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Jaishankar ने UAE के विदेश मंत्री से की मुलाकात, West Asia संकट और शांति प्रयासों पर चर्चा

मुंबई, 21 अक्टूबर 2026: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान (Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात की। बैठक में पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट, क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रयासों पर चर्चा हुई। इसके अलावा भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। West Asia संकट पर हुई चर्चा बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्षों से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। चर्चा में कूटनीतिक प्रयासों, तनाव कम करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों का समाधान निकालने की वकालत करता रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन मार्गों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समन्वय और सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। India-UAE संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा बैठक में क्षेत्रीय परिस्थितियों के साथ-साथ भारत और UAE के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। शांति प्रयासों को समर्थन दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में कूटनीतिक पहलों के महत्व पर भी जोर रहा। भारत पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर संवाद, मानवीय सहायता और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है। Energy security भी अहम मुद्दा पश्चिम एशिया में तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर पड़ सकता है। Reuters की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच Brent crude की कीमत लगभग 1.5% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ऐसे हालात में क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा महत्वपूर्ण बनी हुई है। Source: The Indian Express, Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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मार्को रुबियो भारत पहुंचे, जयशंकर से ट्रेड डील, रूसी तेल और रक्षा सहयोग पर अहम बातचीत

मुंबई, 20 अक्टूबर 2026: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, रूसी कच्चे तेल के आयात, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। ट्रेड डील पर बड़ी प्रगति भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत पहुंचने से पहले रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। वार्ता में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। रूसी तेल का आयात रहेगा अहम मुद्दा भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात का मुद्दा भी इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। रूस से तेल खरीद, अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित अतिरिक्त टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा होती रही है। रुबियो ने संकेत दिया है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव करना आसान नहीं है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आयात महत्वपूर्ण हैं, जबकि अमेरिका रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, निवेश, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल है। भारत और अमेरिका अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में इस बैठक से इन क्षेत्रों में आगे सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुंबई में ही क्यों हो रही है मुलाकात? रुबियो के दौरे में नई दिल्ली के बजाय मुंबई को बैठक के प्रमुख स्थल के रूप में चुना गया है। इस फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों के साथ बैठकें पहले भी देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित होती रही हैं। जामनगर भी जाएंगे रुबियो Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो के कार्यक्रम में मुंबई के साथ गुजरात का जामनगर भी शामिल है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है। ऐसे में दौरे के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक सहयोग से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहने की संभावना है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अहम दौरा रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता, टैरिफ और रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। व्यापार समझौते पर सहमति बनने से निवेश, ऊर्जा और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, किसी संभावित समझौते के प्रभाव का आकलन उसकी अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकेगा। स्रोत: Reuters, India Today और विदेश मंत्रालय (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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आने वाले महीनों में बड़ा खाद्य संकट? जयशंकर ने जताई चिंता, fertiliser shortage और El Niño को बताया खतरा

न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि आने वाले महीनों में दुनिया बड़े खाद्य संकट का सामना कर सकती है। उन्होंने Ukraine war, Iran-Gulf conflict, प्रमुख अनाज निर्यातक देशों की बाधित आपूर्ति, उर्वरकों की कमी और Super El Niño को इसके प्रमुख कारणों में गिनाया। जयशंकर ने कहा कि इन संकटों का सबसे ज्यादा असर Global South की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। प्रमुख अनाज निर्यातक देशों की आपूर्ति पर खतरा जयशंकर ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण कुछ बड़े अनाज निर्यातक देश अपनी नियमित खेप भेजने में सक्षम नहीं हो सकते। इससे अंतरराष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है और आयात पर निर्भर देशों में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। Fertiliser shortage भी बड़ी चिंता उन्होंने वैश्विक उर्वरक संकट को भी गंभीर समस्या बताया। उर्वरकों की कमी सीधे कृषि उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है। इससे आने वाली फसल चक्रों में उत्पादन घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। Super El Niño से बढ़ सकता है संकट जयशंकर ने Super El Niño का भी उल्लेख किया। अत्यधिक मौसमी बदलाव, बारिश के पैटर्न में परिवर्तन और सूखे जैसी स्थितियां फसलों की पैदावार तथा खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भू-राजनीतिक व्यवधान और जलवायु संबंधी दबाव मिलकर खाद्य सुरक्षा के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर सकते हैं। Ukraine conflict का असर अब भी जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष ने वैश्विक अनाज और उर्वरक बाजारों को पहले ही प्रभावित किया है। यूक्रेन और रूस दोनों गेहूं, मक्का तथा उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए संघर्ष के कारण निर्यात और परिवहन में आने वाली बाधाओं का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है। Iran-Gulf conflict से ऊर्जा संकट भी गहरा जयशंकर ने कहा कि खाद्य संकट को ऊर्जा संकट से अलग करके नहीं देखा जा सकता। तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी दबाव और भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को बढ़ा सकते हैं। इससे परिवहन, कृषि मशीनरी और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य संसाधनों की लागत भी बढ़ सकती है। Global South पर सबसे ज्यादा असर विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी क्षेत्र के संघर्षों का विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। कम आय वाले देशों के लिए महंगे ईंधन, उर्वरक और आयातित खाद्य पदार्थों की लागत एक साथ संभालना मुश्किल हो सकता है। इससे उनकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। Energy और food का दोहरा संकट जयशंकर ने मौजूदा स्थिति को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा दोहरा संकट बताया। एक ओर ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर दबाव है, तो दूसरी ओर अनाज निर्यात और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने का खतरा है। दोनों संकट मिलकर महंगाई और गरीबी बढ़ा सकते हैं। India पर कितना असर? भारत के लिए स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर मानी जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में फिलहाल बड़े खाद्य या उर्वरक संकट की आशंका कम बताई गई है। घरेलू भंडार और आपूर्ति प्रबंधन इसमें मददगार हो सकते हैं। हालांकि, वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का असर आयात लागत और महंगाई के जरिए भारत पर भी पड़ सकता है। Food inflation का खतरा अगर उर्वरकों की लागत, कच्चे तेल और अनाज की कीमतें एक साथ बढ़ती हैं, तो खाद्य महंगाई पर इसका असर दिखाई दे सकता है। गरीब और कम आय वाले परिवार इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनके कुल खर्च का बड़ा हिस्सा भोजन और ऊर्जा पर जाता है। IMF ने भी जीवन-यापन की लागत से जुड़े बार-बार पैदा होने वाले संकटों को गरीबी और महंगाई की उम्मीदों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। Global cooperation पर जोर जयशंकर ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि देश ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति को भू-राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। आने वाले महीने अहम अब वैश्विक अनाज निर्यात, उर्वरकों की उपलब्धता, El Niño की परिस्थितियों और मध्य पूर्व के ऊर्जा बाजारों पर नजर रहेगी। यदि इन मोर्चों पर हालात बिगड़ते हैं, तो आने वाले महीनों में खाद्य सुरक्षा दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकती है। जयशंकर की चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक संघर्षों और जलवायु संबंधी जोखिमों के कारण खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। Source – The Indian Express, The Times of India, NDTV, IMF जय राष्ट्र न्यूज़

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Russia-Ukraine शांति प्रयासों में भारत की बड़ी भूमिका क्यों जरूरी—Moscow से Kyiv तक Diplomacy पर नई बहस

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: Russia-Ukraine war को खत्म करने की नई diplomatic कोशिशों के बीच भारत की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi की Vladimir Putin से बातचीत, विदेश मंत्री S. Jaishankar की Kyiv यात्रा और Moscow तथा Kyiv दोनों के साथ लगातार संपर्क ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि क्या भारत दोनों पक्षों के बीच meaningful dialogue आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। Moscow और Kyiv दोनों तक भारत की सीधी पहुंच भारत की सबसे बड़ी diplomatic strength यह है कि उसके Russia और Ukraine दोनों के साथ working relations बने हुए हैं। Jaishankar ने हाल में स्पष्ट कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और ऐसे ideas तलाश रहा है जो conflict को कम करने या अंततः समाप्त करने में मदद कर सकें। Kyiv में उन्होंने President Volodymyr Zelenskyy से मुलाकात कर भारत की ओर से किसी भी उपयोगी भूमिका के लिए तैयार रहने की बात भी कही। Modi ने Putin से कहा—युद्ध को खत्म करने की दिशा में बढ़ना होगा 31 अगस्त को Bishkek में SCO summit के दौरान PM Narendra Modi ने Russian President Vladimir Putin से कहा कि लगातार युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है और दुनिया को hostilities खत्म करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। Modi ने यह भी दोहराया कि भारत हर credible peace effort का समर्थन करेगा। US ने भी फिर तेज की Peace Diplomacy इस समय भारत अकेला देश नहीं है जो diplomatic रास्ता तलाश रहा है। अमेरिकी envoys Steve Witkoff और Jared Kushner ने Moscow में Putin से बातचीत करने के बाद Kyiv जाकर Zelenskyy से मुलाकात की है। US negotiators ने जल्द नई trilateral talks की उम्मीद जताई है, हालांकि अभी तक कोई निर्णायक breakthrough नहीं हुआ है। ऐसे में भारत क्यों हो सकता है अहम? भारत पश्चिमी देशों की तरह Ukraine का military ally नहीं है और Russia के खिलाफ sanctions regime का हिस्सा भी नहीं है। साथ ही New Delhi ने Ukraine की territorial integrity और dialogue-diplomacy की जरूरत पर लगातार जोर दिया है। इसी strategic balance के कारण भारत उन चुनिंदा बड़े देशों में है जो Moscow और Kyiv—दोनों से उच्च स्तर पर बातचीत कर सकता है। सिर्फ Ceasefire नहीं, Confidence-Building Measures भी जरूरी तत्काल comprehensive peace agreement मुश्किल हो सकता है क्योंकि Russia और Ukraine के बीच territory, Donbas और security guarantees जैसे मूल मुद्दों पर अभी बड़ा अंतर है। ऐसे में शुरुआती कदम के तौर पर civilian infrastructure, energy facilities और Black Sea commercial shipping को हमलों से बचाने जैसे confidence-building measures आगे बढ़ाए जा सकते हैं। आज के Indian Express editorial ने भी भारत से ऐसे practical measures के लिए अधिक सक्रिय प्रयास करने की वकालत की है। आगामी BRICS Summit बन सकता है बड़ा मंच भारत के सामने आगामी BRICS summit भी एक diplomatic opportunity हो सकता है। Russia के President Vladimir Putin और China के President Xi Jinping के summit में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में New Delhi ceasefire और confidence-building measures पर broader international consensus तैयार करने की कोशिश कर सकता है। भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं भारत की भूमिका आसान नहीं होगी। Russia और Ukraine अभी भी कई core issues पर दूर हैं। Russia अपनी शर्तों पर settlement चाहता है, जबकि Kyiv territory और security guarantees को लेकर समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। दूसरी ओर भारत की Russian oil purchases और Moscow के साथ पुराने strategic संबंधों को लेकर पश्चिम और Ukraine में समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। Mediator नहीं, Facilitator की भूमिका ज्यादा व्यावहारिक फिलहाल भारत को औपचारिक mediator कहना जल्दबाजी होगी। न Russia और न Ukraine ने भारत को formal mediator नियुक्त किया है। लेकिन दोनों से संवाद बनाए रखने वाला एक facilitator बनकर New Delhi proposals, back-channel communication और confidence-building initiatives को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है। यह भूमिका भारत की मौजूदा diplomatic position के ज्यादा करीब है। युद्ध जितना लंबा, दुनिया पर उतना ज्यादा असर Russia-Ukraine conflict अब पांचवें वर्ष में है। इसका असर केवल battlefield तक सीमित नहीं है; food, fuel, fertiliser और global supply chains पर भी इसका दबाव पड़ा है। Jaishankar ने हाल में कहा कि ऐसे युद्धों में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता और हर अतिरिक्त दिन अधिक मौत, तबाही और आर्थिक नुकसान लेकर आता है। भारत के लिए यही वह समय है जब Moscow और Kyiv दोनों तक अपनी diplomatic access का उपयोग केवल संदेश पहुंचाने के बजाय ठोस confidence-building proposals आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि अंतिम peace settlement रूस और यूक्रेन को ही स्वीकार करना होगा, New Delhi बातचीत की राह आसान करने वाले देशों में महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। source – The Indian Express / Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Africa Day कार्यक्रम में भारत–अफ्रीका साझेदारी पर दिया जोर, व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की अपील

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित Africa Day समारोह को संबोधित करते हुए भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकास साझेदारी पर आधारित हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में और मजबूत किया जाएगा। भारत–अफ्रीका संबंधों को बताया रणनीतिक साझेदारी अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ समानता, आपसी सम्मान और साझा विकास के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित करना है। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर फोकस विदेश मंत्री ने दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बढ़ाने, नई निवेश परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा तथा बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियाँ अफ्रीका में निवेश बढ़ा रही हैं और आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। तकनीक और क्षमता निर्माण पर जोर जयशंकर ने कहा कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और आईटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों अफ्रीकी पेशेवरों को भारत में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत विदेश मंत्री ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, रक्षा प्रशिक्षण और शांति अभियानों में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है। Global South की आवाज़ मजबूत करने की अपील जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। निष्कर्ष Africa Day कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संदेश स्पष्ट था कि भारत और अफ्रीका के संबंध भविष्य की वैश्विक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और विकास सहयोग को नई गति देकर दोनों पक्ष साझा समृद्धि और स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। Source: Ministry of External Affairs (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD Foreign Ministers’ Meeting और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भारत ने एक बार फिर मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठकों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत ने ASEAN देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। बैठक के प्रमुख मुद्दे QUAD और ASEAN बैठकों में जिन विषयों पर प्रमुख रूप से चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं— द्विपक्षीय बैठकों पर भी रहा फोकस मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंध, रक्षा सहयोग, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों से भारत की कूटनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक कई मायनों में अहम है— भारत का संदेश विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत मुक्त, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी और संवाद को आवश्यक बताया। निष्कर्ष मनीला में आयोजित QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | ASEAN Secretariat जय राष्ट्र न्यूज़

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मनीला में QUAD और ASEAN बैठकों में शामिल होंगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इंडो-पैसिफिक सहयोग पर भारत का फोकस

नई दिल्ली/मनीला: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आज फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (Quad Foreign Ministers’ Meeting) और ASEAN से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरे को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठकों के दौरान भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उभरती प्रौद्योगिकियों और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही ASEAN सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी विशेष फोकस रहेगा। बैठक का प्रमुख एजेंडा मनीला में आयोजित इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है— भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि— द्विपक्षीय बैठकें भी संभव विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ASEAN देशों के कई विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इनमें व्यापार, रक्षा सहयोग, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका भारत लगातार मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करता रहा है। सरकार का मानना है कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान वैश्विक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। निष्कर्ष मनीला में होने वाली QUAD और ASEAN बैठकों के माध्यम से भारत एक बार फिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Reuters | The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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