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Lucknow cafe owner death case: Shraddha Dubey समेत 3 आरोपी 10 दिन की judicial custody में, phones forensic जांच के लिए भेजे गए

लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026: Lucknow के cafe owner Shiva Sharma की मौत के मामले में model और social media influencer Shraddha Dubey, उनकी बहन Rashmi Dubey और driver Danish को court ने 10 दिन की judicial custody में भेज दिया है। तीनों को Nagpur से गिरफ्तार कर transit remand पर Lucknow लाया गया था। Court ने क्या आदेश दिया? तीनों आरोपियों को Additional Chief Judicial Magistrate Balwan Kumar Bharti की court में पेश किया गया, जहां उन्हें 10 दिन की judicial custody में भेजने का आदेश दिया गया। Police आगे की investigation और evidence verification जारी रखेगी। Shraddha से घंटों पूछताछ Court में पेश करने से पहले Lucknow Police ने Shraddha, उनकी बहन और driver से अलग-अलग questioning की। Hindustan Times के मुताबिक investigators ने करीब 120 सवालों की सूची तैयार की थी ताकि घटना से पहले और बाद के घटनाक्रम को समझा जा सके। Mobile phones forensic lab भेजे गए Police ने आरोपियों के mobile phones और अन्य electronic items forensic examination के लिए भेज दिए हैं। Investigators calls, messages, location history और digital communication से घटना की sequence और possible involvement समझने की कोशिश कर रहे हैं। Shiva Sharma की मौत कैसे हुई? 28 वर्षीय Shiva Sharma की 9 October को Lucknow के Balu Adda इलाके में एक apartment की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हुई थी। उनकी मां ने Shraddha और अन्य लोगों पर बेटे को assault और torture करने के बाद नीचे फेंकने का आरोप लगाया और murder FIR दर्ज कराई। ये आरोप अभी court में साबित होना बाकी हैं। Nagpur से हुई गिरफ्तारी Shraddha, Rashmi और Danish करीब 11 दिनों तक फरार रहने के बाद Nagpur में पकड़े गए। Police ने Uttar Pradesh, Nepal border और Maharashtra तक उनके movement को track किया था। Shraddha ने क्या दावा किया? Shraddha इससे पहले social media पर अपने खिलाफ आरोपों से इनकार कर चुकी हैं और दावा किया था कि Shiva की मौत suicide थी। Police फिलहाल murder complaint, digital evidence, CCTV footage और witness statements सहित सभी angles की जांच कर रही है। जय राष्ट्र न्यूज़

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स्वतंत्र भारद्वाज को Delhi High Court से राहत नहीं, गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका खारिज; Trial Court जाने को कहा

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026: जंतर-मंतर पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को Delhi High Court से राहत नहीं मिली है। High Court ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली habeas corpus petition खारिज करते हुए कहा कि वह इस समय judicial orders के तहत custody में हैं और अपनी गिरफ्तारी या remand को appropriate trial court के सामने चुनौती दे सकते हैं। 7 सितंबर को High Court ने खारिज की Plea Justice Navin Chawla और Justice Ravinder Dudeja की division bench ने 7 सितंबर को भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई की। Petition में दावा किया गया था कि Delhi Police द्वारा की गई गिरफ्तारी illegal थी और उन्हें custody से release किया जाना चाहिए। हालांकि High Court ने habeas corpus के जरिए राहत देने से इनकार कर दिया। Court ने क्यों नहीं दी राहत? Delhi Police की ओर से court को बताया गया कि भारद्वाज को पहले एक दिन की police custody मिली थी, उसके बाद magistrate ने judicial custody का आदेश दिया। Court ने कहा कि जब किसी व्यक्ति की custody सक्षम अदालत के judicial order के तहत जारी है, तो उसे habeas corpus के जरिए सीधे चुनौती देने के बजाय उस remand order के खिलाफ उपलब्ध कानूनी remedy अपनानी होगी। अब Trial Court में Challenge कर सकते हैं Arrest High Court ने भारद्वाज को यह liberty दी कि वह अपनी गिरफ्तारी या judicial remand को appropriate trial court में challenge कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि High Court ने गिरफ्तारी को merits पर पूरी तरह सही ठहरा दिया है; court ने मुख्य रूप से habeas corpus petition को इस stage पर maintainable relief नहीं माना। 14 दिन की Judicial Custody मामले की सुनवाई के दौरान prosecution ने High Court को बताया कि संबंधित अदालत ने भारद्वाज को 14 दिन की judicial custody में भेज दिया है। इसलिए फिलहाल वह judicial custody में रहेंगे, जब तक lower court से कोई अलग relief नहीं मिलती। Bulandshahr से हुई थी गिरफ्तारी Delhi Police ने स्वतंत्र भारद्वाज को Uttar Pradesh के Bulandshahr से हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें Delhi लाया गया और court के सामने पेश किया गया। उनकी गिरफ्तारी जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े उस मामले में हुई जिसमें उन पर एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट का आरोप है। Podcast Video के बाद बढ़ा था मामला मामला उस समय फिर सुर्खियों में आया जब भारद्वाज का एक podcast clip वायरल हुआ। उसमें उन्होंने कथित हमले को लेकर विवादित दावे किए थे। इसके बाद CJP नेताओं और समर्थकों ने Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। SC/ST Act की धाराएं भी जोड़ी गईं Delhi Police ने संबंधित FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और criminal intimidation से जुड़े provisions भी जोड़े हैं। इसके अलावा छात्र कार्यकर्ता की ओर से कथित धमकियों और morphed images से जुड़े आरोपों पर अलग POCSO case भी दर्ज किया गया है। ये सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अब Lower Court की प्रक्रिया अहम High Court से habeas corpus relief नहीं मिलने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की legal strategy अब trial court पर केंद्रित होगी। वह arrest, remand या bail से जुड़ी appropriate applications वहां दाखिल कर सकते हैं। फिलहाल मामले में आरोपों की अंतिम सत्यता तय नहीं हुई है और आगे की स्थिति judicial proceedings पर निर्भर करेगी। source – Delhi High Court / LiveLaw / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

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