प्रमुख खबरें

भारत में नई Telecom पाबंदी की तैयारी! 9 से ज्यादा SIM रखने वालों को नहीं मिलेगा नया कनेक्शन

नई दिल्ली: भारत में मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सरकार ने नियमों के पालन को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि 24 अगस्त 2026 से उन ग्राहकों को नया SIM कनेक्शन जारी न किया जाए, जिनके नाम पर पहले से 9 मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। यह कदम फर्जी SIM, डिजिटल फ्रॉड और मोबाइल कनेक्शनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया जा रहा है। 9 SIM की सीमा होगी लागू DoT के निर्देश के मुताबिक सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन की सीमा है। यदि किसी ग्राहक के नाम पर पहले से 9 SIM हैं और वह 10वां कनेक्शन लेने की कोशिश करता है, तो टेलीकॉम कंपनी को नया कनेक्शन देने से इनकार करना होगा। यह सीमा अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग नहीं है। यानी Jio, Airtel, Vi या BSNL जैसे अलग-अलग ऑपरेटरों के कनेक्शन भी ग्राहक की कुल सीमा में शामिल होंगे। J&K और North-East में सिर्फ 6 SIM जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ लाइसेंस्ड सर्विस एरिया में यह सीमा और कम है। वहां एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 6 मोबाइल कनेक्शन की अनुमति है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शनों को लेकर सुरक्षा कारणों से पहले से ज्यादा सख्त व्यवस्था लागू है। 24 अगस्त से टेलीकॉम कंपनियां करेंगी सख्ती DoT के 17 अगस्त के सर्कुलर के अनुसार, 24 अगस्त से टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होंगे, ताकि 9 कनेक्शन की सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों की पहचान की जा सके और उन्हें नया नंबर लेने से रोका जा सके। ग्राहक को यह भी बताया जाएगा कि उसके नाम पर पहले ही अधिकतम अनुमत मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। Digital Intelligence Platform से होगी पहचान इस नियम को लागू करने के लिए DoT के Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए subscriber data के आधार पर प्लेटफॉर्म उन लोगों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनके नाम पर निर्धारित सीमा तक SIM पहले से मौजूद हैं। 23 अगस्त से निर्धारित सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की representative photograph भी DIP पर उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है, ताकि उनकी पहचान में मदद मिल सके। अगर आपके नाम पर 9 से ज्यादा SIM हैं तो? जिन लोगों के नाम पर पहले से निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, उनके लिए भी व्यवस्था सख्त की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार अतिरिक्त कनेक्शनों में बाद में लिए गए नंबरों को पहले बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसलिए लोगों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते जांच करें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। सरकार का मकसद क्या है? DoT की यह कार्रवाई मुख्य रूप से फर्जी पहचान, SIM के दुरुपयोग, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड को रोकने की दिशा में है। सरकार चाहती है कि एक पहचान पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न किया जा सके। नई व्यवस्था से अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों में मौजूद कनेक्शनों को एक साथ ट्रैक करना भी आसान होगा। आम मोबाइल यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं ज्यादातर सामान्य मोबाइल यूजर्स के लिए इस नियम का सीधा असर नहीं पड़ेगा। समस्या मुख्य रूप से उन ग्राहकों के सामने आएगी जिनके नाम पर पहले से 9 या उससे अधिक मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पुराने या इस्तेमाल में न आने वाले नंबर बंद नहीं कराए हैं, तो अपने नाम पर सक्रिय कनेक्शनों की जानकारी जांचना उपयोगी रहेगा। 30 नवंबर तक सिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को इस व्यवस्था से जुड़े सिस्टम और प्रक्रियाओं को 30 नवंबर 2026 तक व्यवस्थित करने का समय दिया है। इस दौरान DIP के जरिए पहचान और verification व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस नए कदम से भारत में SIM कार्ड की निगरानी और subscriber verification व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त होने जा रही है। स्रोत: Department of Telecommunications, PTI, NDTV, India Today, ThePrint Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

22 भारतीयों वाले दो जहाज हाईजैक! यमन और सोमालिया के पास समुद्री डकैती से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़ी समुद्री सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को बड़ी चिंता सामने आई। यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में दो कमर्शियल जहाजों को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक कर लिया। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल दोनों जहाजों के भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। Gulf of Aden में 16 भारतीयों वाला टैंकर हाईजैक पहली घटना 20 अगस्त को Gulf of Aden में हुई। Eritrea-flagged oil products tanker MT Sibu 1 को यमन के तट से करीब 30 nautical miles दूर हथियारबंद समुद्री डाकुओं ने अपने कब्जे में ले लिया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाकी क्रू में एक-एक Syrian, Sudanese और Iraqi नागरिक थे, जबकि एक सदस्य की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार करीब छह हथियारबंद समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उन्होंने उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। Somalia के Puntland तट पर दूसरा जहाज कब्जे में दूसरी घटना 17 अगस्त को Somalia के Puntland तट के पास हुई। Cameroon-flagged cargo vessel M/V LUTUF को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया। इस जहाज पर कुल 10 क्रू सदस्य थे, जिनमें 6 भारतीय नागरिक शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हथियारबंद हमलावर दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उस पर कब्जा कर लिया। इस तरह दोनों घटनाओं को मिलाकर 22 भारतीय नागरिक समुद्री डकैती की घटनाओं से प्रभावित जहाजों पर मौजूद थे। भारतीय क्रू की सुरक्षा पर क्या अपडेट? भारतीय अधिकारियों की शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों जहाजों पर मौजूद भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हालांकि, जहाजों की मौजूदा स्थिति और आगे की घटनाक्रम पर भारतीय अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। MT Sibu 1 मामले में संबंधित Recruitment and Placement Service Licence एजेंसी को घटना की रिपोर्ट और आगे के अपडेट e-Navik online marine casualty reporting system के जरिए जमा करने को कहा गया है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार दो अलग-अलग घटनाओं ने Horn of Africa और Gulf of Aden में commercial shipping की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां से Red Sea तथा Suez Canal की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग जुड़े हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में piracy के साथ-साथ क्षेत्रीय संघर्ष और जहाजों पर हमलों का खतरा भी बना हुआ है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापारिक देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक international merchant vessels पर काम करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय seafarers की सुरक्षा पर पड़ सकता है। भारतीय नौसेना पहले भी Gulf of Aden और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में commercial shipping की सुरक्षा तथा संकट में फंसे भारतीयों की मदद के लिए अभियान चला चुकी है। दो घटनाओं ने बढ़ाई चिंता एक ही सप्ताह में Somalia और Yemen के पास दो जहाजों का हाईजैक होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में piracy का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर भारतीय क्रू सदस्यों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। आगे भारतीय अधिकारियों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। स्रोत: PTI, Hindustan Times, Business Standard, The Statesman Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

UN में भारत का बड़ा बयान! Terror Listings में राजनीतिक दखल के खिलाफ उठाई आवाज

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और terror listings की प्रक्रिया को लेकर भारत ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। भारत ने UNSC से अपील की कि आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी देश को परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए नहीं करना चाहिए। आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने पर भारत की आपत्ति भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि UNSC की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी को “legitimise” करने या उसे राजनीतिक कारणों से संरक्षण देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों और आतंकवाद से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक व्यवस्था में objectivity और transparency को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। Terror Listing प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को UNSC sanctions lists में शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और तथ्य आधारित होनी चाहिए। इसी तरह किसी नाम को सूची से हटाने का फैसला भी राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। UN Security Council के तहत आतंकवाद और counter-terrorism से संबंधित कई sanctions regimes पहले से लागू हैं। पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना? भारत के बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, ताजा बयान में भारत ने किसी एक देश का नाम लेकर आरोप लगाने के बजाय UN sanctions mechanism को मजबूत करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने पर जोर दिया। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा आतंकवादी संगठनों की listing और delisting में राजनीतिक या धार्मिक आधार पर दोहरे मानदंडों के खिलाफ भारत पहले भी आवाज उठाता रहा है। भारत ने UN में यह रुख रखा है कि ऐसी प्रक्रिया objective होनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी तरह का double standard नहीं होना चाहिए। भारत ने UNSC 1267 sanctions regime के तहत आतंकवादियों की listing को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। संसद की विदेश मामलों की समिति के अनुसार, भारत ने कई आतंकवादियों को सूचीबद्ध कराने के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं। UNSC में सुधार की मांग भी तेज भारत का यह बयान व्यापक UN Security Council reforms की उसकी मांग से भी जुड़ा है। नई दिल्ली लंबे समय से UNSC को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग करती रही है। भारत का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या अन्य आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। आज के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि UNSC की sanctions प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाया जा सकता है और क्या सदस्य देश राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपना पाएंगे। स्रोत: United Nations, Moneycontrol, Times of India, Indian diplomatic statements Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान! J&K को बताया ‘भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा’, पाकिस्तान ने जताई कड़ी आपत्ति

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पहली बार जम्मू-कश्मीर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में सुधार की सराहना की और कहा कि केंद्र तथा जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा बेहतर करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गोर ने जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता की भी तारीफ की और संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र को लेकर अपनी मौजूदा ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है, ताकि अधिक अमेरिकी पर्यटक यहां आ सकें। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब अमेरिकी राजदूत के बयान पर पाकिस्तान ने कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर को तलब कर विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने वाली टिप्पणी को खारिज करते हुए इसे “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया। इस्लामाबाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अंतिम स्थिति को लेकर उसका अपना दावा है और उसने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को स्वीकार करने से इनकार किया है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है बयान? सर्जियो गोर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संवेदनशील कूटनीतिक संबंधों को संभाल रहा है। जम्मू-कश्मीर लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है। हालांकि, एक राजदूत की टिप्पणी को पूरी अमेरिकी विदेश नीति में औपचारिक बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में गोर के बयान और ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा की बात सामने आई है। कश्मीर में पर्यटन को लेकर भी बड़ा संकेत गोर ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए अमेरिकी यात्रा चेतावनी को कम करने की संभावना जताई। यदि भविष्य में एडवाइजरी का स्तर बदला जाता है, तो इससे जम्मू-कश्मीर में विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा सकती है। पाकिस्तान की आपत्ति से बढ़ी कूटनीतिक हलचल अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी और पाकिस्तान के विरोध ने जम्मू-कश्मीर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताया जाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इस स्थिति को स्वीकार नहीं करता। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी राजदूत ने श्रीनगर में J&K को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया और इसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया। स्रोत: Indian Express, Hindustan Times, Reuters/BDNews24, Anadolu, Economic Times Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

PM CARES Fund: ₹8,452 करोड़ का फंड, FY25 में खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख!

नई दिल्ली: PM CARES Fund एक बार फिर चर्चा में है। ताजा ऑडिट स्टेटमेंट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इससे सिर्फ ₹87.85 लाख के भुगतान दर्ज हुए। आंकड़े सामने आने के बाद फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 93% रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में ऑडिट आंकड़ों के अनुसार फंड की करीब ₹7,846.65 करोड़ राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में थी, जबकि लगभग ₹605.41 करोड़ सेविंग बैंक खातों में रखे गए थे। यानी कुल बैलेंस का लगभग 93% हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में था। FY2024-25 में फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब ₹469.38 करोड़ ब्याज भी मिला। ब्याज आय फंड की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की प्रमुख वजहों में शामिल रही। ₹87.85 लाख में ज्यादातर रकम बच्चों की योजना पर वित्त वर्ष 2024-25 में PM CARES से कुल ₹87.85 लाख का भुगतान हुआ। इसमें लगभग पूरी राशि यानी ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के तहत खर्च हुई। पिछले वित्त वर्ष में कुल भुगतान करीब ₹15.6 करोड़ था। ₹8,452 करोड़ के क्लोजिंग बैलेंस की तुलना में FY25 का यह भुगतान करीब 0.01% है। हालांकि, यह सिर्फ एक वित्त वर्ष के भुगतान और उस वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस की तुलना है; इसे फंड की स्थापना से अब तक के कुल खर्च का प्रतिशत नहीं माना जाना चाहिए। फंड का बैलेंस एक साल में बढ़ा PM CARES का बैलेंस FY2023-24 में करीब ₹7,173 करोड़ था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर ₹8,452 करोड़ से ज्यादा हो गया। इसी अवधि में घरेलू स्वैच्छिक योगदान करीब ₹479 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह करीब ₹682 करोड़ था। बैलेंस बढ़ने में ब्याज आय और अन्य वित्तीय मदों की भी अहम भूमिका रही। खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज ताजा आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष और अन्य आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े फंड के मुकाबले FY25 में खर्च इतनी कम क्यों रही। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ₹87.85 लाख के खर्च और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी बड़ी राशि को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, फंड के समर्थक पक्ष से यह तर्क सामने आया है कि PM CARES का उद्देश्य आपात स्थितियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध रखना है और किसी एक वित्त वर्ष में कम खर्च होना अपने आप में वित्तीय अनियमितता साबित नहीं करता। PM CARES Fund क्या है? Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations (PM CARES) Fund की स्थापना मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी। यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में काम करता है और इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता प्रदान करना है। ताजा ऑडिट आंकड़ों ने एक बार फिर फंड के बड़े कॉर्पस, कम वार्षिक भुगतान और निवेश पैटर्न को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Statement, India Today, PTI, Tribune India Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

नागालैंड के नन्हे रॉकस्टार ‘याटो’ ने जीता देशवासियों का दिल, राष्ट्रगान की आवाज ने मचाई धूम

नई दिल्ली: नागालैंड के महज 5 साल के याटो वांगनाओ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका ‘जन गण मन’ गाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे सुनकर देशभर के लोग उनकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की जमकर तारीफ कर रहे हैं। याटो के राष्ट्रगान ने मचाई धूम याटो का राष्ट्रगान गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। छोटी सी उम्र में जिस आत्मविश्वास और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया, उसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास तौर पर राष्ट्रगान के अंतिम हिस्से ‘जय हे’ को जिस अंदाज में याटो ने गाया, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने वीडियो को बार-बार देखने और सुनने की बात कही। आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित याटो की प्रतिभा से प्रभावित होकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने याटो की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए नागालैंड की खूबसूरती और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। महिंद्रा ने याटो के वीडियो को नागालैंड के लिए एक तरह का अनौपचारिक टूरिज्म प्रमोशन बताते हुए कहा कि इस छोटे बच्चे ने जिस तरह लोगों का ध्यान नागालैंड की ओर खींचा, वह बेहद खास है। छोटी उम्र, बड़ा आत्मविश्वास याटो की सबसे खास बात उनकी उम्र के मुकाबले उनका आत्मविश्वास है। महज पांच साल की उम्र में राष्ट्रगान को इस तरह पूरे जोश और भाव के साथ प्रस्तुत करना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आया। उनके वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी प्रतिभाएं किस तरह सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत तक पहुंच सकती हैं। नागालैंड की संस्कृति भी चर्चा में याटो की वायरल प्रस्तुति के साथ नागालैंड भी चर्चा में आ गया है। पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने नागालैंड को अपनी Travel Bucket List में शामिल करने की बात कही। सोशल मीडिया पर मिल रहा प्यार याटो के वीडियो पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग उनकी आवाज, मासूमियत और देशभक्ति की भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने याटो को भविष्य का बड़ा कलाकार बताते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की अपील भी की है। निष्कर्ष नागालैंड के 5 वर्षीय याटो वांगनाओ ने अपनी प्यारी आवाज और जोशीले अंदाज में राष्ट्रगान गाकर देशवासियों का दिल जीत लिया है। उनका वायरल वीडियो न सिर्फ उनकी प्रतिभा को सामने ला रहा है, बल्कि नागालैंड की खूबसूरती और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर में चर्चा में ला रहा है। Source: Times of India, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

तारिक रहमान की भारत यात्रा पर बांग्लादेश की शर्त, शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर ढाका का दबाव

नई दिल्ली/ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से पहले दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल बनाने की जरूरत बताई है और इसी संदर्भ में भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। ढाका ने क्या कहा? बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता AKM शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के अधिकारी पिछले कई सप्ताह से तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर संपर्क में हैं। हालांकि, ढाका का कहना है कि यात्रा के लिए एक “अनुकूल माहौल” तैयार किया जाना जरूरी है। बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण संबंधी अपने अनुरोध पर जल्द कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा ढाका ने भारत में मौजूद अन्य कथित फरार आरोपियों को भी सौंपने की मांग की है। शेख हसीना का मुद्दा क्यों बना अहम? शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की और भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। भारत को बांग्लादेश की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध मिल चुका है और भारतीय पक्ष ने कहा है कि मामले की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है। तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा तारिक रहमान की भारत यात्रा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संभावित दौरे को लेकर बातचीत चल रही है और यह यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस दौरे में शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अलावा द्विपक्षीय व्यापार, सीमा प्रबंधन और जल बंटवारे जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक बन चुका है। ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि भारत इस मामले को अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है। तारिक रहमान की संभावित यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन प्रत्यर्पण की मांग ने इस यात्रा को राजनयिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। निष्कर्ष बांग्लादेश ने तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को प्रमुखता से उठा दिया है। ढाका चाहता है कि नई दिल्ली उसके प्रत्यर्पण अनुरोध पर तेजी से कार्रवाई करे और यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो। अब नजर भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच आगामी राजनयिक बातचीत पर है। Source: Reuters, NDTV, Hindustan Times, Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

बिहार के अशोक धाम मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति, कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत; कई घायल

लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के अशोक धाम मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। शुरुआती आधिकारिक जानकारी के अनुसार कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। श्रावण के तीसरे सोमवार पर उमड़ी थी भारी भीड़ बताया जा रहा है कि श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए अशोक धाम मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान मंदिर परिसर में भीड़ अचानक बढ़ गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बैरिकेडिंग टूटने की भी बात सामने आई लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच भीड़ काफी बढ़ गई थी। शुरुआती जानकारी में मंदिर की एक तरफ की बैरिकेडिंग टूटने के बाद कई लोगों के एक-दूसरे पर गिरने की बात सामने आई है। प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि बिजली का खंभा गिरने और करंट लगने की बात सामने आई है, लेकिन घटना की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मंदिर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है और मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका घटना अभी विकासशील स्थिति में है। शुरुआती रिपोर्टों में 6 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में 7 मौतों का भी उल्लेख आया है। इसलिए फिलहाल मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। निष्कर्ष लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में श्रावण सोमवार के दौरान भारी भीड़ के बीच हुई इस त्रासदी ने मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भगदड़ जैसी स्थिति की वास्तविक वजह क्या थी। Source: PTI, The New Indian Express, The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

मंत्री कार्यालय परिसर में BJP का झंडा? वीडियो सामने आने के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली: एक वीडियो सामने आने के बाद मंत्री कार्यालय के परिसर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का झंडा दिखाई देने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो को लेकर यह चर्चा तेज है कि क्या किसी सरकारी मंत्री कार्यालय के परिसर में राजनीतिक दल का झंडा लगाया जाना उचित है। हालांकि, मुझे उपलब्ध विश्वसनीय ताजा रिपोर्टों में इस खास वीडियो, उसके स्थान और संबंधित मंत्री की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे फिलहाल एक वायरल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है? सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक मंत्री कार्यालय के परिसर में BJP का झंडा लगा हुआ दिखाई दे रहा है। इसी दृश्य को लेकर लोगों ने सरकारी कार्यालय और राजनीतिक पार्टी के प्रतीक के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि के बिना यह कहना मुश्किल है कि फुटेज किस कार्यालय, किस तारीख और किस परिस्थिति का है। सरकारी कार्यालय में राजनीतिक झंडे को लेकर क्यों उठे सवाल? सरकारी कार्यालय संवैधानिक और प्रशासनिक कामकाज के लिए होते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी राजनीतिक दल का प्रतीक या झंडा दिखाई देने पर स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ सकता है कि क्या सरकारी परिसर और राजनीतिक गतिविधियों के बीच उचित दूरी बनाए रखी गई है। हालांकि, किसी वीडियो के आधार पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित विभाग या प्रशासन का पक्ष जानना जरूरी है। सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सरकारी कार्यालय के राजनीतिकरण का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग वीडियो के संदर्भ और वास्तविक स्थान की पुष्टि की मांग कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में वीडियो की तारीख, स्थान और मूल स्रोत की पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण होती है। आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार फिलहाल इस मामले में संबंधित मंत्री कार्यालय या प्रशासन की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि वीडियो वास्तव में किस कार्यालय का है और वहां BJP का झंडा किस कारण मौजूद था। इसलिए इस खबर को प्रकाशित करते समय “वीडियो में दावा” और “स्वतंत्र रूप से पुष्टि” के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। निष्कर्ष मंत्री कार्यालय के परिसर में BJP का झंडा दिखाई देने वाले कथित वीडियो ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। हालांकि, वीडियो की जगह, समय और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी। Source: सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो; स्वतंत्र पुष्टि/आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

PM Modi ने Independence Day पर ‘Saptadhara’ Vision पेश किया

नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के विकास की नई दिशा के रूप में ‘शक्ति की सप्तधारा’ (Saptadhara) का विजन सामने रखा। प्रधानमंत्री ने इन सात धाराओं को भारत की आर्थिक ताकत, आत्मनिर्भरता और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला आधार बताया। क्या है ‘शक्ति की सप्तधारा’? प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भारत की विकास यात्रा को सात प्रमुख क्षेत्रों की ताकत से गति मिलेगी। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने देशवासियों से इन सात क्षेत्रों को राष्ट्रीय शक्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में मजबूत करने का आह्वान किया। 1. मैन्युफैक्चरिंग बनेगी विकास की ताकत सप्तधारा की पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग पावर है। PM Modi ने भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल तैयार उत्पादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरी components से लेकर complete products तक देश में निर्माण की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने उद्योगों से cost, quality और scale पर ध्यान देने की अपील की, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें। 2. कृषि और खाद्य उत्पादन पर जोर दूसरी धारा कृषि और food production से जुड़ी है। सरकार का फोकस कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार, खाद्य प्रसंस्करण और value addition से जोड़ने पर रहेगा। इससे कृषि को केवल प्राथमिक उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय एक बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है। 3. Technology और Innovation सप्तधारा की तीसरी और बेहद महत्वपूर्ण धारा Technology Power है। PM Modi ने AI, semiconductor, data centres और emerging technologies में भारत की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को नई तकनीकों के साथ जोड़ने और भारत को technology-driven economy बनाने की आवश्यकता बताई। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस भाषण में अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI training देने की योजना की भी घोषणा की। 4. Gati Shakti और मजबूत Connectivity चौथी धारा Gati Shakti यानी तेज और बेहतर connectivity से संबंधित है। इसका उद्देश्य देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और अन्य infrastructure networks को मजबूत करना है। बेहतर connectivity से माल की आवाजाही की लागत और समय कम करने तथा manufacturing और व्यापार को गति देने में मदद मिल सकती है। 5. Defence Power से आत्मनिर्भर सुरक्षा सप्तधारा की पांचवीं धारा Raksha Shakti यानी Defence Power है। PM Modi ने रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश का defence production करीब चार गुना बढ़ा है। उन्होंने hypersonic technology, drones, counter-drone systems और स्वदेशी air-defence capabilities में प्रगति का भी उल्लेख किया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भारत की रणनीतिक और आर्थिक ताकत से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन और technology development को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। 6. Green और Blue Economy छठी धारा हरित और नीली अर्थव्यवस्था है। Green economy के तहत renewable energy, clean technology और sustainable development को महत्व दिया गया है। वहीं Blue economy में भारत की लंबी coastline, fisheries, coastal tourism और ocean technology जैसी संभावनाओं को आर्थिक विकास के नए स्रोत के रूप में देखा गया है। इसका उद्देश्य विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है। 7. India की Soft Power सप्तधारा की सातवीं धारा भारत की Soft Power है। PM Modi ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं दुनिया में भारत की पहचान और प्रभाव को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने योग, आयुर्वेद और भारत की आध्यात्मिक एवं holistic healthcare traditions को भारत की soft power के प्रमुख उदाहरणों के रूप में पेश किया। भारतीय संस्कृति, पर्यटन, परंपराओं और वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव को आर्थिक एवं रणनीतिक ताकत में बदलना इस धारा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ‘Saptadhara’ का लक्ष्य क्या है? प्रधानमंत्री ने सप्तधारा को Viksit Bharat @2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा। भारत 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। ऐसे में सरकार का लक्ष्य देश को एक विकसित, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। सप्तधारा इसी लक्ष्य के लिए आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने का रोडमैप प्रस्तुत करती है। युवाओं को विकास का केंद्र PM Modi ने अपने Independence Day address में युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया। AI training और competitive examinations के लिए free online coaching जैसे ऐलानों के जरिए सरकार ने युवाओं को भारत की अगली विकास यात्रा का प्रमुख भागीदार बनाने का संदेश दिया। तकनीक, innovation और entrepreneurship में युवाओं की भागीदारी को भारत की future growth के लिए महत्वपूर्ण माना गया। आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत तक सप्तधारा का एक प्रमुख संदेश आत्मनिर्भरता है। Manufacturing और defence से लेकर technology, energy और agriculture तक घरेलू क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य भारत की बाहरी निर्भरता कम करना और वैश्विक बाजार में देश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करना है। प्रधानमंत्री ने इन सात धाराओं को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया, यानी केवल किसी एक क्षेत्र की प्रगति से नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों के साथ-साथ मजबूत होने से भारत की व्यापक शक्ति बढ़ेगी। क्यों महत्वपूर्ण है यह घोषणा? ‘Saptadhara’ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भारत के अगले विकास चरण को केवल GDP growth तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें उद्योग, किसान, technology, infrastructure, national security, sustainability और cultural influence को एक साथ विकास के प्रमुख आधारों के रूप में रखा गया है। यदि इन क्षेत्रों में घोषित लक्ष्यों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे रोजगार, investment, exports, innovation और strategic autonomy को बढ़ावा मिल सकता है। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस 2026 के अपने संबोधन में PM Modi ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के जरिए भारत के भविष्य की सात प्रमुख दिशाएं सामने रखीं। Manufacturing, Agriculture, Technology, Gati Shakti, Defence, Green & Blue Economy और Soft Power — इन सात क्षेत्रों को मजबूत करने का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भरता से आगे ले जाकर ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में आगे बढ़ाना है। आने वाले वर्षों में इस विजन की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर…

आगे और पढ़ें
Translate »