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जंतर-मंतर मामले में स्वतंत्र भारद्वाज तिहाड़ जेल से रिहा; 3 हफ्ते की अंतरिम जमानत

नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: Delhi के Jantar Mantar पर प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार social media influencer Swatantra Bhardwaj को Tihar Jail से रिहा कर दिया गया है। Delhi court ने उन्हें तीन सप्ताह की interim bail दी थी, जिसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर 17 सितंबर की देर रात वह जेल से बाहर आए। 15 September को मिली थी Interim Bail Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने 15 September को Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी थी। Court ने ₹50,000 के personal bond और इतनी ही राशि की surety पर उन्हें राहत दी। Regular bail पर आगे विचार करने से पहले court इस अवधि के दौरान उनके conduct को भी देखेगा। Media से दूरी बनाकर निकले Jail से रिहाई के समय Swatantra Bhardwaj media से दूरी बनाते नजर आए। Viral video में वह mask लगाए तेजी से बाहर खड़ी car की ओर जाते दिखाई दिए। Reports के मुताबिक उनके associates उन्हें तुरंत वहां से लेकर चले गए और उन्होंने journalists से कोई बातचीत नहीं की। Court ने लगाईं कई सख्त Conditions Interim bail देते हुए court ने Bhardwaj को case से जुड़े complainant, उनकी बेटी या किसी witness से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्हें social media, print या electronic media पर इस case, अपने defence या complainant के परिवार से जुड़ी comments या posts करने से भी रोका गया है। Court ने evidence से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्त भी लगाई है। क्या है Jantar Mantar Case? मामला 23 June 2026 को Jantar Mantar पर Cockroach Janta Party (CJP) के protest के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। Bhardwaj पर एक student activist के पिता से कथित assault और caste-related remarks के आरोप लगाए गए हैं। Delhi Police ने मामला दर्ज कर उन्हें 4 September को Bulandshahr से हिरासत में लिया था और बाद में judicial custody में Tihar Jail भेजा गया। आरोपों पर अंतिम फैसला court में trial के बाद होगा। ‘Bail Trophy नहीं’—Court की टिप्पणी Bail देते हुए court ने Bhardwaj को public celebration से बचने की चेतावनी दी और कहा कि bail court के trust की expression है, इसे उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। मामले की अगली proceedings 6 October को होने की जानकारी reports में दी गई है। source – PTI / Aaj Tak / NDTV / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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जमानत बनाम लंबा ट्रायल: न्यायिक प्रक्रिया पर अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक Abhijeet Dipke ने Jantar Mantar assault case में आरोपी Swatantra Bhardwaj को तीन हफ्ते की interim bail मिलने के बाद criminal justice system में bail और लंबे pre-trial detention को लेकर सवाल उठाए हैं। Dipke ने Bhardwaj के मामले की तुलना 2020 Delhi riots conspiracy case में आरोपी Umar Khalid की लगभग छह साल की incarceration से की। ‘Same Justice System, Very Different Approach’ Dipke ने social media पर लिखा कि एक व्यक्ति कथित घटना से जुड़े video के बावजूद कुछ दिनों में bail पा जाता है, जबकि दूसरा छह साल से जेल में है और substantive trial शुरू नहीं हुआ। उन्होंने इसे “Same justice system. Very different approach” बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में अलग-अलग मामलों के treatment पर सवाल उठाया। यह Dipke का अपना आकलन है। Swatantra Bhardwaj को 3 Weeks की Interim Bail Delhi की Patiala House Court के Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने Swatantra Bhardwaj को तीन सप्ताह की interim bail दी। Bhardwaj पर CJP protest के दौरान एक student activist के पिता के साथ कथित assault का आरोप है। उनके खिलाफ SC/ST Act से जुड़ी provisions भी जोड़ी गई थीं। आरोपों पर अंतिम निर्णय trial के बाद ही होगा। Court ने Bail के साथ दी सख्त चेतावनी Court ने bail देते हुए Bhardwaj के conduct पर भी टिप्पणी की और कहा कि bail को उपलब्धि की तरह प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। Court ने यह भी संकेत दिया कि interim bail के दौरान उनका व्यवहार आगे regular bail plea पर विचार करते समय महत्वपूर्ण होगा। उनकी regular bail application पर आगे सुनवाई होनी है। Umar Khalid के 6 साल पूरे Former JNU student Umar Khalid को 13 September 2020 को 2020 northeast Delhi riots से जुड़े larger conspiracy case में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। September 2026 में उनकी custody को छह साल पूरे हो गए हैं। Charges और bail को लेकर कई judicial proceedings हुई हैं, लेकिन prosecution evidence वाला substantive trial अभी शुरू नहीं हुआ है। Delhi Police ने उनके खिलाफ conspiracy के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्हें Khalid ने contest किया है। ‘बिना Hearing’ वाली बात पूरी तरह सही नहीं Dipke के statement में “छह साल बिना trial या hearing” का जिक्र किया गया, लेकिन उपलब्ध court records के मुताबिक Umar Khalid की कई bail applications पर hearings और judicial orders हो चुके हैं। इसलिए ज्यादा accurate स्थिति यह है कि वह लगभग छह साल से undertrial custody में हैं और मामले का substantive trial अभी लंबित है। Long Incarceration पर Courts भी कर चुके हैं टिप्पणी हाल के एक अलग मामले में Delhi High Court ने कहा है कि किसी offence की seriousness अपने आप bail रोकने का absolute ground नहीं हो सकती, खासकर जब trial reasonable pace से आगे नहीं बढ़ रहा हो। यह ruling Dipke या Khalid के मामले का फैसला नहीं है, लेकिन लंबी undertrial detention को लेकर broader judicial debate को दिखाती है। source – The Indian Express / LiveLaw / Hindustan / ABP Live जय राष्ट्र न्यूज़

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आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के दौरान डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी; अजीत भारती पर FIR, कोर्ट पहुंचे YouTuber

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए ‘Reservation Hatao Andolan’ के बाद विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। YouTuber और commentator अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने YouTube कार्यक्रम में नागीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिगत, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। FIR दिल्ली के North Avenue Police Station में 23 अगस्त को दर्ज की गई। शिकायत Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की ओर से दी गई थी। पुलिस ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के साथ Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की धाराएं भी लगाई हैं। क्या Jantar Mantar के मंच पर हुई थी कथित टिप्पणी? इस मामले में सबसे जरूरी clarification यही है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग caste-based reservation system में बदलाव की मांग को लेकर जुटे थे। आंदोलन में अजीत भारती ने भी हिस्सा लिया और reservation system की समीक्षा, white paper तथा economic criteria जैसे मुद्दे उठाए थे। लेकिन डॉ. आंबेडकर और चंद्रशेखर आजाद को लेकर जिस कथित आपत्तिजनक भाषा पर FIR हुई, वह शिकायत के मुताबिक 22 अगस्त को जारी YouTube show ‘SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti’ से संबंधित है। इसलिए इसे सीधे “जंतर-मंतर के मंच पर आंबेडकर पर टिप्पणी” कहना अभी उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सही नहीं होगा। शिकायत में क्या आरोप लगाए गए? Indian Express द्वारा देखी गई FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि YouTube video में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बी.आर. आंबेडकर को लेकर कथित तौर पर caste-based, abusive और humiliating statements की गईं। शिकायत में महिलाओं को लेकर कथित रूप से sexually degrading language और कुछ statements को inflammatory तथा threatening बताने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता अभी investigation और judicial process में तय होनी है। इसलिए कथित आपत्तिजनक शब्दों को बिना जरूरत दोहराना उचित नहीं है। किसकी शिकायत पर दर्ज हुई FIR? मामला Balakram Bauddh, Delhi State President, Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की शिकायत पर दर्ज हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और Nagina MP Chandrashekhar Azad हैं। शिकायत के साथ कथित video और social-media screenshots को electronic evidence के रूप में पुलिस को दिया गया। शिकायतकर्ता ने investigating agency से original platform data, video URL, upload details, metadata, views, comments और reposts जैसी digital information हासिल करने की भी मांग की। किन धाराओं में दर्ज हुआ Case? रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR में: समेत संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। Police investigation के बाद ही यह साफ होगा कि उपलब्ध evidence के आधार पर कौन-सी धाराएं आगे कायम रहती हैं। Ajeet Bharti ने आरोपों को किया खारिज अजीत भारती ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने FIR को pressure-driven बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ SC/ST Act के तहत मामला नहीं बनता। उनका कहना है कि उनके statements को context से अलग करके पेश किया गया और वे अपने video पर आई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दे रहे थे। यह उनका पक्ष है; अदालत और जांच एजेंसी अभी इसकी जांच कर रही हैं। गिरफ्तारी की आशंका के बीच Court पहुंचे इस मामले में 25 अगस्त को अजीत भारती ने Delhi के Patiala House Court में anticipatory bail petition दाखिल की। उनके वकीलों ने दलील दी कि FIR में बताए गए facts के आधार पर SC/ST Act का offence prima facie नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी BNSS की Section 35(3) के तहत appearance notice जारी नहीं किया है। Additional Sessions Judge Saurabh Pratap Singh Laler ने मामले की सुनवाई की। Court ने Police को क्या कहा? Court ने कहा कि अगर investigating officer अजीत भारती को BNSS Section 35(3) के तहत कोई notice जारी करता है, तो उसकी copy Court के सामने भी रखी जाए। अदालत उस notice की तारीख और SC/ST Act के alleged offence के prima facie ingredients को देखते हुए anticipatory bail application पर विचार करेगी। Court ने investigating officer को notice जारी किया है और मामले को आगे की arguments के लिए 31 अगस्त 2026 को listed किया है। इसका मतलब अभी anticipatory bail पर final फैसला नहीं हुआ है। Jantar Mantar पर क्या था Reservation Hatao Andolan? 21 अगस्त को दिल्ली के Jantar Mantar पर बड़ी संख्या में लोग reservation policy में reform की मांग को लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में caste-based quota की समीक्षा, economic condition को greater weight देने, reservation पर white paper जारी करने और UGC equity rules पर पुनर्विचार जैसी बातें शामिल थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST Act में बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग भी उठाई। यह मांग विवाद का बड़ा कारण बनी। Police Permission को लेकर भी हुआ विवाद Delhi Police ने शुरुआत में स्पष्ट किया था कि Jantar Mantar पर उस protest के लिए permission नहीं दी गई थी। बाद में Ramlila Maidan में सीमित संख्या में लोगों के लिए peaceful protest की NOC जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, लेकिन प्रदर्शनकारी Jantar Mantar से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और अलग-अलग दिनों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की घटनाएं भी हुईं। Chandrashekhar Azad ने भी आंदोलन पर साधा निशाना Nagina MP और Bhim Army प्रमुख Chandrashekhar Azad ने anti-reservation protest की आलोचना की और आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठाए। इसके बाद social media और political discourse में reservation के पक्ष और विरोध में बहस और तेज हो गई। इसी broader controversy के बीच अजीत भारती का YouTube programme सामने आया और उसके बाद Azad Samaj Party की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। यह मामला क्यों Sensitive है? यह मामला तीन बेहद संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ता है: पहला, भारत की reservation policy और social justice debate। दूसरा, SC/ST Act और caste-based speech से जुड़े criminal-law provisions। तीसरा, public figures और historical personalities पर online speech की कानूनी सीमाएं। ऐसे मामलों में किसी statement के words,…

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