हैदराबाद/नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 नवंबर 2026 को हैदराबाद में राहुल गांधी को संसद में इन मुद्दों पर बहस की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विशेष संसद सत्र बुलाने के लिए भी तैयार है।
हैदराबाद से राहुल गांधी को सीधी चुनौती
अमित शाह भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाया और कहा कि अगर विपक्ष को SIR, EVM या मतदाता सूची पर सवाल हैं तो वह संसद में बहस करे।
‘विशेष सत्र बुलाने को तैयार’
शाह ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।
उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि वह सदन में आएं और SIR, EVM तथा मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों पर बहस करें।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है।
विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।
वहीं भाजपा और सरकार का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए मृत, स्थानांतरित, दोहरे और अपात्र नाम हटाना जरूरी है।
राहुल गांधी ने लगाए हैं 13 करोड़ नाम हटाने के आरोप
राहुल गांधी ने हाल के दिनों में आरोप लगाया है कि देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं।
अमित शाह ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि हटाए गए नामों में स्थान बदल चुके लोग, मृत व्यक्ति और डुप्लीकेट प्रविष्टियां भी शामिल हैं। उन्होंने शेष नामों को लेकर घुसपैठियों का दावा किया। यह भाजपा का राजनीतिक दावा है और इन संख्याओं तथा वर्गीकरण पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
‘तीन करोड़ घुसपैठिए’ वाला दावा
शाह ने कहा कि SIR के दौरान सामने आए करीब तीन करोड़ नाम ऐसे हैं जिन्हें उन्होंने कथित घुसपैठियों से जोड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इन नामों को मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है। हालांकि विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
INDIA गठबंधन की रैली पर भी हमला
शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ’ रैली पर भी निशाना साधा।
उन्होंने इसे ‘घुसपैठिया बचाओ’ रैली बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष SIR के विरोध के जरिए अपात्र मतदाताओं को बचाना चाहता है। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है।
EVM पर भी कांग्रेस से पूछा सवाल
अमित शाह ने EVM पर कांग्रेस की आपत्तियों को लेकर भी हमला बोला।
उन्होंने सवाल किया कि अगर EVM में गड़बड़ी है तो कांग्रेस या उसके सहयोगी दल तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव कैसे जीतते हैं।
शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव हारने पर EVM पर सवाल उठाता है लेकिन जीतने पर इन्हीं नतीजों को स्वीकार कर लेता है।
राहुल गांधी ने भी PM मोदी को दी बहस की चुनौती
राजनीतिक टकराव यहीं नहीं रुका। 2 नवंबर की रात राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर विदेशी समर्थन से जुड़े आरोप लगाए और कहा कि वह किसी भी समय और किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार हैं।
चुनाव आयोग भी विपक्ष के निशाने पर
SIR विवाद के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। चुनाव आयोग इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है और कहता है कि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।
क्या सच में बुलाया जाएगा विशेष सत्र?
अमित शाह ने विशेष सत्र बुलाने की तत्परता जताई है, लेकिन फिलहाल संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की कोई औपचारिक अधिसूचना जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए इसे सरकार की राजनीतिक पेशकश या चुनौती के रूप में देखना चाहिए, न कि तय हो चुके संसद सत्र के रूप में।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासत
SIR और EVM का मुद्दा आने वाले चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है।
एक ओर विपक्ष मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहा है, वहीं भाजपा इसे मतदाता सूची की शुद्धता और अवैध प्रविष्टियां हटाने की प्रक्रिया बता रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या वास्तव में संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है और राहुल गांधी इस बहस की चुनौती को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
स्रोत – इकोनॉमिक टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे
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