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Ram Rahim फिर जेल से बाहर; 21 दिन की Furlough पर सुबह 6:05 बजे रिहा, 17वीं बार मिली Temporary Release

रोहतक/सिरसा: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया। उसे 21 दिन की furlough दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह सुबह करीब 6:05 बजे जेल से निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। ताजा अस्थायी रिहाई के साथ, 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद राम रहीम की यह 17वीं parole या furlough release है। वह दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में 20 साल की सजा काट रहा है। सुबह 6:05 बजे Sunaria Jail से निकला आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर राम रहीम रोहतक की high-security Sunaria Jail से बाहर निकला। इसके बाद वह वाहनों के काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। जेल से निकलने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार इस बार उसे furlough की अवधि के दौरान Sirsa headquarters में रहने की अनुमति दी गई है। हाल की उसकी temporary releases में भी उसे सिरसा जाने की अनुमति दी गई थी। 17वीं बार जेल से बाहर राम रहीम को अक्टूबर 2020 से अगस्त 2026 तक parole और furlough मिलाकर 17 बार अस्थायी रूप से जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। इन releases की अवधि अलग-अलग मौकों पर एक दिन से लेकर 50 दिन तक रही है। इस वजह से उसकी बार-बार होने वाली temporary release लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय बनती रही है। हालांकि parole या furlough का अर्थ सजा खत्म होना या दोषसिद्धि रद्द होना नहीं होता। तय अवधि पूरी होने के बाद कैदी को जेल लौटना होता है और प्रत्येक release सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी तथा निर्धारित शर्तों के अधीन होती है। 2026 में तीसरी बार Temporary Release राम रहीम को इस साल 2026 में ही तीसरी बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। जनवरी 2026 में उसे 40 दिन की parole मिली थी। इसके बाद मई में वह 30 दिन की parole पर बाहर आया। वह 26 जून को वापस Sunaria Jail लौटा था। अब करीब दो महीने बाद उसे 21 दिन की furlough मिली है। यानी 2026 में अब तक: मिल चुकी है। Parole और Furlough में क्या अंतर? राम रहीम की रिहाई को लेकर अलग-अलग शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में कहीं parole और कहीं furlough शब्द इस्तेमाल किया गया है। नवीनतम रिपोर्ट्स इसे 21 दिन की furlough बता रही हैं। Parole आमतौर पर किसी विशेष परिस्थिति या जरूरत के आधार पर दी जाने वाली temporary release होती है, जबकि furlough लंबे समय से सजा काट रहे पात्र कैदी को नियमों के तहत निश्चित अवधि की छुट्टी के रूप में मिल सकती है। Haryana prison rules के तहत पात्र कैदियों के लिए parole और furlough की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं और दोनों के लिए सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। किस मामले में जेल में है Ram Rahim? गुरमीत राम रहीम को 2017 में Panchkula की विशेष CBI अदालत ने दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे प्रत्येक मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं लगातार चलने के कारण कुल अवधि 20 वर्ष है। वह अगस्त 2017 से जेल में सजा काट रहा है। उसकी दोषसिद्धि के बाद पंचकूला और हरियाणा के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा भी हुई थी। Murder Cases में क्या स्थिति है? राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह से जुड़े हत्या मामलों में भी निचली अदालत से दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में Punjab and Haryana High Court ने उसे इन दोनों मामलों में अलग-अलग फैसलों में बरी कर दिया। मौजूदा समय में वह मुख्य रूप से दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में मिली 20 साल की सजा काट रहा है। इसलिए खबर में उसे murder cases में वर्तमान दोषी बताना सही नहीं होगा। बार-बार Parole-Furlough पर उठते रहे सवाल राम रहीम को लगातार मिलती अस्थायी रिहाई पहले भी राजनीतिक विवाद पैदा करती रही है। विशेष रूप से कुछ releases के चुनावों या डेरा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के आसपास होने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि Haryana government और prison authorities का रुख रहा है कि उसे मिलने वाली राहत जेल नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जाती है। किसी कैदी को parole या furlough मिलना अपने आप में असाधारण रूप से स्थायी कानूनी राहत नहीं है और उसे तय शर्तों का पालन करना होता है। इस बार Sirsa Dera में रहेगा Ram Rahim ताजा furlough की खास बात यह है कि राम रहीम को सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda headquarters जाने की अनुमति दी गई है। पहले उसकी कई temporary releases के दौरान उसे उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित Barnawa Ashram में रहने की अनुमति दी जाती थी। लेकिन हाल की releases में वह सिरसा headquarters भी जा चुका है। सिरसा डेरा उसके संगठन का मुख्य केंद्र है और बड़ी संख्या में अनुयायी इससे जुड़े हैं। Furlough खत्म होने पर लौटना होगा जेल 21 दिन की furlough पूरी होने के बाद राम रहीम को दोबारा Sunaria Jail लौटना होगा, जब तक कि किसी अन्य वैधानिक आदेश से स्थिति में बदलाव न हो। Furlough उसकी मूल सजा को खत्म नहीं करती और न ही बलात्कार के मामलों में उसकी conviction पर कोई असर डालती है। फिलहाल 25 अगस्त 2026 की सबसे बड़ी ताजा अपडेट यही है कि गुरमीत राम रहीम सुबह 6:05 बजे के आसपास जेल से बाहर आया है और यह उसकी अब तक की 17वीं temporary release है। स्रोत – आजतक, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की समिति ने जनता से मांगे सुझाव, 21 दिन में भेज सकेंगे अपनी राय

नई दिल्ली: अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने आम जनता, पर्यावरण विशेषज्ञों, किसानों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। समिति ने इन सुझावों को भेजने के लिए 21 दिनों का समय दिया है। यह पहल अरावली क्षेत्र के संरक्षण और भविष्य की नीति तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष अरावली पर्वतमाला से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को 31 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है। इसके लिए अब आम नागरिकों और संबंधित पक्षों की राय भी शामिल की जाएगी। कौन दे सकता है सुझाव? समिति ने निम्नलिखित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं— समिति ने कहा है कि सुझावों के साथ यदि संभव हो तो दस्तावेज़ी साक्ष्य या अन्य सत्यापन योग्य सामग्री भी भेजी जाए। अरावली संरक्षण क्यों है महत्वपूर्ण? अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है और उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अरावली— समिति की रिपोर्ट पर रहेगी नजर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति सभी प्राप्त सुझावों और उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों का अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में अरावली क्षेत्र के संरक्षण, खनन गतिविधियों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। निष्कर्ष अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 21 दिनों तक चलने वाली सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के जरिए आम नागरिकों और विशेषज्ञों की राय को भी अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे भविष्य की नीतियों को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाया जा सके। Source: Supreme Court of India | Ministry of Environment, Forest and Climate Change (PIB) | PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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