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UPI और ATM Charges को लेकर बहस तेज; ₹2,000 से ऊपर Merchant Payments पर MDR बना मुद्दा

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: UPI transactions और banking charges को लेकर social media पर बहस तेज हो गई है। 15 October से चुनिंदा ₹2,000 से ज्यादा के Person-to-Merchant UPI payments पर 0.4% MDR लागू होने वाला है। हालांकि Finance Ministry ने स्पष्ट किया है कि सामान्य consumers के Person-to-Person UPI transfers free रहेंगे और करीब 96% merchant transactions नए charge से प्रभावित नहीं होंगे। Customer को सीधे नहीं देना होगा UPI Charge Government के मुताबिक MDR कोई consumer transaction fee नहीं है। इसे merchant payment ecosystem के participants—banks, payment apps और service providers—के बीच distribute किया जाएगा। हालांकि retailers और industry associations ने चिंता जताई है कि merchants इस अतिरिक्त cost को prices में जोड़ सकते हैं या cash payments को बढ़ावा दे सकते हैं। ₹2,000 से ऊपर के Payments पर 0.4% MDR New framework में specified merchant transactions पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। ₹2,000 तक के merchant payments, Person-to-Person transfers और eligible small merchants के transactions free रहेंगे। ATM Charges अलग मामला ATM withdrawal charges UPI MDR से अलग हैं। Banks अपने customers को निर्धारित free ATM transactions देते हैं और limit खत्म होने के बाद applicable bank/ATM charges वसूल सकते हैं। इसलिए UPI के नए merchant charge और ATM withdrawal fees को एक ही नई policy बताना सही नहीं होगा। Banking customers पहले से ATM, debit card, SMS और कुछ अन्य services पर अलग-अलग charges दे सकते हैं। Traders में भी बढ़ रहा विरोध आज Ghaziabad में कुछ traders ने नए MDR के विरोध में दुकानों के बाहर UPI payment स्वीकार नहीं करने के notices लगाने शुरू किए हैं। वहीं Maharashtra के fuel dealers 27 September को meeting करके तय करेंगे कि UPI payments जारी रखे जाएं या नहीं। Supreme Court में भी पहुंचा मामला UPI MDR framework को Supreme Court में चुनौती दी गई है। Petition में तर्क दिया गया है कि merchant पर लगने वाला अतिरिक्त खर्च अंततः consumers तक पहुंच सकता है। Court ने अभी इस challenge पर कोई final फैसला नहीं दिया है। Dhruv Rathee वाला हिस्सा: अगर आप उनका video/reel/X post link या screenshot भेज दें, तो मैं उनके exact statement को verify करके इसी news में जोड़ दूँगा। source – Finance Ministry / Reuters / The Indian Express / Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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लोकसभा ने UPI लेनदेन पर संभावित MDR शुल्क का रास्ता खोलने वाला विधेयक पारित किया, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों वाला Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) सहित अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग गया है। क्या बदलेगा? अब तक UPI भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और व्यापारियों पर भी MDR लागू नहीं था। नए संशोधन के बाद सरकार आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना जारी करके बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ श्रेणियों के UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। यह कदम डिजिटल भुगतान ढांचे को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। क्या आम उपभोक्ता को भुगतान करना होगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़े खर्चों के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। छोटे लेनदेन पर असर नहीं सरकारी सूत्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,000 तक के अधिकांश छोटे UPI भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहने की संभावना है। यदि भविष्य में MDR लागू किया भी जाता है, तो उसका दायरा मुख्यतः बड़े व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा। डिजिटल भुगतान उद्योग की प्रतिक्रिया बैंकिंग और फिनटेक उद्योग लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि पूरी तरह निःशुल्क UPI मॉडल के कारण भुगतान अवसंरचना (Infrastructure) को बनाए रखने की लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि सीमित MDR व्यवस्था से बैंक, NPCI और भुगतान सेवा प्रदाता तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और नई सेवाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। दूसरी ओर कई व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि MDR लागू हुआ तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। राजनीतिक बहस विधेयक संसद में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह का महत्वपूर्ण कानून पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है और किसी प्रकार का तत्काल शुल्क लागू नहीं करता। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा पारित संशोधन ने UPI पर संभावित MDR लागू करने का कानूनी रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। भविष्य में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। Source: Ministry of Finance | Lok Sabha Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की पॉलिमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट योजना चर्चा में, डिजिटल भुगतान और नई मुद्रा तकनीक पर फोकस

नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंकनोट योजना एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की अनुमति दी है। इस पहल का उद्देश्य नई मुद्रा तकनीक की उपयोगिता, टिकाऊपन और सुरक्षा का परीक्षण करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागज़ के नोटों को पूरी तरह हटाने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ (कुल 200 करोड़) पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों का उपयोग अलग-अलग जलवायु और परिस्थितियों में उनकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और सुरक्षा विशेषताओं का आकलन करने के लिए किया जाएगा। पॉलिमर नोट क्यों? RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर साबित हो सकते हैं— दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में पॉलिमर नोट पहले से सफलतापूर्वक प्रचलन में हैं। डिजिटल भुगतान पर क्या असर पड़ेगा? हाल के वर्षों में भारत में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि पॉलिमर नोटों का परीक्षण डिजिटल भुगतान का विकल्प नहीं, बल्कि नकद मुद्रा को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक तकनीकी कदम है। फील्ड ट्रायल के बाद ही इसके व्यापक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। कागज़ी नोट जारी रहेंगे वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान में कागज़ी नोटों को बंद करने या पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तभी आगे नियमित जारी करने पर विचार किया जाएगा। आगे क्या होगा? फील्ड ट्रायल के दौरान RBI अलग-अलग क्षेत्रों में नोटों के उपयोग, टिकाऊपन, सुरक्षा और जनता की प्रतिक्रिया का अध्ययन करेगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्गों में भी पॉलिमर नोट जारी करने पर विचार किया जा सकता है। निष्कर्ष RBI की पॉलिमर करेंसी योजना भारत की मुद्रा प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य नकद लेन-देन को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाना है। हालांकि डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल भारतीय मुद्रा प्रणाली में नई तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। Source: Reserve Bank of India (RBI) | Ministry of Finance | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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