H5N1

महामारी की आशंका: अमेरिका में H5N1 के नए मामले, दुनिया भर में चिंता

एच5एन1 (H5N1) यानी एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) वो वायरल इन्फेक्शन है, जो पक्षियों, गायों और अन्य जानवरों में सबसे पहले फैलता है। मनुष्यों में इसके फैलने की संभावना भी होती है। इसके कारण रोगी हल्की से लेकर गंभीर सांस संबंधी समस्याओं का अनुभव कर सकते हैं। अमेरिका में हाल ही में डेयरी गायों और लोगों में एच5एन1 (H5N1) इंफेक्शन के कुछ मामले सामने आएं हैं। इन मामलों के कारण इस वायरस की महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही जंगली पक्षियों और अन्य पक्षियों में भी यह फैल रहा है। यानी, यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है। आइए जानें एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) क्या है? इससे बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat): पाएं जानकारी एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) एक गंभीर समस्या है जिसके हाल ही में अमेरिका में बहुत से मामले सामने आएं हैं। यह मामले अभी डेयरी गायों और मनुष्यों में सामने आएं हैं। इसके कारण चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गयी हैं। ग्लोबल वायरस नेटवर्क (GVN) जो एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार करना है। ग्लोबल वायरस नेटवर्क ने पूरी दुनिया के देशों की सरकारों से यह निवेदन किया है कि जल्दी इस रोग को लेकर कोई बड़ा फैंसला लें ताकि इससे निपटा जा सके। इससे एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) बचा जा सकता है। आइए जानें की इस रोग के सिम्पटम्स क्या हो सकते हैं? एच5एन1 (H5N1) के सिम्पटम्स इस रोग के बारे में इन्फोर्मशन होना बेहद आवश्यक है। कुछ लोगों में एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं: क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार रोगी में नजर आने वाले एच5एन1 या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) के लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इसके लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? H1N1 से कैसे बचें? एच5एन1 (H5N1) जैसे रोग से बचना जरूरी है। इसके बचाव के तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi H5N1 #Birdflu #H5N1newthreat #AvianInfluenza #H5N1

आगे और पढ़ें
Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission

बिहार में बंपर भर्ती: बिहार में असिस्टेंट इंजीनियर के 1000+ पदों पर आवेदन शुरू

असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) एक ऐसी पोस्ट है, जिसमें टेक्निक और मैनेजमेंट स्किल की जरूरत होती है। अगर आप टेक्निकल प्रोब्लेम्स को सॉल्व करने और प्रोजेक्ट्स के विकास में रूचि रखते हैं तो असिस्टेंट इंजीनियर जॉब आपके लिए उपयुक्त रहेगी। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar Public Service Commission) ने असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) के लिए पोस्ट्स निकाली हैं। यह भर्ती 1024 पोस्ट्स के लिए की जा रही है। इन पोस्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस 30 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और इच्छुक कैंडिडेट 28 मई तक रजिस्टर कर सकते हैं। अगर आप भी अप्लाई करना चाहते हैं, तो देर न करें। आइए जानें बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के बारे में।  बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission): पाएं जानकारी इस पोस्ट्स के लिए ऑनलाइन आसानी से अप्लाई कर सकते हैं। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें। इसके लिए निम्नलिखित पोस्ट्स निकाली गई हैं: बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission): एलिजिबिलिटी इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने के लिए इच्छुक कैंडिडेट के पास सिविल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री होना जरूरी है। यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालय या एआईसीटीई द्वारा एप्रूव्ड इंस्टिट्यूट से ही की होनी चाहिए। इसके अलाई किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से नियमित रूप से की जाने वाले टेक्निकल कोर्स की डिग्री भी मान्य होगी। आयु सीमा बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 साल है जबकि अधिकतम आयु पुरुषों की 37 साल है और महिलाओं की 40 साल है। आरक्षित वर्गों को इसमें कुछ छूट दी गई है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें। इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन कैसे करें अप्लाई? बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के लिए आप इस तरह से आसानी से अप्लाई कर सकते हैं:  अगर बात की जाए असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts) की फीस के बारे में, तो जनरल कैंडिडेट के लिए यह फीस 750 रुपए है जबकि एससी, एसटी, बिहार की फेमल कैंडिडेट्स आदि के लिए यह शुक्ल केवल 200 रुपए है। अन्य कैंडिडेट्स के लिए यह शुक्ल 750 रुपए है। इच्छुक कैंडिडेट 28 मई से पहले अप्लाई करना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Public Service Commission #AssistantEngineerPosts #BiharPublicServiceCommission  #AssistantEngineer  #AssistantEngineerPostsreleasedbyBiharPublicServiceCommission

आगे और पढ़ें
Why Sindoor is Offered to Hanuman

क्यों चढ़ाया जाता है हनुमान जी को सिंदूर? जानिए त्रेता युग से जुड़ी यह अद्भुत कथा

हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी (Lord Hanuman) को बल, बुद्धि, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। वे कलियुग के सबसे जाग्रत और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। भक्तजन मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा करते हैं और उनके विग्रह पर सिंदूर चढ़ाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? यह परंपरा केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो त्रेता युग के समय की बताई जाती है। हनुमान जी और सिंदूर की कथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे और राजपाट संभाल रहे थे, उस समय एक दिन माता सीता किसी कार्य में व्यस्त थीं। तभी हनुमान जी ने जिज्ञासावश उनसे पूछा कि भगवान श्रीराम को कौन-सी चीज़ सबसे अधिक प्रिय है। माता सीता ने उत्तर दिया कि भगवान राम (Lord Rama) को किसी वस्तु से विशेष मोह नहीं है, वे सभी चीजों को समान दृष्टि से देखते हैं और सब चीज़ों से प्रसन्न हो जाते हैं। तभी हनुमान जी की दृष्टि सीता माता के मांग में लगे सिंदूर पर पड़ी। उन्होंने उत्सुकता से पूछा, “माते, आप यह सिंदूर क्यों लगाती हैं?” तब माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “यह सिंदूर मेरे सुहाग की निशानी है और इसे लगाने से प्रभु श्रीराम प्रसन्न रहते हैं।” तभी हनुमान जी (Lord Hanuman) के मन में एक विचार आया। उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और प्रभु श्रीराम के दरबार में उपस्थित हुए। उन्हें इस रूप में देखकर वहां मौजूद लोग हँसने लगे। जब भगवान राम ने इसका कारण पूछा, तो हनुमान जी ने भावुकता से उत्तर दिया—“जब माता सीता की मांग में थोड़ा-सा सिंदूर (Sindoor) देखकर आप प्रसन्न होते हैं, तो मैंने सोचा कि यदि मैं पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो आपको अत्यधिक प्रसन्नता होगी।” हनुमान जी की यह मासूम और भक्ति से भरी भावना सुनकर भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) अत्यंत प्रसन्न हुए। हनुमान जी ने इस माध्यम से अपने प्रभु के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण प्रकट किया। तभी से हनुमान जी (Lord Hanuman) को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई, जो आज भी श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक रूप में निभाई जाती है। इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने का महत्व सिंदूर मुख्य रूप से दो रंगों में उपलब्ध होता है—लाल और नारंगी। हिंदू परंपराओं में लाल सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने माथे पर लगाती हैं। वहीं नारंगी सिंदूर त्याग, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना गया है। हनुमान जी के व्यक्तित्व में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण और निष्ठा प्रमुख रूप से दिखाई देती है, इसलिए उन्हें नारंगी सिंदूर अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से हनुमान जी पर सिंदूर (Sindoor) चढ़ाता है, उसकी सभी परेशानियाँ और कष्ट संकटमोचन हनुमान दूर कर देते हैं। यह परंपरा न केवल भक्ति भाव का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाती है कि समर्पण और सेवा के माध्यम से प्रभु की कृपा प्राप्त की जा सकती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Lord Hanuman #HanumanSindoor #TretayugStory #HanumanDevotion #HinduBeliefs #SindoorSignificance #RamayanTales #HanumanBhakti #SpiritualIndia #MythologyFacts #DivineStories

आगे और पढ़ें
Sita Navami Celebration Tips

सीता नवमी 2025: घर में सुख-समृद्धि के लिए मां जानकी को अर्पित करें ये भोग

सीता नवमी (Sita Navami) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे माता सीता (Goddess Sita) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना कर उनके जीवन से सीख लेते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां जानकी को विशेष भोग अर्पित करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती। आइए जानते हैं सीता नवमी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भोग के महत्व। सीता नवमी 2025 कब है? (Sita Navami 2025 Date & Time) सीता नवमी (Sita Navami) का पर्व वर्ष 2025 में सोमवार, 5 मई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 5 मई को सुबह 7 बजकर 35 मिनट से आरंभ होकर 6 मई को सुबह 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। इस पावन अवसर पर महिलाएं सुखमय वैवाहिक जीवन और घर-परिवार में समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। सीता नवमी पर माता जानकी (Goddess Sita) की पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है। मां सीता को लगाएं ये दिव्य भोग (Sita Navami Bhog & Offerings)   चावल की खीर: सीता नवमी के शुभ पर्व पर केसर मिलाकर चावल की खीर तैयार कर माता सीता को भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य भोग से घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।   मखाने की खीर: व्रत करने वाले भक्तों के लिए मखाने की खीर एक आदर्श भोग है। इस दिन माता सीता को इसका नैवेद्य चढ़ाने से घर में अन्न और धन की वृद्धि होती है।   नारियल के लड्डू: नारियल शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। सीता माता को नारियल के लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। इनका भोग लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।   पंजीरी: पारंपरिक प्रसाद के रूप में पंजीरी सीता नवमी पर अर्पित करना अत्यंत फलदायी होता है। इससे घर में संपन्नता और सौभाग्य बना रहता है।   ऋतु फल और मेवे: सीता नवमी के अवसर पर माता सीता को ताजे मौसम के फल जैसे केला, सेब, अनार और विभिन्न प्रकार के सूखे मेवे अर्पित किए जाते हैं। यह सात्विक और पवित्र भोग न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्त को पुण्य भी प्राप्त होता है। सीता नवमी पर करें ये शुभ उपाय, मिलेगा माता सीता का आशीर्वाद इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया सीता नवमी की पूजा विधि: कैसे करें मां जानकी की आराधना सीता नवमी (Sita Navami) के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थान की सफाई कर माता सीता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। उन्हें पुष्प, अक्षत, कुमकुम और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं समर्पित करें। इसके पश्चात श्रद्धा से तैयार किया गया दिव्य भोग माता को अर्पित करें और भक्तिभाव से प्रार्थना करें। पूजा उपरांत यह प्रसाद अपने परिवारजनों व आस-पास के लोगों में वितरित करें। यह दिन माता जानकी की विशेष कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर माना जाता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Sita Navami #SitaNavami2025, #SitaNavamiBhog, #MaaSitaBlessings, #JankiPuja, #HappinessAndProsperity, #NavamiCelebrations, #RamayanFestival, #DivineOfferings, #FestiveRituals, #HinduFestivals2025

आगे और पढ़ें
Surdas poems in praise of Krishna

सूरदास जयंती 2025: भक्ति और काव्य के सच्चे साधक को श्रद्धांजलि

संत सूरदास (Surdas Jayanti), भक्ति काल के प्रमुख कवि और भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त माने जाते हैं। उनकी जयंती हर वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ सूरदास जयंती मनाई जाती है। इस विशेष अवसर पर देशभर के मंदिरों में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है, और भगवान श्रीकृष्ण (Shri Krishna) के महान भक्त संत सूरदास को श्रद्धांजलि दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण के सच्चे भक्तों को जीवन में सुख, सम्मान और प्रसिद्धि निश्चित रूप से प्राप्त होती है। सूरदास जी वैष्णव परंपरा के महान संत थे, जिन्होंने भक्ति, गीत और संगीत के माध्यम से श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति की। अपने जीवन में सूरदास जी ने कई भावपूर्ण रचनाएं कीं, जिनमें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रास लीला और वात्सल्य भाव का सुंदर चित्रण है। आज भी उनके दोहे और पद लोगों के दिलों में बसे हैं और भक्ति संगीत में नियमित रूप से गाए जाते हैं। इस जयंती पर आइए जानते हैं सूरदास जयंती 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, बन रहे योग और उनके अमर दोहे जो आज भी हमारे जीवन को प्रकाश देते हैं। सूरदास का जीवन परिचय संत सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी के अंत में माना जाता है। उनका जन्मस्थान हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सीही गांव या आगरा के पास स्थित रुनकता गांव में हुआ था। जन्म से ही दृष्टिहीन होने के बावजूद, सूरदास ने अपनी आध्यात्मिक दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन किया। उन्होंने श्री वल्लभाचार्य से दीक्षा ली और पुष्टिमार्ग के अनुयायी बने।​ सूरदास जयंती 2025 (Surdas Jayanti 2052): तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस वर्ष 1 मई को सुबह 11:23 बजे शुरू होकर 2 मई को सुबह 9:13 बजे समाप्त होगी। ऐसे में सूरदास जयंती 2 मई 2025 को मनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि 1 मई को विनायक चतुर्थी का पर्व भी रहेगा। इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया सूरदास जयंती पर बन रहे शुभ योगज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार सूरदास जयंती के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। इसके अलावा रवि योग और दुर्लभ शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन तीनों योगों में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना विशेष फलदायक मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन सूरदास जी के आराध्य श्रीकृष्ण (Shri Krishna) की पूजा करने से साधक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।  सूरदास के प्रसिद्ध दोहे नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Surdas Jayanti #SurdasJayanti2025 #SurdasPoetry #BhaktiMovement #IndianSaints #DevotionalPoet #KrishnaBhakti #SantSurdas #HinduFestivals2025 #IndianLiterature #SpiritualLegends

आगे और पढ़ें
Sawan 2025 start date

हर-हर महादेव! जानिए कब से शुरू हो रहा है सावन 2025 का पावन महीना

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन का महीना (Sawan Month) भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह महीना भक्तों के लिए भक्ति, उपवास और पूजा का विशेष समय होता है। सावन में विशेष रूप से सोमवार  (Monday) और मंगलवार को व्रत रखे जाते हैं, जिन्हें क्रमशः सावन सोमवार व्रत और मंगला गौरी व्रत कहा जाता है।​ सावन 2025 (Sawan 2025) की शुरुआत और समाप्ति ज्योतिष गणनाओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा इस वर्ष 10 जुलाई को है। इसके अगले दिन यानी 11 जुलाई से पवित्र सावन मास की शुरुआत होगी। इस महीने की पहली सावन सोमवारी का व्रत 14 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। इसके बाद दूसरी सोमवारी 21 जुलाई, तीसरी सोमवारी 28 जुलाई और चौथी व अंतिम सोमवारी 4 अगस्त को होगी। वहीं, 9 अगस्त को सावन पूर्णिमा है, जिस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। सावन सोमवार व्रत की तिथियां सावन 2025 (Sawan 2025) की शुभ शुरुआत वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार आषाढ़ पूर्णिमा गुरुवार, 10 जुलाई को पड़ेगी। इसके बाद, सावन मास (Sawan Month) की शुरुआत अगले दिन यानी 11 जुलाई से मानी जाएगी। यदि इसे आसान भाषा में समझें, तो इस साल सावन महीना 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से आरंभ होगा। आषाढ़ पूर्णिमा की तारीख 11 जुलाई की रात 2 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होकर 12 जुलाई की रात 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। सनातन परंपरा में “उदयातिथि” को मान्यता दी जाती है, इसी कारण सावन की शुरुआत 11 जुलाई से होगी। सावन सोमवार व्रत 2025 की तिथियां मंगला गौरी व्रत की तिथियां इन व्रतों के दौरान महिलाएं विशेष पूजा करती हैं और देवी पार्वती (Devi Parvati) का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत रखती हैं। ​ इसे भी पढ़ें:-  विष्णु भक्ति से मिलेगा अक्षय पुण्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और भोग का महत्व सावन महीने का महत्व सावन का महीना (Sawan Month) भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित होता है। सावन माह में शिव भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग (Shivling) की पूजा करते है। और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन में की गई पूजा और व्रत से भगवान शिव (Lord Shiva) शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।​ नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Sawan Month #Sawan2025 #ShravanMonth #SawanStartDate2025 #HarHarMahadev #LordShiva #SawanSomwar #SawanFestival #ShivaBhakti #HinduFestivals #SpiritualMonth

आगे और पढ़ें
Jyeshtha Purnima 2025

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025: जानिए व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

भारतीय पंचांग में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। हर माह की पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से शुभ और पुण्यदायी माना गया है, लेकिन ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का स्थान और भी विशिष्ट है। यह दिन न केवल व्रत और पूजा के लिए उत्तम माना जाता है, बल्कि कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए भी शुभ होता है। आइए जानते हैं, ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 (Jyeshtha Purnima 2025) में कब मनाई जाएगी, इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है। ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 की तिथि और समय वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून को प्रातः 11:35 बजे होगी और यह 11 जून को दोपहर 1:13 बजे समाप्त होगी। ऐसे में ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) का पावन पर्व 11 जून 2025 को धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन व्रत रखकर चंद्रदेव का पूजन करने से कुंडली में मौजूद चंद्र दोष का निवारण होता है। यदि जन्म पत्रिका में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या उसकी दशा का प्रभाव चल रहा हो, तो इस दिन की पूजा से उसके नकारात्मक प्रभावों में भी कमी आती है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही, इस दिन गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा को धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025: करें और न करें ये विशेष बातें ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima 2025) के दिन घर में अंधेरा नहीं रखना चाहिए, विशेष रूप से संध्या के समय। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर देवी लक्ष्मी घर में आगमन करती हैं, और वे अंधेरे स्थानों में प्रवेश नहीं करतीं।इस दिन काले वस्त्र पहनने से भी बचना चाहिए, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है, जिससे जीवन, कार्य और व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।दान और पूजा के समय भी काले रंग से जुड़े वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे चंद्रमा की शुभ स्थिति प्रभावित हो सकती है और राहु के दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं। इसलिए इस दिन हल्के और शुभ रंगों का प्रयोग करना और शुद्ध भाव से पूजा-अर्चना करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया ज्येष्ठ पूर्णिमा : करें ये शुभ कार्य इस पावन दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें या स्नान के जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय मन में गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियों का स्मरण करना अत्यंत शुभ होता है।स्नान के उपरांत घर के मंदिर में दीपक जलाएं और यदि संभव हो तो पूरे दिन व्रत का संकल्प लें।घर के देवालय में सभी देवी-देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें। इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। उनके साथ माता लक्ष्मी की भी विधिपूर्वक आराधना करें।भगवान विष्णु को भोग अर्पित करते समय ध्यान रखें कि भोग में तुलसी पत्र अवश्य हो, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु (Lord Vishnu) भोग स्वीकार नहीं करते। केवल सात्विक भोजन का ही भोग लगाना चाहिए।पूजन के पश्चात भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और माता लक्ष्मी की आरती करें और उनका ध्यान तथा नाम-स्मरण अधिक से अधिक करें। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का पूजन भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें, जिससे चंद्र दोष और अन्य ग्रहदोषों से मुक्ति प्राप्त होती है।इस पुण्य अवसर पर जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही यदि आपके आसपास गाय हो, तो उसे भोजन कराना भी अत्यंत पुण्यदायी होता है, जिससे कई प्रकार के दोषों का निवारण होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Jyeshtha Purnima 2025 #JyeshthaPurnima2025 #PurnimaVrat #HinduFestival #FullMoon2025 #PurnimaSignificance #VratDates2025 #SpiritualIndia #HinduRituals #PurnimaCelebration #ReligiousFestival

आगे और पढ़ें
World Immunization Week

World Immunization Week: इस वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक जानें बच्चों के लिए कौन सी वैक्सीन्स हैं जरूरी?

इम्यूनाइजेशन यानी प्रतिरक्षीकरण उस प्रोसेस को कहा जाता है, जिसमें वैक्सीन (Vaccine) के माध्यम से व्यक्ति किसी रोग के प्रति रेजिस्टेंस बन सकता है। यानी, इससे रोगों से बचाव में मदद मिलती है। वैक्सीन (Vaccine) से शरीर का इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट किया जा सकता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के इन्फेक्शन्स और रोगों से बचाव हो सके। हर साल 24 अप्रैल से 30 अप्रैल को वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को टीकाकरण के बारे में बताया जा सके। इससे लोगों को गंभीर बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी। आइए जानें वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में और अधिक। यह भी जानें कि बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)?  वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम  इस साल वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम है  “सभी के लिए वैक्सीनेशन (Vaccination) मानवीय रूप से संभव है’। इस थीम के माध्यम से वैक्सीनेशन (Vaccination) के महत्व और प्रयासों को हाईलाइट किया गया है। वैक्सीनेशन (Vaccination) से बीमारियों से बचाव और जीवन को बचाने में मदद मिली है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि हर व्यक्ति चाहे वो किसी भी उम्र का हो, वैक्सीनेशन (Vaccination) करा सकता है। बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? डब्ल्यूएचओ (WHO) का कहना है की हर साल अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इस दिन को मनाने का उद्देश्य है वैक्सीन (Vaccine) के इस्तेमाल को बढ़ाना देना ताकि हर उम्र के लोग बीमारियों से बच सकें। जानिए बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? जन्म के बाद शिशु के जन्म लेते ही उसे बैसिलस कैलमेट-गुएरिन, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइटिस बी बर्थ डोज दी जाती है। 6 हफ्ते की उम्र के शिशु 6  हफ्ते की उम्र के शिशु को ओरल पोलियो वैक्सीन, पेंटावेलेंट, रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन दी जाती है। 10 हफ्ते के उम्र के शिशु इस उम्र के शिशु को पेंटावलेंट की दूसरी डोज, ओरल पोलियो वैक्सीन (Vaccine) की तीसरी डोज और रोटावायरस की दूसरी डोज दी जाती है। 14 हफ्ते के उम्र के शिशु 14 हफ्ते के शिशु को पेंटावलेंट की अंतिम डोज के साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Vaccine) की डोज दी जाती है। इसके साथ ही इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज भी इसी उम्र में दी जाती है। 9-12 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला के साथ न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन का बूस्टर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस की डोज भी दी जाती है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? 16-24 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला की दूसरी डोज, जापानी इंसेफेलाइटिस की अंतिम डोज, डीपीटी (DPT) यानी डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) का बूस्टर और ओरल पोलियो वैक्सीन का बूस्टर दिया जाता है। यह तो थी बच्चों में वैक्सीन (Vaccine) की लिस्ट और वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में जानकारी। इसके साथ ही कुछ अन्य वैक्सीन्स भी हैं जो बच्चों को लगवानी चाहिए। इसके बारे में आप अपने डॉक्टर से बात करें और सलाह लें। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Immunization week #Whichvaccinesshouldchildrenget #Vaccination #vaccine #WorldImmunizationweek

आगे और पढ़ें
ACB Files Case Against Sisodia & Jain

ACB Files Case Against Sisodia & Jain : एंटी करफ्शन ब्यूरो ने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ करोड़ों रूपये के घोटाले का मामला किया दर्ज

आप आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन एक बार फिर मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। एक बार फिर उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस के एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पूर्व आप मंत्रियों मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ नया मामला दर्ज किया (ACB Files Case Against Sisodia & Jain) है। एसीबी (ACB) ने मंत्रियों के खिलाफ स्कूलों में कक्षों के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। इन पर आरोप है कि आप सरकार के दौरान इन्होने 12,000 से अधिक कक्षाओं और स्कूल भवनों के निर्माण में जरूरत से अधिक धन खर्च किए। इसमें 2000 करोड़ रुपये धन की अनियिमतता पाई गई है। बहुत मुमकिन है कि ऐसे में अब मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ फिर से नया मामला खुलने पर फिर से संकट खड़ा हो सकता है। कक्ष निर्माण बनाने की लागत करीब 5 गुना अधिक हो गई (ACB Files Case Against Sisodia & Jain) है बता दें कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान शिक्षा विभाग डिप्टी सीए्म मनीष सिसोदिया के अधीन था। यही नहीं, सत्येंद्र जैन पीडब्ल्यूडी के प्रभारी मंत्री थे, जो सरकारी एजेंसी है जो ऐसे निर्माण कार्य करती हैं। दरअसल यह मामला दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए 12,748 कक्षाओं और भवनों के निर्माण से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक निर्माण कार्य 34 ठेकेदारों को दिया गया था। उनमें से अधिकांश ठेकेदार आप पार्टी से ताल्लुक रखते हैं। एसीबी ने ये भी आरोप लगाया कि निर्माण तय समय में पूरा नहीं हुआ जिससे लागत में भारी वृद्धि भी हुई। इस पूरे मामले परएसीबी ने बताया कि “भाजपा नेताओं द्वारा कक्ष निर्माण में घोटाले की शिकायत दर्ज कराने के बाद मामले की जांच तब शुरू की गई।” बीजेपी नेताओं का आरोप था कि कक्ष निर्माण बनाने की लागत करीब 5 गुना अधिक हो गई (ACB Files Case Against Sisodia & Jain) है। ऐसे में निर्माण कार्य में धन की अनियमितता पाई गई। मामले की छानबीन शुरू की गई है।” इसे भी पढ़ें:-   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी तीनों सेनाओं को खुली छूट, पाकिस्तान का सूखा हलक मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ पहले ही शराब नीति में घोटाले के (ACB Files Case Against Sisodia & Jain) आरोप में चल रहा है केस  प्राप्त जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट में बताया गया है कि एसपीएस निर्माण की लागत 2,292 रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गई है, जो कंक्रीट से बने स्कूल भवनों के निर्माण की लागत 2044-2416 रुपये प्रति वर्ग फीट के बराबर है। यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि “नए टेंडर लाए बिना ही प्रोजेक्ट की लागत में करीब 326 करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी गई।” बता दें कि अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ पहले ही शराब नीति में घोटाले के (ACB Files Case Against Sisodia & Jain) आरोप में केस चल रहा है। फिलहाल ये तीनों ही जमानत पर रिहा हुए हैं।   Latest News in HindiToday Hindi news ACB Files Case Against Sisodia & Jain #ManishSisodia #SatyendarJain #ACB #DelhiScam #CorruptionCase #ACBAction #ScamNews #DelhiPolitics #FIR #NewsUpdate

आगे और पढ़ें
Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam

Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam: पहलगाम हमले के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी राष्ट्रवादी छवि से पाकिस्तान को औकात दिखाते हुए कही यह बड़ी बात

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से देश को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का अलग ही चेहरा देखने मिला है। मुस्लिमों की राजनीति करने के लिए जाने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी की इस हमले के बाद बतौर एक राष्ट्रवादी नेता वाली छवि बनकर (Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam) आई है। पहलगाम हमले के बाद से ओवैसी इस कदर नाराज हैं कि वो पाकिस्तान को पानी पी पीकर कोस रहे हैं। गौर करने वाली बात यह कि वो अपनी राष्ट्रवादी छवि से पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के नापाक को इरादों की पोल खोलकर रख दी है। जिस तरह से आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म और नाम पूछकर बेरहमी से मारा है। इसे लेकर ओवैसी काफी क्रोध में हैं। उन्होंने पाकिस्तान की तुलना आतंकी संगठन आईएस (इस्लामिक स्टेट) से कर दी है। गौर करने वाली बात यह कई वो न सिर्फ पाकिस्तान पर हमलावर हैं बल्कि पाकिस्तानी नेताओं के बेशर्म बयानों का करारा जवाब भी दे रहे हैं।  पाकिस्तान की भारत में हिंदू-मुसलमान में विभाजन की नापाक कोशिश को कर (Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam) दिया है नाकाम  कहने की जरूरत नहीं, जिस तरह असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान को अपने निशाने लिया है उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि उन्होंने पाकिस्तान की भारत में हिंदू-मुसलमान में विभाजन की नापाक कोशिश को नाकाम कर (Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam) दिया है। बड़ी बात तो यह कि उन्होंने अपनी राष्ट्रवादी छवि से पाकिस्तान को हैरान कर दिया है। पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ओवैसी इस तरह मुखर होकर पाकिस्तान का विरोध करेंगे। दरअसल, ओवैसी देश की मुस्लिम सियासत का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। सड़क से संसद तक वो मुसलमानों की आवाज को बुलंद करते रहते हैं। मुद्दा चाहे वो बाबरी मस्जिद का रहा हो, या फिर तीन तलाक का, या फिर मुद्दा चाहे लव जिहाद का हो या सीएए और एनआरसी का, उन्होंने हर मुद्दे पर खुलकर मुखालफत की है। उनके गुस्से को कौन भूल सकता है जब उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान बिल की कॉपी को फाड़कर अपने गुस्से का इजहार किया था।  इसे भी पढ़ें:-   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी तीनों सेनाओं को खुली छूट, पाकिस्तान का सूखा हलक राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश को कमजोर करने की कोशिशें न (Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam) होने दें कामयाब  इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि पहलगाम में जिस तरह से आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछकर 26 निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारा उसे देखकर लोगों का खून खौल रहा है। इस हमले के बाद ही ओवैसी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि “आईएसआई और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों का मकसद भारत में हिंदू-मुस्लिम विवाद कराना है। इसीलिए कश्मीर में गैर मुस्लिमों को निशाना बनाया गया।” इस बीच उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश को कमजोर करने की कोशिशें कामयाब न (Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam) होने दें।” पाकिस्तान को आडे हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “ये कुत्ते कमीने नाम और धर्म पूछकर निर्दोष लोगों को मार रहे थे, जहां इतने सारे टूरिस्ट थे, वहां सीआरपीएफ कैंप नहीं था।” उन्होंने आगे कहा कि “इन कमीनों-हरामजादों ने लोगों से उनका धर्म पूछने के बाद उन्हें गोली मार दी।” आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान हुकूमत की नाजायज औलाद बताते हुए उन्होंने कहा कि “भारत के खिलाफ पाकिस्तान लंबे समय से आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा है, लेकिन अब इसे जड़ से मिटाने का समय आ गया है। इस तरह ओवैसी ने भारत में हिंदू-मुसलमान में विभाजन की नापाक कोशिश को नाकाम करने की कवायद की और संकट की इस घड़ी में एक रहने का संदेश दिया, जो कि काबिलेतारीफ है। यही नहीं, ओवैसी भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान की पहचान से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। वो टू नेशन थ्योरी को भी खारिज कर चुके हैं।   Latest News in HindiToday Hindi news Owaisi Targets Pakistan After Pahalgam #Owaisi #PahalgamAttack #Pakistan #NationalistOwaisi #IndianPolitics #Terrorism #BreakingNews #IndiaFirst #LatestNews #OwaisiSpeech

आगे और पढ़ें
Translate »