नई दिल्ली: अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने आम जनता, पर्यावरण विशेषज्ञों, किसानों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। समिति ने इन सुझावों को भेजने के लिए 21 दिनों का समय दिया है। यह पहल अरावली क्षेत्र के संरक्षण और भविष्य की नीति तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष अरावली पर्वतमाला से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को 31 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है। इसके लिए अब आम नागरिकों और संबंधित पक्षों की राय भी शामिल की जाएगी।
कौन दे सकता है सुझाव?
समिति ने निम्नलिखित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं—
- पर्यावरण विशेषज्ञ और संरक्षणवादी
- गैर-सरकारी संगठन (NGOs)
- किसान और ग्रामीण समुदाय
- खनन पट्टा धारक
- परियोजना संचालक
- स्थानीय निवासी
- दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात तथा अन्य संबंधित राज्यों के हितधारक
समिति ने कहा है कि सुझावों के साथ यदि संभव हो तो दस्तावेज़ी साक्ष्य या अन्य सत्यापन योग्य सामग्री भी भेजी जाए।
अरावली संरक्षण क्यों है महत्वपूर्ण?
अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है और उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अरावली—
- रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में मदद करती है।
- भूजल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- जैव विविधता का प्रमुख केंद्र है।
- दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण में भी योगदान देती है।
समिति की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति सभी प्राप्त सुझावों और उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों का अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में अरावली क्षेत्र के संरक्षण, खनन गतिविधियों और पर्यावरणीय नियमों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 21 दिनों तक चलने वाली सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के जरिए आम नागरिकों और विशेषज्ञों की राय को भी अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे भविष्य की नीतियों को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाया जा सके।
Source:
Supreme Court of India | Ministry of Environment, Forest and Climate Change (PIB) | PTI
जय राष्ट्र न्यूज़






