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SIR विवाद पर INDIA गठबंधन का बड़ा ऐलान, 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन; 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे। 2 अक्टूबर से शुरू होगा देशव्यापी अभियान INDIA गठबंधन ने तय किया है कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे और विपक्षी दल SIR प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के हालिया फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां जनता के बीच ले जाएंगे। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च आंदोलन के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक 6 अक्टूबर को दिल्ली में होगा। INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आयोग के सामने उठाएंगे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। SIR को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल INDIA गठबंधन का आरोप है कि Special Intensive Revision की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने हाल में सामने आई उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। INDIA गठबंधन ने रखीं छह प्रमुख मांगें बैठक के बाद विपक्षी दलों ने छह प्रमुख मांगों और आगे की राजनीतिक रणनीति की घोषणा की। इनमें SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग, चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की योजना भी शामिल है। राष्ट्रपति से मिलने की भी तैयारी INDIA गठबंधन के नेताओं ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगने की बात कही है। विपक्षी नेता चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना बना रहे हैं। राहुल गांधी ने विपक्षी एकता पर दिया जोर बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता मिलकर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने विपक्ष की इस लड़ाई को किसी एक नेता या दल के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। यह विपक्ष का राजनीतिक पक्ष है और इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं तथा सत्तारूढ़ पक्ष की अलग प्रतिक्रिया रही है। ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर साधा निशाना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। BJP ने विपक्ष के अभियान पर किया पलटवार INDIA गठबंधन की घोषणा के बाद BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और आंदोलन को राजनीतिक बताया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के ‘Save Democracy’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए इसे राजनीतिक परिवारों को बचाने की कोशिश बताया। यह BJP का राजनीतिक जवाब है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा आंदोलन बता रहा है। अक्टूबर-नवंबर में बड़ी रैलियों की भी योजना INDIA गठबंधन सिर्फ एक सप्ताह के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष ने अक्टूबर और नवंबर में अलग-अलग स्थानों पर बड़ी रैलियां आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची, SIR और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे कथित ‘vote chori’ के आरोप प्रमुख मुद्दे रहेंगे। SIR विवाद पर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर के चुनाव आयोग मार्च के चलते SIR विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं तथा अदालतों की प्रक्रिया से तय होगी। source – Reuters / India Today / The Statesman / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Tamil Nadu Alliance पर Congress की Red Line—Rahul Gandhi ही PM Face, Vijay को लेकर अटकलों के बीच बड़ा बयान

चेन्नई, 7 सितंबर 2026: Tamil Nadu की सत्तारूढ़ गठबंधन राजनीति में 2029 के Prime Minister face को लेकर नई बहस तेज हो गई है। Congress ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले Lok Sabha चुनाव में Rahul Gandhi ही पार्टी और विपक्षी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के कुछ नेता मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। K.C. Venugopal ने साफ किया Congress का रुख Congress General Secretary K.C. Venugopal ने कहा कि Rahul Gandhi 2029 में INDIA bloc का नेतृत्व करेंगे। Vijay को PM candidate के रूप में पेश किए जाने से जुड़ी चर्चाओं को उन्होंने Congress के आधिकारिक रुख से अलग बताया। Manickam Tagore ने भी दोहराई Rahul Gandhi की दावेदारी Tamil Nadu Congress President Manickam Tagore ने भी कहा कि Rahul Gandhi ही Congress के Prime Ministerial candidate हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर alliance arrangements और national leadership के सवाल को आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए। TVK में उठ रही ‘Vijay for PM’ की मांग TVK के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने Vijay को 2029 के लिए संभावित PM candidate के रूप में project करना शुरू किया है। इसी वजह से Congress और TVK के बीच national leadership को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हुई है। हालांकि Vijay की ओर से इस पर कोई formal PM candidature announcement नहीं की गई है। 9 सितंबर की Alliance Meeting अहम Vijay ने 9 सितंबर को alliance partners की बैठक बुलाई है। इस meeting में गठबंधन के formal नाम और Common Minimum Programme पर चर्चा होने की उम्मीद है। Congress ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। Left Parties ने बनाई दूरी Reports के मुताबिक CPI और CPI(M) ने इस बैठक में शामिल होने को लेकर दूरी बनाई है। इससे alliance के अंदर आगे की राजनीतिक दिशा और 2029 की national strategy पर नए सवाल खड़े हुए हैं। Congress के लिए Rahul Gandhi पर कोई समझौता नहीं Congress का संदेश साफ है कि Tamil Nadu में Vijay के साथ सत्ता साझेदारी होने के बावजूद national level पर party Rahul Gandhi की leadership से पीछे नहीं हटेगी। इसी वजह से इसे Congress की political “red line” के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल Alliance टूटने के संकेत नहीं मतभेद के बावजूद फिलहाल Congress ने TVK-led सरकार या alliance से अलग होने का कोई संकेत नहीं दिया है। दोनों पक्ष 9 सितंबर की meeting से पहले बातचीत जारी रखे हुए हैं। इसलिए मौजूदा विवाद को alliance breakdown की बजाय leadership positioning के रूप में देखना ज्यादा सही होगा। source – The Indian Express / Economic Timesजय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल विपक्षी दलों के नेता

INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक, सामने आया नया 5-सूत्रीय प्लान

विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति, जनहित के मुद्दों और संसद के भीतर तथा बाहर विपक्ष की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक के बाद गठबंधन के नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले समय में वे पांच प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रणनीति के साथ जनता के बीच जाएंगे। बैठक में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और देश के मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक हालात पर विचार-विमर्श किया। गठबंधन का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाना और साझा मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाना बताया गया। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। नेताओं ने माना कि आम जनता से जुड़े इन मुद्दों को लेकर व्यापक संवाद की आवश्यकता है। बैठक में यह भी विचार किया गया कि विभिन्न राज्यों में गठबंधन की रणनीति को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कैसे मजबूत किया जाए। कई नेताओं ने जमीनी स्तर पर संगठनात्मक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। क्या है 5-सूत्रीय प्लान? गठबंधन की चर्चा से जो प्रमुख बिंदु सामने आए, उनमें निम्नलिखित मुद्दों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है: हालांकि गठबंधन की ओर से विस्तृत आधिकारिक दस्तावेज जारी होने की प्रतीक्षा की जा रही है, लेकिन इन मुद्दों को आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों का आधार माना जा रहा है। गठबंधन की पृष्ठभूमि INDIA गठबंधन का गठन विभिन्न विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से किया गया था। समय-समय पर गठबंधन की बैठकों में चुनावी रणनीति, संसद में समन्वय और जनहित के मुद्दों पर साझा रुख तय करने की कोशिश की जाती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल गठबंधन की प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है। हालांकि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के कारण चुनौतियां भी बनी हुई हैं। जनता पर क्या असर पड़ सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गठबंधन अपने घोषित मुद्दों पर लगातार अभियान चलाता है, तो महंगाई, रोजगार और किसानों से जुड़े सवाल राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में अधिक प्रमुखता से उभर सकते हैं। इसके अलावा विपक्षी दलों की एकजुटता संसद और अन्य लोकतांत्रिक मंचों पर भी प्रभाव डाल सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि गठबंधन अपने एजेंडे को कितनी प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा पाता है।

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