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भारत की जेल से 7 ‘अमेरिकी जासूस’ रिहा? जानिए पूरा सच!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत की जेल से “7 अमेरिकी जासूसों” को रिहा कर दिया गया है। लेकिन यह दावा भ्रामक है। असल में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद सात विदेशी नागरिकों में केवल एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें अदालत ने डिफॉल्ट बेल मिलने के बाद एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। किसी अदालत ने इन सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया है और NIA की जांच अभी जारी है। कौन हैं ये सात विदेशी नागरिक? NIA ने 13 मार्च 2026 को सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—विक्टर कामिन्स्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव और मैक्सिम होंचारुक—शामिल हैं। मैथ्यू को कोलकाता एयरपोर्ट से, जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। NIA ने क्या आरोप लगाए थे? NIA की शुरुआती FIR में सातों पर UAPA की धारा 18 के तहत कथित आतंकी साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये लोग भारत के रास्ते बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम पहुंचे और वहां से अवैध रूप से म्यांमार गए। एजेंसी के मुताबिक उन्होंने म्यांमार के Ethnic Armed Groups को drone warfare, drone operations, assembly और jamming technology से जुड़ी ट्रेनिंग दी। क्या ये ‘अमेरिकी जासूस’ थे? नहीं, उपलब्ध रिकॉर्ड ऐसा साबित नहीं करते। सात आरोपियों में केवल मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं, बाकी छह यूक्रेन के नागरिक हैं। इसके अलावा NIA की चार्जशीट या अदालत के आदेश में सातों को “अमेरिकी जासूस” घोषित नहीं किया गया है। उन पर गंभीर सुरक्षा संबंधी आरोप जरूर लगे हैं, लेकिन आरोपी होना और किसी अदालत द्वारा जासूसी का दोषी ठहराया जाना अलग बातें हैं। इसलिए “भारत ने 7 अमेरिकी जासूस छोड़ दिए” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक है। चार्जशीट में क्यों नहीं लगी UAPA? इस मामले में बड़ा घटनाक्रम 8 सितंबर 2026 को हुआ, जब NIA ने पहली चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। इसके बजाय Immigration and Foreigners Act, 2025 से जुड़ी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। NIA ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की आगे जांच जारी है और पर्याप्त आधार मिलने पर supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। India Today ने NIA सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि जांच में उस समय तक आरोपियों द्वारा भारत के खिलाफ सीधे गतिविधियां करने का निर्णायक सबूत नहीं मिला था, हालांकि संभावित लिंक की जांच जारी रखी गई। कैसे मिली डिफॉल्ट बेल? UAPA मामले में जांच एजेंसी के पास तय अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का समय होता है। सातों आरोपियों को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और 180 दिनों की अवधि 8 सितंबर को पूरी हुई। NIA की उस तारीख की चार्जशीट में UAPA आरोप शामिल नहीं होने के बाद अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को 18 सितंबर को डिफॉल्ट बेल दी। अदालत ने यह भी कहा कि इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर दूसरे सह-आरोपी भी डिफॉल्ट बेल के पात्र हैं। डिफॉल्ट बेल मिलने का मतलब आरोपी का आरोपों से बरी होना नहीं होता। इसका संबंध जांच और चार्जशीट की वैधानिक समयसीमा से है। विदेश जाने की अनुमति कैसे मिली? 24 सितंबर को दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने सातों विदेशी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देशों में परिवार से मिलने जाने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार Article 21 से जुड़े व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है और NIA ने भी यह नहीं कहा था कि जांच पूरी करने के लिए निकट भविष्य में सातों की भारत में शारीरिक मौजूदगी जरूरी है। सातों को NIA की जांच में जरूरत पड़ने पर सहयोग करने, अपना पता, फोन नंबर और ईमेल उपलब्ध कराने जैसी शर्तों का पालन करना होगा। क्या केस खत्म हो गया है? नहीं। NIA ने मामले में कोई closure report दाखिल नहीं की है। एजेंसी ने अदालत को स्पष्ट किया है कि UAPA के तहत जांच जारी है और आगे पर्याप्त सबूत मिलने की स्थिति में supplementary chargesheet दाखिल की जा सकती है। इसलिए जेल से रिहाई या एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति को मामले में “क्लीन चिट” नहीं माना जा सकता। आखिर वायरल दावे का सच क्या है? दावा: भारत ने जेल से 7 अमेरिकी जासूसों को रिहा कर दिया। सच्चाई: सात लोगों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं। उन्हें किसी अदालत ने “जासूस” घोषित नहीं किया है। उन्हें डिफॉल्ट बेल मिली है और अदालत ने शर्तों के साथ एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। NIA की UAPA जांच अभी जारी है। इसलिए “7 अमेरिकी जासूस रिहा” वाला दावा भ्रामक है, जबकि सात विदेशी आरोपियों को तिहाड़ जेल से कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिलने की बात सही है। source – The Indian Express / India Today / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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पहलगाम आतंकी हमले में NIA की बड़ी कार्रवाई, सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद को बनाया आरोपी

नई दिल्ली, 7 जुलाई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए विशेष NIA अदालत, जम्मू में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने इसमें पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख हाफिज़ मोहम्मद सईद को हमले की साजिश रचने का आरोपी बताया है। सीमा पार से रची गई साजिश का आरोप NIA के अनुसार सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद को उसकी व्यक्तिगत भूमिका के साथ-साथ प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके कथित सहयोगी संगठन The Resistance Front (TRF) के प्रमुख के रूप में भी आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का कहना है कि जांच में सीमा पार से साजिश रचे जाने के संबंध में नए साक्ष्य सामने आए हैं। विस्तृत जांच के बाद दाखिल हुई चार्जशीट NIA ने बताया कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट विस्तृत वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक विश्लेषण, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों के आधार पर तैयार की गई है। यह पहले दाखिल की गई मूल चार्जशीट का विस्तार है और इसमें नए तथ्यों एवं कथित साजिश के विवरण को शामिल किया गया है। अप्रैल 2025 में हुआ था हमला यह मामला अप्रैल 2025 में पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें 25 पर्यटकों और जम्मू-कश्मीर के एक स्थानीय निवासी सहित कुल 26 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद जांच का जिम्मा राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया था। विभिन्न धाराओं के तहत आरोप सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने का आरोप भी लगाया है। जांच अभी भी जारी NIA ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी हमले से जुड़े पूरे नेटवर्क, वित्तीय सहायता, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी रखे हुए है। यदि आगे और साक्ष्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया जाना जांच की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। उनका कहना है कि इससे कथित साजिश के पूरे नेटवर्क को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सामने लाने में मदद मिलेगी तथा सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद के मामलों में भारत की कानूनी कार्रवाई और मजबूत होगी. आगे की प्रक्रिया अब यह मामला NIA की विशेष अदालत में आगे बढ़ेगा, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों और चार्जशीट के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। एजेंसी ने कहा है कि वह मामले की जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं पर कार्य जारी रखेगी। स्रोत:राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), भारत सरकार। मूल रिपोर्ट:7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक NIA जानकारी एवं विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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