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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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आज की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाए! दिल्ली में समर्थन में उतरे संगठन

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग उठी है। दिल्ली में अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े संगठनों के साथ ग्लोबल वैश्य फेडरेशन, यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और अन्य संगठनों ने प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के कामकाज का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की। दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन 27 सितंबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया। एक कार्यक्रम मंदिर मार्ग स्थित हिंदू महासभा भवन के सामने हुआ, जबकि जंतर-मंतर पर भी अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े लोगों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का विरोध किया। भारत रत्न देने की रखी मांग प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन देने की बात भी सामने आई है। संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR में ज्ञानेश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और इसी आधार पर वे उनके सम्मान की मांग कर रहे हैं। जय भगवान गोयल ने की CEC की तारीफ प्रदर्शन में शामिल जय भगवान गोयल ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। गोयल ने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित रूप से अयोग्य नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे महत्वपूर्ण काम बताया। हालांकि मतदाता सूची से बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिकों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने संबंधी उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं की गई है। विपक्ष पर भी साधा निशाना प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी नारे लगाए। संगठनों का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बना रहा है। यह प्रदर्शनकारी संगठनों का राजनीतिक आरोप है। अप्रैल में हिमंत बिस्वा सरमा भी कर चुके हैं ऐसी मांग यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग उठी है। अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कहा था कि SIR में योगदान के लिए ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उनका बयान राजनीतिक प्रचार के दौरान दिया गया था। दूसरी ओर CEC के खिलाफ भी जारी है विरोध ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग ऐसे समय उठी है जब दूसरी ओर विपक्षी दल और कुछ नागरिक संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक विवाद बढ़ा है। ज्ञानेश कुमार के समर्थन और विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन भी हुए हैं। इसलिए भारत रत्न की मौजूदा मांग को भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। मांग से तेज हुई नई राजनीतिक बहस एक तरफ ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने वाले समूह प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग लेकर सामने आए हैं। फिलहाल यह कुछ संगठनों और राजनीतिक समर्थकों की मांग है। भारत रत्न देने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से ज्ञानेश कुमार के नाम पर किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। source – Dainik Jagran / Navbharat Times / ABP News / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बोले- ‘पक्षपात से BJP को मिला अनुचित फायदा’

मुजफ्फरपुर: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” से भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में अनुचित लाभ मिला है। किशोर ने चुनावी खर्च, प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। SIR विवाद के बीच आया प्रशांत किशोर का बयान प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाए। उनसे हाल में सामने आई उस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था, जिसमें Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का दावा किया गया था। ‘2021 में ही उठाया था आयोग की निष्पक्षता का सवाल’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर पहली बार सवाल अब नहीं उठाया है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी BJP को चुनाव आयोग के कथित पक्षपात का फायदा मिला था। किशोर उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो पश्चिम बंगाल में BJP का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह किशोर का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक जांच ने स्थापित नहीं किया है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण किशोर ने हाल के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण भी दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और BJP द्वारा बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च की अनदेखी की गई। किशोर ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां न होतीं तो उनकी जीत का अंतर और बड़ा होता। इससे पहले उन्होंने पटना के SSP की कथित “पक्षपातपूर्ण भूमिका” को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत भी दर्ज कराई थी। पैसे, नौकरशाही और वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव में धन के इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों की भूमिका और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबलों में आयोग का कथित पक्षपात परिणाम पर असर डाल सकता है। इन आरोपों को चुनाव आयोग या किसी अदालत ने प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित समस्याएं केवल मौजूदा CEC के कार्यकाल से शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और पद छोड़ने के बाद मिली जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ quid pro quo का उनका आरोप प्रमाणित तथ्य नहीं है। चुनाव आयोग में कथित मतभेद की रिपोर्ट क्या है? The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR समेत विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर कई लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और लिखित टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से थे। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पूछ चुका है सवाल दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को “logical discrepancy” से जुड़े नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कुछ नोटिसों के लगभग “mechanical” तरीके से जारी होने पर चिंता जताते हुए आयोग से उनकी प्रक्रिया और आधार समझाने को कहा। चुनाव आयोग पर राजनीतिक बहस तेज प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। एक ओर प्रशांत किशोर और विपक्ष के कई नेता आयोग पर निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और संस्थागत नियमों के तहत संचालित हो रही हैं। फिलहाल किशोर के आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। source – PTI / The Indian Express / Times of India / The Federal जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR के खिलाफ प्रकाश राज ने जताया विरोध, बोले- ‘हर योग्य मतदाता का नाम सूची में रहना चाहिए’

बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का विरोध करते हुए प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। 1 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ मार्च में प्रकाश राज समेत कई नागरिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। मार्च के दौरान बेंगलुरु पुलिस ने प्रकाश राज और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। ‘SIR वापस लिया जाए’- प्रकाश राज प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि SIR प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिक संगठनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। अभिनेता किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ‘Election Commission Chalo’ अभियान का किया था ऐलान प्रकाश राज ने 25 अगस्त को ही घोषणा कर दी थी कि नागरिक संगठनों के साथ 1 सितंबर को बेंगलुरु में Election Commission Chalo अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी समय है तो इतनी बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि इससे आम मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रकाश राज का नाम भी ‘Shifted’ कैटेगरी में आया था इस विवाद से पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम ‘permanently shifted’ कैटेगरी में इसलिए रखा गया क्योंकि Booth Level Officer की जांच में वह पिछले चार वर्षों से अपने पुराने पंजीकृत पते पर नहीं रह रहे थे। चुनाव अधिकारी ने कहा कि प्रकाश राज का नाम पहले शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय था और वह अपने वर्तमान पते पर Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। एक करोड़ से ज्यादा नाम ASDDO कैटेगरी में कर्नाटक में SIR के दौरान चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता शामिल रहे। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उन्हें नोटिस और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का किया बचाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत आयोजित किए जाते हैं और राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों के प्रतिनिधि विभिन्न चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। BJP और JD(S) भी उठा चुके हैं सवाल कर्नाटक में SIR को लेकर केवल प्रकाश राज या कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। BJP और JD(S) ने भी जुलाई में चुनाव आयोग के सामने प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। दोनों दलों ने कुछ क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब में कहा था कि SIR चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के अनुसार किया जा रहा है। SIR को लेकर जारी है राजनीतिक और कानूनी बहस कर्नाटक में SIR को लेकर मतदाता सूची से संभावित नाम हटने, दस्तावेज सत्यापन और प्रक्रिया की समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बहस चल रही है। प्रकाश राज और प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन किया जा रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर 25 सितंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने AISA से जुड़े छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। AISA और सिविल सोसाइटी समूहों ने किया प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन All India Students’ Association (AISA) की दिल्ली इकाई और कुछ सिविल सोसाइटी समूहों ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” जैसे नारे भी लगाए गए। कई प्रदर्शनकारी हिरासत में रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए या पुलिस द्वारा रोके गए प्रमुख लोगों में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। मनोज झा और प्रशांत भूषण भी प्रदर्शन में शामिल आयोजकों के मुताबिक प्रदर्शन में RJD सांसद मनोज झा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और कई अन्य लोग भी शामिल हुए। इसके अलावा SFI और Indian Youth Congress से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अलग-अलग विरोध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई आवेदन या अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें। SIR विवाद बना प्रदर्शन की बड़ी वजह यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स के बाद हुआ। The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और electoral roll data management से जुड़े कुछ मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। युवा कांग्रेस ने भी किया विरोध इसी दिन भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर मार्ग पर रोक दिया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत को लेकर भी उठा विवाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कार्रवाई अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कारण की गई। हिरासत की परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं। चुनाव आयोग पर जारी है राजनीतिक बहस CEC ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को तय कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। ऐसे में जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। source – Hindustan / ThePrint / The Tribune / Amar Ujala / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का गंभीर सवाल; चुनाव आयोग से जवाब की मांग

भुवनेश्वर, 6 सितंबर 2026: पूर्व Chief Election Commissioner S.Y. Quraishi ने Election Commission की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस exercise के दौरान देशभर में करीब 14–15 करोड़ मतदाताओं के नाम electoral rolls से बाहर हुए और Election Commission से पूछा कि SIR के जरिए आखिर कितने illegal immigrants की पहचान की गई। ‘कितने Illegal Immigrants मिले, आंकड़ा बताए EC’ Quraishi ने कहा कि SIR के उद्देश्यों में electoral rolls को साफ करना और ineligible voters की पहचान करना शामिल था। उन्होंने Election Commission से मांग की कि वह publicly बताए कि इस प्रक्रिया में कितने कथित illegal immigrants पाए गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आयोग को इस आंकड़े को सामने लाना चाहिए, ताकि देश को SIR की वास्तविक सफलता का पता चल सके। 14–15 करोड़ नाम हटने का किया दावा पूर्व CEC ने दावा किया कि SIR के बाद अलग-अलग राज्यों की draft electoral rolls में कुल मिलाकर करीब 14 से 15 करोड़ नाम कम हुए हैं। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि किसी genuine voter का नाम गलत तरीके से हटना भी Election Commission की accountability पर सवाल खड़ा करता है। Voting को बताया Constitutional Right Quraishi ने कहा कि voter list में eligible नागरिक का नाम होना कोई “charity” नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि केवल procedural या bureaucratic कारणों के आधार पर किसी eligible citizen को voting rights से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। SIR को बताया ‘Illogical और Arbitrary’ Quraishi ने voter deletions की प्रक्रिया को “illogical, unreasonable, arbitrary and mischievous” बताया। उन्होंने large-scale deletions को लेकर independent scrutiny और Election Commission की जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। Election Commission का क्या कहना है? Election Commission का कहना रहा है कि draft voter list से नाम बाहर होना final deletion नहीं होता और eligible citizens claims तथा objections process के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar ने हालिया SIR criticism के बीच कहा है कि आयोग की impartiality और integrity बरकरार है और सभी eligible Indian citizens का नाम electoral rolls में होना चाहिए। हालांकि Quraishi के illegal immigrants वाले सवाल पर कोई specific आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने की पुष्टि नहीं मिली है। source – ANI / PTI / Hindustan Times / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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