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IIT JAM 2027 Registration Date बदली, अब 12 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन; जानें पूरा Schedule

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: IIT JAM 2027 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। Indian Institute of Technology (IIT) Kharagpur ने Joint Admission Test for Masters (JAM) 2027 के registration schedule में बदलाव किया है। Online application process अब 12 सितंबर 2026 से शुरू होगा, जबकि पहले registration की तारीख 5 सितंबर घोषित की गई थी। पहले 5 सितंबर से खुलना था Portal IIT JAM 2027 की website launch होने के समय IIT Kharagpur ने registration process 5 सितंबर से शुरू करने की जानकारी दी थी। इसी वजह से कई शुरुआती reports में 5 सितंबर registration date बताई गई थी। बाद में जारी updated schedule और information brochure में इसे बदलकर 12 सितंबर कर दिया गया। 12 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन Updated schedule के मुताबिक JAM Online Application Processing System यानी JOAPS portal 12 सितंबर को खुलेगा। उम्मीदवार 12 अक्टूबर 2026 तक application form जमा कर सकेंगे। 14 फरवरी 2027 को होगी परीक्षा IIT JAM 2027 examination 14 फरवरी 2027 को Computer Based Test mode में आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो sessions में होगी और कुल सात test papers के लिए आयोजित की जाएगी। इन सात Subjects के लिए होगा JAM JAM 2027 में Biotechnology, Chemistry, Economics, Geology, Mathematics, Mathematical Statistics और Physics के papers होंगे। Candidate एक या दो test papers चुन सकता है, लेकिन दो papers तभी लिए जा सकते हैं जब वे अलग-अलग sessions में scheduled हों। करीब 3,000 IIT Seats पर मिलेगा Admission JAM 2027 score का इस्तेमाल academic session 2027-28 के लिए IITs के postgraduate programmes में admission के लिए किया जाएगा। Official brochure के अनुसार 23 IITs में करीब 3,000 seats उपलब्ध हैं। 18 मार्च को घोषित होगा Result Official schedule के मुताबिक IIT JAM 2027 का result 18 मार्च 2027 को घोषित किया जाना है। Candidates को IIT Kharagpur की official JAM website पर ही latest notifications check करने की सलाह दी गई है। source – IIT Kharagpur / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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कन्नौज में स्कूल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन! प्रधानाध्यापक पर दुर्व्यवहार, मारपीट और जातीय भेदभाव के आरोप

कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल का बहिष्कार करते हुए प्रधानाध्यापक की गाड़ी का घेराव किया और कई गंभीर आरोप लगाए। छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, भेदभाव और मारपीट करते हैं। कुछ छात्रों ने जाति और समुदाय के आधार पर भेदभाव किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये फिलहाल छात्रों और अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिभावक भी बच्चों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए। स्कूल का बहिष्कार और गाड़ी का घेराव रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रधानाध्यापक की गाड़ी को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शिकायतों पर कार्रवाई करने की मांग की। स्कूल में करीब 200 छात्र पढ़ते हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई के बजाय दूसरे कामों में लगाया जाता है। एक रिपोर्ट में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर भी छात्रों की शिकायत का उल्लेख है। गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्कूल में गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठाया। छात्रों के अनुसार, विज्ञान विषय के शिक्षक द्वारा गणित पढ़ाया जा रहा है और वे गणित के लिए अलग शिक्षक की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों ने स्कूल की पढ़ाई और व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें भी प्रशासन के सामने रखीं। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी उठाई आवाज रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्कूल के कुछ शिक्षक भी प्रधानाध्यापक के खिलाफ शिकायतों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधानाध्यापक पर स्कूल परिसर में लगे पेड़ों को कटवाने के आरोप भी प्रदर्शन के दौरान सामने आए हैं। इन आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों की किस तरह जांच करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि जांच पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कन्नौज की यह घटना उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। स्रोत: Careers360, Times Now Navbharat, Navbharat Times, IANS Jai Rashtra News

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PM CARES Fund के पैसे से स्कूल बनाने की मांग! ₹8,452 करोड़ के फंड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: PM CARES Fund में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि को ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में इस्तेमाल करने की मांग उठी है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाए। ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का मुद्दा डिपके ने अपनी ‘School Thik Karo’ मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को बेहतर सड़क, बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में फंड की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ PM CARES Fund में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा स्कूलों का दावा डिपके के मुताबिक अगर एक आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हों, तो ₹8,500 करोड़ की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। हालांकि, यह आंकड़ा डिपके का अनुमान है और इसे सरकार की स्वीकृत स्कूल-निर्माण योजना नहीं माना जाना चाहिए। PM CARES Fund में कितनी रकम है? नवीनतम ऑडिट आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 को PM CARES Fund का बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था। यह राशि 2023-24 के करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस से काफी अधिक है। फंड की करीब 93% राशि यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में थी। वित्त वर्ष 2024-25 में फंड से कुल भुगतान करीब ₹87.85 लाख दर्ज हुआ, जिससे फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। क्या PM CARES का पैसा स्कूलों पर खर्च किया जा सकता है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। PM CARES Fund का घोषित उद्देश्य मुख्य रूप से आपात स्थितियों, आपदाओं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसके उद्देश्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान भी हैं, लेकिन सामान्य स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग से मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए PM CARES की राशि से सामान्य स्कूल निर्माण किया जा सकता है या नहीं, यह फंड के घोषित उद्देश्यों और Board of Trustees की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। BJP ने मांग पर जताई आपत्ति इस मांग के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। BJP ने कहा कि PM CARES Fund का उद्देश्य आपातकालीन और आपदा राहत है और इसे सामान्य स्कूल निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की मांग फंड के मूल उद्देश्य को नहीं समझती। यानी फिलहाल यह सरकार की घोषित योजना नहीं, बल्कि अभिजीत डिपके की मांग है। PM CARES Fund फिर चर्चा में ₹8,452 करोड़ के बड़े कॉर्पस, FY25 में बेहद कम भुगतान और अब ग्रामीण स्कूलों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की मांग ने PM CARES Fund को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार या PM CARES Fund का ट्रस्ट बोर्ड इस सुझाव पर कोई विचार करता है या स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के जरिए ही फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Report, PTI, Hindustan Times, New Indian Express, Times of India Jai Rashtra News

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16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दीपके की डिग्री और स्कॉलरशिप पर सवाल, बोले—“मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार”

नई दिल्ली: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और उसकी फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। दीपके ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने BJP नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। Boston University की पढ़ाई पर उठे सवाल विवाद तब शुरू हुआ जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने दीपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी की गई और यह सवाल उठाया गया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा हुआ। दीपके ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। “मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार हूं” अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वह अपनी Boston University की डिग्री दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन के दस्तावेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके ने दावा किया है कि उन्हें Boston University से Dean’s Scholarship मिली थी और पढ़ाई के बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया गया था। PM मोदी की डिग्री पर भी उठाया सवाल दीपके ने अपने बचाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना है कि यदि उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो राजनीतिक नेताओं को भी अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। विरोधियों को भी दिया जवाब 17 अगस्त को सामने आए एक वीडियो में दीपके ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनकी Boston University की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी डिग्री दिखा देंगे और साथ ही अपने आलोचकों से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की। विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना यह मामला केवल दीपके की शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है। उनके CJP आंदोलन और सरकार के खिलाफ उनके बयानों के कारण यह विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी दीपके की ओर से प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी की आलोचना की और इसे अहंकार से जोड़कर देखा। निष्कर्ष अभिजीत दीपके की Boston University की डिग्री और विदेश में पढ़ाई की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने साफ कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उनके सवालों ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। Source: PTI, India Today, ThePrint, ABP News, Navbharat Live जय राष्ट्र न्यूज़

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नन्हे कदम, बड़ा सवाल! सड़क की मांग लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर में सड़क की खराब स्थिति को लेकर कुछ स्कूली बच्चों का जिला प्रशासन के कार्यालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। बच्चों ने अधिकारियों के सामने अपने इलाके की सड़क से जुड़ी समस्या रखी और बेहतर सड़क निर्माण की मांग की। बच्चों के इस कदम ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ लोगों का भी ध्यान खींचा है। सड़क की समस्या लेकर बच्चों ने उठाई आवाज जानकारी के मुताबिक, बच्चों का कहना था कि उनके इलाके में सड़क की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है, जिससे रास्ते पर कीचड़ और पानी जमा होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। बच्चों ने इसी समस्या को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे बच्चे अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उनका उद्देश्य अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाना था कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। बच्चों के इस कदम को देखकर कार्यालय में मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी ओर गया। इतनी कम उम्र में अपनी बुनियादी जरूरत के लिए प्रशासन के सामने आवाज उठाने की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं। बारिश में बढ़ जाती है परेशानी स्थानीय लोगों के अनुसार, खराब सड़क की समस्या बारिश के दौरान और गंभीर हो जाती है। पानी जमा होने और सड़क पर कीचड़ होने के कारण पैदल चलने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए रोजाना इस रास्ते से गुजरना मजबूरी है। ऐसे में सड़क की स्थिति में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है। बच्चों ने प्रशासन के सामने रखा सवाल बच्चों का जिला प्रशासन तक पहुंचना सिर्फ सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल भी माना जा रहा है। जब स्कूली बच्चों को खुद अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचना पड़े, तो यह स्थानीय स्तर पर सड़क और नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों को कार्रवाई की उम्मीद बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराकर जल्द जरूरी कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत या निर्माण होने से बच्चों के साथ-साथ आसपास रहने वाले सभी लोगों को राहत मिलेगी। बच्चों की पहल बनी चर्चा का विषय अपनी समस्या को लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने वाले बच्चों की पहल ने यह संदेश दिया है कि अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चों की मांग अब प्रशासन के सामने है और लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग सड़क की समस्या के समाधान के लिए कब तक कार्रवाई करता है। निष्कर्ष सोलापुर में सड़क की समस्या को लेकर बच्चों का जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना चर्चा में है। बच्चों ने प्रशासन के सामने खराब सड़क और स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को रखा और सड़क सुधार की मांग की। अब उम्मीद है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करेगा और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / जिला प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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सोलापुर में जिला परिषद स्कूल का स्लैब गिरा, 13 छात्र और 2 शिक्षक घायल

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब अचानक गिर गया। हादसे में 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक गिरा स्लैब, बच्चों में मची अफरा-तफरी जानकारी के अनुसार, हादसा 10 अगस्त 2026 को दोपहर के समय हुआ। स्कूल के पोर्च की छत की एक परत अचानक नीचे गिर गई और मलबा छात्रों के ऊपर जा गिरा। मलबा गिरते ही स्कूल में चीख-पुकार मच गई। मौजूद शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। 13 छात्र घायल, 2 शिक्षकों के घायल होने की भी खबर हादसे में कुल 13 छात्रों के घायल होने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्ट में 2 शिक्षकों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है। घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और उपचार के बाद घायल छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। करीब 25 साल पुरानी है स्कूल की इमारत बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन करीब 25 साल पुराना है। यह सोलापुर जिला परिषद द्वारा संचालित कन्नड़ माध्यम का स्कूल है, जिसमें पहली से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल भवन के एक हिस्से का अचानक गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस के साथ जिला परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल बच्चों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लैब गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठे सवाल हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की पुरानी इमारत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरानी इमारत को गिराकर नई स्कूल बिल्डिंग बनाने की मांग उठाई है। सवाल यह भी है कि यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में भवन के किसी हिस्से का गिरना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि स्कूल की इमारत की पूरी तरह जांच कराई जाए और जब तक भवन सुरक्षित घोषित न हो, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती हादसे के बाद प्रशासन के सामने स्कूल भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है। यदि भवन के अन्य हिस्से भी कमजोर पाए जाते हैं, तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण भी जरूरी माना जा रहा है। निष्कर्ष सोलापुर के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब गिरने से 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है और घायल छात्रों की स्थिति स्थिर बताई गई है। लेकिन इस हादसे ने करीब 25 साल पुराने स्कूल भवन की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच और स्कूल भवन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। Source: ABP News / TV9 Bharatvarsh / स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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“शिक्षा शेरनी का दूध है, लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है…” — आचार्य सूर्य सागर जी

आचार्य सूर्य सागर जी का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने शिक्षा और आरक्षण की तुलना करते हुए बेहद आपत्तिजनक और विवादित भाषा का इस्तेमाल किया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इस तरह की भाषा और तुलना पर आपत्ति जताई है। नोट: यह कथन आचार्य सूर्य सागर जी के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इसके मूल वीडियो और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। #AcharyaSuryaSagar#Reservation#Education#SocialJustice#ControversialStatement BreakingNews JayRashtraNews

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राष्ट्रीय | PM Modi ने IIT Delhi में emerging technologies पर दिया जोर, बोले—देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर करें innovation

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों और युवा इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विकास में innovation, research और emerging technologies की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश की वास्तविक जरूरतों के समाधान के लिए भी करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के दौर में युवाओं को लगातार सीखते रहना होगा। उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने, सवाल पूछने और ऐसी समस्याओं के समाधान खोजने की सलाह दी जिनका कोई तैयार जवाब मौजूद नहीं है। करियर का आकलन सिर्फ सैलरी से न करें PM Modi ने IIT Delhi के graduating students से कहा कि वे अपने करियर के फैसले लेते समय केवल वेतन या व्यक्तिगत लाभ को आधार न बनाएं। उन्होंने युवाओं से यह सोचने को कहा कि उनके काम से देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी और समाज को उसका क्या लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की प्रगति में योगदान देने का मतलब केवल सरकारी क्षेत्र में काम करना नहीं है। निजी कंपनियों, startups, research institutions और technology-driven businesses के जरिए भी युवा राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘Out of syllabus’ समस्याओं के लिए तैयार रहें प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन और करियर की चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिंदगी की कई कठिन परीक्षाएं ऐसी होती हैं जो ‘out of syllabus’ होती हैं। उनका संदेश था कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए किताबों में हमेशा तैयार उत्तर नहीं मिलते। ऐसे में युवाओं को परिस्थितियों के अनुसार सीखने, सोचने और समाधान निकालने की क्षमता विकसित करनी होगी। Emerging technologies में भारत की बड़ी संभावनाएं PM Modi ने कहा कि दुनिया तेजी से technological transformation के दौर से गुजर रही है। Artificial Intelligence, advanced computing, quantum technology और दूसरी emerging technologies आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करेंगी। ऐसे समय में भारत के लिए केवल नई तकनीकों का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा। देश को research, innovation और indigenous technology development पर भी जोर देना होगा, ताकि भारत अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर सके। Research को वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर जोर प्रधानमंत्री ने छात्रों और researchers से कहा कि उनकी research का उद्देश्य केवल academic achievement तक सीमित नहीं रहना चाहिए। Research को देश और समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं को ऐसे solutions विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत की बड़ी चुनौतियों जैसे infrastructure, energy, healthcare, education और technology access में उपयोगी साबित हो सकें। लगातार सीखते रहने की सलाह PM Modi ने graduating students से कहा कि degree हासिल करने के बाद learning खत्म नहीं होती। बदलती technology के दौर में professionals को लगातार अपने skills को update करना होगा। उन्होंने युवाओं से curiosity बनाए रखने और नए सवाल पूछने की आदत विकसित करने को कहा। उनके मुताबिक, तेजी से बदलती दुनिया में सीखने की क्षमता ही लंबे समय में सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक होगी। वैश्विक बदलावों को अवसर के रूप में देखें प्रधानमंत्री ने geopolitical बदलावों और technological transformation का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इन बदलावों के बीच भारत के सामने नई चुनौतियों के साथ-साथ बड़े अवसर भी मौजूद हैं। युवा engineers और technology professionals इन बदलावों को समझकर भारत को global technology ecosystem में मजबूत स्थिति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। IIT Delhi के graduates को मिला बड़ा संदेश IIT Delhi के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यह रहा कि देश की नई पीढ़ी केवल नौकरी पाने वाली workforce न बने, बल्कि problem solvers, innovators और technology creators के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और skills को देश की जरूरतों के साथ जोड़ने की अपील की। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत AI, semiconductor, quantum technology, space technology और अन्य advanced technology sectors में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। IIT Delhi में ‘Param Pragya’ का भी उल्लेख IIT Delhi के 57वें Convocation से जुड़े कार्यक्रम में institute की research और technology initiatives भी चर्चा में रहे। समारोह में ‘Param Pragya’ से जुड़े कार्यक्रम का भी उल्लेख हुआ, जो भारत की advanced computing और technology capabilities को मजबूत करने की दिशा से जुड़ा है। यह पहल इस व्यापक दिशा से जुड़ी है जिसमें भारत emerging technologies में research और indigenous capabilities को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। निष्कर्ष IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा engineers और graduates को innovation, research और continuous learning पर जोर देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि career decisions लेते समय केवल salary को नहीं, बल्कि देश की जरूरतों और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब emerging technologies तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को बदल रही हैं। भारत के लिए आने वाले वर्षों में यह चुनौती होगी कि वह केवल नई technologies को अपनाए नहीं, बल्कि research और innovation के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताएं भी विकसित करे। Source: All India Radio / DD India, Hindustan Times, Indian Express, IIT Delhi Convocation-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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