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DRDO विशेषज्ञों की चेतावनी: सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता नहीं हुई तो भविष्य के युद्धों में कमजोर पड़ सकती है भारत की रक्षा क्षमता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण और चिप सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण होती जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने इस क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल नहीं की, तो भविष्य के तकनीक-आधारित संघर्षों में देश की रक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है। आधुनिक युद्ध में चिप्स की अहम भूमिका आज के आधुनिक रक्षा तंत्र में ड्रोन, रडार, मिसाइल, संचार नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म और AI आधारित हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन प्रणालियों के संचालन और उनकी क्षमताओं को बेहतर बनाने में सेमीकंडक्टर चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उन्नत चिप्स के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। वैश्विक तनाव से बाधित हो सकती है सप्लाई चेन अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में रक्षा उपकरणों के निर्माण, रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड की प्रक्रिया में बाधाएं आने का खतरा है। इसलिए रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक घटकों की विश्वसनीय और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी चिप इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को केवल व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में रक्षा-उपयोग के लिए जरूरी चिप्स, सेंसर, प्रोसेसर और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक्स का घरेलू इकोसिस्टम विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए चिप डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि रक्षा प्रणालियों की जरूरतों के अनुरूप तकनीक देश में ही विकसित की जा सके। आयातित तकनीक पर निर्भरता घटाना जरूरी रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों और तकनीकों के लिए आयात पर निर्भरता एक चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सैन्य तैयारियों और तकनीकी मजबूती के लिए स्वदेशी विकल्प विकसित करना जरूरी है। घरेलू क्षमताओं के विस्तार से आपूर्ति में संभावित व्यवधानों के जोखिम को कम करने और महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के रखरखाव में मदद मिल सकती है। India Semiconductor Mission को रक्षा जरूरतों से जोड़ने की जरूरत केंद्र सरकार India Semiconductor Mission के माध्यम से देश में चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल को रक्षा क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना जरूरी है। इसका उद्देश्य रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सुरक्षित घरेलू आपूर्ति विकसित करना और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों की उपलब्धता को मजबूत करना है। भविष्य के युद्धों में बढ़ेगी तकनीक की भूमिका भविष्य के संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों की भूमिका बढ़ने की संभावना है। इन सभी क्षेत्रों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तकनीक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। ऐसे में चिप निर्माण की घरेलू क्षमता को केवल औद्योगिक विकास का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जुड़ी प्राथमिकता के रूप में देखना जरूरी है। Source – The Indian Express, DRDO जय राष्ट्र न्यूज़

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