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जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद राहत अभियान जारी, मृतकों की संख्या बढ़ी

टोक्यो: जापान के दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस आपदा में कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों, सड़कों और औद्योगिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भूकंप के बाद सबसे अधिक नुकसान कशिमा स्थित एयॉन शॉपिंग मॉल में हुआ, जहां झटकों के बाद गैस विस्फोट होने से इमारत का एक हिस्सा ढह गया। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स, दमकल विभाग और आपदा राहत एजेंसियों के हजारों जवान राहत कार्य में जुटे हुए हैं। बिजली, पानी और परिवहन प्रभावित भूकंप के कारण हजारों घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। कई रेलवे सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं, जबकि कुछ घरेलू उड़ानों को भी रद्द किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। लगातार आ रहे हैं आफ्टरशॉक्स जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं और आने वाले दिनों में भी तेज झटके महसूस किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने भूस्खलन, कमजोर इमारतों के ढहने और अन्य संभावित जोखिमों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उद्योगों पर भी पड़ा असर कुमामोटो क्षेत्र जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। भूकंप के बाद टोयोटा, सोनी, टीएसएमसी, होंडा और अन्य बड़ी कंपनियों ने अपने कई संयंत्रों में उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है ताकि संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया जा सके। इससे आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की प्रतिक्रिया जापान की प्रधानमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर, भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रशासन ने कहा है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रहेगा। निष्कर्ष जापान में आए इस विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर देश की आपदा प्रबंधन क्षमता की कठिन परीक्षा ली है। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जबकि सरकार प्रभावित नागरिकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स के खतरे को देखते हुए आने वाले कुछ दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे। Source: Japan Meteorological Agency (JMA) | Japan Fire and Disaster Management Agency | Government of Japan जय राष्ट्र न्यूज़

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फ्रांस और स्पेन में जंगल की आग का संकट जारी, राहत अभियान तेज; लाखों लोग प्रभावित

पेरिस/मैड्रिड: फ्रांस और स्पेन में भीषण जंगल की आग (Wildfires) का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी, तेज़ हवाओं और लंबे सूखे के कारण आग तेजी से फैल रही है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, फ्रांस और स्पेन में लगभग तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि हजारों दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। फ्रांस के बोर्दो (Bordeaux) के आसपास का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है, जहां आग शहर की बाहरी सीमा तक पहुंच चुकी है। वहीं स्पेन में मैड्रिड, अविला और वेलेंसिया के आसपास कई बड़े जंगलों में आग अब भी सक्रिय है। कई गांवों और पर्यटन स्थलों को खाली कराया गया है तथा लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया है। राहत एवं बचाव अभियान तेज फ्रांस और स्पेन की सरकारों ने हजारों दमकलकर्मियों, सैन्य कर्मियों और आपदा राहत टीमों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है। आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर, जल बमवर्षक विमान और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। यूरोपीय संघ के कई देशों ने भी राहत सामग्री, अग्निशमन विमान और विशेषज्ञ दल भेजकर सहायता की है। बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ गर्मी और शुष्क हवाएं आग को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही हैं। कई क्षेत्रों में धुएं के कारण वायु गुणवत्ता भी बेहद खराब हो गई है। जलवायु परिवर्तन पर फिर बहस यूरोपीय नेताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इन भीषण जंगल की आग को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसम घटनाओं का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि बढ़ते तापमान और लंबे सूखे की अवधि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और गंभीरता दोनों बढ़ा सकती है। निष्कर्ष फ्रांस और स्पेन में जारी जंगल की आग यूरोप के लिए बड़ी मानवीय और पर्यावरणीय चुनौती बन गई है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में अभी समय लग सकता है। Source: Reuters | Associated Press | European Civil Protection जय राष्ट्र न्यूज़

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