प्रमुख खबरें

DRDO विशेषज्ञों की चेतावनी: सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता नहीं हुई तो भविष्य के युद्धों में कमजोर पड़ सकती है भारत की रक्षा क्षमता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण और चिप सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण होती जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने इस क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल नहीं की, तो भविष्य के तकनीक-आधारित संघर्षों में देश की रक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है। आधुनिक युद्ध में चिप्स की अहम भूमिका आज के आधुनिक रक्षा तंत्र में ड्रोन, रडार, मिसाइल, संचार नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म और AI आधारित हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन प्रणालियों के संचालन और उनकी क्षमताओं को बेहतर बनाने में सेमीकंडक्टर चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उन्नत चिप्स के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। वैश्विक तनाव से बाधित हो सकती है सप्लाई चेन अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में रक्षा उपकरणों के निर्माण, रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड की प्रक्रिया में बाधाएं आने का खतरा है। इसलिए रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक घटकों की विश्वसनीय और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी चिप इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को केवल व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में रक्षा-उपयोग के लिए जरूरी चिप्स, सेंसर, प्रोसेसर और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक्स का घरेलू इकोसिस्टम विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए चिप डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि रक्षा प्रणालियों की जरूरतों के अनुरूप तकनीक देश में ही विकसित की जा सके। आयातित तकनीक पर निर्भरता घटाना जरूरी रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों और तकनीकों के लिए आयात पर निर्भरता एक चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सैन्य तैयारियों और तकनीकी मजबूती के लिए स्वदेशी विकल्प विकसित करना जरूरी है। घरेलू क्षमताओं के विस्तार से आपूर्ति में संभावित व्यवधानों के जोखिम को कम करने और महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के रखरखाव में मदद मिल सकती है। India Semiconductor Mission को रक्षा जरूरतों से जोड़ने की जरूरत केंद्र सरकार India Semiconductor Mission के माध्यम से देश में चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल को रक्षा क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना जरूरी है। इसका उद्देश्य रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सुरक्षित घरेलू आपूर्ति विकसित करना और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों की उपलब्धता को मजबूत करना है। भविष्य के युद्धों में बढ़ेगी तकनीक की भूमिका भविष्य के संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों की भूमिका बढ़ने की संभावना है। इन सभी क्षेत्रों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तकनीक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। ऐसे में चिप निर्माण की घरेलू क्षमता को केवल औद्योगिक विकास का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जुड़ी प्राथमिकता के रूप में देखना जरूरी है। Source – The Indian Express, DRDO जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

भारत-कनाडा संबंधों में नई तेजी, मोदी और कार्नी के बीच व्यापार के साथ रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर चर्चा

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रक्षा सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ वर्षों के राजनयिक तनाव के बाद दोनों देश अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बातचीत के एजेंडे में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। इससे पहले भारत और कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर सहमत हुए थे। इसके तहत रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा जाने की योजना है। दोनों नेताओं ने प्रस्तावित यात्रा से पहले संपर्क बनाए रखने और उच्चस्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। CEPA वार्ता जल्द पूरी करने पर जोर मोदी और कार्नी ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर चल रही बातचीत को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देना है। समझौते पर प्रगति से कारोबार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक साझेदारी के नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि, वार्ता पूरी होने और समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री सहयोग पर भी ध्यान भारत और कनाडा के बीच रक्षा साझेदारी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल हैं। कनाडा ने अपने रक्षा क्षेत्र में साझेदारियों का विस्तार करने और भारत के साथ रक्षा उद्योग से जुड़े व्यावसायिक संबंध बढ़ाने में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से रणनीतिक संवाद को व्यापक बनाने का अवसर मिल सकता है। राजनयिक तनाव के बाद संबंध सुधारने की कोशिश भारत और कनाडा के संबंध वर्ष 2023 में गंभीर राजनयिक तनाव से गुजरे थे। इसके बाद वर्ष 2025 से दोनों देशों ने उच्चायुक्तों की वापसी और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत के माध्यम से संबंध सुधारने की दिशा में कदम उठाए। मोदी और कार्नी के बीच मौजूदा बातचीत इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग और प्रस्तावित उच्चस्तरीय यात्रा पर होने वाली प्रगति से यह तय होगा कि दोनों देश अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। स्रोत: रॉयटर्स, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

UK defence companies India में investment और co-creation को लेकर उत्सुक, strong IP regime को बताया अहम

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: UK की defence और advanced manufacturing कंपनियां India में investment, joint development और defence technology co-creation के अवसर तलाश रही हैं। UK-India Business Council (UKIBC) के CEO Kishore Jayaraman ने कहा कि India का scale और manufacturing capability British firms को आकर्षित कर रही है, लेकिन defence जैसे strategic sectors में long-term collaboration के लिए मजबूत Intellectual Property (IP) protection regime बेहद जरूरी होगा। Defence co-creation में joint IP होगा अहम Jayaraman के मुताबिक, defence cooperation अब केवल products खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं रह सकता। Future partnerships में technologies को jointly develop करने, local supply chains बनाने और intellectual property को साझा करने की जरूरत होगी। ऐसे model में companies तभी सहज होंगी जब उन्हें IP protection पर भरोसा होगा। India में scale, UK के पास advanced technology UKIBC CEO ने कहा कि India के पास large market, engineering talent और manufacturing scale है, जबकि UK advanced manufacturing, uncrewed systems, AI और defence technologies में मजबूत capabilities रखता है। दोनों देशों की strengths को जोड़कर global supply chains और export-oriented defence products विकसित किए जा सकते हैं। Uncrewed systems और combat engine पर collaboration UK और India के बीच unmanned या uncrewed defence systems पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है। UK में नवंबर में होने वाले defence conclave में Indian और British companies को साथ लाने की योजना है। इसके अलावा Rolls-Royce लंबे समय से India के साथ next-generation combat aircraft engine के co-development को लेकर बातचीत कर रही है। FTA के बाद British firms की दिलचस्पी बढ़ी India-UK trade agreement के operational होने के बाद British businesses की India में investment को लेकर रुचि बढ़ी है। UKIBC के अनुसार defence के साथ space, advanced manufacturing और technology sectors भी उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं जहां UK companies विस्तार देख रही हैं। Local supply chain और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा Strong IP framework के साथ defence technology का co-development India में manufacturing और supply-chain localisation को बढ़ा सकता है। इससे Indian companies को सिर्फ component suppliers बनने के बजाय higher-value design, development और technology ownership में भागीदारी का मौका मिल सकता है। Trust होगा long-term defence partnership की कुंजी Defence projects में technology अक्सर national security और strategic advantage से जुड़ी होती है। इसलिए UK firms के लिए यह जरूरी है कि jointly developed technologies और sensitive IP को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा मिले। Jayaraman ने कहा कि इस trust को लगातार मजबूत करना India-UK defence partnership के विस्तार के लिए अहम होगा। source – ThePrint, UK-India Business Council जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

Air Marshal Ashutosh Dixit नए IAF Chief नियुक्त, 31 अक्टूबर को संभालेंगे पदभार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने Air Marshal Ashutosh Dixit को Indian Air Force का अगला Chief of the Air Staff नियुक्त किया है। वे 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर से Air Chief Marshal के rank में पदभार संभालेंगे। वर्तमान Air Chief Marshal Amar Preet Singh उसी दिन सेवा से सेवानिवृत्त होंगे। IAF के 29वें Chief होंगे Ashutosh Dixit सरकार के आधिकारिक आदेश के मुताबिक Ashutosh Dixit Indian Air Force के 29वें Chief of the Air Staff होंगे। वर्तमान में वह Vice Chief of the Air Staff के पद पर कार्यरत हैं। 31 अक्टूबर से संभालेंगे कमान उनकी नियुक्ति 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर से प्रभावी होगी। उसी दिन Air Chief Marshal Amar Preet Singh अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और सेवा से सेवानिवृत्त होंगे। 1986 में IAF में हुए थे commissioned Ashutosh Dixit को 6 दिसंबर 1986 को Indian Air Force की fighter stream में commissioned किया गया था। करीब चार दशक लंबे career में उन्होंने operational, training और strategic command से जुड़े कई अहम पद संभाले हैं। 3,500 घंटे से ज्यादा की flying Dixit एक experienced fighter pilot और experimental test pilot हैं। उन्होंने Mirage-2000, Jaguar, MiG variants, Tejas, Hawk, Kiran, An-32 और IL-78 समेत कई aircraft उड़ाए हैं और उनके पास 3,500 घंटे से ज्यादा की flying experience है। Mirage-2000 और Tejas से रहा खास जुड़ाव उनका career Mirage-2000 और indigenous Light Combat Aircraft Tejas से भी गहराई से जुड़ा रहा है। उन्होंने Mirage-2000 squadron की re-equipment process संभाली और France से नए aircraft की acceptance flights और ferrying में भी भूमिका निभाई। Operation Safed Sagar से Operation Sindoor तक अनुभव Ashutosh Dixit कई अहम military operations और exercises से जुड़े रहे हैं। इनमें Operation Safed Sagar, Operation Rakshak, Cope India और Operation Sindoor शामिल हैं। MMRCA trials में निभाई अहम भूमिका उन्होंने Medium Multi-Role Combat Aircraft programme के technical evaluation और field trials में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान छह competing fighter aircraft के radar, electronic warfare systems, weapons और overall performance का evaluation किया गया। Central Air Command भी संभाल चुके हैं Vice Chief बनने से पहले Dixit Air Officer Commanding-in-Chief, Central Air Command रह चुके हैं। इसके अलावा वह Chief of Integrated Defence Staff to the Chairman, Chiefs of Staff Committee के पद पर भी काम कर चुके हैं। Tri-services integration पर किया काम Chief of Integrated Defence Staff के रूप में उन्होंने Army, Navy और Air Force के बीच jointness और integration को मजबूत करने पर काम किया। उनके tenure में कई joint doctrines और operational coordination initiatives आगे बढ़ाए गए। कई military honours से सम्मानित Ashutosh Dixit को उनकी सेवा के लिए कई महत्वपूर्ण military honours मिल चुके हैं। उन्हें Vayu Sena Medal, Vishisht Seva Medal, Ati Vishisht Seva Medal और Param Vishisht Seva Medal से सम्मानित किया जा चुका है। Drones और AI पर रहेगा फोकस The Indian Express के मुताबिक Dixit modern warfare में drones, artificial intelligence और advanced technologies के ज्यादा इस्तेमाल के समर्थक माने जाते हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब IAF indigenous platforms, unmanned systems और network-centric warfare पर अपना focus बढ़ा रही है। IAF modernization के दौर में बड़ी जिम्मेदारी Ashutosh Dixit के सामने fighter squadron strength, indigenous aircraft induction, air defence modernisation और future warfare technologies को आगे बढ़ाने जैसी बड़ी चुनौतियां रहेंगी। उनकी appointment IAF के अगले modernisation phase के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। Source – PIB, The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई में CJP का प्रदर्शन, SIR विवाद फिर केंद्र में

मुंबई: Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने मुंबई में Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित इस प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई, हालांकि मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी। CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा। शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से अपने विरोध अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और आगे गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP की मुख्य मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। ये आरोप CJP और अन्य प्रदर्शनकारी समूहों के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग का इस पर अलग आधिकारिक रुख रहा है। SIR प्रक्रिया को रोकने की भी मांग CJP ने Special Intensive Revision प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई है। संगठन चाहता है कि पिछली मतदाता सूची को बहाल किया जाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। मुंबई पुलिस ने नहीं दी अनुमति मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था, ट्रैफिक और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। इसके बावजूद प्रदर्शन की घोषणा के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई। दादर स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ी प्रदर्शन को देखते हुए दादर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। Railway Protection Force और अन्य स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई ताकि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। दिल्ली में भी हुआ विरोध मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के आसपास भारी सुरक्षा तैनात की गई और पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे कई लोगों को हिरासत में लिया। इससे SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया। विपक्षी दल भी उठा रहे SIR का मुद्दा SIR विवाद केवल CJP तक सीमित नहीं है। INDIA Bloc समेत कई विपक्षी दल और छात्र संगठन भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने अलग-अलग शहरों में विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। दूसरे शहरों में भी आंदोलन की तैयारी CJP ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत कई शहरों में मार्च और प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। संगठन का कहना है कि CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। SIR विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज SIR को लेकर चुनाव आयोग और विरोधी दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपों और कानूनी मांगों की अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं से तय होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / India Today / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

INDIA Bloc की बैठक में विपक्षी एकता पर जोर, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत नेताओं ने आगे की रणनीति पर चर्चा की

नई दिल्ली: SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA Bloc के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में बैठक कर विपक्षी एकता और आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और संयुक्त विरोध कार्यक्रमों पर रहा। दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक INDIA Bloc की इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP(SP), शिवसेना (UBT), RJD, JMM और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर एक साझा राजनीतिक रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करना था। राहुल गांधी और ममता बनर्जी रहे प्रमुख चेहरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बैठक के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। दोनों नेताओं ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी चिंतियां सामने रखीं और विपक्षी दलों के संयुक्त अभियान की जरूरत पर जोर दिया। विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। SIR बना बैठक का मुख्य मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA Bloc के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने pre-SIR electoral rolls बहाल करने और बाहर हुए मतदाताओं के लिए प्रभावी appeal mechanism की मांग भी रखी। Paper Ballot की मांग फिर उठी बैठक में विपक्षी दलों ने EVM की जगह paper ballot से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बैठक में शामिल दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि भारत में EVM की वैधता और उपयोग पर चुनाव आयोग का अलग आधिकारिक रुख रहा है। 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध की रणनीति बैठक के बाद INDIA Bloc ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की। विपक्ष ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रदर्शन, जनसभाएं और मार्च आयोजित करने की योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों का केंद्र SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे रहेंगे। चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी INDIA Bloc के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की भी योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के जरिए विपक्ष अपने सवाल और मांगें सीधे चुनाव आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष की रणनीति आने वाले दिनों में SIR विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की है। CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी चर्चा बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की, जबकि इससे पहले उनके खिलाफ संसदीय कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार विपक्ष इस विकल्प को फिलहाल टाल भी सकता है। विपक्षी एकता दिखाने की कोशिश बैठक को INDIA Bloc के लिए राजनीतिक एकता दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर कई दल साझा मंच पर दिखाई दिए। आगे भी जारी रह सकता है संयुक्त अभियान INDIA Bloc ने संकेत दिया है कि उसका अभियान केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले हफ्तों में विपक्ष अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित कर सकता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

AAP के Donations में 68% गिरावट, BJD ने घोषित किया Zero Contribution

नई दिल्ली: राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग को सौंपे गए 2025-26 के contribution reports में फंडिंग को लेकर बड़े बदलाव सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस वित्त वर्ष में करीब ₹12.09 करोड़ का चंदा घोषित किया, जो पिछले वर्ष के ₹38.10 करोड़ की तुलना में करीब 68% कम है। वहीं बीजू जनता दल (BJD) ने ₹20,000 से अधिक की श्रेणी में कोई contribution घोषित नहीं किया। AAP का चंदा ₹38 करोड़ से घटकर ₹12 करोड़ AAP ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब ₹38.10 करोड़ के donations घोषित किए थे। 2025-26 में यह राशि घटकर लगभग ₹12.09 करोड़ रह गई। यानी एक साल के भीतर पार्टी की घोषित contribution receipts में करीब 68% की गिरावट दर्ज हुई। दो Donors से आए ₹10 करोड़ AAP को मिले कुल contributions में सबसे बड़ा हिस्सा Prudent Electoral Trust और Trident Limited का रहा। दोनों ने पार्टी को ₹5-₹5 करोड़ दिए। इस तरह सिर्फ इन दो donors से AAP को कुल ₹10 करोड़ मिले, जो पार्टी की कुल घोषित राशि का बड़ा हिस्सा है। Trident Limited का नाम चर्चा में Trident Limited की स्थापना पंजाब के कारोबारी राजिंदर गुप्ता ने की थी। गुप्ता पहले AAP से राज्यसभा सदस्य रहे और बाद में BJP में शामिल हो गए। Contribution report के मुताबिक Trident Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 में AAP को ₹5 करोड़ का donation दिया। Ashutosh Ranka ने भी दिया Donation रिपोर्ट में CJP के मौजूदा सह-संयोजक आशुतोष रांका का नाम भी donor के रूप में दर्ज है। AAP के पूर्व प्रवक्ता रहे रांका ने पार्टी को ₹21,100 का contribution दिया था। BJD ने क्यों दिखाया Zero Contribution? ओडिशा की बीजू जनता दल ने 2025-26 की contribution report में ₹20,000 से अधिक का कोई donation घोषित नहीं किया। यहां “zero contribution” का अर्थ यह नहीं है कि पार्टी के पास कोई आय या पैसा नहीं था। Contribution report मुख्य रूप से कानून के तहत रिपोर्ट किए जाने वाले राजनीतिक donations से संबंधित होती है। पिछले साल BJD को मिले थे ₹60 करोड़ 2024-25 में BJD ने करीब ₹60 करोड़ के contributions घोषित किए थे। उस वर्ष Vedanta Limited पार्टी का सबसे बड़ा donor था और उसने करीब ₹25 करोड़ का योगदान दिया था। इसके मुकाबले 2025-26 में reportable contributions का nil होना बड़ा बदलाव है। सत्ता से बाहर होने के बाद पहला पूरा वित्त वर्ष BJD ने ओडिशा में करीब 24 साल तक सरकार चलाई थी, लेकिन 2024 विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। 2025-26 सत्ता से बाहर रहने के बाद पार्टी का पहला पूरा वित्त वर्ष था। हालांकि donation में आई गिरावट के कारण को लेकर contribution report स्वयं कोई निष्कर्ष नहीं देती। TDP को मिले ₹58.25 करोड़ अन्य क्षेत्रीय दलों की बात करें तो Telugu Desam Party (TDP) ने 2025-26 में करीब ₹58.25 करोड़ के contributions घोषित किए। इसमें अकेले Prudent Electoral Trust से करीब ₹45 करोड़ मिले। YSRCP ने घोषित किए ₹24.30 करोड़ आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी YSR Congress Party ने करीब ₹24.30 करोड़ के donations घोषित किए। इसमें सबसे बड़ा ₹10 करोड़ का contribution Chennai स्थित Goodwood Sanctuary Pvt Ltd से आया। LJP (Ram Vilas) को मिले ₹3.23 करोड़ चिराग पासवान की Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने करीब ₹3.23 करोड़ के contributions दर्ज किए। इसमें ₹1 करोड़ Prudent Electoral Trust से मिला, जबकि बाकी राशि विभिन्न कंपनियों और अन्य donors से आई। BJP-Congress की Reports अभी सार्वजनिक नहीं चुनाव आयोग ने अभी तक BJP, Congress और कुछ अन्य राष्ट्रीय दलों की 2025-26 contribution reports सार्वजनिक नहीं की थीं। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सभी प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों की funding की सीधी तुलना फिलहाल पूरी तरह संभव नहीं है। Political Funding के आंकड़ों पर बढ़ी चर्चा AAP के donations में 68% गिरावट और BJD के nil contributions ने राजनीतिक फंडिंग को फिर चर्चा में ला दिया है। ये आंकड़े दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए contribution reports पर आधारित हैं और इन्हें पार्टी की कुल संपत्ति, कुल आय या सभी प्रकार की funding के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। source – Election Commission of India / The Indian Express / Times of India / The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

INS Kolkata–Pakistan Vessel Collision पर India ने Pakistan के आरोप खारिज किए; MEA ने PNS Hunain के Conduct को ‘Unacceptable’ बताया

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: India ने Arabian Sea में Indian Navy के destroyer INS Kolkata और Pakistan Navy के PNS Hunain के बीच हुई collision को लेकर Islamabad के आरोपों को खारिज कर दिया है। Ministry of External Affairs (MEA) ने कहा कि INS Kolkata routine deployment पर था और Pakistani vessel ने समुद्र में “unacceptable and unprofessional manner” में manoeuvre किया, जिसके कारण दोनों ships की टक्कर हुई। 15 September को हुई थी Collision दोनों naval vessels के बीच collision 15 September को North Arabian Sea में हुई थी। India के मुताबिक INS Kolkata international waters में routine deployment पर था, जबकि Pakistan का कहना है कि घटना उसके Exclusive Economic Zone के भीतर SEASPARK-26 naval exercise के दौरान हुई। दोनों देशों ने घटना को लेकर अलग-अलग versions सामने रखे हैं। MEA ने Pakistan के आरोप किए Reject MEA spokesperson Randhir Jaiswal ने कहा कि India ने Pakistan की ओर से लगाए गए allegations और insinuations को पूरी तरह reject किया है। उन्होंने कहा कि PNS Hunain ने dangerous overtaking manoeuvre किया और उसका conduct established maritime practices के अनुरूप नहीं था। 1991 Agreement के उल्लंघन का आरोप India ने आरोप लगाया कि PNS Hunain का manoeuvre April 1991 के India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements के Article 10 का उल्लंघन था। इस provision के मुताबिक दोनों देशों की naval units को समुद्र में एक-दूसरे से कम से कम 3 nautical miles की दूरी बनाए रखनी होती है। MEA ने International Regulations for Preventing Collisions at Sea के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। Pakistan ने India पर लगाया था Aggressive Manoeuvre का आरोप Pakistan ने इससे पहले आरोप लगाया था कि Indian vessel ने उसके naval ship के बेहद करीब aggressive manoeuvres किए, जिसके बाद दोनों vessels के बीच contact हुआ। Islamabad ने इस मुद्दे पर Indian diplomat को बुलाकर protest भी दर्ज कराया था। India ने Pakistan के इस version को खारिज किया है। INS Kolkata को Major Damage नहीं MEA के मुताबिक collision में INS Kolkata को कोई बड़ा structural damage नहीं हुआ और warship समुद्र में operational बनी हुई है। Reports के मुताबिक PNS Hunain को collision के बाद repair के लिए वापस harbour जाना पड़ा, हालांकि damage की extent को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग जानकारी सामने आई है। दोनों देशों ने दर्ज कराया Diplomatic Protest घटना के बाद India और Pakistan दोनों ने diplomatic channels के जरिए एक-दूसरे के सामने protest दर्ज कराया है। India ने Pakistan से कहा है कि उसके military units bilateral agreements और maritime safety protocols का पालन करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। source – Ministry of External Affairs / The Indian Express / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »