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मार्को रुबियो भारत पहुंचे, जयशंकर से ट्रेड डील, रूसी तेल और रक्षा सहयोग पर अहम बातचीत

मुंबई, 20 अक्टूबर 2026: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, रूसी कच्चे तेल के आयात, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत पहुंचने से पहले रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। रूसी तेल का आयात रहेगा अहम मुद्दा भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात का मुद्दा भी इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। रूस से तेल खरीद, अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित अतिरिक्त टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा होती रही है। रुबियो ने संकेत दिया है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव करना आसान नहीं है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आयात महत्वपूर्ण हैं, जबकि अमेरिका रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, निवेश, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल है। भारत और अमेरिका अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में इस बैठक से इन क्षेत्रों में आगे सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुंबई में ही क्यों हो रही है मुलाकात? रुबियो के दौरे में नई दिल्ली के बजाय मुंबई को बैठक के प्रमुख स्थल के रूप में चुना गया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बैठकें पहले भी देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित होती रही हैं। जामनगर भी जाएंगे रुबियो Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो के कार्यक्रम में मुंबई के साथ गुजरात का जामनगर भी शामिल है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है। ऐसे में दौरे के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक सहयोग से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहने की संभावना है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अहम दौरा रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता, टैरिफ और रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। व्यापार समझौते पर सहमति बनने से निवेश, ऊर्जा और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, किसी संभावित समझौते के प्रभाव का आकलन उसकी अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकेगा। स्रोत: Reuters, India Today और विदेश मंत्रालय (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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India-US Trade Deal की पहली Phase Final Drafting में, Sergio Gor बोले—“Big Items Are Done”

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली phase अब अंतिम कानूनी मसौदा तैयार करने के चरण में पहुंच गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है और समझौते के बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा, “Big items are done”, जबकि शेष तकनीकी बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। Piyush Goyal ने भी कहा—पहला चरण लगभग फाइनल केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने 15 अक्टूबर को कहा था कि व्यापार समझौते का पहला चरण लगभग अंतिम रूप ले चुका है। फिलहाल कानूनी मसौदे और अंतिम समीक्षा पर काम चल रहा है। भारत की कोशिश है कि समझौता लागू होने के बाद उसके निर्यातकों को बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में नुकसान न उठाना पड़े। “Big Items Are Done”: Sergio Gor Bloomberg New Economy Forum में Sergio Gor ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत असाधारण तेजी से आगे बढ़ी है। उनके अनुसार, समझौते के प्रमुख मुद्दों पर पर्याप्त सहमति बन चुकी है और अब बाकी बिंदुओं को सुलझाने पर ध्यान दिया जा रहा है। Tariffs और Market Access रहे अहम मुद्दे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और नियामकीय मुद्दे लंबे समय से प्रमुख विषय रहे हैं। इससे पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने कहा था कि बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन कुछ मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। इसी वजह से उस समय समझौते को तत्काल अंतिम रूप दिए जाने की संभावना नहीं मानी गई थी। भारतीय निर्यातकों के लिए क्या बदल सकता है? भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार में अपने निर्यातकों के लिए अधिक अनुकूल और अनुमानित टैरिफ व्यवस्था हासिल करना है। अमेरिका भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजारों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर की अवधि में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर बढ़ा है। व्यापार समझौते के पहले चरण से निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापारिक अनिश्चितताओं में कमी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ समझौते की अंतिम शर्तों और उनके लागू होने पर निर्भर करेगा। Marco Rubio की भारत यात्रा भी अहम अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की भारत यात्रा भी दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस दौरान आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यह बातचीत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त गति प्रदान कर सकती है। व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत अभी बाकी पहले चरण का अंतिम कानूनी मसौदा तैयार होना महत्वपूर्ण प्रगति है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत-अमेरिका के व्यापक व्यापार समझौते से जुड़े सभी मुद्दे सुलझ गए हैं। दोनों देशों को टैरिफ, बाजार पहुंच और नियामकीय नियमों सहित कई व्यापक विषयों पर आगे भी बातचीत करनी होगी। समझौते की अंतिम शर्तें और लागू होने की समय-सीमा आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी। स्रोत: Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Trump ने Russia Sanctions Bill पर हस्ताक्षर किए; Russian Oil Buyers पर 100% तक Tariff का रास्ता साफ, India पर भी असर संभव

वॉशिंगटन, 18 सितंबर 2026: US President Donald Trump ने Russia पर नए economic sanctions लगाने वाले व्यापक legislation पर हस्ताक्षर कर उसे कानून बना दिया है। नए law के तहत Russian crude oil या natural gas के सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक tariff लगाने का प्रावधान है। India और China Russia के प्रमुख oil buyers में शामिल हैं, इसलिए दोनों देशों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि India पर 100% tariff तत्काल लागू हो गया है, ऐसा नहीं है; implementation और exemptions से जुड़े फैसलों में US administration के पास व्यापक discretion है। 30 दिनों के भीतर Tariff लगाने का प्रावधान Reuters के मुताबिक कानून President को Russian crude oil या gas के पांच सबसे बड़े importers से आने वाले goods पर 100% तक tariffs लगाने को कहता है। इसके दायरे में वे देश भी आ सकते हैं जो कानून लागू होने के 30 दिन बाद Russian oil या gas की नई खरीद करते हैं या Russia को sanctions evade करने में मदद करने वाले top countries में शामिल पाए जाते हैं। India और China पर क्यों बढ़ा Risk? India और China Russian crude के सबसे बड़े buyers में शामिल हैं। इसी कारण नए US law के तहत दोनों देशों के exports पर अतिरिक्त tariffs का risk बढ़ गया है। हालांकि legislation में किसी specific country का नाम नहीं दिया गया है और top-five countries तय करने की methodology भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इससे implementation में US administration को काफी flexibility मिलती है। India ने पहले ही जताई थी चिंता India ने bill के Congress से पारित होने के बाद Washington को चेताया था कि ऐसे tariffs India-US bilateral relations और global energy stability को प्रभावित कर सकते हैं। New Delhi का कहना रहा है कि उसका energy sourcing decision देश की energy security और 1.4 billion लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। Russia की Energy और Defence Sector भी निशाने पर नए sanctions package में सिर्फ third-country tariffs ही नहीं, बल्कि Russian officials, banks, energy और defence industries तथा so-called shadow tanker fleet पर भी कार्रवाई के प्रावधान हैं। US lawmakers का कहना है कि इसका उद्देश्य Moscow की Ukraine war को finance करने की क्षमता पर दबाव बढ़ाना है। Tariffs में Waiver का भी विकल्प Law President को national security grounds पर कुछ tariffs या sanctions waive करने की authority भी देता है। यही वजह है कि experts का कहना है कि कानून का actual economic impact इस बात पर निर्भर करेगा कि Trump administration किस देश पर कितना tariff लगाता है और किन मामलों में exemptions देता है। Global Oil Market पर भी पड़ सकता है असर अगर major buyers Russian crude imports तेजी से कम करते हैं, तो global oil supply chain में disruption और crude prices पर upward pressure बन सकता है। Analysts ने यह भी चेताया है कि ऐसी स्थिति energy-importing देशों के लिए costs बढ़ा सकती है। source – Reuters / Associated Press जय राष्ट्र न्यूज़

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Modi-Pezeshkian मुलाकात पर Marco Rubio की चेतावनी; बोले—कोई देश Iran को US Sanctions से बचाने में मदद न करे

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने Iran के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी देश को Tehran को अमेरिकी sanctions से बचने या revenue जुटाने के वैकल्पिक रास्ते तैयार करने में मदद नहीं करनी चाहिए। Rubio का यह बयान प्रधानमंत्री Narendra Modi और Iranian President Masoud Pezeshkian की Bishkek में हुई मुलाकात के बाद आया है। India-Iran Trade Deal की बात से Rubio का इनकार Fox News Radio के The Brian Kilmeade Show में Modi-Pezeshkian meeting के बारे में पूछे जाने पर Rubio ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि India और Iran किसी नए trade deal पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी माना कि sovereign countries अपनी foreign policy तय करने और Iran समेत दूसरे देशों से diplomatic relations रखने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि Washington की आपत्ति ऐसी आर्थिक व्यवस्था से है जो Tehran को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करे। ‘Sanctions Bypass कराया तो कार्रवाई होगी’ Rubio ने कहा कि कोई देश Iran के लिए ऐसे mechanisms तैयार न करे जिनसे Tehran revenue generate कर सके। उनका दावा है कि Iran ऐसी आय का इस्तेमाल terrorism को support करने या nuclear weapons विकसित करने की कोशिश में कर सकता है। Rubio ने चेतावनी दी कि अगर कोई देश अमेरिकी sanctions को evade कराने में मदद करता है, तो Washington उस देश या संबंधित entities पर भी sanctions लगा सकता है। यह अमेरिकी सरकार का आरोप और policy position है। Iran अपने nuclear programme को लेकर अमेरिकी आरोपों और sanctions policy का लंबे समय से विरोध करता रहा है। Modi-Pezeshkian Meeting में Trade बढ़ाने पर हुई थी बात Prime Minister Narendra Modi ने 31 अगस्त को SCO Summit के sidelines पर Bishkek में President Masoud Pezeshkian से मुलाकात की थी। PMO के official readout के मुताबिक दोनों नेताओं ने India-Iran संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। Modi ने कहा कि India आने वाले समय में Iran के साथ अपने trade basket को expand और diversify करना चाहता है। दोनों नेताओं ने West Asia की स्थिति, regional stability और commercial shipping की सुरक्षा पर भी विचार साझा किए। India ने दोहराया Dialogue और Diplomacy का रुख बैठक में PM Modi ने West Asia में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और कहा कि disputes का समाधान dialogue और diplomacy से होना चाहिए। उन्होंने freedom of navigation और commerce की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि civilians, civilian infrastructure, commercial shipping और seafarers को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। India ने BRICS और SCO समेत multilateral platforms पर Iran के साथ cooperation जारी रखने की इच्छा भी जताई है। Iran पर Economic Pressure बढ़ा रहा US Rubio की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब Trump administration Iran पर economic pressure और sanctions enforcement बढ़ा रहा है। Reuters के मुताबिक हाल के महीनों में Iranian oil exports और broader economy पर अमेरिकी restrictions का दबाव बढ़ा है। Washington दूसरे देशों और कंपनियों को भी Iran के साथ ऐसी transactions से दूर रहने के लिए कह रहा है जो sanctions के दायरे में आ सकती हैं। India को सीधे Sanction करने की घोषणा नहीं Rubio के बयान को India पर नए sanctions की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने India-Iran meeting पर सवाल का जवाब देते हुए broadly कहा कि कोई भी देश Iran को sanctions evade करने में मदद न करे। फिलहाल इस बयान के आधार पर India के खिलाफ किसी नई अमेरिकी punitive action की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए सबसे accurate headline होगी: Modi-Pezeshkian मुलाकात पर Marco Rubio की चेतावनी; बोले—कोई देश Iran को US Sanctions से बचाने में मदद न करे स्रोत – US Secretary of State Marco Rubio Interview, PMO India, Business Today, Moneycontrol, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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India-US Trade Deal लगभग Final: अमेरिकी राजदूत Sergio Gor बोले—‘In Principle’ ज्यादातर समझौता पूरा

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रहा Bilateral Trade Agreement अब अंतिम चरण के बेहद करीब पहुंच गया है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि समझौते के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों पर दोनों देशों के बीच “in principle” सहमति बन चुकी है और अब मुख्य रूप से कानूनी तथा तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने का काम बाकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। Gor ने भरोसा जताया कि बाकी तकनीकी काम पूरा होने के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। Sergio Gor ने Trade Deal पर क्या कहा? Economic Times World Leaders Forum में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि India-US Trade Deal के अधिकांश हिस्सों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब बातचीत बड़े नीतिगत मतभेदों को सुलझाने के बजाय मुख्य रूप से legal और technical language को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है। समझौते के कुछ हिस्सों के text को दोबारा तैयार किया जा रहा है। Gor ने समझौते को लेकर आशावादी रुख दिखाया और संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अब बड़ी बाधाओं के बजाय अंतिम दस्तावेजी प्रक्रिया पर काम चल रहा है। क्यों बदला जा रहा Trade Agreement का कुछ Text? Sergio Gor ने कार्यक्रम में बताया कि पहले एक समय दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंच चुके थे, लेकिन अमेरिका में हुए कानूनी घटनाक्रम के बाद deal के कुछ हिस्सों की भाषा को दोबारा तैयार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि Washington अब agreement के कुछ text को “reconfigure” कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इससे पूरी trade negotiation दोबारा शुरू नहीं हुई है और अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा चरण में दोनों पक्ष नए सिरे से पूरा समझौता नहीं बना रहे, बल्कि पहले तय किए गए framework को कानूनी रूप से लागू करने योग्य रूप देने पर काम कर रहे हैं। India-US Trade तेजी से बढ़ा अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक करीब 15 साल पहले दोनों देशों के बीच bilateral trade लगभग 20 अरब डॉलर था, जबकि आज यह बढ़कर करीब 240 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत और अमेरिका ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए tariff barriers कम करना, market access बढ़ाना और दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार करना आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Trade Deal से भारत को क्या फायदा हो सकता है? India-US Trade Agreement का अंतिम स्वरूप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए सभी sector-wise benefits को निश्चित रूप से बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन किसी व्यापक trade deal से भारतीय exporters को अमेरिकी बाजार में बेहतर access मिलने, कुछ products पर tariffs कम होने और investment flows बढ़ने की संभावना रहती है। अमेरिका भारत के सबसे महत्वपूर्ण export markets में शामिल है। ऐसे में textiles, engineering goods, pharmaceuticals, electronics और अन्य manufacturing sectors के लिए किसी tariff relief का बड़ा प्रभाव हो सकता है। हालांकि किन products को कितनी राहत मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब final agreement जारी होने के बाद ही मिलेगा। Russian Oil खरीदने वाले देशों पर 100% Tariff की भी चर्चा Sergio Gor ने कार्यक्रम में एक अलग मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की। अमेरिकी संसद में ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत tariff लगाने के प्रस्ताव की चर्चा चल रही है जो रूस से तेल खरीदते हैं। भारत दुनिया के बड़े Russian crude buyers में शामिल रहा है, इसलिए ऐसे किसी प्रस्ताव का भारत पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि Gor ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी Congress में bipartisan स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है और इसे सीधे President Donald Trump या White House की घोषित नीति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि Trump administration की प्राथमिकता Russia-Ukraine युद्ध को समाप्त कराने की दिशा में काम करना है। Trump-Modi संबंधों पर भी बोले Sergio Gor अमेरिकी राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रिश्तों को भी दोनों देशों की partnership के लिए महत्वपूर्ण बताया। Gor ने कहा कि Trump और Modi के बीच गहरा व्यक्तिगत संबंध और आपसी भरोसा है। उनके मुताबिक दोनों नेता तेजी से परिणाम चाहते हैं और bilateral relationship को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि India-US relationship केवल trade तक सीमित नहीं है, बल्कि defence, energy, technology और Indo-Pacific cooperation जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है। Marco Rubio अक्टूबर में फिर आ सकते हैं भारत India-US संबंधों में बढ़ती diplomatic engagement का संकेत देते हुए Sergio Gor ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अक्टूबर में भारत का दौरा कर सकते हैं। यह Rubio की इस साल भारत की दूसरी यात्रा होगी। इससे पहले वह मई में पांच दिन के दौरे पर भारत आए थे। Gor ने कहा कि अमेरिकी सरकार के शीर्ष अधिकारियों की लगातार भारत यात्राएं यह दिखाती हैं कि Washington भारत के साथ रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देता है। क्या Trade Deal अब Final हो चुकी है? फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि India-US Trade Deal पूरी तरह final और लागू हो चुकी है। Sergio Gor के मुताबिक मुख्य मुद्दों पर “in principle” सहमति लगभग पूरी है, लेकिन legal और technical drafting अभी जारी है। इसके बाद दोनों सरकारों को final text पर औपचारिक सहमति देनी होगी और agreement को लागू करने के लिए जरूरी administrative और legal processes पूरी करनी होंगी। इसलिए वर्तमान स्थिति को “लगभग अंतिम चरण में पहुंचा समझौता” कहना ज्यादा सटीक होगा। India-US संबंधों के लिए बड़ा संकेत Trade deal का पूरा होना दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि अमेरिका उसका प्रमुख trading और strategic partner है। दोनों देशों की कंपनियों के बीच technology, energy, pharmaceuticals, manufacturing और defence sectors में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Sergio Gor…

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भारत-अमेरिका के बीच वीज़ा और इमिग्रेशन सहयोग पर नई बातचीत, भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर रहेगा असर

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने वीज़ा एवं इमिग्रेशन से जुड़े मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए औपचारिक बातचीत तेज कर दी है। हाल के उच्चस्तरीय संवादों में दोनों देशों ने स्टूडेंट वीज़ा, H-1B वर्क वीज़ा, कानूनी प्रवासन (Legal Migration), वीज़ा प्रोसेसिंग समय और अवैध इमिग्रेशन जैसे अहम विषयों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ भारतीय छात्रों, आईटी पेशेवरों और अमेरिका में काम करने के इच्छुक कुशल कर्मचारियों को मिल सकता है। भारत ने इस दौरान वीज़ा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि अमेरिका ने कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने और अवैध इमिग्रेशन पर संयुक्त कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। किन मुद्दों पर हुई चर्चा? दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे— भारतीय छात्रों को क्या फायदा हो सकता है? अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा उच्च शिक्षा गंतव्यों में से एक है। हर वर्ष हजारों छात्र अमेरिका की विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। यदि वीज़ा प्रक्रिया में सुधार होता है, तो— हालांकि, फिलहाल वीज़ा नियमों में किसी नए बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आईटी पेशेवरों और H-1B वीज़ा पर नजर भारतीय आईटी कंपनियों और तकनीकी पेशेवरों के लिए H-1B वीज़ा सबसे महत्वपूर्ण श्रेणियों में से एक है। बातचीत के दौरान कुशल पेशेवरों की आवाजाही, रोजगार आधारित वीज़ा प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संवाद से भविष्य में वीज़ा संबंधी कई व्यावहारिक समस्याओं के समाधान का रास्ता खुल सकता है। अवैध इमिग्रेशन पर भी सहयोग भारत और अमेरिका ने अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल जैसे मामलों पर सूचना साझा करने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रवासन को प्रोत्साहित करते हुए अवैध गतिविधियों पर सख्ती जारी रहेगी। भारत-अमेरिका संबंधों में नया कदम हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, सेमीकंडक्टर, शिक्षा और निवेश के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है। वीज़ा और इमिग्रेशन पर जारी यह संवाद भी उसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की आसान आवाजाही दोनों देशों के आर्थिक और शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत कर सकती है। आगे क्या होगा? दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आने वाले महीनों में भी वार्ता जारी रहने की संभावना है। यदि किसी नई नीति, वीज़ा नियम या प्रक्रिया में बदलाव पर सहमति बनती है, तो उसकी आधिकारिक घोषणा दोनों सरकारों द्वारा की जाएगी। निष्कर्ष भारत और अमेरिका के बीच वीज़ा एवं इमिग्रेशन सहयोग पर तेज हुई बातचीत भारतीय छात्रों, आईटी पेशेवरों और कानूनी रूप से अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि अभी किसी नए वीज़ा नियम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद भविष्य में प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। Source: भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), अमेरिकी अधिकारियों के सार्वजनिक बयान और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका के बीच वीज़ा और इमिग्रेशन मुद्दों पर बातचीत तेज, छात्रों और पेशेवरों के हितों पर रहेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने वीज़ा एवं इमिग्रेशन से जुड़े लंबित मुद्दों पर औपचारिक बातचीत तेज करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में हुई बैठकों में छात्र वीज़ा, कार्य वीज़ा (H-1B), पेशेवरों की आवाजाही, कानूनी प्रवासन और अवैध इमिग्रेशन से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत का उद्देश्य भारतीय छात्रों, आईटी पेशेवरों और कुशल कर्मचारियों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। वहीं, दोनों देश अवैध प्रवासन और मानव तस्करी के मामलों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। किन मुद्दों पर हो रही है चर्चा? दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य फोकस निम्नलिखित विषयों पर है— भारत का मानना है कि बढ़ते शैक्षणिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए लोगों की आवाजाही को आसान बनाना दोनों देशों के हित में है। भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर क्या असर होगा? हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं, जबकि हजारों आईटी और अन्य क्षेत्रों के पेशेवर अमेरिकी कंपनियों में कार्यरत हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वीज़ा प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है और लंबित मामलों के समाधान में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शिक्षा, तकनीक और व्यापारिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। अवैध इमिग्रेशन पर भी रहेगा फोकस भारत और अमेरिका ने अवैध प्रवासन तथा मानव तस्करी के मामलों पर सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया है। दोनों देशों का उद्देश्य कानूनी यात्रा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती साझेदारी हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वीज़ा और इमिग्रेशन से जुड़े मुद्दों का समाधान इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक और शैक्षणिक संबंधों के कारण लोगों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में नियमित संवाद और सहयोग दोनों देशों के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। आगे क्या होगा? दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आने वाले हफ्तों में भी वार्ता जारी रहने की संभावना है। इन बैठकों में वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाने, लंबित मामलों के समाधान और इमिग्रेशन सहयोग को मजबूत करने पर आगे चर्चा हो सकती है। निष्कर्ष भारत और अमेरिका के बीच वीज़ा एवं इमिग्रेशन मुद्दों पर तेज हुई बातचीत को दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि वार्ता सकारात्मक परिणाम देती है, तो इसका सबसे अधिक लाभ भारतीय छात्रों, पेशेवरों और दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक एवं शैक्षणिक सहयोग को मिल सकता है। Source: भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), अमेरिकी अधिकारियों के सार्वजनिक बयान और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका के बीच वीज़ा और इमिग्रेशन मुद्दों पर बातचीत तेज, छात्रों और पेशेवरों के हितों पर रहेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने वीज़ा एवं इमिग्रेशन से जुड़े लंबित मुद्दों पर औपचारिक बातचीत तेज करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में हुई बैठकों में छात्र वीज़ा, कार्य वीज़ा (H-1B), पेशेवरों की आवाजाही, कानूनी प्रवासन और अवैध इमिग्रेशन से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत का उद्देश्य भारतीय छात्रों, आईटी पेशेवरों और कुशल कर्मचारियों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। वहीं, दोनों देश अवैध प्रवासन और मानव तस्करी के मामलों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। किन मुद्दों पर हो रही है चर्चा? दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य फोकस निम्नलिखित विषयों पर है— भारत का मानना है कि बढ़ते शैक्षणिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए लोगों की आवाजाही को आसान बनाना दोनों देशों के हित में है। भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर क्या असर होगा? हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं, जबकि हजारों आईटी और अन्य क्षेत्रों के पेशेवर अमेरिकी कंपनियों में कार्यरत हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वीज़ा प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है और लंबित मामलों के समाधान में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शिक्षा, तकनीक और व्यापारिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। अवैध इमिग्रेशन पर भी रहेगा फोकस भारत और अमेरिका ने अवैध प्रवासन तथा मानव तस्करी के मामलों पर सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया है। दोनों देशों का उद्देश्य कानूनी यात्रा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती साझेदारी हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वीज़ा और इमिग्रेशन से जुड़े मुद्दों का समाधान इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक और शैक्षणिक संबंधों के कारण लोगों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में नियमित संवाद और सहयोग दोनों देशों के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। आगे क्या होगा? दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आने वाले हफ्तों में भी वार्ता जारी रहने की संभावना है। इन बैठकों में वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाने, लंबित मामलों के समाधान और इमिग्रेशन सहयोग को मजबूत करने पर आगे चर्चा हो सकती है। निष्कर्ष भारत और अमेरिका के बीच वीज़ा एवं इमिग्रेशन मुद्दों पर तेज हुई बातचीत को दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि वार्ता सकारात्मक परिणाम देती है, तो इसका सबसे अधिक लाभ भारतीय छात्रों, पेशेवरों और दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक एवं शैक्षणिक सहयोग को मिल सकता है। Source: भारत का विदेश मंत्रालय (MEA), अमेरिकी अधिकारियों के सार्वजनिक बयान और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट। Original Report: उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता निर्णायक चरण में, अंतरिम समझौते पर बढ़ी उम्मीदें

जय राष्ट्र न्यूज़ | बिजनेस डेस्क | 23 जून 2026 मुख्य समाचार भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली में दोनों देशों के वरिष्ठ व्यापार अधिकारियों के बीच हुई हालिया बैठकों के बाद अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिका और भारत दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के लिए लाभकारी और संतुलित हो। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई चर्चा में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था और व्यापारिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता? भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में शुल्क, बाजार पहुंच और नियामकीय बाधाओं को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं। प्रस्तावित अंतरिम समझौते का उद्देश्य इन बाधाओं को कम करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता होने पर दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को लाभ मिल सकता है। भारत की प्रमुख मांगें भारत अमेरिकी बाजार में अपने निर्यातकों के लिए बेहतर और वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच चाहता है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अधिक अवसरों की मांग की जा रही है। भारतीय पक्ष का मानना है कि यदि व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं तो निर्यात और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। अमेरिका का फोकस अमेरिका कृषि, ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक अवसर चाहता है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वह ऐसा समझौता चाहता है जो दोनों देशों के लिए “निष्पक्ष और पारस्परिक लाभकारी” हो। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी आर्थिक सहयोग को भी मजबूत बना रही है। निवेशकों की नजर व्यापार वार्ता में प्रगति की खबरों पर निवेशक भी नजर बनाए हुए हैं। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है तो कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच भारत और अमेरिका दोनों अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता व्यापक भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com/world/india/us-focused-fair-trade-deal-with-india-that-benefits-both-countries-us-embassy-2026-06-23/ जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी की वैश्विक नेताओं से मुलाकातों पर चर्चा तेज, भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर दुनिया की नजर

नई दिल्ली / एविंया (फ्रांस): वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत का कद लगातार बड़ा होता जा रहा है। फ्रांस के एविंया में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई बैक-टू-बैक द्विपक्षीय मुलाकातों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के साथ पीएम मोदी की इन मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह बढ़ती ‘कूटनीतिक सक्रियता’ (Strategic Autonomy) आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा समीकरणों को बदलने वाली साबित होगी। अमेरिका और भारत के बीच ‘COMPACT’ समझौते पर बड़ी प्रगति G7 समिट के इतर सबसे बहुप्रतीक्षित मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका कॉम्पेक्ट (INDIA-U.S. COMPACT) समझौते की समीक्षा की, जिसके तहत रक्षा, रणनीतिक तकनीक, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक प्रगति देखी जा रही है। भारत-यूरोपियन यूनियन (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर ऐतिहासिक मुहर प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की। बड़ी सफलता: इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के वार्ताओं के निष्कर्ष का स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश के असीमित अवसर खुलेंगे और सप्लाई चेन को और मजबूती मिलेगी। जर्मनी के साथ रक्षा और वीज़ा नियमों पर बड़ी डील जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ पीएम मोदी की बैठक में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप’ पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों के लिए जर्मनी से होकर गुजरने वाले ट्रांजिट वीज़ा की छूट को लागू करने का स्वागत किया गया, जिससे भारतीयों के लिए यूरोपीय यात्रा और आसान हो जाएगी। ‘ग्लोबल साउथ’ की बुलंद आवाज बना भारत शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया में केवल अपने हितों की बात नहीं कर रहा, बल्कि वह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और गरीब देशों) की मजबूत आवाज बनकर उभरा है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकसित देशों से डोनर-बेनिफिशियरी (दाता और लाभार्थी) की मानसिकता से बाहर निकलकर समानता के आधार पर साझेदारी करने का आह्वान किया है। यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच, पीएम मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि “भारत हमेशा शांति के पक्ष में है और मानवता को सबसे ऊपर रखता है।” फ्रांस में ‘विवाटेक 2026’ में भारत का डंका G7 समिट के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी पेरिस (फ्रांस) पहुंचे हैं, जहां प्रवासी भारतीयों ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इवेंट VivaTech 2026 में हिस्सा लेंगे। इस साल विवाटेक में ‘इंडिया पवेलियन’ सबसे बड़ा है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब दुनिया का नया डिजिटल और इनोवेशन हब बन चुका है। Source: The Hindu Original report: The Hindu – PM Modi arrives in Paris to attend VivaTech 2026 Publication: jairashtranews

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