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दिल्ली में CJP की तिरंगा यात्रा पर पुलिस की चेतावनी, DCP Neha Yadav की अपील—“यात्रा में शामिल न हों”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: CJP की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा को लेकर Delhi Police ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। New Delhi district की DCP Neha Yadav ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से लोग इस यात्रा में शामिल न हों। Connaught Place और आसपास के इलाकों में पहले से ही heavy security deployment और traffic restrictions लागू हैं। Police ने क्यों जारी की चेतावनी? Delhi Police का कहना है कि बड़ी भीड़, restricted zones और ongoing protest-related tensions को देखते हुए public safety priority है। इसी वजह से लोगों से advised routes follow करने और बिना जरूरत Central Delhi की ओर न जाने को कहा गया है। DCP Neha Yadav की अपील DCP Neha Yadav ने लोगों से appeal की कि वे proposed march का हिस्सा न बनें और police instructions का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी unlawful gathering या restricted area में entry पर action लिया जा सकता है। Connaught Place में security कड़ी CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ programme को देखते हुए Connaught Place, Central Park, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और अतिरिक्त force deployment की गई है। Central Park पर भी restrictions लागू किए गए हैं। Traffic पर भी असर Traffic Police ने Central Delhi के कई routes पर diversions और restrictions लागू किए हैं। Commuters को alternate routes इस्तेमाल करने और journey plan पहले से करने की सलाह दी गई है। CJP ने क्या कहा? CJP का कहना है कि उसका programme peaceful और democratic है। संगठन Chief Election Commissioner, voter-list revision और recent police action को लेकर protest जारी रखे हुए है। Police और protesters आमने-सामने हाल के दिनों में CJP protests, Jantar Mantar access और Connaught Place gathering को लेकर police और organisers के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। आज की tiranga yatra इसी broader confrontation का हिस्सा मानी जा रही है। source – Delhi Police, media reports जय राष्ट्र न्यूज़

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Rahul Gandhi-led INDIA bloc protest पर Delhi Police का action, barricade damage के आरोप में दो FIR दर्ज

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Rahul Gandhi के नेतृत्व में हुए INDIA bloc के protest march के बाद Delhi Police ने दो FIR दर्ज की हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान Barakhamba Road और Tilak Marg इलाके में barricades को नुकसान पहुंचाया गया और सार्वजनिक संपत्ति पर graffiti की गई। प्रदर्शन Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar को हटाने और electoral rolls की Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में आयोजित किया गया था। Barakhamba Road और Tilak Marg थानों में FIR Delhi Police ने एक FIR Barakhamba Road Police Station और दूसरी Tilak Marg Police Station में दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक march के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और प्रदर्शन के दौरान लगाए गए security barricades को नुकसान पहुंचा। Truck से barricade damage का आरोप Police के अनुसार एक truck से barricades को कथित तौर पर damage किया गया। इसके अलावा कुछ जगहों पर roads और public property पर graffiti किए जाने का भी आरोप है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। Rahul Gandhi समेत कई बड़े विपक्षी नेता हुए शामिल 12 अक्टूबर को हुए इस protest में Rahul Gandhi के अलावा Congress president Mallikarjun Kharge, Akhilesh Yadav, Mamata Banerjee और अन्य INDIA bloc नेताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने CEC Gyanesh Kumar को हटाने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की। Supreme Court तक march की थी योजना Opposition leaders का march Central Delhi से Supreme Court की ओर बढ़ा, लेकिन पुलिस ने रास्ते में barricading कर दी। बाद में विपक्ष की ओर से Supreme Court में SIR और Election Commission से जुड़े मुद्दों पर petition भी दाखिल की गई। Police करेगी video footage की जांच Delhi Police अब protest के दौरान सामने आए videos और दूसरे evidence की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल ये सभी allegations जांच के अधीन हैं। source – The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों से मारपीट का आरोप, IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी संदिग्धों की पहचान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के वीडियो सामने आए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया गया, जबकि मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी। संगठन ने वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी है। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के दृश्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सामने आए वीडियो में कुछ पुरुष प्रदर्शनकारियों को धक्का देते, थप्पड़ मारते और लात-घूंसे चलाते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में काली, फटी हुई टी-शर्ट पहने एक युवक को कई लोगों से घिरा हुआ देखा गया। वहीं, एक अन्य क्लिप में एक पुरुष और महिला के साथ कथित मारपीट के दृश्य सामने आए। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) महिला को जमीन पर गिराने का आरोप इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला को कथित तौर पर धक्का देकर जमीन पर गिराते और उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया है। IYC ने सवाल उठाया कि भारी पुलिस तैनाती के बावजूद ऐसी घटना कैसे हुई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी पहचान इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से उनकी पहचान के संबंध में जानकारी देने की अपील की। संगठन ने कथित हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। (फ्री प्रेस जर्नल) दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और कथित पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वायरल वीडियो से जुड़े मामले में चार लोग पकड़े गए फ्री प्रेस जर्नल की एक बाद की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो से जुड़े कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा था। पुलिस ने घटनास्थल को डीडीयू मार्ग के उस हिस्से से जोड़ा, जो कमला मार्केट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि उस समय कथित पीड़ित या किसी संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। (फ्री प्रेस जर्नल) सुरक्षा के लिए 35 हजार से अधिक कर्मियों की तैनाती की रिपोर्ट 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा पुलिस सहित 35,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे में कथित मारपीट के वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठाया गया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर बड़ी सभा को रोकने की खबरें सामने आई थीं। अधिकारियों ने सुरक्षा प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय बताया, जबकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। (रॉयटर्स) 12 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रदर्शन 12 अक्टूबर को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बाराखंभा रोड से मार्च निकाला। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कनॉट प्लेस से मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता बैठकर विरोध प्रदर्शन करते दिखाई दिए। (अमर उजाला) कथित मारपीट के मामले में जांच अहम IYC और कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन घटनाओं को सुनियोजित हिंसा बताया है। हालांकि, इस व्यापक आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मारपीट से जुड़े वीडियो सामने आए और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। कुछ लोगों को पकड़े जाने की भी खबर है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों, कथित पीड़ितों के बयानों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, फ्री प्रेस जर्नल, रॉयटर्स, अमर उजाला जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest के चलते दिल्ली से जुड़ी 245 ट्रेनें रद्द, राजधानी-शताब्दी समेत कई प्रीमियम सेवाएं प्रभावित

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन और मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भारतीय रेलवे ने दिल्ली से शुरू होने या दिल्ली में समाप्त होने वाली कुल 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया। इनमें 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। रद्द की गई सेवाओं में राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे ने यह फैसला दिल्ली के रेलवे स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लिया। इस कदम से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। 245 ट्रेनों की सेवाएं रद्द रेलवे के फैसले के तहत 10 अक्टूबर को कुल 245 ट्रेन सेवाएं रद्द की गईं। इनमें नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्टेशनों से चलने वाली या यहां पहुंचने वाली ट्रेनें शामिल हैं। बड़े पैमाने पर सेवाएं रद्द होने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर भी प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने का असर केवल सामान्य यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। कई राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस सेवाओं के साथ तेजस और हमसफर एक्सप्रेस भी प्रभावित हुईं। इन प्रीमियम ट्रेनों के रद्द होने से विभिन्न शहरों से दिल्ली आने और राजधानी से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें रद्द रिपोर्ट के मुताबिक, रद्द की गई 245 ट्रेनों में 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। यह फैसला दिल्ली से जुड़े रेल परिचालन पर अस्थायी रूप से बड़े पैमाने पर असर डालने वाला कदम रहा। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक की सेवाएं प्रभावित रेलवे की योजना के तहत 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच दिल्ली पहुंचने या दिल्ली से रवाना होने वाली कई ट्रेनें रद्द की गईं। इस अवधि में रेलवे स्टेशनों के आसपास भारी यातायात, भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा होने की आशंका जताई गई थी। केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनें चालू रहीं हालांकि, सभी ट्रेन सेवाएं बंद नहीं की गईं। रिपोर्ट के अनुसार, केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ चुनिंदा ट्रेनें निर्धारित योजना के तहत परिचालन में रहीं। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि जरूर करें, क्योंकि अलग-अलग सेवाओं पर अलग-अलग फैसले लागू किए गए थे। दो ट्रेनें रीशेड्यूल, नौ सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने के अलावा रेलवे ने कुछ सेवाओं के समय और संचालन में भी बदलाव किया। रिपोर्ट के अनुसार, दो ट्रेनों को रीशेड्यूल किया गया, जबकि नौ सेवाओं को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले समाप्त करने या शुरुआती स्टेशन में बदलाव के साथ चलाने का निर्णय लिया गया। इन बदलावों के कारण संबंधित यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में संशोधन करना पड़ा। कई राज्यों से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर असर ट्रेनों के रद्द होने से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों पर असर पड़ा। गुजरात के अहमदाबाद से दिल्ली आने वाली स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस भी प्रभावित सेवाओं में शामिल रही। रेलवे स्टेशनों के आसपास जाम की आशंका बनी वजह रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे ने ट्रेनों को रद्द करने के पीछे संभावित भारी सड़क यातायात और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को प्रमुख कारण बताया। मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना मुश्किल होने की आशंका थी। CJP ने ट्रेनें रद्द करने के फैसले पर उठाए सवाल CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़े पैमाने पर ट्रेनें रद्द किए जाने की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से प्रदर्शन में शामिल होने के इच्छुक लोगों की भागीदारी सीमित हो सकती है। हालांकि, यह CJP की ओर से लगाया गया आरोप है। रेलवे के फैसले को लेकर सामने आई रिपोर्टों में परिचालन संबंधी परिस्थितियों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में भी उठा परिवहन प्रतिबंधों का मुद्दा दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों और परिवहन व्यवस्था पर उनके असर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने सुरक्षा उपायों में आनुपातिकता बनाए रखने और आम लोगों को होने वाली असुविधा कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी असर रेलवे के अलावा दिल्ली मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी प्रतिबंधों का असर पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदियां लगाई गईं। इसके साथ ही सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्थित नमो भारत स्टेशनों को भी 10 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया गया। यात्रियों को ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह ट्रेनों के रद्द होने, समय बदलने और कुछ सेवाओं के आंशिक रूप से संचालित होने के कारण यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह दी गई है। यात्रियों को स्टेशन के लिए निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक जानकारी से अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए, ताकि अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सके। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / भारतीय रेलवे जय राष्ट्र न्यूज़

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EC मार्च में हाई ड्रामा, आकाशवाणी भवन में धरने पर राहुल-प्रियंका; घंटों चला विपक्ष-पुलिस का टकराव

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हाई ड्रामा देखने को मिला। पुलिस ने विपक्षी सांसदों को Nirvachan Sadan की ओर बढ़ने से रोका तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अचानक पास स्थित Akashvani Bhavan परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। कई घंटे चले इस विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। Election Commission तक जाना था मार्च INDIA bloc ने Parliament से Election Commission headquarters तक मार्च का आह्वान किया था। विपक्षी दल Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision यानी SIR को वापस लेने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने रास्ते में रोका Central Delhi में भारी barricading और security deployment किया गया था। जब सांसद Election Commission की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें Akashvani Bhavan के पास आगे जाने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया। राहुल-प्रियंका ने अचानक बदला रास्ता इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अचानक अपना रास्ता बदल दिया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों Akashvani Bhavan के खुले gate से परिसर में प्रवेश कर गए, जिससे पुलिस और वहां मौजूद विपक्षी नेताओं में भी कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना Akashvani Bhavan परिसर में पहुंचने के बाद राहुल और प्रियंका वहीं बैठ गए। बाद में KC Venugopal, Pawan Khera और अन्य Congress नेता भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। प्रदर्शन कई घंटे तक जारी रहा। आठ से नौ घंटे तक चला विरोध अलग-अलग reports में धरने की अवधि करीब आठ से नौ घंटे बताई गई है। इस दौरान Congress workers बाहर जमा होकर नारेबाजी करते रहे और अंदर मौजूद नेताओं ने Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। राहुल गांधी ने लोकतंत्र बचाने की कही बात धरने के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि वह Election Commission और voter-list revision से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने BJP और Election Commission पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और प्रदर्शन को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। EC बोला- formal meeting request नहीं मिली Election Commission ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की ओर से formal appointment request नहीं मिली थी। EC officials ने यह भी कहा कि इतने बड़े delegation के अचानक मिलने की मांग को स्वीकार करना सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शाम को पुलिस ने खत्म कराया धरना लंबे समय तक चले sit-in के बाद दिल्ली पुलिस ने Akashvani Bhavan परिसर से विपक्षी नेताओं को हटाना शुरू किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, KC Venugopal और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में हिरासत में लिए गए नेताओं को छोड़ दिया गया। Barricade पर चढ़े राहुल गांधी मार्च के दौरान राहुल गांधी के police barricade पर चढ़ने का दृश्य भी चर्चा में रहा। उन्होंने वहां तिरंगा लहराया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारा। इस दौरान विपक्ष और पुलिस के बीच कई जगह धक्का-मुक्की और नारेबाजी हुई। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि revision प्रक्रिया voter lists को अधिक accurate बनाने के लिए की जा रही है। INDIA bloc और सरकार के बीच बढ़ा टकराव इस घटना के बाद Election Commission और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद और गहरा गया है। जहां INDIA bloc CEC के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग पर कायम है, वहीं BJP ने विपक्ष पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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पत्रकार रोजी के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप, जवाब मांगने पहुंचे प्रदर्शनकारियों को थाने के बाहर रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने दिल्ली पुलिस के एक ACP पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले में FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर Parliament Street Police Station पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने थाने के बाहर ही रोक दिया और कई लोगों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायत को Crime Branch को जांच के लिए भेज दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान का है मामला घटना 3 अक्टूबर को उस समय की बताई जा रही है जब जंतर-मंतर के आसपास CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था। रोजी वहां प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत को रिकॉर्ड कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर उनके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया। ACP विवेक भगत पर लगाया आरोप रोजी ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उन्हें कथित तौर पर अनुचित तरीके से छुआ और पीछे की ओर धक्का दिया। उन्होंने कहा कि वह महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठा रही थीं। ये आरोप पत्रकार की शिकायत पर आधारित हैं और अभी जांच के अधीन हैं। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल रोजी तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक 3 अक्टूबर की law-and-order situation के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment के आरोप लगाए और लिखित शिकायतें दीं। Crime Branch को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी रोजी और अन्य महिला पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पत्रकार, छात्र कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग Parliament Street Police Station के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और शिकायत की औपचारिक FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने थाने के बाहर रोका सोमवार, 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। रोजी भी हिरासत में रिपोर्टों के अनुसार पत्रकार रोजी को भी FIR की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के दौरान हिरासत में लिया गया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी दावा किया कि रोजी समेत प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को Delhi Cantonment Police Station ले जाया गया। कैमरे पर माफी की मांग रोजी ने ACP विवेक भगत से on-camera apology और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को उसी तरह लिया जाना चाहिए जैसे किसी भी sexual harassment complaint को लिया जाता है। पत्रकार संगठनों में भी नाराजगी मामले के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 5 अक्टूबर को Press Club of India में भी इस मामले को लेकर पत्रकारों के जुटने और न्याय की मांग उठाने की खबर सामने आई। पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं रोजी और अन्य पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल ये शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं और किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई बनती है या नहीं। source – Delhi Police / The Indian Express / Times Now Navbharat / Daily Jagran / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद समर्थकों का प्रदर्शन, केस वापस लेने की मांग; पुलिस स्टेशन के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: जंतर-मंतर मारपीट मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। समर्थक Parliament Street Police Station के बाहर जुटे और भारद्वाज के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। पुलिस स्टेशन के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा समर्थकों के जुटने की सूचना के बाद Parliament Street Police Station के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने कई स्थानों पर barricades लगाए और एहतियात के तौर पर paramilitary personnel भी तैनात किए। समर्थकों ने कार्रवाई को बताया एकतरफा प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है। समर्थकों ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुई मारपीट की परिस्थितियों और भारद्वाज के self-defence के दावे को भी जांच में ध्यान में रखा जाना चाहिए। ये प्रदर्शनकारियों के दावे हैं और मामले की जांच अभी जारी है। SC/ST Act और POCSO को लेकर भी जताया विरोध भारद्वाज के समर्थकों ने मामले में जोड़ी गई SC/ST Act की धाराओं और एक अलग शिकायत पर दर्ज POCSO case को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस से भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा और उन्हें वापस लेने की मांग की। जंतर-मंतर की घटना से जुड़ा है मामला स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए CJP-led protest के दौरान उन्होंने एक नाबालिग छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ मारपीट की थी। मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब भारद्वाज का एक podcast clip वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने हमले को लेकर विवादित दावे किए थे। भारद्वाज बाद में इसे self-defence में हुई घटना बताते रहे हैं। Bulandshahr से हिरासत में लिए गए थे भारद्वाज Delhi Police ने भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के Bulandshahr से हिरासत में लिया था। इसके बाद 5 सितंबर को उन्हें formally arrest किया गया और अदालत ने एक दिन की police custody मंजूर की। आज Judicial Custody में भेजा गया मामले में आज 6 सितंबर को नई कानूनी कार्रवाई हुई। दिल्ली की अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की judicial custody में भेज दिया। उन्हें video conferencing के जरिए duty magistrate के सामने पेश किया गया। मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। समर्थकों और शिकायतकर्ताओं के अलग-अलग दावों की अंतिम सत्यता अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। source – PTI / The Tribune / ABP Newsजय राष्ट्र न्यूज़

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E20 ईंधन नीति के विरोध में केजरीवाल का प्रदर्शन तेज़, PM आवास मार्च रोका गया, सरकार से तीन बड़ी मांगें

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के खिलाफ अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है। मंगलवार को उन्होंने पार्टी नेताओं और समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मार्च रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं ने फिरोजशाह रोड पर धरना दिया। 2.3 लाख से अधिक हस्ताक्षर वाला ज्ञापन AAP के अनुसार पार्टी ने देशभर से 2.3 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर एकत्र किए हैं। इन हस्ताक्षरों वाले ज्ञापन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचाने के लिए यह मार्च आयोजित किया गया था। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया। केजरीवाल ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। AAP की तीन प्रमुख मांगें केजरीवाल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं— सरकार का पक्ष केंद्र सरकार का कहना है कि E20 नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाना, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। सरकार का दावा है कि चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही यह नीति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि विपक्ष और कुछ परिवहन संगठनों ने पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। राजनीतिक बहस हुई तेज़ BJP ने केजरीवाल के प्रदर्शन को “राजनीतिक ड्रामा” बताते हुए कहा कि E20 से वाहनों को नुकसान पहुँचने का कोई आधिकारिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। वहीं AAP का कहना है कि सरकार को लोगों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए और उपभोक्ताओं पर किसी एक ईंधन विकल्प को अनिवार्य नहीं बनाना चाहिए। निष्कर्ष E20 ईंधन नीति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं AAP और कई वाहन संगठनों की मांग है कि उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार दिया जाए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज़ होने की संभावना है. Source: Ministry of Petroleum & Natural Gas | Delhi Police | Aam Aadmi Party जय राष्ट्र न्यूज़

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