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SIR के खिलाफ प्रकाश राज ने जताया विरोध, बोले- ‘हर योग्य मतदाता का नाम सूची में रहना चाहिए’

बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का विरोध करते हुए प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। 1 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ मार्च में प्रकाश राज समेत कई नागरिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। मार्च के दौरान बेंगलुरु पुलिस ने प्रकाश राज और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। ‘SIR वापस लिया जाए’- प्रकाश राज प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि SIR प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिक संगठनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। अभिनेता किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ‘Election Commission Chalo’ अभियान का किया था ऐलान प्रकाश राज ने 25 अगस्त को ही घोषणा कर दी थी कि नागरिक संगठनों के साथ 1 सितंबर को बेंगलुरु में Election Commission Chalo अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी समय है तो इतनी बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि इससे आम मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रकाश राज का नाम भी ‘Shifted’ कैटेगरी में आया था इस विवाद से पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम ‘permanently shifted’ कैटेगरी में इसलिए रखा गया क्योंकि Booth Level Officer की जांच में वह पिछले चार वर्षों से अपने पुराने पंजीकृत पते पर नहीं रह रहे थे। चुनाव अधिकारी ने कहा कि प्रकाश राज का नाम पहले शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय था और वह अपने वर्तमान पते पर Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। एक करोड़ से ज्यादा नाम ASDDO कैटेगरी में कर्नाटक में SIR के दौरान चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता शामिल रहे। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उन्हें नोटिस और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का किया बचाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत आयोजित किए जाते हैं और राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों के प्रतिनिधि विभिन्न चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। BJP और JD(S) भी उठा चुके हैं सवाल कर्नाटक में SIR को लेकर केवल प्रकाश राज या कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। BJP और JD(S) ने भी जुलाई में चुनाव आयोग के सामने प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। दोनों दलों ने कुछ क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब में कहा था कि SIR चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के अनुसार किया जा रहा है। SIR को लेकर जारी है राजनीतिक और कानूनी बहस कर्नाटक में SIR को लेकर मतदाता सूची से संभावित नाम हटने, दस्तावेज सत्यापन और प्रक्रिया की समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बहस चल रही है। प्रकाश राज और प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन किया जा रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत रत्न प्रो. CNR Rao का नाम SIR Discrepancy List में, Officials बोले—कोई Notice जारी नहीं हुआ

बेंगलुरु, 10 सितंबर 2026: भारत रत्न से सम्मानित प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर C. N. R. Rao का नाम Karnataka में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान voter-list की “discrepancy elector” report में सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। शुरुआती reports में दावा किया गया कि 92 वर्षीय वैज्ञानिक को अपनी पहचान साबित करने के लिए notice भेजा गया है, लेकिन election officials ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्हें कोई formal notice जारी या serve नहीं किया गया है। ‘Self-Name Mismatch’ के कारण Flag हुआ नाम Chief Electoral Officer, Karnataka की online discrepancy report में Prof. Rao का नाम “self-name mismatch” category में दिखाई दिया। Bengaluru Urban District Election Officer Maheshwar Rao के अनुसार 2002 की electoral roll में Rao का नाम अलग तरीके से दर्ज था, जबकि मौजूदा voter list में उनकी entry अलग नाम के साथ मौजूद है। इसी mismatch के कारण system ने उनका record flag किया। 2002 और Current Electoral Roll में अलग Entry Official clarification के मुताबिक 2002 की voter list में Prof. Rao की entry Malleshwaram Assembly constituency में “Rama” नाम से दर्ज थी। वर्तमान electoral roll में उनका नाम “Prof. C. N. Rao M” के रूप में दर्ज है। इसी अंतर के कारण discrepancy सामने आई। BLO ने नहीं जारी किया Notice Election officials के अनुसार discrepancy सामने आने के बाद Booth Level Officer (BLO) ने Prof. Rao को notice जारी करने के बजाय सीधे उनका नाम final electoral roll में शामिल करने की recommendation की। District Election Officer ने स्पष्ट कहा कि Prof. Rao को SIR प्रक्रिया के संबंध में कोई formal notice नहीं दिया गया है। CNR Rao के Office ने भी Notice मिलने से किया इनकार Prof. Rao के office ने भी कहा कि उन्हें notice मिलने की जानकारी नहीं है। उनके assistant Chandrashekar ने The Indian Express को बताया कि registered mobile number या email पर भी किसी notice या alert की जानकारी नहीं मिली है। शुरुआती Reports से क्यों हुआ Confusion? 9 सितंबर को कई media reports में दावा किया गया था कि Prof. Rao के नाम में spelling mismatch के कारण उन्हें hearing के लिए बुलाया गया है। कुछ reports ने current voter entry में “Prof” और “Proff” जैसे spelling difference का भी जिक्र किया था। बाद में authorities की clarification आने के बाद साफ हुआ कि system में discrepancy दिखाई दी थी, लेकिन notice formally serve नहीं किया गया। 43 लाख Voters के लिए Generate हुए हैं Notices The Indian Express के मुताबिक Karnataka में SIR exercise के दौरान करीब 43 लाख voters ऐसे हैं जिनके records में discrepancies के कारण notices generate हुए हैं। जिन voters को actual notice मिलता है, उन्हें final electoral roll में नाम बनाए रखने के लिए relevant documents देकर verification कराना पड़ सकता है। Final electoral roll अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में प्रकाशित होने की संभावना है। CNR Rao कौन हैं? Prof. C. N. R. Rao भारत के सबसे प्रतिष्ठित scientists में शामिल हैं और solid-state तथा structural chemistry के क्षेत्र में उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्हें 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वह यह सम्मान पाने वाले देश के चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल हैं। आज की Fresh Update क्या है? इस मामले की 10 सितंबर की प्रमुख fresh update यही है कि election authorities ने उन reports को स्पष्ट रूप से खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि Prof. CNR Rao को अपनी पहचान साबित करने के लिए notice दिया गया है। उनका नाम discrepancy list में जरूर था, लेकिन अधिकारियों के अनुसार उनका नाम final voter list में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। source – The Indian Express / PTI / Election Officials जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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