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Putin ने भारत को बताया दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल, Multipolar World में India की बढ़ती भूमिका पर जोर

मॉस्को/नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल बताते हुए बदलती वैश्विक व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका पर जोर दिया है। भारत की आर्थिक ताकत, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती है। रूस लंबे समय से भारत, चीन और अन्य उभरती शक्तियों की भागीदारी वाले बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) की वकालत करता रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वैश्विक निर्णयों में किसी एक शक्ति या पश्चिमी देशों के समूह के बजाय कई प्रमुख देशों की भूमिका को महत्व देना है। भारत को प्रमुख वैश्विक शक्ति क्यों माना जाता है? भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल आबादी, रक्षा क्षमताएं, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसकी वैश्विक अहमियत को मजबूत करती हैं। रूस ने विभिन्न अवसरों पर भारत की स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका की सराहना की है। मोदी-पुतिन संबंधों का भी जिक्र भारत और रूस के संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संवाद महत्वपूर्ण रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में पुतिन ने पहले भी कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं और उनके पास समाधान की दिशा में अच्छे विचार हैं। BRICS में भारत की अहम भूमिका भारत, रूस, चीन और ब्राजील मूल BRIC समूह के संस्थापक सदस्य रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह BRICS बना और बाद में इसका विस्तार भी हुआ। आज BRICS वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत इस समूह में एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी रही है। दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी संवाद और समन्वय करते हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का भी समर्थन किया है। ‘चार प्रमुख शक्तियों’ वाले दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में पुतिन के बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है कि भारत दुनिया की “चार सबसे बड़ी शक्तियों” में शामिल है। हालांकि, इस सटीक शब्दावली की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। इसलिए “चार प्रमुख शक्तियों” वाले कथन को पुतिन का प्रत्यक्ष और सत्यापित उद्धरण मानने से पहले आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट से इसकी पुष्टि करना जरूरी है। Source – The Indian Express, India Today, Carnegie Endowment, BRICS coverage जय राष्ट्र न्यूज़

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Russia-Ukraine शांति प्रयासों में भारत की बड़ी भूमिका क्यों जरूरी—Moscow से Kyiv तक Diplomacy पर नई बहस

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: Russia-Ukraine war को खत्म करने की नई diplomatic कोशिशों के बीच भारत की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi की Vladimir Putin से बातचीत, विदेश मंत्री S. Jaishankar की Kyiv यात्रा और Moscow तथा Kyiv दोनों के साथ लगातार संपर्क ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि क्या भारत दोनों पक्षों के बीच meaningful dialogue आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। Moscow और Kyiv दोनों तक भारत की सीधी पहुंच भारत की सबसे बड़ी diplomatic strength यह है कि उसके Russia और Ukraine दोनों के साथ working relations बने हुए हैं। Jaishankar ने हाल में स्पष्ट कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और ऐसे ideas तलाश रहा है जो conflict को कम करने या अंततः समाप्त करने में मदद कर सकें। Kyiv में उन्होंने President Volodymyr Zelenskyy से मुलाकात कर भारत की ओर से किसी भी उपयोगी भूमिका के लिए तैयार रहने की बात भी कही। Modi ने Putin से कहा—युद्ध को खत्म करने की दिशा में बढ़ना होगा 31 अगस्त को Bishkek में SCO summit के दौरान PM Narendra Modi ने Russian President Vladimir Putin से कहा कि लगातार युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है और दुनिया को hostilities खत्म करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। Modi ने यह भी दोहराया कि भारत हर credible peace effort का समर्थन करेगा। US ने भी फिर तेज की Peace Diplomacy इस समय भारत अकेला देश नहीं है जो diplomatic रास्ता तलाश रहा है। अमेरिकी envoys Steve Witkoff और Jared Kushner ने Moscow में Putin से बातचीत करने के बाद Kyiv जाकर Zelenskyy से मुलाकात की है। US negotiators ने जल्द नई trilateral talks की उम्मीद जताई है, हालांकि अभी तक कोई निर्णायक breakthrough नहीं हुआ है। ऐसे में भारत क्यों हो सकता है अहम? भारत पश्चिमी देशों की तरह Ukraine का military ally नहीं है और Russia के खिलाफ sanctions regime का हिस्सा भी नहीं है। साथ ही New Delhi ने Ukraine की territorial integrity और dialogue-diplomacy की जरूरत पर लगातार जोर दिया है। इसी strategic balance के कारण भारत उन चुनिंदा बड़े देशों में है जो Moscow और Kyiv—दोनों से उच्च स्तर पर बातचीत कर सकता है। सिर्फ Ceasefire नहीं, Confidence-Building Measures भी जरूरी तत्काल comprehensive peace agreement मुश्किल हो सकता है क्योंकि Russia और Ukraine के बीच territory, Donbas और security guarantees जैसे मूल मुद्दों पर अभी बड़ा अंतर है। ऐसे में शुरुआती कदम के तौर पर civilian infrastructure, energy facilities और Black Sea commercial shipping को हमलों से बचाने जैसे confidence-building measures आगे बढ़ाए जा सकते हैं। आज के Indian Express editorial ने भी भारत से ऐसे practical measures के लिए अधिक सक्रिय प्रयास करने की वकालत की है। आगामी BRICS Summit बन सकता है बड़ा मंच भारत के सामने आगामी BRICS summit भी एक diplomatic opportunity हो सकता है। Russia के President Vladimir Putin और China के President Xi Jinping के summit में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में New Delhi ceasefire और confidence-building measures पर broader international consensus तैयार करने की कोशिश कर सकता है। भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं भारत की भूमिका आसान नहीं होगी। Russia और Ukraine अभी भी कई core issues पर दूर हैं। Russia अपनी शर्तों पर settlement चाहता है, जबकि Kyiv territory और security guarantees को लेकर समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। दूसरी ओर भारत की Russian oil purchases और Moscow के साथ पुराने strategic संबंधों को लेकर पश्चिम और Ukraine में समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। Mediator नहीं, Facilitator की भूमिका ज्यादा व्यावहारिक फिलहाल भारत को औपचारिक mediator कहना जल्दबाजी होगी। न Russia और न Ukraine ने भारत को formal mediator नियुक्त किया है। लेकिन दोनों से संवाद बनाए रखने वाला एक facilitator बनकर New Delhi proposals, back-channel communication और confidence-building initiatives को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है। यह भूमिका भारत की मौजूदा diplomatic position के ज्यादा करीब है। युद्ध जितना लंबा, दुनिया पर उतना ज्यादा असर Russia-Ukraine conflict अब पांचवें वर्ष में है। इसका असर केवल battlefield तक सीमित नहीं है; food, fuel, fertiliser और global supply chains पर भी इसका दबाव पड़ा है। Jaishankar ने हाल में कहा कि ऐसे युद्धों में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता और हर अतिरिक्त दिन अधिक मौत, तबाही और आर्थिक नुकसान लेकर आता है। भारत के लिए यही वह समय है जब Moscow और Kyiv दोनों तक अपनी diplomatic access का उपयोग केवल संदेश पहुंचाने के बजाय ठोस confidence-building proposals आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि अंतिम peace settlement रूस और यूक्रेन को ही स्वीकार करना होगा, New Delhi बातचीत की राह आसान करने वाले देशों में महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। source – The Indian Express / Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-रूस के बीच बड़ा आर्थिक समझौता: ऊर्जा, IT और व्यापार में खुलेगा नए अवसरों का द्वार

नई दिल्ली/सेंट पीटर्सबर्ग: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस ने अपने आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), विज्ञान, शिक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत और रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी भारत और रूस लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में तेजी आई है। अब दोनों देशों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा गति बरकरार रहती है तो आने वाले वर्षों में व्यापार का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकता है। ऊर्जा क्षेत्र रहेगा सबसे बड़ा आधार ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में पहले से सहयोग चल रहा है। नए समझौते के बाद इस सहयोग के और विस्तार की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और उद्योगों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिल सकेगी। IT सेक्टर में नए अवसर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल नवाचार भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनकर उभरे हैं। भारत की IT कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। वहीं रूस तकनीकी अनुसंधान और इंजीनियरिंग क्षमताओं के लिए जाना जाता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ने से: शिक्षा और विज्ञान में सहयोग भारत और रूस ने शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है। छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और शोध करने के अवसर मिल सकते हैं। भारतीय उद्योगों को क्या होगा फायदा? व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक सहयोग का लाभ कई भारतीय उद्योगों को मिल सकता है। संभावित फायदे: ✔ ऊर्जा लागत में स्थिरता✔ निर्यात के नए अवसर✔ निवेश में वृद्धि✔ रोजगार सृजन✔ तकनीकी सहयोग में विस्तार✔ औद्योगिक विकास को गति विशेष रूप से विनिर्माण, ऊर्जा, IT और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत साझेदारी दुनिया इस समय कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और रूस का सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की स्थिति को भी मजबूत कर सकती है। निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें इस समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत और रूस के बीच होने वाली भविष्य की परियोजनाओं पर टिकी हुई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो इससे निवेश माहौल को सकारात्मक संकेत मिलेगा। jairashtranews

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