Aurangzeb Tomb Protests

Nagpur riots 2025: रामनवमी थी निशाने पर, अब नागपुर गरजेगा देवा भाउ का बुलडोजर, दंगाइयों से की जाएगी भरपाई

17 मार्च को हुई हिंसा नागपुर में भड़की हिंसा (Nagpur riots 2025) में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ रहा। ऐसे में पुलिस ने सभी सोशल मीडिया अकाउंट को छानना और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बीच पुलिस के हाथ कई सबूत लगे हैं। इन सबूतों से ये साबित होता है कि ये हिंसा केवल नागपुर या महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि बाहर के लोग भी इसमें शामिल है। दरअसल, मामले की जांच में नागपुर साइबर पुलिस को जांच में कुछ ऐसे इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पोस्ट मिला हैं, जिसमें हिंदुस्तान के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में लिखा गया है। कुछ ऐसे भड़काऊ भाषण के पोस्ट और वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें भड़काऊ पोस्ट लिखा है। पोस्ट के मुताबिक लिखा है कि 15 मिनट दो फिर देखो हम क्या कर सकते हैं, मुसलमान जितनी जंग लड़े हैं सब जीते हैं, औरंगजेब जनाब पहले भी जिंदा थे, आज भी जिंदा है और कायामत तक जिंदा रहेंगे, 6 अप्रैल को रामनवमी है, हिंदूओं को रामनवमी तक के लिए अस्पताल भेजो जैसी भाषा लिखी गई है। यही नहीं, जांच में ये भी पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी फहीम खान ने हिन्दू धर्म के खिलाफ अपनी इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट में कई आपत्तिजनक पोस्ट पहले भी किया था।  हिंसा (Nagpur riots 2025) के बाद पहली बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहुंचे नागपुर  बता दें कि हिंसा (Nagpur riots 2025) के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहली बार नागपुर पहुंचे थे। शनिवार को उन्होंने वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया। बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नागपुर हिंसा को लेकर कहा कि “झूठा प्रचार किया गया कि कुरान की आयत जलाई गई है। झूठी अफवाह के चलते बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई। सीएम ने आगे कहा कि “हिंसा में शामिल लोगों को जब तक हम सबक नहीं सिखा देते, तब तक हम लोग शांत नहीं बैठेंगे। खासकर पुलिसकर्मियों पर जिन लोगों ने हमला किया है, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।” गौर करने वाली बात यह कि “इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा में हुई नुकसान की भरपाई दंगाइयों से की जाएगी। उनकी प्रोप्रटी भी जब्त की जाएगी।” बुलडोजर एक्शन को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “जहां पर चलाने की आवश्यकता होगी, वहां पर बुलडोजर चलाया जाएगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”  इसे भी पढ़ें:- जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार  हिंसा (Nagpur riots 2025) वाले दिन औरंगजेब की कब्र की प्रतिकृति को सुबह जलाया गया था बता दें कि हिंसा (Nagpur riots 2025) वाले दिन औरंगजेब की कब्र की प्रतिकृति को सुबह जलाया गया था। इस पर एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन इस पर कुरान की आयत लिखी होने की अफवाह फैलने के बाद लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने पथराव और आगजनी की घटना को अंजाम दिया। हिंसा दौरान पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई की। अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दंगा करने वालों की शिनाख्त कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अब तक 105 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पूरे मामले पर सीएम ने कहा कि “सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी सह-आरोपी बनाया जाएगा।” गौरतलब हो कि अब तक 68 सोशल मीडिया पोस्ट की पहचान कर उन्हें हटाया जा चुका है। महत्वपूर्ण बात यह कि नागपुर शहर सीएम फडणवीस का गृह नगर होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी है। ऐसे में नागपुर में हिंसा होना बड़ी बात है। ध्यान देने वाली बात यह कि घटना के बाद छठे दिन बाद भी शहर के 9 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Nagpur riots 2025 #NagpurRiots2025​ #AurangzebTombProtests​ #AurangzebTombProtests​ #CommunalViolence​ #CurfewInNagpur​ #PeaceInNagpur​ #NagpurClashes​ #ReligiousHarmony​#SocialMediaResponsibility​ #CommunityLeadersUnite​

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Ajit Pawar on Muslims

Ajit Pawar on Muslims: जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, उसे हम नहीं छोड़ेंगे- अजित पवार 

महाराष्ट्र में नागपुर हिंसा को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। दरअसल, पूरा का पूरा विवाद महायुति सरकार द्वारा छत्रपति संभाजीनगर से औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग के बीच शुरू हुआ था। नागपुर हिंसा को लेकर विपक्ष द्वारा राज्य सरकार की आलोचना जारी रहने के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने मुंबई में इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव और एकता पर जोर देते हए कहा कि “होली, गुड़ी पड़वा और ईद जैसे त्यौहार एकजुटता को बढ़ावा देते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि एकता ही देश की असली ताकत है।” यही नहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने मुसलमानों को (Ajit Pawar on Muslims) आश्वासन देते हुए कहा कि “आपका भाई अजित पवार आपके साथ है। जो भी मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाएगा, दो समूहों के बीच संघर्ष भड़काकर कानून व्यवस्था को बाधित करेगा, तथा कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, फिर वो चाहे कोई भी हो.. उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं किया जाएगा।” ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं- अजित पवार  अजित पवार यही नहीं रुके, (Ajit Pawar on Muslims) उन्होंने आगे कहा कि “जो कोई भी दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करेगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बीआर अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और अन्य जैसे कई महान नेताओं ने सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर सामाजिक प्रगति का मार्ग दिखाया है। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाना है। भारत एकता और विविधता का प्रतीक है। हमने अभी होली मनाई है और अब गुड़ी पड़वा और ईद आने वाली है। ये त्यौहार हमें साथ रहना सिखाते हैं। हमारी असली ताकत एकता में है।” बता दें कि रमजान इस्लामी धर्म का सबसे पवित्र महीना है। यह हिजरी (इस्लामी चंद्र कैलेंडर) के नौवें महीने में आता है। इस पवित्र अवधि के दौरान, मुसलमान भोर से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है। #WATCH | Mumbai | Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar, at an Iftar party hosted by him, says, "…India is a symbol of unity in diversity… We should not fall into the trap of any divisive forces. We have just celebrated Holi, Gudi Padwa and Eid are coming – all these festivals… pic.twitter.com/5s7hMhdGmb — ANI (@ANI) March 22, 2025 इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से  किया गया था इफ्तारी का आयोजन बता दें कि मुसलमानों के पाक माह रमज़ान पर एनसीपी अजित पवार (Ajit Pawar on Muslims) गुट की तरफ से मुंबई के इस्लाम जिम खाना में इफ्तारी का आयोजन किया गया था। इस मौके पर अजित पवार, छगन भुजबल, सना मलिक, प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, नवाब मलिक सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। इसके अलावा भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी मौजूद थे। इस दौरान अजित पवार ने यह भी कहा कि “रमजान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। और जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने की प्रेरणा देता है।” बता दें कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जलाये जाने की अफवाह के बाद मध्य नागपुर में सोमवार को तनाव उत्पन्न हो गया और पुलिस पर पथराव किया गया। इस दौरान चार लोग घायल हो गए।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ajit Pawar on Muslims #AjitPawar #MuslimsInIndia #MaharashtraPolitics #AjitPawarStatement #IndianPolitics #MuslimRights #NCP #PoliticalNews #SecularIndia #MaharashtraNews

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Gangaur Vrat 2025 Date, Significance & Puja Vidhi

गणगौर व्रत 2025: जानें तारीख, महत्व और पूजा विधि

गणगौर व्रत हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। गणगौर व्रत विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे करने से उन्हें अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं कि गणगौर व्रत 2025 में कब है, इसका क्या महत्व है और इसकी पूजा विधि क्या है। गणगौर व्रत 2025 की तारीख गणगौर व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में गणगौर व्रत 31 मार्च 2025, मंगलवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं गणगौर माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं और व्रत का पारण करती हैं। गणगौर व्रत का महत्व गणगौर व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा, कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें मनचाहा वर प्राप्त हो सके। गणगौर व्रत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह व्रत माता पार्वती के अपने मायके आगमन की कथा से जुड़ा हुआ है।  गणगौर व्रत की पूजा विधि गणगौर व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल और पवित्र मानी जाती है। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है और इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से गणगौर माता की पूजा करती हैं। आइए जानते हैं कि गणगौर व्रत की पूजा कैसे की जाती है: इसे भी पढ़ें:- भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ गणगौर उत्सव क्यों मनाया जाता है? गणगौर पूजा महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। यह देवी गौरी या माता पार्वती के प्रति सम्मान प्रकट करने और विवाह व प्रेम के आनंद को मनाने का पर्व है। खासतौर पर राजस्थान में, इसे वैवाहिक प्रेम और संपूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इस उत्सव में विवाहित और अविवाहित महिलाएं उत्साहपूर्वक भाग लेती हैं। वे शिव और पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाती हैं और श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करती हैं। महिलाएं वैवाहिक सुख और समृद्धि की कामना करते हुए उपवास रखती हैं। गणगौर के दिन पारंपरिक व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news गणगौर व्रत #GangaurVrat2025 #GangaurPuja #GangaurFestival #GangaurDate #HinduFestivals #GangaurSignificance #GangaurPooja #IndianTradition #FastingRituals #GangaurCelebration

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Gudi Padwa 2025 Date, History, Significance & Celebration

गुढी पाडवा 2025: नववर्ष की शुरुआत का पावन पर्व, जानें इसका इतिहास और महत्व

महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो हिंदू नववर्ष (Hindu New Year)  की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार न केवल नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि इसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा है। आइए जानते हैं कि गुढी पाडवा क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास क्या है और इसका क्या महत्व है। गुढी पाडवा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4:27 बजे शुरू होकर 30 मार्च को दोपहर 12:49 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) का पर्व 30 मार्च को मनाया जाएगा। गुढी पाडवा पर विशेष योगों का संयोग गुढी पाडवा (Gudi Padwa) के दिन इंद्र योग बन रहा है, जो शाम 5:54 बजे तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं और ब्रह्म देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो 30 मार्च को शाम 4:35 बजे से शुरू होकर 31 मार्च की सुबह 6:12 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अलावा गुढी पाडवा के दिन पंचक का प्रभाव सुबह 6:13 बजे से शाम 4:35 बजे तक रहेगा। साथ ही, इस दिन बव, बालव और कौलव करण भी बन रहे हैं, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना देते हैं। गुढी पाडवा का इतिहास गुढी पाडवा (Gudi Padwa) दो शब्दों से मिलकर बना है—’गुड़ी’ का अर्थ ध्वज (फहराया जाने वाला पताका) है, जबकि ‘पड़वा’ संस्कृत शब्द ‘प्रतिपदा’ से लिया गया है, जो चंद्र मास के पहले दिन को दर्शाता है। गुढी पाडवा (Gudi Padwa) का इतिहास बहुत पुराना है और यह त्योहार कई ऐतिहासिक एवं पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। रामायण से संबंधित एक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण को पराजित कर अयोध्या वापसी की थी। अयोध्या वासियों ने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और इसी के साथ नए वर्ष की शुरुआत हुई। इसके अलावा, यह त्योहार शालिवाहन शक के प्रारंभ का प्रतीक भी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन सम्राट शालिवाहन ने अपने शत्रुओं को पराजित कर नए साम्राज्य की स्थापना की थी। वहीं, हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़ी पड़वा के दिन ही भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए इसे नए साल (New Year) की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। इसे भी पढ़ें:-  भगवान विट्ठल की दिव्य धाम, जहां पीएम मोदी भी हो चुके हैं दर्शनार्थ गुढी पाडवा कैसे मनाया जाता है? इस दिन की शुरुआत पारंपरिक स्नान और पूजा-अर्चना से होती है। लोग सुबह जल्दी उठकर अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और घर के दरवाजे पर विशेष गुड़ी ध्वज स्थापित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह ध्वज समृद्धि का प्रतीक है और बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाता है। गुढी  ध्वज को रंगीन रेशमी दुपट्टे से बनाया जाता है, जिसे बांस की छड़ी पर बांधा जाता है। इसके ऊपरी सिरे पर नीम के पत्ते, आम्र पुष्प और शक्कर की माला (साखर गाठी) लगाई जाती है। इसके साथ ही, उल्टे रखे कलश को इस ध्वज पर स्थापित किया जाता है, जो विजय का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद, इस गुड़ी को घर के बाहर ऊंचे स्थान पर फहराया जाता है। परंपरागत रूप से, इस दिन लोग विशेष व्यंजन तैयार करते हैं, जिनमें कड़वे नीम के पत्ते और मीठे गुड़ का प्रयोग किया जाता है, जो जीवन में सुख-दुख के संतुलन का प्रतीक होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Gudi Padwa #GudiPadwa2025 #HinduNewYear #FestivalsOfIndia #GudiPadwaCelebration #MaharashtrianFestival #ShubhMuhurat #GudiPadwaSignificance #NewYearFestival #GudiPadwaTradition #GudiPadwaHistory

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Trump Executive Order Causes 5.32 Lakh Homeless Crisis

Trump executive order: ट्रंप के इस फरमान से 5.32 लाख लोग हुए बेघर 

जब से अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से वह देश में रह रहे अवैध प्रवासियों को निकालने में लगे हुए हैं। एक के बाद एक वो चौंकाने वाले फैसले कर रहे हैं। अपने इन्हीं फैसलों में वह अमेरिका के भीतर अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ पहले ही अभियान चला चुके हैं। राष्ट्रपति ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ अभियान तेज (Trump executive order) किया है। इस सिलसिले में उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों के हजारों लोगों को पकड़कर उनके देश भेजने का काम किया है। इस सभी कार्रवाई को उनकी सरकार अमेरिका को फिर से महान बनाने की रणनीति के लिए जरूरी बता रही है। इस पूरे मामले पर उनका कहना है कि “बाहरी लोगों ने अमेरिकियों का हक मार लिया है और इस कारण अमेरिका में अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। “ ट्रंप के इस फैसले से तकरीबन 5,32,000 लोग (Trump executive order) प्रभावित होंगे हालिया लिए फैसले में अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने कहा है कि “वह क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के लाखों लोगों से कानूनी सुरक्षा छीन लेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इससे तकरीबन 5,32,000 लोग प्रभावित (Trump executive order) होंगे। उन्हें महीने भर के भीतर देश छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, यह फैसला उन लोगों पर लागू होगा, जो अक्टूबर साल 2022 के बाद अमेरिका आए थे। जानकारी के लिए बता दें कि ये लोग वित्तीय सहायकों के साथ आए थे और उन्हें अमेरिका में दो साल तक रहने और काम करने की अनुमति मिली थी। इस मामले पर होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि “इन लोगों का कानूनी दर्जा 24 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। इसके बाद फेडरल रजिस्टर में यह नोटिस छपने के 30 दिन बाद इनको देश छोड़ना पड़ेगा। कहने की जरूरत नहीं यह नई नीति खास तौरपर उन लोगों पर असर डालेगी जो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं और ह्यूमैनिटेरियन पैरोल प्रोग्राम के तहत आए थे। बता दें कि यह प्रोग्राम पहले ट्रंप प्रशासन ने खत्म किया था, क्योंकि उनका मानना था कि “इसका गलत इस्तेमाल हो रहा था।” ध्यान देने वाली बात यह कि यह कानूनी तरीका लंबे समय से उन लोगों को अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने की इजाजत देता था, जिनके देशों में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता थी।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे बता दें कि अपने चुनाव अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि वह अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद अब आप्रवासियों के लिए उन्होंने कानूनी रास्ते भी बंद करने शुरू कर दिए हैं। इस नए आदेश से पहले, इस प्रोग्राम के लाभार्थी अपने पैरोल की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे, लेकिन प्रशासन ने उनके शरण, वीजा या अन्य अनुरोधों को प्रोसेस करना बंद कर दिया। हलाँकि इस फैसले को पहले ही संघीय अदालतों में चुनौती दी जा चुकी है। कुछ अमेरिकी नागरिकों और आप्रवासियों के समूह ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। दरअसल, वे ह्यूमैनिटेरियन पैरोल को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। विदित हो कि बाइडन प्रशासन ने इन चार देशों से हर महीने 30,000 लोगों को दो साल के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी थी, साथ में काम करने का अधिकार भी दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump executive order #TrumpExecutiveOrder #USHomelessCrisis #TrumpPolicyImpact #HomelessnessSurge #PoliticalDebate #USHousingCrisis #TrumpNews #PolicyEffects #BreakingNews #USPolitics

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Mystery of the Split Shivling – Ancient Mythological Story

दो भागों में विभाजित शिवलिंग की बड़ी अद्भुत है पौराणिक कहानी

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव मंदिर अपनी विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग दुनिया में सबसे प्राचीन शिवलिंगों में से एक है। इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहां का शिवलिंग दो भागों में विभाजित है, जिसमें एक हिस्सा मां पार्वती का प्रतीक माना जाता है और दूसरा भगवान शिव (Lord Shiva) का। आइए, जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा। युद्ध की शुरुआत की पौराणिक कथा शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। दोनों स्वयं को सर्वोच्च मानते हुए एक-दूसरे का अपमान करने लगे। जब यह विवाद बढ़ने लगा और युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई, तब दोनों ने अपने दिव्यास्त्र निकाल लिए। यदि ये अस्त्र चलाए जाते, तो संपूर्ण सृष्टि प्रलय में समा जाती। इस संकट से जगत की रक्षा करने के लिए भगवान शिव (Lord Shiva) ने अपनी माया रची। अचानक दोनों देवताओं के बीच एक अग्निमय लिंग प्रकट हुआ, जिसकी ज्वालाएं आकाश तक फैल गईं। इस दृश्य को देखकर ब्रह्मा और विष्णु आश्चर्यचकित रह गए और उस लिंग के रहस्य को जानने का प्रयास करने लगे। भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) ने उस लिंग का ऊपरी सिरा खोजने के लिए आकाश की ओर उड़ान भरी, जबकि भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने उसका आधार खोजने के लिए धरती के नीचे जाना शुरू किया। लाखों वर्षों तक प्रयास करने के बाद भी दोनों देवता लिंग का आदि या अंत नहीं खोज पाए। थक-हारकर वे वापस उसी स्थान पर लौट आए, जहां उन्होंने इस दिव्य लिंग को देखा था। वहां उन्हें अचानक “ॐ” की पावन ध्वनि सुनाई देने लगी। इस दिव्य ध्वनि को सुनकर वे समझ गए कि यह कोई अलौकिक शक्ति है। तब दोनों ने इस शक्ति की आराधना करनी शुरू कर दी। भगवान शिव (Lord Shiva) उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर लिंग से प्रकट हुए और कहा कि वे दोनों ही समान रूप से पूज्यनीय हैं, इसलिए व्यर्थ में श्रेष्ठता का विवाद न करें। उन्होंने दोनों देवताओं को सद्बुद्धि का आशीर्वाद दिया और पुनः शिवलिंग के रूप में उसी स्थान पर स्थापित हो गए। इसी कारण शिवलिंग की पूजा का महत्व बढ़ गया। इसे भी पढ़ें:- 22 या 23 मार्च, कब है यह शुभ तिथि? जानें पूजा विधि और महत्व काठगढ़ महादेव शिवलिंग की अनोखी मान्यता कालांतर में यह दिव्य शिवलिंग काठगढ़ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसकी अनोखी विशेषता यह है कि इसके दो भागों के बीच की दूरी समय के साथ घटती-बढ़ती रहती है। गर्मियों के दौरान यह दो अलग भागों में विभक्त हो जाता है, जबकि सर्दियों में पुनः जुड़कर एकाकार रूप धारण कर लेता है। ईशान संहिता के अनुसार, यह शिवलिंग फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात प्रकट हुआ था। चूंकि भगवान शिव का यह दिव्य लिंग शिवरात्रि के दिन प्रकट हुआ था, इसलिए यह मान्यता प्रचलित है कि इसकी संरचना चंद्रमा की कलाओं के अनुसार प्रभावित होती है। जैसे-जैसे चंद्रमा घटता-बढ़ता है, वैसे ही शिवलिंग के दो भाग भी एक-दूसरे के करीब आते और दूर जाते हैं। शिवरात्रि के पावन दिन यह दोनों भाग एकाकार हो जाते हैं, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #ShivlingMystery #ShivlingHistory #MythologicalStory #LordShiva #AncientLegends #HinduMythology #DivineMiracle #ShivaTemple #SacredStories #SpiritualHeritage

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Mango

डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए आम से जुड़ी जरूरी जानकारी

आम जिसे फलों का राजा कहा जाता है। यह न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में पसंद किया जाता है। इसकी मीठास और स्वाद के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है और इसके अनेक स्वास्थ्य लाभ भी हैं। आम का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि यह हमारे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। इस लेख में हम आम के लाभ, इसके पोषक तत्वों और खासकर डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए इसके लाभों के बारे में चर्चा करेंगे। आम में मौजूद पोषक तत्व आम में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस (USDA) के अनुसार 165 ग्राम आम में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं: कैलोरी: 99प्रोटीन: 1.4 ग्रामफैट: 0.6 ग्रामकार्बोहाइड्रेट्स: 25 ग्रामशुगर: 22.5 ग्रामफाइबर: 2.6 ग्रामविटामिन C: 67%कॉपर: 20%फोलेट: 18%विटामिन A: 10%विटामिन E: 10%पोटैशियम: 6%ये सभी तत्व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होते हैं। हालांकि, आम का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक सेवन से शारीरिक समस्याएँ हो सकती हैं। गर्मियों में आम के लाभ गर्मियों में आम का सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, आम शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है और लू या अत्यधिक गर्मी से बचाव करता है। आम का जूस शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और शरीर का तापमान कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, अगर बुखार हो, तो कच्चे आम को उबालकर शरीर पर लगाने से तापमान में कमी आ सकती है। आम का सेवन कैसे करें कच्चा आम: गर्मियों में कच्चे आम का सेवन विशेष रूप से किया जाता है। कच्चे आम को भूनकर उसमें नमक और भुने जीरे का पाउडर डालकर शिकंजी बनाया जा सकता है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।पका हुआ आम: पके आम का सेवन ताजे रूप में किया जा सकता है, या इसे दूध और ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर स्मूदी बनाई जा सकती है। डायबिटीज पेशेंट के लिए आम डायबिटीज (Diabetics) पेशेंट के लिए आम का सेवन एक भ्रमपूर्ण विषय रहा है, क्योंकि आम में शुगर की मात्रा अधिक होती है। लेकिन हार्टलैंड इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड एजुकेशन द्वारा किए गए एक शोध में यह पाया गया कि संतुलित मात्रा में आम का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। शोध में यह भी सामने आया कि आम में मौजूद फाइबर और मैंगिफेरिन डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को आम का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। हार्ट पेशेंट के लिए आम आम में पोटैशियम और मैग्नेशियम जैसे तत्व होते हैं, जो दिल और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखते हैं। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, आम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से मैंगिफेरिन, हृदय की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल स्तर को संतुलित रखने और हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। हालांकि, हार्ट पेशेंट को आम का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। इसे भी पढ़ें: पाचन को सही बनाए रखने के साथ ही यह हैं बेल के 7 हेल्थ बेनेफिट्स आम से जुड़ी कुछ खास जानकारियाँ आम न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभ भी अद्वितीय हैं। यह हमें विभिन्न पोषक तत्व प्रदान करता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक हैं। गर्मी के मौसम में आम का सेवन शरीर को ठंडक प्रदान करता है और लू से बचाता है। डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए भी आम का सेवन संतुलित मात्रा में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर यह सेवन करना जरूरी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi  Depression in people who sleep late at night#Mango #Mangobenefits #diabetics #heartpatients

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BJP MLA Suspended

BJP MLA Suspended: कर्नाटक विधानसभा से BJP के 18 विधायक क्यों किये गए निलंबित?

कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) से BJP के 18 विधायकों (BJP MLA Suspended) को निलंबित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष, यूटी खादर ने शुक्रवार को हनी ट्रैप (Honey Trap) मामलों के संबंध में हंगामा करने और सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के कारण इन विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने का फैसला लिया है। हनी ट्रैप (Honey Trap) मामले की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की मांग विपक्षी नेताओं ने कर्नाटक सरकार से कहा था कि राज्य के एक मंत्री और अन्य राजनेताओं से जुड़े कथित ‘हनी ट्रैप’ मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। शुक्रवार को बीजेपी विधायकों (BJP MLA) ने विधानसभा में कागज फाड़कर और वेल के पास आकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। मंत्री एचके पाटिल द्वारा विधेयक पेश कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल (HK Patil) ने इस मामले में कार्यवाही को बाधित करने के लिए 18 बीजेपी विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने वाला एक विधेयक विधानसभा में पेश किया। यह विधेयक पारित कर दिया गया और निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई। कर्नाटक का ‘हनी ट्रैप’ मामला कर्नाटक में हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले (Honey Trap Case) ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी। यह मामला तब सामने आया जब कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना ने विधानसभा में खुलासा किया कि वह खुद हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार होने से बच गए, लेकिन राज्य के 48 अन्य नेताओं, विधायकों, और यहां तक कि केंद्रीय नेताओं के भी इस जाल में फंसने की संभावना जताई। इस खुलासे ने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी को एक गंभीर विवाद में घसीट लिया है। सदन में बीजेपी विधायक द्वारा मामले का उठाना 20 मार्च 2025 को कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) में बजट सत्र (Budget Session) के दौरान बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हनी ट्रैप की घटनाएं बढ़ रही हैं और सहकारिता मंत्री राजन्ना को भी निशाना बनाया। इसके जवाब में मंत्री राजन्ना ने स्वीकार किया कि उनके खिलाफ हनी ट्रैप की कोशिश की गई थी, और यह समस्या केवल उनके तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक अब पेन ड्राइव और सीडी का कारखाना बन चुका है। मेरे पास जानकारी है कि 48 लोग, जिनमें विधायक, केंद्रीय नेता, और जज भी शामिल हैं, इस जाल में फंस चुके हैं।” इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग मंत्री जारकीहोली द्वारा हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश का स्वीकार करना इसके बाद राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “यह सच है कि एक मंत्री को हनी ट्रैप (Honey Trap) में फंसाने की कोशिश की गई थी। यह दो बार हुआ, लेकिन दोनों बार यह प्रयास असफल रहे। कर्नाटक में हनी ट्रैप कोई नई बात नहीं है, यह पिछले 20 सालों से चल रहा है। कुछ लोग इसे राजनीति में निवेश के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।” जारकीहोली ने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित मंत्री को पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए ताकि इस मामले के पीछे के लोग पकड़े जा सकें। कर्नाटक का यह हनी ट्रैप मामला (Honey Trap Case) राजनीति में नया मोड़ ले चुका है और राज्य की सियासी सरगर्मियों को और तेज कर दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। Latest News in Hindi Today Hindi news BJP MLAs Suspended #BJPMLA #HoneyTrapCase #KarnatakaAssembly

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Grok AI

एलन मस्क के ग्रोक एआई पर विवाद: अनहिंज्ड मोड की सच्चाई

आजकल एआई चैटबॉट (Chatbot) बेहद प्रचलित हैं, जो किसी भी सवाल का जवाब कुछ ही पलों में दे सकते हैं। यह एक कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जिसे मनुष्यों के साथ बातचीत करने के लिए बनाया गया है। इस प्रोग्राम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और नेचरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग यानी एनएलपी के इस्तेमाल करके बनाया गया है। ग्रोक एआई (Grok AI)  एक ऐसा ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट (Chatbot) है, जिसे एलन मस्क की कंपनी xAI कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। यह चैटबॉट आजकल अनहिंज्ड मोड (Unhinged mode) के कारण चर्चा में है। आइए जानें ग्रोक एआई (Grok AI) का अनहिंज्ड मोड (Unhinged mode) के बारे में और जानते हैं कि क्या है इससे जुड़ा पूरा मामला? ग्रोक एआई (Grok AI) का अनहिंज्ड मोड क्यों बना हुआ है चर्चा का विषय? एआई चैटबॉट ग्रोक एआई (Grok AI) प्लेटफॉर्म X का चैटबॉट (Chatbot) है, अक्सर अपनी आपत्तिजनक भाषा, नकारात्मक प्रतिक्रिया और गोपनीयता की चिंता के कारण आलोचना का सामना करता रहता है। हाल ही में भारत में भी यह जांच का विषय बना हुआ है। क्योंकि, यह टूल हिंदी स्लैंग और गाली-गलौच वाली भाषा का इस्तेमाल करता है। यही कारण है कि आईटी मिनिस्ट्री इस पर खास नजर रखे हुए है। दूसरे चैटबॉट जैसे चैटजी चैटजीपीटी, गूगल जेमिनाइ आदि कभी भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करते, जो उचित न हों लेकिन वहीं दूसरी तरफ ग्रोक एआई (Grok AI) अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है। इसके कारण अक्सर इसकी आलोचना होती है। ग्रोक एआई का अनहिंज्ड मोड (Unhinged mode) ऐसा भी माना गया है कि यह चैटबॉट (Chatbot) यूजर्स के सवालों का जवाब देने के लिए दो मोड्स का इस्तेमाल करता है। एक है रेगुलर मोड और दूसरा अनहिंज्ड मोड (Unhinged mode)। रेगुलर मोड सामान्य भाषा में जवाब देता है यानी अगर यूजर कोई सीधा उत्तर पूछता है, तो यह चैटबॉट सीधा और स्पष्ट उत्तर देता है। लेकिन, अनहिंज्ड मोड (Unhinged mode) बिना फिल्टर के जवाब देता है जो यूजर को असहज महसूस करा सकता है। क्या है पूरा मामला? ग्रोक एआई (Grok AI) से जुड़ा एक मामला तब चर्चा में आया जब इसके बारे में भारत में एक यूजर ने कुछ पोस्ट किया। यूजर ने जब इस एआई टूल से कोई सामान्य सवाल पुछा तो उसने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। यही नहीं उसने ऐसे हिंदी स्लैंग और शब्दों का इस्तेमाल किया, जो यूजर्स को हैरान कर देने वाले थे। यह भी पाया गया है कि ग्रोक एआई (Grok AI) गुस्से में इंसानों तक तरह व्यवहार करता है। इस समस्या के बारे में भारत सरकार X के अधिकारीयों से बात कर रही है और उनसे इसके बारे में सवाल-जवाब कर रही है। इसे भी पढ़ें: गेमिंग की दुनिया में क्रांति: 30,000 रुपये से कम में बेहतरीन स्मार्टफोन ग्रोक एआई के बारे में जानें और अधिक जैसा कि पहले ही बताया गया है कि ग्रोक एआई, (Grok AI) एक चैटबॉट (Chatbot)  है, जिसे एलन मस्क की कंपनी xAI कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह इंटरनेट पर ट्रेंडिंग लैंग्वेज और स्लैंग जैसी जानकारियों को समझता है और उसी अंदाज में जवाब देता है। हालांकि, इसी वजह से इसके जवाब कभी-कभी अनफिलटर्ड या आपत्तिजनक भी हो सकते हैं। इस मामले में भारत सरकार (Indian Government) ने X को नोटिस भेजा है और एआई चैटबॉट्स के कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही पर जवाब मांगा है। यही नहीं सरकार ने इस बारे में कानूनी नोटिस भी भेजा है। सरकार चाहती है कि यह चैटबॉट भारत की भाषा में गलत, और असभ्य बातों को न फैलाएं। लेकिन, X का दावा है कि सरकार कानून के मुतबिक बिना कानूनी प्रक्रिया के सीधे कंटेंट को सेंसर कर सकती है, जो फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का उल्लंघन है। Latest News in Hindi Today Hindi Grok AI #Chatbot #Unhingedmode #GrokAI #AIchatbot

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Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict

Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग

किसी महिला को गलत तरीके से पकड़ना और पजामा का नाड़ा तोड़ना, बलात्कार के अपराध के बराबर नहीं है। ये शर्मनाक बात किसी नेता-अभिनेता या समाजसेवक ने नहीं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने अपने फैसले में कही है। गौरतलब हो कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि “लड़की को गलत तरीके से पकड़ना और उसके पजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार नहीं है।” हाई कोर्ट जज के इस फैसले के बाद से देश की महिलाओं में रोष व्याप्त है। इस पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) देते हुए कहा कि “ऐसे फैसलों से समाज में गलत संदेश जाएगा।” उन्होंने इस फैसले को शर्मनाक और बिल्कुल गलत बताया है। यही नहीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की लड़की से जुड़ा है। साल 2021 में दो लोग पवन और आकाश ने 11 वर्षीय लड़की पर हमला किया था। आरोपियों ने उसको गलत तरीके से पकड़ा, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया और उसे एक पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया था। इस बीच जब उसकी चीखें सुनकर लोग वहां पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग निकले। इस तरह वो दुष्कर्म का शिकार होते-होते बच गयी थी।  यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict)  बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग के स्तन का स्पर्श और वस्त्र का नाड़ा तोड़ने को दुष्कर्म का प्रयास न मानते हुए गंभीर यौन उत्पीड़न माना था। दरअसल, न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने कासगंज के स्पेशल जज (पोक्सो कोर्ट) का समन आदेश संशोधित कर नए सिरे से समन करने का आदेश दिया है। आपने आदेश में हाई कोर्ट ने निर्देशित किया कि आरोपितों के खिलाफ धारा 354-बी आइपीसी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के मामूली आरोप के साथ पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाया जाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद संसद के बाहर संवाददाताओं से हुई बातचीत में स्वाति मालीवाल ने कोर्ट के फैसले पर आपत्ति (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) जताते हुए कहा कि “यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है। वे समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं कि एक छोटी लड़की के साथ इस तरह की हरकत की जा सकती है और फिर भी इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा?” इसे भी पढ़ें:- नक्सल के खिलाफ सुरक्षा बलों की नई रणनीति कामयाब, 80 दिन में किए 113 नक्सली ढेर सुप्रीम कोर्ट इस तरह के न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) करे सख्त कार्रवाई  यही नहीं, स्वाति मालीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप करने और ऐसी न्यायिक फैसलों के खिलाफ (Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict) सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।” गौर करने वाली बात यह कि स्वाति मालीवाल ही नहीं, बल्कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी सुप्रीम कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है। लोकसभा के बाहर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि “वह फैसले से पूरी तरह असहमत हैं। और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने का आह्वान किया।” इस बीच उन्होंने कहा कि “मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं और सुप्रीम कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह के फैसले के लिए कोई जगह नहीं है। कहीं न कहीं इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हम इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Swati Maliwal Slams Allahabad HC Verdict #SwatiMaliwal #AllahabadHC #SupremeCourt #LegalVerdict #JusticeForWomen #IndianJudiciary #CourtRuling #LegalRights #BreakingNews #SupremeCourtIntervention

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