवर घडलेल्या या घटनांमुळे अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमधील वाद पुन्हा चर्चेत आला आहे. स्रोत – Times of India, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के नई दिल्ली जिले में 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को बंद रखा, जबकि संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू रही। 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के करीब 6,000 जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 220 कंपनियां तैनात की गईं। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं। इस तैनाती के चलते कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या 28,000 से अधिक बताई गई। सेंट्रल पार्क बंद, धारा 163 के तहत प्रतिबंध कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभाओं और जुलूसों को रोकना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने रैली की अनुमति नहीं दी दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीप्ते को नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस ने संभावित यातायात बाधा, भगदड़ के खतरे और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया। कनॉट प्लेस में CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की गई। CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते गिरफ्तार रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की गई। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। क्यों बुलाई गई थी ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों और पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के समर्थन में रैली का आह्वान किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। रैली को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात सुचारु रखने और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करने की रही। स्रोत – Reuters, The New Indian Express, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में CJP की तिरंगा यात्रा पर पुलिस की चेतावनी, DCP Neha Yadav की अपील—“यात्रा में शामिल न हों”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: CJP की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा को लेकर Delhi Police ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। New Delhi district की DCP Neha Yadav ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से लोग इस यात्रा में शामिल न हों। Connaught Place और आसपास के इलाकों में पहले से ही heavy security deployment और traffic restrictions लागू हैं। Police ने क्यों जारी की चेतावनी? Delhi Police का कहना है कि बड़ी भीड़, restricted zones और ongoing protest-related tensions को देखते हुए public safety priority है। इसी वजह से लोगों से advised routes follow करने और बिना जरूरत Central Delhi की ओर न जाने को कहा गया है। DCP Neha Yadav की अपील DCP Neha Yadav ने लोगों से appeal की कि वे proposed march का हिस्सा न बनें और police instructions का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी unlawful gathering या restricted area में entry पर action लिया जा सकता है। Connaught Place में security कड़ी CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ programme को देखते हुए Connaught Place, Central Park, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और अतिरिक्त force deployment की गई है। Central Park पर भी restrictions लागू किए गए हैं। Traffic पर भी असर Traffic Police ने Central Delhi के कई routes पर diversions और restrictions लागू किए हैं। Commuters को alternate routes इस्तेमाल करने और journey plan पहले से करने की सलाह दी गई है। CJP ने क्या कहा? CJP का कहना है कि उसका programme peaceful और democratic है। संगठन Chief Election Commissioner, voter-list revision और recent police action को लेकर protest जारी रखे हुए है। Police और protesters आमने-सामने हाल के दिनों में CJP protests, Jantar Mantar access और Connaught Place gathering को लेकर police और organisers के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। आज की tiranga yatra इसी broader confrontation का हिस्सा मानी जा रही है। source – Delhi Police, media reports जय राष्ट्र न्यूज़

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Delhi में ₹60 लाख में foreign citizenship दिलाने का झांसा, 64 वर्षीय German woman गिरफ्तार

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: Delhi Police ने एक 64 वर्षीय German woman को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक व्यक्ति को ₹60 लाख में foreign citizenship दिलाने का झांसा देने का आरोप है। Police के मुताबिक आरोपी ने immigration और citizenship process में अपने कथित international contacts का हवाला देकर victim से बड़ी रकम ली। कैसे हुआ कथित fraud? Complaint के अनुसार आरोपी महिला ने दावा किया कि वह victim को एक foreign country की citizenship और residency दिलवा सकती है। इसके बदले उसने करीब ₹60 लाख की मांग की और अलग-अलग stages पर payments लिए गए। Citizenship नहीं मिली, पैसे भी वापस नहीं हुए Victim का आरोप है कि तय समय बीतने के बावजूद न तो citizenship process पूरी हुई और न ही रकम वापस की गई। इसके बाद उसने Delhi Police से संपर्क किया और cheating की शिकायत दर्ज कराई। German woman को Delhi से पकड़ा गया Investigation के दौरान police ने financial transactions, communication records और travel-related documents की जांच की। इसके बाद 64 वर्षीय German national को गिरफ्तार किया गया और उससे पूछताछ शुरू की गई। Police जांच रही है international links Investigators यह भी देख रहे हैं कि आरोपी अकेले काम कर रही थी या उसके साथ कोई organised immigration-fraud network जुड़ा हुआ था। Police अन्य संभावित victims और financial trail की भी जांच कर रही है। Foreign citizenship scams पर सावधानी Authorities ने लोगों को सलाह दी है कि citizenship, visa या residency दिलाने का दावा करने वाले private agents को बड़ी रकम देने से पहले उनकी credentials और legal authorisation verify करें। Citizenship decisions केवल संबंधित देश की authorised government agencies ही ले सकती हैं। source – The Indian Express, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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