प्रमुख खबरें

भारत-जापान की बड़ी रणनीतिक साझेदारी! समुद्री सुरक्षा और Indo-Pacific सहयोग पर हुआ अहम समझौता

नई दिल्ली: भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देते हुए समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए Memorandum of Arrangement (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 20 अगस्त को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच हुई वार्ता के दौरान हुआ। दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित Indo-Pacific को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय नौसेना और जापानी Maritime Force के बीच बढ़ेगा सहयोग नए समझौते के तहत Indian Navy और Japan Maritime Self-Defense Force (JMSDF) के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना, समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इससे दोनों देशों की समुद्री स्थितियों को समझने और संभावित खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। Indo-Pacific में Freedom of Navigation पर जोर भारत और जापान ने Free and Open Indo-Pacific के अपने साझा दृष्टिकोण को दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैध समुद्री व्यापार को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। यह सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब Indo-Pacific क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Joint Naval Shipbuilding पर भी बातचीत रक्षा सहयोग सिर्फ समुद्री निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। भारत और जापान ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को साथ लाकर Make in India के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देशों ने जहाजों की मरम्मत और maintenance facilities के पारस्परिक इस्तेमाल पर भी आगे काम करने की बात कही है। Defence Technology में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और जापान ने उन्नत रक्षा तकनीक में सहयोग तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्ष co-development और co-production के नए अवसर तलाशेंगे, जिससे भारत के defence manufacturing ecosystem और Japanese technology के बीच साझेदारी बढ़ सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जापानी कंपनियों को भारतीय defence companies और startups के साथ Make in India के तहत co-development और co-production में भागीदारी के अवसर तलाशने की बात कही है। Maritime Security में Piracy के खिलाफ भी सहयोग समुद्री सुरक्षा समझौते में piracy, armed robbery और अन्य transnational crimes से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा भी शामिल है। इससे Indian Ocean और Indo-Pacific के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में दोनों देशों के बीच coordination मजबूत हो सकता है। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच समझौता अहम भारत-जापान का यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब Indo-Pacific में चीन की बढ़ती सैन्य और समुद्री गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। हालांकि दोनों देशों ने समझौते को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में पेश नहीं किया है, लेकिन freedom of navigation, rules-based order और maritime security पर उनका साझा जोर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत-जापान रिश्तों में नया अध्याय भारत और जापान के बीच पहले से ही Special Strategic and Global Partnership है। अब नए maritime security framework, defence technology cooperation और संभावित joint shipbuilding के जरिए यह साझेदारी अधिक operational और practical दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच नौसैनिक अभ्यास, information sharing, ship repair, defence manufacturing और Indo-Pacific security में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है। स्रोत: PIB, DD India, PTI, Economic Times, Prime Minister’s Office Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

22 भारतीयों वाले दो जहाज हाईजैक! यमन और सोमालिया के पास समुद्री डकैती से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़ी समुद्री सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को बड़ी चिंता सामने आई। यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में दो कमर्शियल जहाजों को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक कर लिया। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल दोनों जहाजों के भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। Gulf of Aden में 16 भारतीयों वाला टैंकर हाईजैक पहली घटना 20 अगस्त को Gulf of Aden में हुई। Eritrea-flagged oil products tanker MT Sibu 1 को यमन के तट से करीब 30 nautical miles दूर हथियारबंद समुद्री डाकुओं ने अपने कब्जे में ले लिया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाकी क्रू में एक-एक Syrian, Sudanese और Iraqi नागरिक थे, जबकि एक सदस्य की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार करीब छह हथियारबंद समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उन्होंने उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। Somalia के Puntland तट पर दूसरा जहाज कब्जे में दूसरी घटना 17 अगस्त को Somalia के Puntland तट के पास हुई। Cameroon-flagged cargo vessel M/V LUTUF को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया। इस जहाज पर कुल 10 क्रू सदस्य थे, जिनमें 6 भारतीय नागरिक शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हथियारबंद हमलावर दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उस पर कब्जा कर लिया। इस तरह दोनों घटनाओं को मिलाकर 22 भारतीय नागरिक समुद्री डकैती की घटनाओं से प्रभावित जहाजों पर मौजूद थे। भारतीय क्रू की सुरक्षा पर क्या अपडेट? भारतीय अधिकारियों की शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों जहाजों पर मौजूद भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हालांकि, जहाजों की मौजूदा स्थिति और आगे की घटनाक्रम पर भारतीय अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। MT Sibu 1 मामले में संबंधित Recruitment and Placement Service Licence एजेंसी को घटना की रिपोर्ट और आगे के अपडेट e-Navik online marine casualty reporting system के जरिए जमा करने को कहा गया है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार दो अलग-अलग घटनाओं ने Horn of Africa और Gulf of Aden में commercial shipping की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां से Red Sea तथा Suez Canal की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग जुड़े हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में piracy के साथ-साथ क्षेत्रीय संघर्ष और जहाजों पर हमलों का खतरा भी बना हुआ है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापारिक देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक international merchant vessels पर काम करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय seafarers की सुरक्षा पर पड़ सकता है। भारतीय नौसेना पहले भी Gulf of Aden और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में commercial shipping की सुरक्षा तथा संकट में फंसे भारतीयों की मदद के लिए अभियान चला चुकी है। दो घटनाओं ने बढ़ाई चिंता एक ही सप्ताह में Somalia और Yemen के पास दो जहाजों का हाईजैक होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में piracy का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर भारतीय क्रू सदस्यों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। आगे भारतीय अधिकारियों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। स्रोत: PTI, Hindustan Times, Business Standard, The Statesman Jai Rashtra News

आगे और पढ़ें

चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती, आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को मिला बड़ा बल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने पिछले एक महीने के भीतर चार अत्याधुनिक स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म को अपने बेड़े में शामिल कर समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती दी है। इनमें INS Arnala, INS Nistar, INS Udaygiri और INS Tamal शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की परिचालन क्षमता, समुद्री निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। यह उपलब्धि भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। एक महीने में चार बड़े प्लेटफॉर्म शामिल रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हाल के सप्ताहों में भारतीय नौसेना ने लगातार चार नए प्लेटफॉर्म अपने बेड़े में शामिल किए हैं। इनमें एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC), डाइविंग सपोर्ट वेसल, अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट और मल्टी-रोल युद्धपोत शामिल हैं। इन जहाजों को आधुनिक सेंसर, हथियार प्रणालियों और उन्नत संचार तकनीक से लैस किया गया है। समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत इन नए प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियान (Anti-Submarine Warfare), खोज एवं बचाव (Search and Rescue) तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों को देखते हुए यह विस्तार रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा इन जहाजों का निर्माण भारतीय शिपयार्ड और घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी से किया गया है। इससे देश में रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, रोजगार और तकनीकी विकास को नई गति मिलेगी। सरकार लगातार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण पर जोर दे रही है। आधुनिक तकनीक से लैस हैं नए प्लेटफॉर्म नौसेना के नए प्लेटफॉर्म अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, उन्नत नेविगेशन, मिसाइल क्षमता और स्वदेशी सेंसर तकनीक से लैस हैं। इनमें से कुछ जहाज विशेष रूप से पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित किए गए हैं, जबकि अन्य समुद्री सर्वेक्षण, बचाव अभियान और लंबी दूरी की गश्त में सक्षम हैं। हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारत की Mission-Based Deployments को और मजबूती मिलेगी। इससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, क्षेत्रीय सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव बढ़ेगा। रक्षा मंत्रालय ने जताया भरोसा रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार आधुनिक तकनीक से लैस हो रही है और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी कई स्वदेशी युद्धपोत, पनडुब्बियां और अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जाएंगे। निष्कर्ष चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का भारतीय नौसेना में शामिल होना केवल रक्षा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। इन प्लेटफॉर्म से समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक सशक्त बनेगी। Source: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence), भारतीय नौसेना। Original Report: रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

भारतीय नौसेना को एक महीने में मिले चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत को मिला बड़ा बल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पिछले एक महीने के भीतर नौसेना में चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। इनमें अत्याधुनिक युद्धपोत, एंटी-सबमरीन युद्धपोत और सर्वेक्षण पोत शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन शक्ति और मजबूत होगी। साथ ही यह भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है। कौन-कौन से प्लेटफॉर्म हुए शामिल? रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में भारतीय नौसेना में INS Tamal, INS Arnala, INS Nistar और INS Himgiri जैसे स्वदेशी या भारत में निर्मित आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। इन सभी जहाजों को अलग-अलग परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इनमें पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री निगरानी, बचाव अभियान और बहुउद्देश्यीय नौसैनिक संचालन जैसी क्षमताएं मौजूद हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिली नई मजबूती रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म का निर्माण भारतीय शिपयार्ड और घरेलू रक्षा उद्योग की भागीदारी से किया गया है। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय कंपनियों, MSME और रक्षा स्टार्टअप्स को भी नई तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है। नौसेना की परिचालन क्षमता में होगा इजाफा नए प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियान और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) मिशनों की क्षमता बढ़ेगी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों को देखते हुए यह विस्तार भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर जोर पिछले कुछ वर्षों में भारत ने युद्धपोत, पनडुब्बी, मिसाइल प्रणाली और नौसैनिक उपकरणों के स्वदेशी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी जहाज निर्माण से देश की रणनीतिक क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार, तकनीकी नवाचार और रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। रक्षा मंत्री ने दी बधाई रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों और जहाज निर्माण में शामिल इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत लगातार आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप रक्षा क्षमताओं का विकास कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी रणनीतिक मौजूदगी विशेषज्ञों का मानना है कि नए नौसैनिक प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की Mission-Based Deployments को और मजबूत करेंगे। इससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव अभियान और क्षेत्रीय सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष एक महीने के भीतर चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश के रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ऐसे और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत को और बढ़ाएंगे। Source: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence), भारतीय नौसेना। Original Report: रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बढ़ती भूमिका और समुद्री सुरक्षा रणनीति

नई दिल्ली, 11 जुलाई। हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ऐसे समय में भारतीय नौसेना केवल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री कानूनों के पालन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। क्यों महत्वपूर्ण है इंडो-पैसिफिक क्षेत्र? इंडो-पैसिफिक दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचार मार्ग (Sea Lanes of Communication) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। भारतीय नौसेना की बढ़ती जिम्मेदारियां भारतीय नौसेना आज समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव (Search and Rescue), मानवीय सहायता (Humanitarian Assistance) और आपदा राहत (HADR) जैसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ समन्वय भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। आधुनिक युद्धपोत और स्वदेशी क्षमता पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने स्वदेशी युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल प्रणाली, नौसैनिक हेलीकॉप्टर और समुद्री निगरानी प्रणालियों को अपनी परिचालन क्षमता का हिस्सा बनाया है। “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे नौसेना की क्षमता और मजबूत हुई है। समुद्री सुरक्षा में तकनीक की भूमिका आधुनिक रडार, उपग्रह आधारित निगरानी, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क आधारित संचार और उन्नत डेटा विश्लेषण प्रणालियां भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को नई मजबूती प्रदान कर रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से समुद्री गतिविधियों पर अधिक प्रभावी निगरानी संभव हो रही है। मित्र देशों के साथ बढ़ता सहयोग भारत नियमित रूप से कई देशों के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास आयोजित करता है। इन अभ्यासों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आपसी समन्वय, आपदा राहत और समुद्री कानूनों के पालन को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी साझेदारियां क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देती हैं। SAGAR दृष्टिकोण भारत की “Security and Growth for All in the Region (SAGAR)” नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और साझा समृद्धि को प्रोत्साहित करना है। भारतीय नौसेना इस नीति को व्यावहारिक रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानवीय सहायता और आपदा राहत प्राकृतिक आपदाओं, चक्रवातों, भूकंप और अन्य संकटों के दौरान भारतीय नौसेना ने कई देशों को त्वरित राहत सहायता पहुंचाई है। इससे भारत की विश्वसनीय समुद्री शक्ति और मानवीय सहयोगी की छवि मजबूत हुई है। भविष्य की दिशा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सामरिक महत्व और बढ़ेगा। ऐसे में भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताएं, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएंगी। स्रोत:भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय एवं सार्वजनिक रक्षा संबंधी आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण, सार्वजनिक सरकारी जानकारी तथा समुद्री सुरक्षा से संबंधित उपलब्ध स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होगी INS Mahendragiri, समुद्री शक्ति को मिलेगा बड़ा बल

नई दिल्ली, 7 जुलाई। भारतीय नौसेना 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक विशेष समारोह में स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS Mahendragiri (F38) को आधिकारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह युद्धपोत Project 17A के तहत निर्मित छठा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट है और भारत की समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। Project 17A का अहम पड़ाव INS Mahendragiri, भारतीय नौसेना के Warship Design Bureau (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL), मुंबई ने किया है। यह Project 17A (Nilgiri-class) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट विकसित किए जा रहे हैं ताकि भारतीय नौसेना की बहु-भूमिका (Multi-Mission) क्षमता को और मजबूत किया जा सके। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसमें अनेक भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित सेंसर, संचार प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण लगाए गए हैं। आधुनिक हथियारों और स्टेल्थ तकनीक से लैस INS Mahendragiri को अत्याधुनिक स्टेल्थ डिजाइन के साथ विकसित किया गया है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है। इसमें आधुनिक मिसाइल प्रणाली, उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियार और बहु-भूमिका युद्ध क्षमता उपलब्ध है। यह सतह, वायु और पनडुब्बी—तीनों प्रकार के खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है। CODOG प्रणाली से मिलेगी तेज रफ्तार युद्धपोत में Combined Diesel or Gas (CODOG) प्रोपल्शन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो आवश्यकता के अनुसार उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है। यह युद्धपोत समुद्री निगरानी, एस्कॉर्ट मिशन, मानवीय सहायता, आपदा राहत और युद्ध अभियानों सहित विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन में उपयोगी होगा। हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की क्षमता विशेषज्ञों का मानना है कि INS Mahendragiri के शामिल होने से भारतीय नौसेना की Eastern Fleet और हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन क्षमता और मजबूत होगी। यह जहाज समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इस तरह के आधुनिक युद्धपोतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार INS Mahendragiri केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और Project 17A इसका महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। भविष्य की दिशा 11 जुलाई को कमीशनिंग के बाद INS Mahendragiri भारतीय नौसेना की सक्रिय सेवा का हिस्सा बन जाएगी। इसके शामिल होने से नौसेना की युद्ध क्षमता, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत अभियानों और क्षेत्रीय रणनीतिक उपस्थिति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे और स्वदेशी युद्धपोत भारतीय नौसेना की शक्ति को और बढ़ाएंगे। स्रोत:भारतीय रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना एवं आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति। मूल रिपोर्ट:Press Information Bureau (PIB), भारतीय नौसेना तथा 7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और निगरानी अभियान को मजबूत करने पर दिया जोर

नई दिल्ली, 4 जुलाई। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में समुद्री सुरक्षा, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में अपनी तैयारियों पर विशेष जोर दिया है। नौसेना का उद्देश्य क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखना तथा क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देना है। समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत नौसेना समुद्री निगरानी के लिए लंबी दूरी के निगरानी विमान, युद्धपोत, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और उन्नत रडार प्रणालियों के बेहतर समन्वय पर ध्यान दे रही है। इससे समुद्री गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने और संभावित चुनौतियों का समय रहते आकलन करने में सहायता मिलेगी। हिंद महासागर का रणनीतिक महत्व विशेषज्ञों के अनुसार हिंद महासागर विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना भारत की प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। साझेदार देशों के साथ सहयोग भारतीय नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास, सूचना साझा करने और समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी लगातार बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग से समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की क्षमता भी मजबूत होती है। आधुनिक तकनीक का बढ़ता उपयोग समुद्री सुरक्षा अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट आधारित निगरानी, स्वायत्त प्रणालियों और उन्नत संचार तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इससे वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत समुद्री सुरक्षा केवल नौसैनिक शक्ति का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता से भी सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। भविष्य की रणनीति भारतीय नौसेना भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी परिचालन क्षमता, आधुनिक तकनीकी संसाधनों और समुद्री निगरानी नेटवर्क को और सुदृढ़ बनाने पर कार्य कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी। स्रोत:भारतीय नौसेना एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी। मूल रिपोर्ट:4 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »