Rahul Gandhi POK statement

Rahul as PM Could Bring Back POK: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने किया बड़ा दावा करते हुए कहा, “राहुल पीएम होते तो वापस लाते पीओके”

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद जहां समूचा भारत जश्न में डूबा है, तो वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी को कमतर दिखाने की  कोशिश में लगे हुए हैं। इस क्रम में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मोदी सरकार पर करारा हमला बोला है। मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए रेवंत रेड्डी ने पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के नतीजों पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल (Telangana CM’s Big Claim) उठाया। इस बीच उन्होंने यह भी पूछा कि “चार दिन के युद्ध के बाद क्या (Rahul as PM Could Bring Back POK) हुआ? किसने आत्मसमर्पण किया? हमें कुछ नहीं पता।” उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी को 140 करोड़ भारतीयों को यह बताना चाहिए कि हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना ने हमारे कितने राफेल विमान मार गिराए। दरअसल, जय हिंद नाम से आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा, प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष शुरू करने से पहले सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई थी? जबकि पड़ोसी देश के साथ सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने से पहले उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? मोदी प्रतिबंधित 1,000 रुपये के नोट की तरह हैं, हमें राहुल गांधी जैसे नेताओं की जरूरत (Rahul as PM Could Bring Back POK) है प्रधानमंत्री के इस बयान का मखौल उड़ाते हुए कि युद्ध भाषण देना नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध रोककर मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की शपथ ली है। मोदी सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, चार दिनों के युद्ध के बाद, हमें नहीं पता कि किसने किसको धमकाया और किसने किसके आगे घुटने टेक दिए। अचानक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने आए और कहा कि (Telangana CM’s Big Claim) उन्होंने भारत को धमकाया और युद्ध रोक दिया। लोकसभा सांसद राहुल गाँधी की प्रशंसा करते हुए रेड्डी ने कहा कि “राहुल गांधी इस स्थिति को अलग तरीके से संभालते। उन्होंने कहा, अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते तो वह पीओके को वापस ले (Rahul as PM Could Bring Back POK) आते। मोदी प्रतिबंधित 1,000 रुपये के नोट की तरह हैं। हमें राहुल गांधी जैसे नेताओं की जरूरत है। मोदी हमारे लिए कभी युद्ध नहीं जीत सकते। केवल प्रधानमंत्री के रूप में राहुल गांधी ही ऐसा कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें:-  इन देशों के साथ-साथ अब भारत भी एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा रहा है अपना फोकस हजारों करोड़ रुपये के ठेके मोदी के करीबी लोगों को दिए गए- रेवंत रेड्डी पीएम मोदी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की इच्छा के बावजूद मोदी बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने और पीओके पर नियंत्रण करने में विफल रहे। यही नहीं, इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, (Telangana CM’s Big Claim) सिकंदराबाद छावनी के सैनिकों ने युद्ध में भाग लिया था। तेलंगाना में निर्मित युद्धक विमानों ने हमारे देश के सम्मान को बनाए रखा। नरेन्द्र मोदी द्वारा लाए गए राफेल विमानों को पाकिस्तान ने मार गिराया। इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई कि कितने राफेल मार गिराए गए। नरेन्द्र मोदी को जवाब देना चाहिए कि हालिया युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने कितने राफेल विमान मार गिराए। आप हमें इसका हिसाब दें। पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए रेड्डी ने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के ठेके मोदी के करीबी लोगों को दिए गए, जिन्होंने फिर राफेल विमान खरीदे।आगे उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी,(Rahul as PM Could Bring Back POK) मल्लिकार्जुन खरगे और मीनाक्षी नटराजन ने केवल एक बात कही कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो राजनीतिक विचारधारा से परे सभी को एक साथ आना चाहिए और तदनुसार उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार को आश्वासन दिया कि वह पाकिस्तान के साथ लड़ाई के दौरान उसके साथ खड़ी रहेगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Telangana CM’s Big Claim #RahulGandhi #POK #TelanganaCM #IndianPolitics #BreakingNews #RahulAsPM #POKReclaim

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Mamata Banerjee news

ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण निंदनीय: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का नाम रखकर इस सैन्य अभियान का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे एक राजनीतिक स्टंट करार दिया और साफ कहा कि इससे सेना के सम्मान को राजनीतिक रंग देना गलत है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने यह टिप्पणी कोलकाता स्थित नबन्ना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के नाम में “सिंदूर” शब्द जोड़ना केवल राजनीतिक आकर्षण बढ़ाने के लिए किया गया है, ताकि आम जनता में भावनात्मक लहर पैदा की जा सके। उनके मुताबिक BJP इस सैन्य कार्रवाई को वोट बैंक में बदलने की साजिश कर रही है। “बंगाल कभी बीजेपी के हाथ नहीं जाएगा” प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने यह स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल कभी भी भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां की जनता BJP की राजनीति को अच्छी तरह समझती है और ऐसे हथकंडे अब काम नहीं आने वाले। मुर्शिदाबाद की घटना: सीधे बीजेपी को ठहराया जिम्मेदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में हुई एक हालिया घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में उनके पास ठोस सबूत हैं और जरूरत पड़ने पर वे सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राज्य की शांति व्यवस्था को भंग करने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों पर तंज कसते हुए ममता बनर्जी ने कहा “कभी उन्हें चाय बेचने वाला कहा गया, फिर चौकीदार और अब वे देशभर में सिंदूर बेच रहे हैं। यह शोभा नहीं देता।” उन्होंने आगे कहा कि मोदी की सिंदूर पर आधारित बयानबाजी देश की राजनीतिक गरिमा को नुकसान पहुंचा रही है और यह केवल भावनात्मक मुद्दों को भुनाने की कोशिश है। महिलाओं का अपमान और भाजपा की चुप्पी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने भाजपा पर महिलाओं के अपमान को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में ऐसे मामलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। उनका कहना था कि जिन नेताओं पर महिलाओं के अपमान के आरोप लगे हैं, उन्हें संरक्षण दिया जाता है, जबकि सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। इसे भी पढ़ें:-  इन देशों के साथ-साथ अब भारत भी एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा रहा है अपना फोकस असम और कूचबिहार से लाई गई भीड़ प्रधानमंत्री की एक जनसभा को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि उस कार्यक्रम में जो भीड़ दिखाई गई थी, वह स्थानीय नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि असम और कूचबिहार से लोगों को लाकर रैली में शामिल किया गया, ताकि जनसमर्थन का झूठा प्रदर्शन किया जा सके। विदेशों में विपक्ष रख रहा है भारत की बात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने इस बात की सराहना की कि विपक्षी दलों के नेता विदेशों में जाकर “ऑपरेशन सिंदूर” पर भारत का पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जब विपक्ष अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को मजबूत कर रहा है, दूसरी ओर भाजपा केवल प्रचार में लगी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) के इस बयान ने केंद्र सरकार और भाजपा की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के नाम को राजनीति से जोड़कर इसे देश की सैन्य गरिमा के साथ खिलवाड़ बताया। यह स्पष्ट संकेत है कि 2024 के आम चुनावों की तैयारी में भाजपा और विपक्ष के बीच टकराव और तेज़ होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news CM Mamata Banerjee #MamataBanerjee #OperationSindoor #IndianPolitics #BJPvsTMC #BreakingNews #WestBengalNews

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Tharoor vs Congress leaders

Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim: शशि थरूर से इस कांग्रेस नेता को ही होने लगी है दिक्कत, कहा- ये तो उनका पब्लिसिटी स्टंट है

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनाये गए ऑल पार्टी डेलीगेशन में गए कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेशों में पाकिस्तान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। एक तरफ जहाँ थरूर विदेशों में पाकिस्तान की पोल खोल रहे हैं तो वहीं देश में उनकी ही पार्टी के नेता उनपर तंज कसने से बाज नहीं आ (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) रहे हैं। पता नहीं क्यों कांग्रेस के कुछ नेताओं को पाकिस्तान से क्यों प्रेम है? थरूर से चिढ़े कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि “बीजेपी के नेता जो बात नहीं कह रहे हैं, वो शशि थरूर कह रहे हैं। ये बीजेपी के सुपर प्रवक्ता हैं। ऐसा तो इस सरकार में हो रहा है कि सेना का श्रेय बीजेपी ले रही है। कांग्रेस सरकार में सेना की कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया जाता था।” उदित राज ने शशि थरूर को बीजेपी का सुपर प्रवक्ता बताते हुए कहा कि “शशि थरूर बीजेपी के सुपर प्रवक्ता हैं। जो बीजेपी नेता नहीं कह रहे हैं, यानी पीएम मोदी और सरकार के पक्ष में बोल रहे हैं, वह शशि थरूर कर रहे हैं। क्या उन्हें पता भी है कि पहले की सरकारें क्या करती थीं?” ये भारतीय सशस्त्र बलों का श्रेय ले रहे (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) हैं- उदित राज मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उदित राज ने कहा कि “ये भारतीय सशस्त्र बलों का श्रेय ले रहे (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) हैं। पहले सर्जिकल स्ट्राइक होती थी पता नहीं चलता था। ये मोदी जी जैसा नहीं कि कुछ करेंगे नहीं और प्रचार करेंगे, शेखी बघारेंगे। सेना की कार्रवाई का लाभ लेंगे।” उन्हें बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस पार्टी ने ऐसा नहीं किया और सेना की कार्रवाई को पब्लिक डिक्लेयर नहीं करती थी, लेकिन ये सेना का सारा श्रेय खुद ही ले रहे हैं। इसमें सेना का कोई सम्मान नहीं है। ये तो शशि थरूर का पब्लिसिटी स्टंट है। ये भारतीय जनता पार्टी के इस समय प्रवक्ता बन गए हैं।”  पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र को निशाना बनाकर आतंकवादी कारनामों को (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) रखा जारी  गौरतलब हो कि पनामा में एक डेलीगेशन का नेतृत्व करते हुए शशि थरूर ने कहा कि “पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र को निशाना बनाकर आतंकवादी कारनामों को जारी रखा।” इस दौरान उन्होंने आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान की घनघोर आलोचना करते हुए कहा कि “हाल के वर्षों में जो बदलाव आया है वह यह है कि आतंकवादियों को अब पता है कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) पड़ेगी।” वो यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि “हाल के वर्षों में जो बदलाव आया है, वह यह है कि आतंकवादियों को भी एहसास हो गया है कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।” थरूर ने जोर देते हुए कहा कि इस रंच मात्र भी  संदेह नहीं होना चाहिए। जब ​​पहली बार भारत ने सितंबर 2016 में उरी में सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया था। पहले से ही कुछ ऐसा था जो हमने पहले कभी नहीं किया था।” इसे भी पढ़ें:- राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप?  कारगिल युद्ध के दौरान भी भारत ने नियंत्रण रेखा नहीं की (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) थी पार  कांग्रेस सांसद ने कहा कि “कारगिल युद्ध के दौरान भी भारत ने नियंत्रण रेखा पार नहीं की (Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim) थी। हालांकि, उरी में उसने ऐसा किया और इसके बाद जनवरी 2019 में पुलवामा हमला हुआ।” उन्होंने कहा कि “इस बार हमने न केवल नियंत्रण रेखा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की और बालाकोट में आतंकवादी मुख्यालय पर हमला किया। इस बार हम उन दोनों से आगे निकल गए हैं। हम न केवल नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा से आगे निकल गए हैं। हमने नौ जगहों पर आतंकी ठिकानों, प्रशिक्षण केंद्रों और आतंकी मुख्यालयों पर हमला करके पाकिस्तान के पंजाबी गढ़ पर हमला किया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Congress Rift Over Tharoor’s Publicity Stunt Claim #ShashiTharoor #CongressRift #PublicityStunt #IndianPolitics #CongressParty #PoliticalNews

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Not Found Suitable

राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप? 

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाया है कि सरकार पिछड़े वर्गों (SC-ST-OBC) के योग्य उम्मीदवारों को शिक्षा के अवसरों से जानबूझकर दूर कर रही है। उन्होंने नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) को एक नए प्रकार का मनुवाद करार देते हुए इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया है। राहुल गांधी ने यह बयान दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में आरक्षित वर्गों के खाली पदों के मुद्दे पर दिया। उन्होंने दावा किया कि DU में 60% से ज्यादा प्रोफेसर और 30% से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर के आरक्षित पद नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) के बहाने खाली रखे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि योग्य उम्मीदवारों को ‘उपयुक्त नहीं’ बताकर उन्हें शैक्षणिक और नेतृत्व की मुख्यधारा से दूर रखने की साजिश रची जा रही है। ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बन गया मनुवाद  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट करते हुए लिखा कि नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) अब नया मनुवाद है। SC-ST-OBC के योग्य युवाओं को अयोग्य बताकर शिक्षा और नेतृत्व से दूर रखा जा रहा है। यह सामाजिक न्याय का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को समानता का सबसे बड़ा हथियार बताया था और मौजूदा सरकार उसी हथियार को कुंद करने में लगी है। उन्होंने न सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी बल्कि IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी यही पैटर्न दोहराए जाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार यह केवल नौकरी या शिक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, प्रतिनिधित्व और बराबरी की लड़ाई है। राहुल गांधी का DU दौरा और छात्रों से संवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस पहुंचे और DUSU (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन) के छात्रों से बातचीत की। यह मीटिंग DUSU अध्यक्ष के कार्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने आरक्षण, प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा की। राहुल ने कहा कि उन्होंने छात्रों से फीडबैक लिया है और अब वे मिलकर BJP-RSS के आरक्षण विरोधी एजेंडे का मुकाबला संविधान की ताकत से करेंगे। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात यूनिवर्सिटी प्रशासन और ABVP का विरोध राहुल गांधी के इस दौरे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय के अनुसार राहुल का दौरा संस्थानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। DU ने अपने बयान में कहा कि वह इस घटना की निंदा करता है और आशा करता है कि भविष्य में ऐसा न हो। राहुल गांधी जितनी देर तक  विश्वविद्यालय परिसर में थें तबतक वहां की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, जिससे एक प्रमुख छात्र संगठन का कामकाज भी प्रभावित हुआ। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने डीयू में छात्र सम्मान मार्च निकाला और DUSU कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन किया। राजनीतिक विवाद या सामाजिक विमर्श? राहुल गांधी की यह पहल एक तरफ जहां राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, वहीं यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक विमर्श को भी जन्म देती है – क्या योग्य उम्मीदवारों को सिर्फ जातिगत पूर्वग्रह के कारण अवसरों से वंचित किया जा रहा है? क्या Not Found Suitable जैसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके आरक्षित वर्गों के खिलाफ संस्थागत भेदभाव हो रहा है? इन सवालों का जवाब देना न सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि समाज के हर जागरूक नागरिक का भी कर्तव्य है। क्योंकि यह सिर्फ शिक्षा की नहीं, समान अवसर, भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है। राहुल गांधी ने Not Found Suitable को नया मनुवाद बताते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश की है। चाहे उनके बयानों को राजनीति कहें या सच की आवाज, यह तय है कि आरक्षण, प्रतिनिधित्व और समानता का मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है। और यह बहस तब तक जरूरी है, जब तक हर योग्य नागरिक को उसका हक न मिल जाए। Latest News in Hindi Today Hindi news Not Found Suitable #RahulGandhi #NotFoundSuitable #BJP #IndianPolitics #Congress

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Did Rajiv Gandhi know about his assassination

Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?: क्या सच में हो गया था पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को अपनी मौत का आभास?

आज ही के दिन 34 वर्ष पूर्व लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हो गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। हैरत की बात यह कि इस घटना से कुछ घंटे पहले ही नीना गोपाल ने राजीव गांधी का इंटरव्यू लिया था। इस दौरान उन्होंने राजीव से पूछा कि “क्या उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी खतरे में है?” इस सवाल के जवाब पर राजीव गांधी ने उल्टा पूछा कि “क्या आपने कभी गौर किया है कि दक्षिण एशिया में जब भी कोई महत्वपूर्ण नेता सत्ता पर काबिज होता है या अपने देश के लिए कुछ हासिल करने के करीब होता है, तब उसे कैसे नीचे गिराया जाता है, उस पर हमला किया जाता है, उसे मार दिया जाता है, श्रीमती इंदिरा गांधी को देखिए, शेख मुजीब, जुल्फिकार अली भुट्टो, भंडारनायके को देखिए।” नीना के मुताबिक इस इंटरव्यू के कुछ देर बाद राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी।  रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था आभास? ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या जिस तरह इंदिरा गांधी ने अपनी हत्या की आशंका जता दी थी ठीक उसी तरह क्या रजीव गाँधी को भी अपनी हत्या का आभास हो गया (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लिट्‌टे के इंटरसेप्ट किए गए कई मैसजों में राजीव गांधी को खत्म करने की बात कही गई थी। ये खुफिया इनपुट अप्रैल 1990 से मई 1991 के बीच इंटरसेप्ट किए गए थे। बता दें कि नीना गोपाल ने कर्नल हरिहरन के हवाले से अपनी किताब में लिखा है कि जब उनकी टीम ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने का संकेत देने वाला लिट्‌टे का एक कैसेट उन्हें सुनाया, तो वे सन्न रह गए थे। यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि अनहोनी होने की आशंका के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर भयावह लापरवाही बरती गई।  लिट्टे के खिलाफ सशस्त्र बलों को भेजना राजीव गाँधी को पड़ा (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) भारी दरअसल, श्रीलंका में फैले उग्रवादी विद्रोह को समाप्त करने हेतु राजीव गाँधी ने भारतीय सशस्त्र बलों को भेजा था। उनका यही कदम उनके जान की आफत (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) बना। जानकारी के मुताबिक यह कदम उठाने की सलाह कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग, सैन्य कमांडरों और खुफिया एजेंसियों ने दी थी। खैर, इस दौरान कई भारतीय सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इन सब के बावजूद लिट्टे पर काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद भारतीय सैनिकों को वापस बुला लिया गया। भले ही सैनिकों को वापस बुला लिया लेकिन तब तक राजीव गांधी लिट्टे का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके थे।  नहीं थे, सुरक्षा के पुख्ता (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) इंतजाम  गौरतलब हो कि साल 1991 में केंद्र में चंद्रशेखर सरकार के पतन के बाद मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी गई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी। चुनाव प्रचार जोरों पर थे। उन दिनों राजीव गांधी तमिलनाडु के चुनावी दौर पर थे। इस बीच 21 मई की रात चेन्नई से तकरीबन 40 किमी दूर श्रीपेरंबुदुर पहुंचे। हैरत की बात यह कि सुरक्षा के इन्तेजामत उस  तरह के नहीं थे जिस तरह के होने चाहिए थे। खैर, उन्हें पहुँचते-पहुँचते 10 बज गए थे। रात काफी हो चुकी थी, सो वो तेजी से कदम बढ़ाते हुए रेड कार्पेट से होते हुए स्टेज की तरफ बढ़ रहे थे। इस दौरान वो सभी से फूलमालाएं स्वीकार करते जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक छोटी-सी लड़की कोकिला पर गई, जो कविता सुना रही थी। उसे देख वो रुक गए तभी आत्मघाती दस्ते में शामिल धनु हाथ में चंदन की माला लेकर आगे बढ़ी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  धमाके के बाद उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) थी खैर, इस बीच उन्होंने कांस्टेबल अनुसूया को भीड़ को नियंत्रित करने का इशारा किया, लेकिन तब तक धनु राजीव के चरण स्पर्श करने का बहाना करते हुए झुकी और तभी उसने अपने शरीर से लिपटे आरडीएक्स विस्फोट से लदे डिवाइस के बटन को दबा दिया। धमाका इतना तीव्र था कि राजीव गाँधी के चिथड़े उड़  (Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death?) गए। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उनकी पहचान उनके जूते से हो हुई थी। कहते हैं बम विस्फोट में 46 साल के राजीव का शव इस कदर क्षत-विक्षत हो गया था कि डॉक्टरों ने बमुश्किल उसे रुई और पट्टियों की मदद से आकार दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Did Rajiv Gandhi Sense His Own Death? #RajivGandhi #DeathMystery #IndianPolitics #RajivAssassination #LTTE #IndiaHistory #PoliticalTruth #GandhiFamily #RajivLegacy #HistoricalFacts

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Digvijaya Singh's Confession on Babri Masjid Riots

Digvijaya Singh confession: दिग्विजय सिंह का कबूलनामा, बाबरी मस्जिद शहीद होने पर हमने करवाए दंगे?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बड़बोलेपन की वजह से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। चाहे वो 9/11 के आतंकी ओसामा को ओसामाजी कहना हो या फिर 26/11 मुंबई हमलों का मुख्य आरोपी हाफिज सईद की हाफिज साहब कहना हो। इस बार तो दिग्विजय ने एक ऐसा बयान दे दिया (Digvijaya Singh confession) है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल इस वीडियो में वो यह कहते सुने जा सकते हैं कि “बाबरी मस्जिद शहीद हुई तब हमने हिन्दू मुसलमानों को जोड़कर दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की।” दरअसल, शाजापुर के चौबदार वाडी में मुस्लिम समाज द्वारा सद्भावना सम्मेलन का कार्यक्रम रखा गया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए उनकी  जुबान फिसल गई।  हिंदू-मुसलमानों को जोड़कर हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की (Digvijaya Singh confession)- दिग्विजय सिंह सभा को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि ”बाबरी मस्जिद जब शहीद हुई थी, उस समय में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष हुआ करता था। मैंने लगभग दो हफ्ते तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के दफ्तर में रात बिताई। घर नहीं जाता था। लेकिन हिंदू-मुसलमानों को जोड़कर हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की। भोपाल में 1947 में भी ऐसे दंगा नहीं हुआ, लेकिन बाबरी मस्जिद गिरने पर दंगा (Digvijaya Singh confession) हुआ।” यहां उन्होंने दंगा फसाद रोकने की बजाय दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश कह दिया। दरअसल, दिग्विजय सिंह कहना चाहते थे कि दंगा फसाद रोकने की कोशिश की, लेकिन आदतन उनकी जुबान फिसल गई। अब कांग्रेस नेता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  इसे भी पढ़ें:–  वक्फ कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, इस बात को लेकर है विरोध मेरे बयान को तोड़ मरोड़ के पेश (Digvijaya Singh confession) किया गया- दिग्विजय सिंह View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jai.rashtranews) इस बीच वीडियो वायरल होने पर दिग्विजय सिंह ने अपने इस बयान पर कहा कि “मेरे बयान को तोड़ मरोड़ के पेश (Digvijaya Singh confession) किया गया। मेरे बयान से बीजेपी के नेताओं ने ना हटा दिया। पूरा देश जानता है, दिग्विजय सिंह दंगे के खिलाफ है। मैंने ये कहा था कि 15 दिन पीसीसी दफ्तर में सोया था। हिंदू, मुसलमानों के साथ मिलकर दंगा फसाद ना हो इसका प्रयास किया था। सिर्फ मेरे बयान से ना ही तो हटाना था।” इसके अलावा बाबरी मस्जिद को शहीद बताने वाले बयान पर दिग्विजय ने कहा कि “हां मैंने शहीद कहा है, किसी पूजास्थल को जबरदस्ती गिराओगे तो क्या कहेंगे।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के दंगे भड़काने के बयान पर मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने उन पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया। और ट्वीट करते हुए कहा कि “सुनिए दिग्विजय सिंह का कबूलनामा।” उन्होंने आगे कहा कि “बाबरी मस्जिद को शहीद कहने वाले दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने दंगे करवाए। दिग्विजय सिंह की मानसिकता हिन्दू विरोधी है। कांग्रेस ने हर समय दंगे भड़काने का काम किया है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Digvijaya Singh confession #DigvijayaSingh #BabriMasjid #RiotsConfession #IndianPolitics #CongressNews #HindutvaPolitics #BreakingNewsIndia #PoliticalScandal #AyodhyaControversy #DigvijayaStatement

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BJP-AIADMK coalition

BJP-AIADMK coalition: एनडीए हुआ और मजबूत, बीजेपी-एआईडीएमके गठबंधन का हुआ ऐलान

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को पद से हटाए जाने के बाद एआईडीएमके के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी का ऐलान भी हो (BJP-AIADMK coalition) गया है। चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गठबंधन का ऐलान किया गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव राज्य में ई. पलानीस्वामी के नेतृत्व में लड़े जाएंगे, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि “1998 से जयललिता जी और अटल जी के समय से हम मिलकर चुनाव लड़ते आए हैं। एक समय ऐसा था जब हमने 39 में से 30 लोकसभा सीटें साथ मिलकर जीती थीं।” बीजेपी और एआईडीएमके का गठबंधन सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि विश्वास और विचारधारा पर आधारित रहा है।” इस दौरान अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता और प्रधानमंत्री मोदी के बीच रिश्तों को भी याद किया और कहा कि “दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ मिलकर हमेशा तमिलनाडु के विकास के लिए काम किया है।” चुनाव के बाद बीजेपी तय करेगी कि वह सरकार में शामिल होगी या (BJP-AIADMK coalition) नहीं।  इस बीच शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि “बीजेपी चुनाव के बाद तय करेगी कि वह सरकार में शामिल होगी या (BJP-AIADMK coalition) नहीं। एआईएडीएमके ने कोई मांग नहीं रखी है और उनके आंतरिक मामलों में भाजपा का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यह गठबंधन दोनों दलों के लिए उपयोगी है और हम मिलकर चुनाव लड़ेंगे। मंत्रियों की संख्या और सीटों के बंटवारे का निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। फिलहाल एनडीए का मुख्य लक्ष्य राज्य में भ्रष्ट डीएमके सरकार को हटाना है।” यही नहीं अमित शाह ने डीएमके पर करारा हमला करते हुए कहा कि “सनातन धर्म और भाषा जैसे मुद्दे डीएमके जानबूझकर उठा रही है ताकि लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटका सके।” उन्होंने कहा कि तमिलनाडु चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार होगा और जनता इस बार विकास और पारदर्शिता को चुनेगी।” शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी और जयललिता के समय से चले आ रहे गठबंधन को याद करते हुए कहा कि “और एआईएडीएमके ने मिलकर पहले भी बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार भी जनता एनडीए को बहुमत दिलाएगी।” इसे भी पढ़ें:- काशी मेरी और मैं काशी का हूं, पीएम मोदी ने वाराणसी को दी 3880 करोड़ रुपये से अधिक की सौगात डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर (BJP-AIADMK coalition) लगाए आरोप  यही नहीं, अमित शाह ने आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि “डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर (BJP-AIADMK coalition) आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार ने अब तक करीब 39,000 करोड़ रुपए के घोटाले किए हैं, जिनमें शराब घोटाला और मनरेगा घोटाला प्रमुख है। हम डीएमके सरकार के घोटालों का खुलासा करेंगे। तमिलनाडु की जनता स्टालिन और उदयनिधि को इस भ्रष्टाचार के लिए कभी माफ नहीं करेगी।” इसके अलावा चुनाव से पहले ही अमित शाह ने इशारों इशारों में यह भी बता दिया कि तमिलनाडु का अगला BJP अध्यक्ष कौन होगा। उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसके बारे में बताया।  Latest News in Hindi Today Hindi News BJP-AIADMK coalition NDAAlliance #BJPNews #AIADMK #IndianPolitics #Election2025 #BJPAlliance

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Political switch in Maharashtra

Muslim leader leaves Congress: वक्फ बिल पास होते ही कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, महाराष्ट्र के इस बड़े मुस्लिम नेता ने छोड़ी पार्टी

संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद से बीजेपी के सहयोगी दलों में इस्तीफों का दौर जारी है। कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देन शुरू कर दिया है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी अछूती नहीं है। वक्फ संशाेधन बिल पास होने के बाद कांग्रेस का एक बड़े मुस्लिम चेहरे ने पार्टी का साथ छोड़ (Muslim leader leaves Congress) दिया है। ध्यान देने वाली बात यह कि एक तरफ कांग्रेस जहां खुद को मजबूत करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों में जोरशोर से जुटी है, तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने पार्टी के सभी पद और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अब्राहनी ने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इसके साथ ही उसकी एक प्रति मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा व सांसद गायकवाड़ को भी भेजी है। संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी छोड़ दिया था कांग्रेस का साथ (Muslim leader leaves Congress)  कांग्रेस से इस्तीफा देने के बारे में यूसुफ अब्राहनी ने बताया कि “पार्टी की बहुत बुरी हालत है। और इसके जिम्मेदार पार्टी के नेता ही है।” जानकारी के मुताबिक उन्होंने यह बात राहुल गांधी को विस्तार से बताई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे वे बहुत निराश है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे है कि जल्द ही कांग्रेस के कई और नेता पार्टी को से इस्तीफा दे सकते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा के अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी और फिर उनके बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी कांग्रेस को राम-राम बोल (Muslim leader leaves Congress) दिया था। इसे भी पढ़ें:- सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप  यूसुफ अब्राहनी राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी कर चुके हैं (Muslim leader leaves Congress) बता दें कि पेशे से वकील यूसुफ अब्राहनी कई मुस्लिम संगठनों और एसोसिएशन से भी जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वो इस्लाम जिमखाना के अध्यक्ष हैं। वो राज्य मंत्री के दर्जे के साथ म्हाडा के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। यही नहीं, वो मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अहम बात यह कि पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी छोड़ दी। हालांकि पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहनी ने अपनी भविष्य की रणनीति के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। अभी तक कुछ नहीं पता चला है कि उनकी अगली रणनीति क्या होगी। क्या वो किसी अन्य दल में शामिल होंगे या फिर राजनीति से तौबा कर लेंगे। खैर, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दिए इस्तीफा पत्र (Muslim leader leaves Congress) में उन्होंने कांग्रेस और पार्टी से मिले स्नेह के लिए धन्यवाद भी दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi News  Muslim leader leaves Congress #CongressCrisis #WaqfBill #MuslimLeaderExit #MaharashtraPolitics #PoliticalShakeup #IndianPolitics #CongressNews #WaqfControversy #PartySwitch #MinorityPolitics

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street namaz controversy

street namaz controversy: हिंदुओं से सीखें धार्मिक अनुशासन, सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कही यह बड़ी बात

इन दिनों देश में हिन्दू-मुस्लिम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। आए दिन नेतागण किसी न किसी बहाने हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को भुनाने का एक भी मौका नहीं गंवाना चाहते। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर होने वाली नमाज (street namaz controversy) को लेकर साफ़ तौर पर कहा है कि ये नहीं हो सकती है। दरअसल, समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “सड़कें चलने के लिए होती हैं और जो लोग ऐसा कह रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। प्रयागराज में 66 करोड़ लोग आए। कहीं कोई लूटपाट नहीं हुई, कहीं कोई आगजनी नहीं हुई, कहीं कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं हुई, कहीं कोई अपहरण नहीं हुआ, यही अनुशासन है, यही धार्मिक अनुशासन है। वे श्रद्धा के साथ आए, महास्नान में भाग लिया और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। त्योहार और उत्सव या ऐसे कोई भी आयोजन उदंडता का माध्यम नहीं बनने चाहिए। अगर आप सुविधा चाहते हैं, तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखें।”   नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? इस पर उन्होंने आगे कहा कि “ईद में कौन सा प्रदर्शन करेंगे? नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह और मस्जिद हैं, न कि सड़क। इसके लिए ठीक तो बोला जा रहा है। और वैसे भी मैं किसी एक वर्ग विशेष के लिए सभी को असुविधा में नहीं डाल सकता। मुझे पूरे प्रदेश के लोगों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध करानी है।” इस बीच सड़क पर नमाज की तुलना कांवड़ यात्रा से करने पर सीएम ने कहा कि “कांवड़ यात्रा से तुलना की जा रही है, कावंड़ यात्रा हरिद्वार से लेकर गाजियाबाद और एनसीआर के क्षेत्रों तक जाती है। वो सड़क पर ही चलेगी। क्या हमने कभी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को रोक, कभी भी नहीं रोक। मुहर्रम के जुलूस निकलते हैं। हां, ये जरूर कहा है कि ताजिया का साइज थोड़ा छोटा रखें क्योंकि तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। रास्ते में हाईटेंशन तार होंगे, जोकि आपके लिए बदले नहीं जाएंगे। हाईटेंशन की चपेट में आने से मर जाओगे। यही होता है, कांवड़ यात्रा में भी यही बोला जाता है कि डीजे का साइज छोटा करो, जो ऐसा नहीं करता है तो सख्ती की जाती है। कानून सभी के लिए बराबर लागू होता है। फिर कैसे तुलना की जा रही है।”  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में हो सकता है पेश, राज्यसभा में मिलेगी चुनौती  सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पूछे गए सवाल का प्रश्न का उत्तर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि “सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है। हर अच्छे काम का विरोध होता है।इसी तरह वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हंगामा हो रहा है, जो लोग इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ, क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई कल्याण किया है? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। यह किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बन गया है और सुधार समय की मांग है और हर सुधार का विरोध किया जाता है।” Latest News in Hindi Today Hindi news street namaz controversy YogiAdityanath #ReligiousDiscipline #Namaz #Hinduism #UttarPradesh #IndianPolitics #ReligiousFreedom

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Modi Successor 2029 BJP’s Next PM Fadnavis’ Big Reveal

Modi successor 2029: साल 2029 में बीजेपी जीती तो कौन होगा पीएम? देवेंद्र फडनवीस ने किया बड़ा खुलासा

संजय राउत ने दावा किया कि आरएसएस देश में राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव चाहता है। इस पर उन्होंने आगे कहा कि “मोदी शायद सितंबर में रिटायरमेंट की अर्जी देने आरएसएस मुख्यालय गए थे।” दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में 75 साल के हो जाएंगे। कहा जाता है भाजपा में 75 वर्ष के बाद किसी भी नेता को पद नहीं दिया जाता। दरअसल, 11 साल में पहली बार रविवार को पीएम मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री नागपुर के आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया था। यह दूसरा मौका था जब कोई मौजूदा पीएम आरएसएस मुख्यालय पहुंचा हो। बता दें कि इससे पहले साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी वहां गए थे। आरएसएस मुख्यालय के दौरे के बाद से संजय राउत ने मोदी के रिटायरमेंट का अंदेशा जताया था। पीएम नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल साल 2029 में पूरा करेंगे। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्‍या यह उनका आखिरी कार्यकाल (Modi successor 2029) होगा? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।  हमारे यहां जब पिताजी जिंदा हों, तो उत्तराधिकार (Modi successor 2029) की बात नहीं करते- फडणवीस  इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर चल रही अटकलों में कोई दम नहीं है। मोदी अभी कई वर्षों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। दरअसल, फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि साल 2029 में भी हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी की बात करने की कोई जरूरत नहीं है। वे हमारे नेता हैं और आगे भी रहेंगे।” इस बीच उन्होंने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि “जब नेता सक्रिय हो, तब उसके उत्तराधिकार की बात करना ठीक नहीं।” यही नहीं, फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि “हमारे यहां जब पिता जिंदा हों, तो उत्तराधिकार (Modi successor 2029) की बात नहीं करते। यह मुगल संस्कृति है, हमारी नहीं। अभी इसका समय नहीं आया।  इसे भी पढ़ें:-  मुंबई में हिंदू युवकों की पिटाई पर मचा बवाल, बजरंग दल ने दी यह चेतावनी पूरा संघ परिवार देश के नेतृत्व में बदलाव (Modi successor 2029) चाहता है-संजय राउत बता दें कि शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने पीएम के नागपुर दौरे के बाद कहा कि “वो रिटायरमेंट की और आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।” उन्होंने कयास लगाते हुए कहा कि “मुझे जितना समझ में आता है, पूरा संघ परिवार देश के नेतृत्व में बदलाव (Modi successor 2029) चाहता है। पीएम मोदी का समय खत्म हो गया है और वे (आरएसएस नेतृत्व) बदलाव चाहते हैं। वे बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहते हैं।” जिसके बाद इस बात पर बहस छिड़ गई थी कि क्या पीएम मोदी अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या नहीं?   Latest News in Hindi Today Hindi News Modi successor 2029 #ModiSuccessor2029 #DevendraFadnavis #BJPPM2029 #IndianPolitics #NarendraModi #BJPNextPM #LokSabhaElections2029 #ModiLegacy #FuturePM #PoliticalNews

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