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US-Iran तनाव और बढ़ा: Trump बोले, Iran के Pickaxe Mountain पर जल्द हमला कर सकता है अमेरिका

वॉशिंगटन, 5 सितंबर 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक और बड़ा बयान दिया है। Trump ने कहा कि अमेरिका ईरान के अत्यधिक सुरक्षित Pickaxe Mountain nuclear site को “बहुत जल्द” निशाना बना सकता है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच एक और बड़े military escalation की आशंका बढ़ गई है। Natanz के पास है Pickaxe Mountain Pickaxe Mountain ईरान के पहले से क्षतिग्रस्त Natanz uranium enrichment facility के पास स्थित है। Reuters के मुताबिक यह एक heavily fortified site है, जहां पहाड़ के भीतर गहराई में दो tunnel complexes मौजूद हैं। इसी वजह से यह ईरान के nuclear infrastructure से जुड़ी बेहद संवेदनशील जगह मानी जा रही है। Trump बोले- बहुत जल्द हो सकता है हमला White House के Oval Office में reporters से बातचीत के दौरान Trump ने कहा कि अमेरिका Pickaxe Mountain को जल्द निशाना बना सकता है। हालांकि उन्होंने संभावित हमले की कोई निश्चित तारीख या operational details नहीं बताईं। US-Iran के बीच पहले से जारी हैं हमले यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान पर नए air strikes किए हैं और Tehran ने भी जवाबी हमले किए हैं। ईरान ने गुरुवार को अमेरिकी सहयोगी Kuwait को भी निशाना बनाया था। इससे Gulf region में तनाव लगातार बना हुआ है। Trump ने संघर्ष को बताया ‘Military Conflict’ Trump ने मौजूदा लड़ाई को full-scale war कहने से परहेज करते हुए इसे “military conflict” बताया। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए “small potatoes” भी कहा। वहीं Vice President JD Vance ने भी इससे एक दिन पहले कहा था कि वह मौजूदा स्थिति को युद्ध नहीं कहेंगे। अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत Associated Press के अनुसार फरवरी से जारी US-Iran confrontation में अब तक 18 अमेरिकी service members की मौत हो चुकी है और अमेरिकी taxpayers पर इसकी लागत 37.5 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद Trump का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के nuclear programme को कमजोर किया है। Nuclear programme बना विवाद का केंद्र Trump ने दोहराया कि अमेरिका ईरान को nuclear weapon हासिल नहीं करने देगा। Pickaxe Mountain को लेकर उनकी नई चेतावनी इसी wider nuclear dispute के बीच आई है। किसी भी नए strike से Middle East में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ सकता है। source – Reuters / Associated Pressजय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों और होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाते हुए नए हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों में किया गया था। क्या है ताज़ा घटनाक्रम? अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ताज़ा सैन्य अभियान में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल ठिकानों और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों की निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। होरमुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है? होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल और गैस निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऊर्जा बाजार पर असर तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता देखी गई। विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं या जहाजरानी प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इसी आशंका के चलते ऊर्जा बाजार और निवेशक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लगातार बढ़ता है, तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक व्यापार, समुद्री परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। भारत पर संभावित प्रभाव भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों, आयात लागत और शिपिंग पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल भारत सरकार ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर तत्काल किसी व्यवधान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों की राय अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है। यदि सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी रहते हैं, तो क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक हो सकता है। उनका मानना है कि तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक वार्ता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होगा। निष्कर्ष अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और अन्य देशों की प्रतिक्रिया से स्थिति की दिशा तय होगी। Source: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM), अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां और आधिकारिक बयान। Original Report: उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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