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CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march से पहले Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, Central Park बंद; traffic curbs लागू

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march को देखते हुए Delhi Police ने Connaught Place और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। Central Park को बंद किया गया है और बड़ी संख्या में police तथा paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक पूरे New Delhi district में लगभग 25,000 security personnel deployment का हिस्सा हैं। Central Park क्यों किया गया बंद? CJP ने Connaught Place के Central Park में gathering और march का call दिया था। इसी के मद्देनजर police ने area को secure कर दिया और entry पर restrictions लगाईं, ताकि crowd control और law-and-order situation को manage किया जा सके। करीब 25,000 personnel की deployment Reuters की report के मुताबिक Delhi में करीब 25,000 police और paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। Connaught Place, Parliament Street, Jantar Mantar और आसपास के sensitive zones में अतिरिक्त barricading और checking की गई है। Traffic पर भी असर Security arrangements की वजह से Connaught Place के आसपास traffic diversions और restrictions लागू किए गए हैं। कई roads पर checking बढ़ाई गई है और commuters को alternate routes लेने की सलाह दी गई है। Protest का मुद्दा क्या है? CJP और उससे जुड़े groups Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, voter-list revision और हाल के police action के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। Protesters ने ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम को peaceful democratic protest बताया है, जबकि police law-and-order concerns का हवाला दे रही है। Delhi High Court ने protest को रोकने से किया था इनकार एक दिन पहले Delhi High Court ने Connaught Place में proposed protest को पूरी तरह restrain करने से इनकार किया था और police को gathering regulate करने की अनुमति दी थी। इससे आज के security arrangements और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। source – Reuters, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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एंटी-CEC प्रदर्शन के बाद नया विवाद: तीन पत्रकारों के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR, क्राइम ब्रांच करेगी जांच

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 3 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद विवाद और गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न और कथित मारपीट के आरोप लगाने वाले तीन पत्रकारों के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने पत्रकारों पर जातिसूचक टिप्पणियां करने, मानहानि और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। किन धाराओं में दर्ज हुई FIR? पुलिस के मुताबिक, तीनों पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 356(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी नेमप्लेट और जातिगत पहचान का उल्लेख करते हुए अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इन आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है। पत्रकारों ने पहले पुलिस अधिकारी पर लगाए थे आरोप इससे पहले एक महिला पत्रकार ने प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। अन्य पत्रकारों ने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतें की थीं। इन शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को अलग-अलग शिकायतों के आधार पर जांचा जा रहा है। क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपों और संबंधित शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और प्रदर्शन के समय रिकॉर्ड किए गए वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान हुई गतिविधियों और दोनों पक्षों की शिकायतों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई चिंता महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने आरोपों पर जवाब के लिए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी मांगी थी। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी इस मामले में अब दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्रकारों ने पुलिस अधिकारी पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं, जबकि एसीपी विवेक भगत ने जातिसूचक टिप्पणियों, मानहानि और सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायत की है। फिलहाल, किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी। Source – The Indian Express, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Supreme Court में DMRC ने मांगी unconditional apology, कहा—10 October की Metro restrictions Delhi Police के निर्देश पर लगी थीं

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने Supreme Court को बताया कि 10 October को कुछ Metro stations पर entry-exit restrictions Delhi Police के directions पर लागू की गई थीं। यह मामला उन restrictions से जुड़ा है जो anti-CEC protests और Central Delhi में security arrangements के दौरान लगाई गई थीं। DMRC ने Court के contempt notice के जवाब में unconditional apology भी दी। DMRC ने Supreme Court में क्या कहा? DMRC ने अपने affidavit में कहा कि उसने Metro access पर restrictions independently नहीं लगाईं, बल्कि Delhi Police की advisory और security instructions के अनुसार action लिया। Corporation ने यह भी कहा कि उसका उद्देश्य law-and-order arrangements में cooperation करना था। Contempt notice क्यों जारी हुआ था? Supreme Court ने Metro stations पर access restrictions को लेकर नाराजगी जताते हुए सवाल किया था कि क्या public transport services को इस तरह restrict करना Court के पहले के directions के अनुरूप था। इसी मामले में DMRC से explanation मांगा गया और contempt notice जारी हुआ। DMRC ने मांगी unconditional apology DMRC ने Court के सामने कहा कि अगर उसके action से किसी judicial direction का उल्लंघन माना गया हो तो वह उसके लिए बिना शर्त माफी मांगता है। साथ ही उसने यह position ली कि restrictions operational decision के बजाय police instructions पर आधारित थीं। Delhi Police की भूमिका पर बढ़े सवाल DMRC के इस stand के बाद focus अब Delhi Police की उस decision-making पर भी आ गया है जिसके तहत Central Delhi में Metro entry-exit controls लगाए गए थे। Protest organisers और opposition groups पहले से ही restrictions को लेकर सवाल उठा रहे थे। 10 October को कई stations पर लगी थीं पाबंदियां Anti-CEC protest के चलते Central Delhi में heavy security deployment किया गया था। कुछ Metro stations पर gates बंद किए गए या entry-exit सीमित की गई, जिससे commuters को भी परेशानी हुई थी। इसी action को लेकर मामला Supreme Court तक पहुंचा। Court अब क्या देखेगा? Supreme Court आगे यह देख सकता है कि restrictions लगाने की legal responsibility किस authority की थी, क्या proper procedure follow हुआ और क्या public transport access को प्रभावित करने से पहले पर्याप्त safeguards मौजूद थे। source – The Indian Express, Supreme Court proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस की हिरासत में NSUI महिला कार्यकर्ता से कथित मारपीट, राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: दिल्ली में NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और कथित कस्टोडियल हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घायल छात्र-कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को उठाया। इस दौरान NSUI से जुड़ी छात्रा अथिरा (Athira) ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में उसे चोटें आईं और उसकी एक कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों से वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की अपील की। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। महिला कार्यकर्ता अथिरा ने क्या आरोप लगाए? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अथिरा ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में उसके साथ मारपीट हुई और उसे गंभीर चोटें आईं। राहुल गांधी ने भी उसकी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अब एक कान से ठीक से सुन नहीं पा रही है। यह मामला कथित हिरासत में हिंसा और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, सुनने की क्षमता प्रभावित होने के दावे की चिकित्सकीय पुष्टि और घटना की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। महिला प्रदर्शनकारी को बालों से खींचने का वीडियो हुआ था वायरल इस घटना से एक दिन पहले दिल्ली के राजीव चौक के पास मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला NSUI कार्यकर्ता को कथित तौर पर बालों से खींचे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। NSUI ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो पुलिस के सत्यापन के दायरे में था। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच से घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के बारे में अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है। राहुल गांधी ने वीडियो और सबूत सुरक्षित रखने की अपील की राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से पुलिस कार्रवाई से संबंधित वीडियो, तस्वीरें और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और जवाबदेही तय करने के लिए सबूत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप कांग्रेस नेता और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं; मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय की जा सकती है। घायल छात्रा को बताया ‘हमारी शेरनी’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने घायल महिला कार्यकर्ता के साहस की सराहना करते हुए उसे “हमारी शेरनी” कहा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने और हिंसा के बजाय प्रेम तथा अहिंसक तरीकों से जवाब देने की बात कही। उनकी यह टिप्पणी छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताने और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाने के संदर्भ में आई। किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे NSUI कार्यकर्ता? NSUI समेत कई छात्र और विपक्षी समूह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में इन प्रदर्शनों को लेकर पुलिस प्रतिबंधों और हिरासत में लिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। पुलिस पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच अहम NSUI कार्यकर्ताओं के आरोपों ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार, महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और जवाबदेही की आवश्यकता पर बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा। घटना की निष्पक्ष जांच, संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन, चिकित्सकीय दस्तावेजों की समीक्षा तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है। मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित घटनाक्रम में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी बनती है। Source – The New Indian Express, The Indian Express, The Times of India और Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के नाइटक्लब में बीयर गिरने पर विवाद, 29 वर्षीय युवक की मौत; मैनेजर की पत्नी समेत 5 गिरफ्तार

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: उत्तर दिल्ली के इंद्रलोक स्थित टोर हाउस नाइटक्लब में बीयर गिरने को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस के अनुसार, इस घटना में 29 वर्षीय कैब ड्राइवर दलजीत की कथित तौर पर पिटाई के बाद मौत हो गई। मामले में क्लब मैनेजर, उसकी पत्नी और तीन बाउंसरों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मैनेजर की पत्नी पर बीयर गिरने के बाद शुरू हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक, दलजीत अपने दोस्तों के साथ नाइटक्लब गया था। इसी दौरान समूह के एक सदस्य से बीयर क्लब मैनेजर की पत्नी पर गिर गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मैनेजर, बाउंसरों और अन्य कर्मचारियों ने दलजीत तथा उसके दोस्तों के साथ मारपीट की। दलजीत को बेरहमी से पीटने का आरोप घटना में बचे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दलजीत को लगातार घूंसे और लातें मारी गईं, जिससे वह बेहोश हो गया। उसके दोस्तों के अनुसार, वे उसे क्लब से बाहर लेकर आए, लेकिन बाहर भी उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। ऑटो में बैठाकर वहां से भेजने का आरोप शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने दलजीत और उसके दो दोस्तों को एक ऑटोरिक्शा में बैठाकर वहां से जाने के लिए मजबूर किया। बाद में दलजीत अपने घर के पास मिला। अगली सुबह बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मैनेजर, पत्नी और तीन बाउंसर गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने मामले में दिलावर, श्रवण कुमार, सनी उर्फ गौरव, विकास बालियान और हर्षिता को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में क्लब मैनेजर, उसकी पत्नी और तीन बाउंसर शामिल हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। तय समय के बाद क्लब चलने पर पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई जांच के दौरान नाइटक्लब के निर्धारित समय के बाद भी संचालित होने का मामला सामने आया। इसके बाद इंद्रलोक पुलिस चौकी के प्रभारी को कथित ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में जिला लाइन्स भेज दिया गया। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप; महिला कार्यकर्ता से मारपीट का वीडियो वायरल, NSUI ने जांच की मांग की

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: दिल्ली में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच Delhi Police पर एक महिला NSUI कार्यकर्ता से मारपीट और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हिरासत के दौरान एक महिला कार्यकर्ता और महिला पुलिसकर्मी के बीच थप्पड़ और बाल खींचने जैसी झड़प दिखाई देती है। हालांकि घटना की शुरुआत किसने की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Rajiv Chowk के पास protest के दौरान हुआ विवाद मंगलवार, 13 अक्टूबर को NSUI कार्यकर्ता Rajiv Chowk Metro Station के पास CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे और कथित “vote chori” के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे। Police ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और इसी दौरान महिला कार्यकर्ता तथा महिला पुलिसकर्मी के बीच टकराव हुआ। वायरल वीडियो में थप्पड़ और बाल खींचने की घटना वायरल footage में दोनों पक्षों के बीच physical scuffle दिखाई देती है। कुछ reports में NSUI की national secretary Ritu Barala का नाम सामने आया है। वीडियो के आधार पर यह साफ है कि हाथापाई हुई, लेकिन किस पक्ष ने पहले violence शुरू किया, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं। NSUI ने Delhi Police पर लगाए गंभीर आरोप NSUI ने आरोप लगाया है कि detention के दौरान उसकी महिला कार्यकर्ताओं के साथ excessive force और बदसलूकी की गई। संगठन ने Connaught Place Police Station के बाहर प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। Police side से भी सामने आए आरोप दूसरी ओर, reports में police side से यह दावा किया गया है कि महिला police personnel के साथ भी हाथापाई हुई। इसी वजह से वायरल clip को एकतरफा police assault मानने के बजाय पूरे video sequence और अन्य evidence की जांच जरूरी है। पहले भी protesters ने लगाए थे assault के आरोप हाल के CJP protests के दौरान कम से कम तीन detainees ने भी Delhi Police पर custody में मारपीट के आरोप लगाए थे। कुछ मामलों में medical records में injuries दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि Police ने कहा था कि formal complaint मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। Viral videos की verification बनी बड़ी चुनौती हालिया protests से जुड़े कई पुराने और unrelated videos भी social media पर नए घटनाक्रम बताकर circulate किए गए हैं। इसलिए इस घटना समेत किसी भी viral footage के पूरे context, समय और location की स्वतंत्र verification जरूरी है। source – The Federal, NewsX, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Jantar Mantar को लेकर टकराव जारी, CJP बोली—“Protest site Jantar Mantar ही रहेगा”; police restrictions के बावजूद प्रदर्शन

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Delhi के Jantar Mantar को protest site के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) और Delhi Police के बीच टकराव जारी है। Delhi Police द्वारा Jantar Mantar को designated protest venue की सूची से हटाए जाने के बावजूद CJP नेताओं ने साफ कहा है कि उनका protest site Jantar Mantar ही रहेगा। मंगलवार को कई activists ने restrictions के बीच वहां पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। CJP leaders Jantar Mantar पहुंचे, police ने हिरासत में लिया CJP के वरिष्ठ नेता Ashutosh Ranka, Saurav Das और Ajinkya Shinde मंगलवार को Jantar Mantar परिसर में पहुंचने की कोशिश करते हुए हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। Jantar Mantar का protest-site status हटाया गया Delhi Police ने हाल ही में Jantar Mantar को designated protest venue के तौर पर de-notify कर दिया है। इसके स्थान पर Ramlila Maidan, Burari Ground और CBD Ground को protests के लिए विकल्प के तौर पर चिन्हित किया गया है। यह बदलाव CJP के लगातार Jantar Mantar पर प्रदर्शन करने के प्रयासों के बीच हुआ है। CJP ने कहा—जगह बदलने को तैयार नहीं CJP ने 12 अक्टूबर को Delhi Police को पत्र देकर Jantar Mantar पर protest के लिए तारीख तय करने की मांग की थी। संगठन ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। CJP leadership का कहना है कि वह प्रशासन द्वारा सुझाए गए दूसरे venues पर अपना आंदोलन shift नहीं करना चाहती। पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर detention की चेतावनी Delhi Police ने New Delhi district में protest-related restrictions जारी रखी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ संवेदनशील इलाकों में पांच या उससे ज्यादा लोगों के समूह में इकट्ठा होने पर detention की कार्रवाई की जा सकती है। Police का कहना है कि restrictions public order बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar बना था fortress CJP ने इससे पहले 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़े protest का ऐलान किया था, लेकिन heavy barricading, security deployment और mass detentions के कारण प्रदर्शनकारी वहां नहीं पहुंच सके। इसके बाद छोटे समूहों ने Dilli Haat, Connaught Place, Raj Ghat और अन्य इलाकों में flash demonstrations किए थे। CEC के इस्तीफे और voter-roll revision को लेकर विरोध CJP का आंदोलन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे और electoral rolls की Special Intensive Revision को लेकर है। विपक्षी दलों और activists ने voter deletions पर सवाल उठाए हैं, जबकि Election Commission और BJP ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। source – Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल सील, CJP कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच 13 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कई कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और वहां प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बहस तेज कर दी है। बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन क्षेत्र में पहुंचे कार्यकर्ता 13 अक्टूबर की सुबह CJP के कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग और प्रतिबंधित प्रवेश व्यवस्था के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और “भारत माता की जय” तथा “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटना के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सौरव दास और आशुतोष रंका समेत करीब 20 लोग हिरासत में पुलिस ने CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया। अजिंक्य शिंदे समेत अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब CJP पहले से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और स्थल पर लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही थी। हिरासत में पुलिस बस से सौरव दास ने साझा किया वीडियो हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने पुलिस बस के अंदर से एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले जंतर-मंतर के भीतर पहुंचने में सफल हुए और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। यह विवरण दास के दावे पर आधारित है। घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को घोषणा की थी कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस बदलाव को प्रदर्शन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानने वाले संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। CJP का जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने का ऐलान CJP ने पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की बात कही है। संगठन का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान को प्रशासनिक आदेश के जरिए विरोध और असहमति के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। CJP इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दूसरी ओर, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है। अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को रोक नहीं सकती और किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से असहमति समाप्त नहीं हो जाती। दीपके की प्रतिक्रिया CJP के राजनीतिक रुख को दर्शाती है। इस मामले में पुलिस और संगठन के बीच मुख्य मतभेद प्रदर्शन के लिए स्थान और वहां लागू प्रतिबंधों को लेकर है। भारी सुरक्षा के बीच सीमित रहा प्रवेश जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली के इस हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के कारण जंतर-मंतर तक सामान्य पहुंच भी सीमित रही। पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया था 10 अक्टूबर को CJP ने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोक दिया था। इसके बाद कुछ समूहों ने INA और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। 13 अक्टूबर की घटना ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी, जबकि पुलिस निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रही है। CJP की मुख्य मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों की जांच की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोप और उनके जवाब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। पुलिस का पक्ष: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रमुख आधार यह बताया गया कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और कार्यकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर वहां जुटे थे। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को हटाया और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी स्थिति का विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो को लेकर भी फैक्ट-चेक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाने वाले कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वीडियो पुराने या असंबंधित घटनाक्रमों से जुड़े थे, जिनमें फिलीपींस के एक उत्सव और 2021 के किसान आंदोलन के दृश्य भी शामिल बताए गए। इसलिए सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को मौजूदा प्रदर्शन…

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, हिरासत में कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। 10 और 11 अक्टूबर को मध्य दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में महिला प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा पकड़कर वाहनों में ले जाते हुए देखा गया। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी के आरोप CPI(M) के नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने सख्ती से पेश आते हुए उन्हें लंबे समय तक पुलिस वाहनों में रखा। पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस वाहनों के भीतर मारपीट हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। हिरासत के दौरान सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने का दावा इसी प्रदर्शन के दौरान CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने की खबर भी सामने आई। पार्टी के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के दौरान हुई धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी, जिसके बाद उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। बंगला साहिब के पास पुलिस कार्रवाई पर भी विवाद गुरुद्वारा बंगला साहिब के आसपास हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने दावा किया कि वहां महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ और मदद की अपील पर ध्यान नहीं दिया गया। संगठन ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण बंगला साहिब से जुड़े वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि पुलिसकर्मी उस सामान्य रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं। हालांकि, एसोसिएशन ने पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता के लिए बिना संपादन वाले वीडियो और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण की निष्पक्ष जांच से ही घटनाओं की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी महिला प्रदर्शनकारी को लेकर उठा था विवाद 7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी एक महिला पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारियों के बीच कथित टकराव को लेकर विवाद हुआ था। उस घटना पर भाजपा ने राहुल गांधी पर महिला पुलिस अधिकारी को धक्का देने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। यह भाजपा का आरोप था, जिसे घटना के स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर एहतियाती हिरासत की कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग हिरासत केंद्रों में ले जाया गया था। हिरासत केंद्रों के भीतर भी जारी रहे नारे रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रों के भीतर भी नारेबाजी और विरोध जारी रखा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने दिया गया, तो वे हिरासत केंद्रों को ही विरोध स्थल बना देंगे। महिला सुरक्षा और पुलिस प्रक्रिया पर बहस महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के तरीके, उन्हें पुलिस वाहनों में ले जाने और कथित सख्ती ने पुलिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी, बल का उचित इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देने की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान को लेकर सवाल 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक कानूनी विश्लेषण में यह सवाल उठाया गया कि बड़े पैमाने पर हिरासत और पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया। विश्लेषण में पहले के मामलों का हवाला देते हुए अदालत के हस्तक्षेप की भूमिका पर चर्चा की गई। यह न्यायिक कार्रवाई को लेकर उठाया गया सवाल है, न कि अदालत की ओर से किसी उल्लंघन की पुष्टि। आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और राजनीतिक आरोपों के आधार पर किसी विशिष्ट पुलिसकर्मी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। हालांकि, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत के दौरान बल प्रयोग से जुड़े आरोप गंभीर हैं। इनकी निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस की भूमिका पर बढ़ती चर्चा दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन, हिरासत और पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव की खबरों के बीच बहस अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन करने के अधिकार, पुलिस की शक्तियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्रोत: द प्रिंट, PTI, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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