प्रमुख खबरें

Strait of Hormuz तनाव के बीच Brent Crude $97 के पार, Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ी

लंदन, 8 सितंबर 2026: Middle East में बढ़ते US-Iran तनाव और Strait of Hormuz से oil shipments में संभावित disruption की चिंता के बीच international crude prices में आज फिर तेजी दर्ज की गई। Global benchmark Brent crude करीब $97.34 प्रति barrel तक पहुंच गया, जबकि US West Texas Intermediate (WTI) लगभग $92.63 प्रति barrel पर कारोबार कर रहा था। लगातार तीसरे दिन Crude Oil में तेजी Oil prices में मंगलवार को लगातार तीसरे session में बढ़त देखने को मिली। Markets में geopolitical risk premium बढ़ा है क्योंकि traders को आशंका है कि Gulf region में सैन्य तनाव और बढ़ने पर crude shipments बाधित हो सकती हैं। Strait of Hormuz में धीमा हुआ Shipping Traffic Kpler data के मुताबिक सोमवार को Strait of Hormuz से केवल 7 commodity vessels गुजरते रिकॉर्ड किए गए, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या 8 थी। हालांकि कुछ ships अपने tracking transponders बंद करके भी गुजर सकती हैं, इसलिए वास्तविक traffic इससे अलग हो सकता है। फिर भी shipping activity में कमजोरी ने market की चिंता बढ़ा दी है। Iran ने Gulf Energy Infrastructure को लेकर दी चेतावनी Iran ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ नए military attacks करता है, तो Gulf region में अमेरिकी energy infrastructure retaliation के दायरे में आ सकता है। हालिया US-Iran military actions और tankers तथा naval assets से जुड़े incidents ने crude market में uncertainty और बढ़ा दी है। Hormuz क्यों है Global Oil Market के लिए इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy transit routes में शामिल है। Persian Gulf के कई बड़े oil exporters अपने crude और petroleum products को international markets तक पहुंचाने के लिए इसी narrow waterway पर निर्भर हैं। इसी वजह से यहां prolonged disruption का असर Asia, Europe और दूसरी प्रमुख economies की energy supply और prices पर पड़ सकता है। Supply घटी, लेकिन Oil अभी $100 से नीचे क्यों? Middle East से crude shipments में बड़ी गिरावट के बावजूद Brent अभी $100 के नीचे है। Reuters analysis के मुताबिक regional crude shipments करीब 18 million barrels per day से घटकर 11 million bpd रह गई हैं, लेकिन कुछ supply अब भी Hormuz से गुजर रही है। इसके अलावा Saudi Arabia और Iraq alternative export routes इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि US, Canada और Guyana जैसे non-OPEC producers की बढ़ती production global shortage का कुछ हिस्सा offset कर रही है। Goldman Sachs ने बढ़ाया Oil Price Forecast Middle East shipping disruptions लंबे समय तक जारी रहने की आशंका के बीच Goldman Sachs ने December 2026 के लिए Brent और WTI forecasts में $5 की बढ़ोतरी की है। Analysts का मानना है कि अगर Hormuz में disruption और geopolitical tension लंबे समय तक बने रहते हैं, तो crude prices elevated रह सकते हैं। $120 तक जाने का भी Risk Scenario Market में extreme upside scenario को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। Reuters के मुताबिक कुछ forecasts में गंभीर और prolonged supply disruption की स्थिति में Brent crude के $120 प्रति barrel तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। हालांकि यह base-case forecast नहीं है और कीमतों की आगे की दिशा military developments और shipping flows पर निर्भर करेगी। भारत पर भी बढ़ सकता है दबाव भारत अपनी crude oil जरूरतों का बड़ा हिस्सा imports से पूरा करता है, इसलिए international oil prices में sustained तेजी import bill, inflation और rupee पर दबाव बढ़ा सकती है। आज Indian markets पर भी rising crude prices का असर देखा गया, जबकि rupee पर oil importers की dollar demand और hedging pressure बढ़ने की संभावना बनी हुई है। अब Hormuz और Iran-US तनाव पर नजर Oil market की अगली दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि Strait of Hormuz में shipping traffic सामान्य होता है या नहीं और US-Iran confrontation आगे कितना बढ़ता है। फिलहाल Brent का $97 के पार पहुंचना दिखाता है कि traders global supply disruption के risk को एक बार फिर गंभीरता से price-in कर रहे हैं। source – Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

अमेरिका-ईरान संबंधों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक चर्चा जारी, संयुक्त राष्ट्र ने शांति बहाली की अपील की

वाशिंगटन / तेहरान / नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में लंबे समय से चला आ रहा भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य गतिरोध, परमाणु कार्यक्रम पर मचे घमासान और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में संपन्न हुए वैश्विक सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठकों में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता अविश्वास पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कूटनीतिक खींचतान का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे दुनिया भर के बाजार सहमे हुए हैं। कूटनीतिक टकराव के 3 सबसे बड़े कारण वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी इस ताजा विवाद के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं, जिन पर वैश्विक मंचों पर बहस जारी है: संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक महाशक्तियों का रुख इस गंभीर होती स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का नया सैन्य टकराव दुनिया के लिए विनाशकारी साबित होगा। वैश्विक कूटनीति: जहाँ एक तरफ यूरोपीय संघ (EU) दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ भारत, चीन और रूस जैसी महाशक्तियां लगातार बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से विवाद सुलझाने पर जोर दे रही हैं। भारत ने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा के लिहाज से शांति बहाली को आवश्यक बताया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा ओपेक (OPEC) देशों के आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह कूटनीतिक गतिरोध सैन्य झड़प में तब्दील होता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया भर के उद्योग जगत की निगाहें अब आने वाले दिनों में होने वाली अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर टिकी हैं, जिससे इस संकट का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। Source: Reuters Original report: Reuters – Global powers hold talks over West Asia security and US-Iran ties Publication: jairashtranews

आगे और पढ़ें
Translate »