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Putin ने भारत को बताया दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल, Multipolar World में India की बढ़ती भूमिका पर जोर

मॉस्को/नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल बताते हुए बदलती वैश्विक व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका पर जोर दिया है। भारत की आर्थिक ताकत, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती है। रूस लंबे समय से भारत, चीन और अन्य उभरती शक्तियों की भागीदारी वाले बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) की वकालत करता रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वैश्विक निर्णयों में किसी एक शक्ति या पश्चिमी देशों के समूह के बजाय कई प्रमुख देशों की भूमिका को महत्व देना है। भारत को प्रमुख वैश्विक शक्ति क्यों माना जाता है? भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल आबादी, रक्षा क्षमताएं, रणनीतिक स्थिति और स्वतंत्र विदेश नीति उसकी वैश्विक अहमियत को मजबूत करती हैं। रूस ने विभिन्न अवसरों पर भारत की स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका की सराहना की है। मोदी-पुतिन संबंधों का भी जिक्र भारत और रूस के संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संवाद महत्वपूर्ण रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में पुतिन ने पहले भी कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं और उनके पास समाधान की दिशा में अच्छे विचार हैं। BRICS में भारत की अहम भूमिका भारत, रूस, चीन और ब्राजील मूल BRIC समूह के संस्थापक सदस्य रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह BRICS बना और बाद में इसका विस्तार भी हुआ। आज BRICS वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत इस समूह में एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी रही है। दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी संवाद और समन्वय करते हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा का भी समर्थन किया है। ‘चार प्रमुख शक्तियों’ वाले दावे पर सावधानी सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में पुतिन के बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है कि भारत दुनिया की “चार सबसे बड़ी शक्तियों” में शामिल है। हालांकि, इस सटीक शब्दावली की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। इसलिए “चार प्रमुख शक्तियों” वाले कथन को पुतिन का प्रत्यक्ष और सत्यापित उद्धरण मानने से पहले आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट से इसकी पुष्टि करना जरूरी है। Source – The Indian Express, India Today, Carnegie Endowment, BRICS coverage जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का बड़ा दावा—“मोदी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में”, ED-CBI और विदेश मंत्रालय के अफसरों का भी किया जिक्र

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और अंदरूनी जानकारी साझा कर रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, इन अधिकारियों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विदेश मंत्रालय से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह बयान 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। राहुल गांधी ने क्या कहा? Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और लगातार जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अधिकारियों की ओर से नियमित रूप से संदेश और इनपुट मिल रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अब तक कोई सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। ED, CBI और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का जिक्र राहुल गांधी ने कहा कि उनके संपर्क में रहने वाले अधिकारियों में Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI) और Ministry of External Affairs (MEA) से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन अधिकारियों ने किस तरह की जानकारी साझा की है या वे किन विभागों में कार्यरत हैं। इसलिए इस दावे को फिलहाल कांग्रेस नेता के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है। CEC और ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच आया बयान यह बयान उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जिसमें राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप भी लगाया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं राहुल गांधी के 200 अधिकारियों के संपर्क में होने संबंधी दावे को लेकर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों के नाम, साझा की गई जानकारी और संपर्क की प्रकृति का विवरण भी सामने नहीं आया है। ऐसे में इस बयान को एक राजनीतिक दावा मानना जरूरी है, जिसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अहम होगी। स्रोत – The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-कनाडा संबंधों में नई तेजी, मोदी और कार्नी के बीच व्यापार के साथ रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर चर्चा

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रक्षा सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ वर्षों के राजनयिक तनाव के बाद दोनों देश अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बातचीत के एजेंडे में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। इससे पहले भारत और कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर सहमत हुए थे। इसके तहत रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा जाने की योजना है। दोनों नेताओं ने प्रस्तावित यात्रा से पहले संपर्क बनाए रखने और उच्चस्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। CEPA वार्ता जल्द पूरी करने पर जोर मोदी और कार्नी ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर चल रही बातचीत को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देना है। समझौते पर प्रगति से कारोबार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक साझेदारी के नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि, वार्ता पूरी होने और समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री सहयोग पर भी ध्यान भारत और कनाडा के बीच रक्षा साझेदारी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल हैं। कनाडा ने अपने रक्षा क्षेत्र में साझेदारियों का विस्तार करने और भारत के साथ रक्षा उद्योग से जुड़े व्यावसायिक संबंध बढ़ाने में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से रणनीतिक संवाद को व्यापक बनाने का अवसर मिल सकता है। राजनयिक तनाव के बाद संबंध सुधारने की कोशिश भारत और कनाडा के संबंध वर्ष 2023 में गंभीर राजनयिक तनाव से गुजरे थे। इसके बाद वर्ष 2025 से दोनों देशों ने उच्चायुक्तों की वापसी और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत के माध्यम से संबंध सुधारने की दिशा में कदम उठाए। मोदी और कार्नी के बीच मौजूदा बातचीत इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग और प्रस्तावित उच्चस्तरीय यात्रा पर होने वाली प्रगति से यह तय होगा कि दोनों देश अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। स्रोत: रॉयटर्स, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी ने executive public office में 25 साल पूरे किए, BJP ने देशभर में कार्यक्रम शुरू किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 7 अक्टूबर 2026 को executive public office में लगातार 25 साल पूरे कर लिए। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था और इसके बाद मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सत्ता के शीर्ष कार्यकारी पदों पर बने रहे। इस अवसर पर BJP ने देशभर में विशेष कार्यक्रम, exhibitions और outreach campaigns शुरू किए। 7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। यहीं से उनके executive public office का सफर शुरू हुआ, जो बाद में गुजरात की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा। गुजरात के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मोदी ने गुजरात में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और कई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। उनका Gujarat tenure infrastructure, industrial investment, governance reforms और political centralisation को लेकर लगातार चर्चा में रहा। 2014 में बने प्रधानमंत्री 2014 के लोकसभा चुनाव में BJP ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसके बाद मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और राष्ट्रीय राजनीति में उनका नया दौर शुरू हुआ। 2019 और 2024 में भी सत्ता बरकरार 2019 में BJP ने और बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। 2024 में BJP अपने दम पर बहुमत से पीछे रही, लेकिन NDA गठबंधन ने सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। Cabinet ने पास किया विशेष resolution 25 साल पूरे होने के अवसर पर Union Cabinet ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर पर एक विशेष resolution पास किया। Resolution में उनके governance model, policy initiatives और public service tenure का उल्लेख किया गया। BJP ने देशभर में शुरू किए कार्यक्रम BJP ने इस milestone को लेकर देशभर में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें exhibitions, public meetings, service activities, digital campaigns और मोदी सरकार की योजनाओं से जुड़ी outreach शामिल है। ‘25 Years of Public Service’ campaign BJP ने इस अवसर को “25 Years of Public Service” के तौर पर project किया है। पार्टी मोदी के Gujarat model से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं तक के सफर को लोगों के सामने रखने की कोशिश कर रही है। विकास और welfare schemes पर जोर BJP के कार्यक्रमों में infrastructure, digital governance, DBT, UPI, housing, sanitation और welfare schemes को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार इन योजनाओं को governance continuity और policy execution से जोड़ रही है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल विपक्षी दलों ने इस milestone पर अलग रुख अपनाया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल Modi सरकार की economic policies, unemployment, institutional independence और federal relations को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। BJP के लिए बड़ा political milestone नरेंद्र मोदी का 25 साल का लगातार executive tenure BJP के लिए बड़ा राजनीतिक milestone माना जा रहा है। भारत की contemporary politics में इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे कार्यकारी पदों पर बने रहना बेहद असाधारण माना जाता है। 2029 से पहले political positioning पर नजर यह milestone ऐसे समय आया है जब 2029 Lok Sabha election की राजनीतिक positioning भी धीरे-धीरे तेज हो रही है। BJP मोदी के लंबे governance record को continuity और stability के narrative से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष accountability और performance को लेकर चुनौती देने की तैयारी में है। source – India Today / The Indian Express / Hindustan Times / BJP जय राष्ट्र न्यूज़

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‘बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक आतंक को मिला करारा जवाब’—PM मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ आतंकी कार्रवाई होने पर उसका जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की। सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी लॉन्च पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उन्होंने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि उस कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारत की नई counter-terrorism approach का उदाहरण पेश किया। बालाकोट से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक दशक में बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की नीति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी भारत की तरफ आंख उठाते हैं तो उन्हें “करारा जवाब” दिया जाएगा। यह बयान भारत की मौजूदा आतंकवाद विरोधी नीति के संदर्भ में दिया गया। 2019 में हुई थी बालाकोट एयर स्ट्राइक फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में कार्रवाई की थी। भारत ने उस समय कहा था कि इस कार्रवाई में आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधन में बालाकोट का उल्लेख सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के साथ किया। ऑपरेशन सिंदूर को बताया नई नीति का हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में एक नया मानक बता चुके हैं। उनके मुताबिक भारत पर आतंकी हमला होने की स्थिति में जवाब भारत अपनी शर्तों और अपने समय के अनुसार देगा। उन्होंने आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले ढांचे के खिलाफ सख्त रुख की बात भी दोहराई। आतंकवाद पर Zero-Tolerance Policy की बात ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance Policy के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को अधिक स्पष्ट और जवाबी कार्रवाई केंद्रित बनाया है। दिल्ली और मुंबई आतंकी हमलों को भी किया याद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 13 सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और उसी वर्ष हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का सामना करता रहा है और इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति मजबूत की है। सेना के साहस की की सराहना प्रधानमंत्री ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए भारतीय सेना के जवानों के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की और मिशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे। ऑपरेशन सिंदूर पर पहले भी दे चुके हैं बयान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई बार बयान दे चुके हैं। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा है। उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई के संदर्भ में भी कहा था कि आतंकवाद से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का संदेश प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को जोड़ते हुए सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति को दोहराया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ Zero-Tolerance के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। source – Prime Minister of India / Press Information Bureau जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदीजी देश के लिए जीते हैं, आज तक एक भी दिन छुट्टी नहीं ली” — रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: BJP के वरिष्ठ नेता और Patna Sahib से सांसद रविशंकर प्रसाद ने Prime Minister Narendra Modi की कार्यशैली और public service की तारीफ करते हुए कहा कि “मोदीजी देश के लिए जीते हैं और उन्होंने आज तक एक भी दिन छुट्टी नहीं ली।” यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब BJP प्रधानमंत्री मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने को लेकर ‘Seva Sankalp Abhiyan’ की तैयारी कर रही है। मोदी के नेतृत्व की तारीफ रविशंकर प्रसाद हाल के दिनों में लगातार PM Modi के नेतृत्व और उनकी सरकार की उपलब्धियों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते रहे हैं। BRICS Summit के दौरान भी उन्होंने कहा था कि Modi के नेतृत्व में India ‘Fragile Five’ की स्थिति से निकलकर दुनिया की top economies में शामिल हुआ और BRICS में एक मजबूत आर्थिक शक्ति के तौर पर उभरा है। ‘एक दिन भी छुट्टी नहीं’ के दावे का क्या आधार? PM Modi के छुट्टी नहीं लेने का दावा पहले भी BJP नेताओं की ओर से किया जाता रहा है। 2023 में PMO के RTI response में कहा गया था कि प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद Narendra Modi ने कोई leave avail नहीं की और प्रधानमंत्री को हर समय duty पर माना जाता है। वहीं बाद में Home Minister Amit Shah ने भी सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि Modi ने 2001 से एक भी दिन छुट्टी नहीं ली और लगातार लोगों के लिए काम किया है। 25 साल की Political Journey पर BJP का Campaign Narendra Modi ने 7 October 2001 को Gujarat के Chief Minister के रूप में पद संभाला था। BJP इस साल उनके government head के रूप में 25 साल पूरे होने के मौके पर nationwide ‘Seva Sankalp Abhiyan’ शुरू करने जा रही है। Campaign 17 September, Modi के birthday से शुरू होगा और इसमें blood donation, cleanliness drives, youth outreach और welfare schemes से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। BJP Public Service को बनाएगी मुख्य मुद्दा Party का कहना है कि campaign के जरिए Modi की Gujarat CM से Prime Minister तक की यात्रा और पिछले 25 वर्षों के development तथा welfare initiatives को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। रविशंकर प्रसाद का बयान भी इसी narrative को आगे बढ़ाता है, जिसमें BJP प्रधानमंत्री की लगातार काम करने वाली image और public service को प्रमुखता दे रही है। source – PMO RTI Response / PIB / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Russia-Ukraine शांति प्रयासों में भारत की बड़ी भूमिका क्यों जरूरी—Moscow से Kyiv तक Diplomacy पर नई बहस

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: Russia-Ukraine war को खत्म करने की नई diplomatic कोशिशों के बीच भारत की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi की Vladimir Putin से बातचीत, विदेश मंत्री S. Jaishankar की Kyiv यात्रा और Moscow तथा Kyiv दोनों के साथ लगातार संपर्क ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि क्या भारत दोनों पक्षों के बीच meaningful dialogue आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। Moscow और Kyiv दोनों तक भारत की सीधी पहुंच भारत की सबसे बड़ी diplomatic strength यह है कि उसके Russia और Ukraine दोनों के साथ working relations बने हुए हैं। Jaishankar ने हाल में स्पष्ट कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और ऐसे ideas तलाश रहा है जो conflict को कम करने या अंततः समाप्त करने में मदद कर सकें। Kyiv में उन्होंने President Volodymyr Zelenskyy से मुलाकात कर भारत की ओर से किसी भी उपयोगी भूमिका के लिए तैयार रहने की बात भी कही। Modi ने Putin से कहा—युद्ध को खत्म करने की दिशा में बढ़ना होगा 31 अगस्त को Bishkek में SCO summit के दौरान PM Narendra Modi ने Russian President Vladimir Putin से कहा कि लगातार युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है और दुनिया को hostilities खत्म करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। Modi ने यह भी दोहराया कि भारत हर credible peace effort का समर्थन करेगा। US ने भी फिर तेज की Peace Diplomacy इस समय भारत अकेला देश नहीं है जो diplomatic रास्ता तलाश रहा है। अमेरिकी envoys Steve Witkoff और Jared Kushner ने Moscow में Putin से बातचीत करने के बाद Kyiv जाकर Zelenskyy से मुलाकात की है। US negotiators ने जल्द नई trilateral talks की उम्मीद जताई है, हालांकि अभी तक कोई निर्णायक breakthrough नहीं हुआ है। ऐसे में भारत क्यों हो सकता है अहम? भारत पश्चिमी देशों की तरह Ukraine का military ally नहीं है और Russia के खिलाफ sanctions regime का हिस्सा भी नहीं है। साथ ही New Delhi ने Ukraine की territorial integrity और dialogue-diplomacy की जरूरत पर लगातार जोर दिया है। इसी strategic balance के कारण भारत उन चुनिंदा बड़े देशों में है जो Moscow और Kyiv—दोनों से उच्च स्तर पर बातचीत कर सकता है। सिर्फ Ceasefire नहीं, Confidence-Building Measures भी जरूरी तत्काल comprehensive peace agreement मुश्किल हो सकता है क्योंकि Russia और Ukraine के बीच territory, Donbas और security guarantees जैसे मूल मुद्दों पर अभी बड़ा अंतर है। ऐसे में शुरुआती कदम के तौर पर civilian infrastructure, energy facilities और Black Sea commercial shipping को हमलों से बचाने जैसे confidence-building measures आगे बढ़ाए जा सकते हैं। आज के Indian Express editorial ने भी भारत से ऐसे practical measures के लिए अधिक सक्रिय प्रयास करने की वकालत की है। आगामी BRICS Summit बन सकता है बड़ा मंच भारत के सामने आगामी BRICS summit भी एक diplomatic opportunity हो सकता है। Russia के President Vladimir Putin और China के President Xi Jinping के summit में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में New Delhi ceasefire और confidence-building measures पर broader international consensus तैयार करने की कोशिश कर सकता है। भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं भारत की भूमिका आसान नहीं होगी। Russia और Ukraine अभी भी कई core issues पर दूर हैं। Russia अपनी शर्तों पर settlement चाहता है, जबकि Kyiv territory और security guarantees को लेकर समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। दूसरी ओर भारत की Russian oil purchases और Moscow के साथ पुराने strategic संबंधों को लेकर पश्चिम और Ukraine में समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। Mediator नहीं, Facilitator की भूमिका ज्यादा व्यावहारिक फिलहाल भारत को औपचारिक mediator कहना जल्दबाजी होगी। न Russia और न Ukraine ने भारत को formal mediator नियुक्त किया है। लेकिन दोनों से संवाद बनाए रखने वाला एक facilitator बनकर New Delhi proposals, back-channel communication और confidence-building initiatives को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है। यह भूमिका भारत की मौजूदा diplomatic position के ज्यादा करीब है। युद्ध जितना लंबा, दुनिया पर उतना ज्यादा असर Russia-Ukraine conflict अब पांचवें वर्ष में है। इसका असर केवल battlefield तक सीमित नहीं है; food, fuel, fertiliser और global supply chains पर भी इसका दबाव पड़ा है। Jaishankar ने हाल में कहा कि ऐसे युद्धों में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता और हर अतिरिक्त दिन अधिक मौत, तबाही और आर्थिक नुकसान लेकर आता है। भारत के लिए यही वह समय है जब Moscow और Kyiv दोनों तक अपनी diplomatic access का उपयोग केवल संदेश पहुंचाने के बजाय ठोस confidence-building proposals आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि अंतिम peace settlement रूस और यूक्रेन को ही स्वीकार करना होगा, New Delhi बातचीत की राह आसान करने वाले देशों में महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। source – The Indian Express / Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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PM Modi ने तेज सुधारों का दिया संकेत, कहा- भारत की ‘Reform Express’ और तेजी से आगे बढ़ेगी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की रफ्तार और तेज करने का संकेत दिया है। Economic Times World Leaders Forum 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में सरकार की ‘Reform Express’ और अधिक गति से आगे बढ़ेगी। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों को लगातार आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरकार युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए लगातार काम करती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण है। ‘Reform Express’ और तेजी से आगे बढ़ेगी अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान में अगली पीढ़ी के सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें कारोबार करना आसान हो और आम नागरिकों के जीवन में भी सुधार आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार Ease of Living और Ease of Doing Business दोनों क्षेत्रों में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और नागरिकों के बीच संबंध शक के बजाय भरोसे पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सुधारों की यह प्रक्रिया और तेज होगी और सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी। ‘Prohibited Unless Permitted’ से बदल रहा नियमों का नजरिया प्रधानमंत्री मोदी ने देश की नियामक व्यवस्था में बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले नियमों को लेकर सोच ‘Prohibited Unless Permitted’ यानी अनुमति मिलने तक किसी गतिविधि को प्रतिबंधित मानने जैसी थी। सरकार अब इसे बदलकर ‘Permitted Unless Prohibited’ की दिशा में ले जा रही है। इसका अर्थ है कि जो काम कानूनन प्रतिबंधित नहीं हैं, उन्हें करने के लिए कारोबारियों और नागरिकों को अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े। पीएम मोदी ने Jan Vishwas जैसे कदमों, पुराने कानूनों को हटाने और कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार नागरिकों और उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करने की दिशा में काम कर रही है। उत्पादन बढ़ाने वालों को अब प्रोत्साहन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की औद्योगिक नीति में आए बदलाव को समझाते हुए पुराने दौर और वर्तमान व्यवस्था की तुलना की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब निर्धारित सीमा से ज्यादा उत्पादन करने वाली कंपनियों को दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री ने इसे ‘Production Linked Punishment’ की सोच बताया। उन्होंने इसकी तुलना मौजूदा Production Linked Incentive (PLI) व्यवस्था से की, जिसके तहत अधिक उत्पादन और विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया जाता है। पीएम मोदी के मुताबिक सरकार का नजरिया उद्योगों को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने में सक्षम बनाने का है। दुनिया भारत को ‘Bright Spot’ के रूप में देख रही: PM Modi प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया कई तरह की अनिश्चितताओं और अविश्वास के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के रणनीतिक इस्तेमाल और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भी दुनिया भारत को विकास और उम्मीद के एक मजबूत केंद्र के रूप में देख रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता देश की बड़ी ताकत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। विकसित भारत के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों पर जोर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए सात महत्वपूर्ण क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, लॉजिस्टिक्स, डिफेंस, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा सॉफ्ट पावर शामिल हैं। प्रधानमंत्री का कहना है कि इन क्षेत्रों में सुधार और निवेश भारत को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत की मजबूती से दुनिया को भी मिलेगी स्थिरता पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत जितना स्थिर और सुरक्षित होगा, दुनिया को स्थिरता देने की उसकी क्षमता उतनी ही मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं, नारी शक्ति, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के हित में लगातार काम करती रहेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुधारों की रफ्तार को और तेज किया जाएगा। प्रधानमंत्री के इस बयान को सरकार की आने वाली आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में केंद्र सरकार किन क्षेत्रों में नए सुधारों और नीतिगत बदलावों की घोषणा करती है। स्रोत – प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), द इंडियन एक्सप्रेस, द इकोनॉमिक टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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तारिक रहमान की भारत यात्रा पर बांग्लादेश की शर्त, शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर ढाका का दबाव

नई दिल्ली/ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से पहले दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल बनाने की जरूरत बताई है और इसी संदर्भ में भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। ढाका ने क्या कहा? बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता AKM शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के अधिकारी पिछले कई सप्ताह से तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर संपर्क में हैं। हालांकि, ढाका का कहना है कि यात्रा के लिए एक “अनुकूल माहौल” तैयार किया जाना जरूरी है। बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण संबंधी अपने अनुरोध पर जल्द कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा ढाका ने भारत में मौजूद अन्य कथित फरार आरोपियों को भी सौंपने की मांग की है। शेख हसीना का मुद्दा क्यों बना अहम? शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की और भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। भारत को बांग्लादेश की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध मिल चुका है और भारतीय पक्ष ने कहा है कि मामले की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है। तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा तारिक रहमान की भारत यात्रा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संभावित दौरे को लेकर बातचीत चल रही है और यह यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस दौरे में शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अलावा द्विपक्षीय व्यापार, सीमा प्रबंधन और जल बंटवारे जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक बन चुका है। ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि भारत इस मामले को अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है। तारिक रहमान की संभावित यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन प्रत्यर्पण की मांग ने इस यात्रा को राजनयिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। निष्कर्ष बांग्लादेश ने तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को प्रमुखता से उठा दिया है। ढाका चाहता है कि नई दिल्ली उसके प्रत्यर्पण अनुरोध पर तेजी से कार्रवाई करे और यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो। अब नजर भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच आगामी राजनयिक बातचीत पर है। Source: Reuters, NDTV, Hindustan Times, Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | PM Modi ने IIT Delhi में emerging technologies पर दिया जोर, बोले—देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर करें innovation

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों और युवा इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विकास में innovation, research और emerging technologies की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश की वास्तविक जरूरतों के समाधान के लिए भी करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के दौर में युवाओं को लगातार सीखते रहना होगा। उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने, सवाल पूछने और ऐसी समस्याओं के समाधान खोजने की सलाह दी जिनका कोई तैयार जवाब मौजूद नहीं है। करियर का आकलन सिर्फ सैलरी से न करें PM Modi ने IIT Delhi के graduating students से कहा कि वे अपने करियर के फैसले लेते समय केवल वेतन या व्यक्तिगत लाभ को आधार न बनाएं। उन्होंने युवाओं से यह सोचने को कहा कि उनके काम से देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी और समाज को उसका क्या लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की प्रगति में योगदान देने का मतलब केवल सरकारी क्षेत्र में काम करना नहीं है। निजी कंपनियों, startups, research institutions और technology-driven businesses के जरिए भी युवा राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘Out of syllabus’ समस्याओं के लिए तैयार रहें प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन और करियर की चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिंदगी की कई कठिन परीक्षाएं ऐसी होती हैं जो ‘out of syllabus’ होती हैं। उनका संदेश था कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए किताबों में हमेशा तैयार उत्तर नहीं मिलते। ऐसे में युवाओं को परिस्थितियों के अनुसार सीखने, सोचने और समाधान निकालने की क्षमता विकसित करनी होगी। Emerging technologies में भारत की बड़ी संभावनाएं PM Modi ने कहा कि दुनिया तेजी से technological transformation के दौर से गुजर रही है। Artificial Intelligence, advanced computing, quantum technology और दूसरी emerging technologies आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करेंगी। ऐसे समय में भारत के लिए केवल नई तकनीकों का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा। देश को research, innovation और indigenous technology development पर भी जोर देना होगा, ताकि भारत अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर सके। Research को वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर जोर प्रधानमंत्री ने छात्रों और researchers से कहा कि उनकी research का उद्देश्य केवल academic achievement तक सीमित नहीं रहना चाहिए। Research को देश और समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं को ऐसे solutions विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत की बड़ी चुनौतियों जैसे infrastructure, energy, healthcare, education और technology access में उपयोगी साबित हो सकें। लगातार सीखते रहने की सलाह PM Modi ने graduating students से कहा कि degree हासिल करने के बाद learning खत्म नहीं होती। बदलती technology के दौर में professionals को लगातार अपने skills को update करना होगा। उन्होंने युवाओं से curiosity बनाए रखने और नए सवाल पूछने की आदत विकसित करने को कहा। उनके मुताबिक, तेजी से बदलती दुनिया में सीखने की क्षमता ही लंबे समय में सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक होगी। वैश्विक बदलावों को अवसर के रूप में देखें प्रधानमंत्री ने geopolitical बदलावों और technological transformation का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इन बदलावों के बीच भारत के सामने नई चुनौतियों के साथ-साथ बड़े अवसर भी मौजूद हैं। युवा engineers और technology professionals इन बदलावों को समझकर भारत को global technology ecosystem में मजबूत स्थिति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। IIT Delhi के graduates को मिला बड़ा संदेश IIT Delhi के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यह रहा कि देश की नई पीढ़ी केवल नौकरी पाने वाली workforce न बने, बल्कि problem solvers, innovators और technology creators के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और skills को देश की जरूरतों के साथ जोड़ने की अपील की। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत AI, semiconductor, quantum technology, space technology और अन्य advanced technology sectors में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। IIT Delhi में ‘Param Pragya’ का भी उल्लेख IIT Delhi के 57वें Convocation से जुड़े कार्यक्रम में institute की research और technology initiatives भी चर्चा में रहे। समारोह में ‘Param Pragya’ से जुड़े कार्यक्रम का भी उल्लेख हुआ, जो भारत की advanced computing और technology capabilities को मजबूत करने की दिशा से जुड़ा है। यह पहल इस व्यापक दिशा से जुड़ी है जिसमें भारत emerging technologies में research और indigenous capabilities को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। निष्कर्ष IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा engineers और graduates को innovation, research और continuous learning पर जोर देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि career decisions लेते समय केवल salary को नहीं, बल्कि देश की जरूरतों और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब emerging technologies तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को बदल रही हैं। भारत के लिए आने वाले वर्षों में यह चुनौती होगी कि वह केवल नई technologies को अपनाए नहीं, बल्कि research और innovation के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताएं भी विकसित करे। Source: All India Radio / DD India, Hindustan Times, Indian Express, IIT Delhi Convocation-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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