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कर्नाटक में voter deletion विवाद पर DK शिवकुमार ने जांच की मांग की, CEO ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे संभावित आपराधिक साजिश बताते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद राज्य के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि झूठी जानकारी या फर्जी declarations के आधार पर दाखिल Form 7 मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाए। Form 7 के कथित बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर सवाल विवाद उन शिकायतों के बाद बढ़ा जिनमें आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में pre-printed Form 7 जमा कर मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की गई। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का संगठित तरीके से दुरुपयोग हुआ। DK शिवकुमार ने criminal probe की मांग की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित Chief Electoral Officer के कार्यालय पहुंचकर मामले की जांच की मांग की। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों के साथ धरना भी दिया और कहा कि कथित फर्जी Form 7 applications की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप शिवकुमार ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग बयानों में उन्होंने संभावित रूप से लाखों मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का दावा किया है। ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। CEO ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों को दिया निर्देश कर्नाटक के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी District Election Officers, Electoral Registration Officers और संबंधित municipal commissioners को निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक Form 7 applications पर कार्रवाई से पहले औपचारिक जांच की जाएगी और जानबूझकर झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे बाद खत्म हुआ धरना CEO के आदेश के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रियों ने करीब छह घंटे तक चला धरना समाप्त कर दिया। शिवकुमार ने इसे अपनी मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि मामला पूरी तरह सुलझने तक राजनीतिक और कानूनी प्रयास जारी रहेंगे। तीन FIR दर्ज होने की भी जानकारी रिपोर्टों के अनुसार कथित फर्जी voter deletion applications से जुड़े मामलों में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें Mysuru, Bidar और Belagavi से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस और चुनाव अधिकारी submissions की जांच कर रहे हैं। Belagavi में BJP नेता पर भी FIR Belagavi जिले में एक BJP नेता और अन्य लोगों के खिलाफ 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने की खबर है। यह मामला भी Form 7 submissions से जुड़ा है और जांच जारी है। आरोपों की अंतिम सत्यता पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तय होगी। चुनाव आयोग ने false declarations पर सख्ती के संकेत दिए Election authorities ने साफ किया है कि Forms 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में गलत या फर्जी submissions को रोकना बताया गया है। SIR के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव कर्नाटक में यह विवाद Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के बीच सामने आया है। कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, जबकि आरोपों में जिन राजनीतिक दलों के नाम लिए गए हैं, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच से ही होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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Karnataka के मंत्री B Nagendra ने इस्तीफे की पेशकश की; ₹89.63 करोड़ Valmiki Corporation मामले को लेकर BJP का दबाव

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में Maharshi Valmiki Scheduled Tribes Development Corporation से जुड़े कथित ₹89 करोड़ के फंड diversion मामले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है। राज्य के Planning and Statistics Minister B Nagendra ने बुधवार, 26 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar की Cabinet से इस्तीफा देने की पेशकश की है। विपक्षी BJP पिछले कई दिनों से Nagendra को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar ने फिलहाल Nagendra को इस्तीफा देने से रोकते हुए कहा है कि वह पहले Congress high command से इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। यानी Nagendra ने इस्तीफे की पेशकश की है, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। आज सुबह सामने आया बड़ा Political Development 26 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे यह जानकारी सामने आई कि BJP के बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच Nagendra ने पद छोड़ने की पेशकश की है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनसे फिलहाल पद पर बने रहने को कहा है, जब तक पार्टी नेतृत्व से चर्चा पूरी नहीं हो जाती। इसलिए headline में “इस्तीफा दे दिया” लिखना अभी गलत होगा। सही स्थिति यह है कि उन्होंने resignation offer किया है। क्या है ₹89.63 करोड़ Valmiki Corporation मामला? यह मामला Karnataka Maharshi Valmiki Scheduled Tribes Development Corporation के सरकारी फंड से जुड़ा है। CBI की chargesheet के मुताबिक करीब ₹89.63 करोड़ सरकारी रकम कथित रूप से forged cheques और RTGS transactions के जरिए divert की गई। जांच एजेंसी ने दावा किया कि यह पैसा लगभग 600 bank accounts के जरिए layer किया गया और बाद में cash, bullion तथा luxury vehicles में बदला गया। CBI ने जून 2026 में Nagendra समेत कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया था। ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और conviction नहीं हुई है। Nagendra को Chargesheet में बनाया गया आरोपी CBI का आरोप है कि B Nagendra और उनके कथित करीबी सहयोगी Nekkanti Nagaraj समेत अन्य लोगों ने सरकारी funds के diversion में भूमिका निभाई। Agency ने यह भी आरोप लगाया कि Nagendra को एक private firm को ₹13.95 करोड़ का tender दिलाने के बदले ₹1.20 करोड़ की कथित रिश्वत मिली। यह CBI की chargesheet का आरोप है, जिसे अदालत में साबित किया जाना बाकी है। CBI ने Nagendra को तीन अलग-अलग chargesheets में आरोपी बनाया है। Governor से Prosecution Sanction भी मांगा मामले में हाल ही में एक और महत्वपूर्ण development सामने आया था। CBI ने Karnataka Governor Thaawarchand Gehlot से Nagendra के खिलाफ prosecution शुरू करने की अनुमति मांगी है। एक sitting minister के खिलाफ कुछ परिस्थितियों में prosecution आगे बढ़ाने के लिए ऐसी sanction महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है। इसी development के बाद BJP ने Nagendra के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज कर दिया। BJP ने Assembly में किया लगातार Protest Karnataka BJP पिछले कई दिनों से Legislative Assembly में Nagendra के resignation की मांग को लेकर विरोध कर रही है। BJP और JD(S) के विधायकों ने Assembly proceedings बाधित कीं और आरोप लगाया कि chargesheet में नाम आने के बाद Nagendra का मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है। Opposition ने Vidhana Soudha के बाहर भी प्रदर्शन किया और कई BJP नेताओं को protest के दौरान हिरासत में लिया गया। Vidhana Soudha में जबरन घुसने की कोशिश तक पहुंचा Protest विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब BJP कार्यकर्ताओं और नेताओं ने Vidhana Soudha की ओर march किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक security personnel के साथ धक्का-मुक्की हुई और कुछ प्रदर्शनकारियों ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की। BJP की मांग थी कि Nagendra को तुरंत Cabinet से हटाया जाए। लगातार protests के चलते राज्य की monsoon session की proceedings भी प्रभावित हुईं। 2024 में भी इसी मामले पर दे चुके हैं इस्तीफा Nagendra के लिए यह विवाद नया नहीं है। जब 2024 में Valmiki Corporation fund diversion मामला सामने आया था, उस समय वह Tribal Welfare Minister थे। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने June 2024 में Cabinet से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Enforcement Directorate ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। बाद में उन्हें bail मिली। August 2026 में दोबारा Cabinet में हुई थी Entry राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद B Nagendra को 3 अगस्त 2026 को D.K. Shivakumar की Cabinet में फिर शामिल किया गया। उन्हें Planning and Statistics portfolio दिया गया। लेकिन re-induction के कुछ ही दिनों बाद BJP ने CBI chargesheet और ED case को लेकर उनकी नियुक्ति का विरोध शुरू कर दिया। अब तीन सप्ताह से भी कम समय में Nagendra ने फिर पद छोड़ने की पेशकश की है। BJP पर Nagendra का पलटवार Nagendra पहले resignation की मांग को खारिज करते रहे थे। 19 अगस्त को उन्होंने BJP पर आरोप लगाया था कि विपक्ष उन्हें इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि वह tribal community से आते हैं। उन्होंने कहा था कि अगर अदालत उन्हें दोषी पाती है तो वह सजा स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। Nagendra ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के आरोपों को भी राजनीतिक साजिश बताया था। हालांकि उनके इन दावों का BJP ने विरोध किया और कहा कि मुद्दा जाति नहीं बल्कि corruption allegations और accountability का है। मामला सामने कैसे आया था? Valmiki Corporation मामला 2024 में उस समय चर्चा में आया जब corporation से जुड़े Accounts Officer P Chandrashekaran की मौत हुई। उनके कथित suicide note में corporation के funds के unauthorized transfer और वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके बाद मामले की जांच अलग-अलग agencies तक पहुंची। Union Bank of India की complaint के आधार पर CBI ने भी investigation शुरू की। ₹187 करोड़ Pool हुआ, ₹89.63 करोड़ कथित तौर पर Divert CBI के मुताबिक corporation और संबंधित departments से लगभग ₹187 करोड़ Union Bank of India के account में pool किए गए थे। Agency का आरोप है कि इसमें से ₹89.63 करोड़ कथित तरीके से divert किए गए। CBI ने bank officials, corporation officers, government officials, private persons और middlemen समेत कई लोगों की भूमिका जांचने का दावा किया है। Congress के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किल…

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