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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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DeepSeek ने V4 Pro AI Model लॉन्च किया

बीजिंग: चीनी AI कंपनी DeepSeek ने अपने नए फ्लैगशिप मॉडल DeepSeek V4 Pro का आधिकारिक वर्जन लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि नया मॉडल खास तौर पर AI agents, software engineering, coding और advanced reasoning जैसे कामों में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है। यह मॉडल DeepSeek के ऐप, वेब प्लेटफॉर्म और API के जरिए उपलब्ध कराया गया है। V4 Pro में क्या खास है? नया DeepSeek-V4-Pro-0813 मॉडल अप्रैल में पेश किए गए V4 Pro Preview का upgraded production version है। DeepSeek ने इसमें agentic AI और software-engineering capabilities को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया है। AI agents ऐसे सिस्टम होते हैं जो केवल सवालों के जवाब देने के बजाय कई चरणों वाले tasks को समझकर tools का इस्तेमाल कर सकते हैं और काम को पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से V4 Pro को developers और enterprise users के लिए महत्वपूर्ण upgrade माना जा रहा है। 1.6 ट्रिलियन Parameters वाला मॉडल DeepSeek V4 Pro architecture में करीब 1.6 trillion total parameters और लगभग 49 billion active parameters का इस्तेमाल करता है। मॉडल में 1 million-token context window भी है, जिससे यह लंबे documents और बड़े codebases के साथ काम करने के लिए बनाया गया है। इतने बड़े context window का फायदा खास तौर पर software development, research और लंबे documents के analysis में मिल सकता है। Coding और AI Agents पर बड़ा फोकस V4 Pro को DeepSeek ने सिर्फ सामान्य chatbot के रूप में position नहीं किया है। कंपनी का बड़ा फोकस coding और agentic workflows पर है। नए मॉडल में software-engineering tasks, tool use और complex reasoning को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। Independent Artificial Analysis benchmark में V4 Pro 0813 ने 53 Intelligence Index score हासिल किया, जो अप्रैल वाले V4 Pro के मुकाबले बेहतर था। V4 Flash से कितनी अलग है कीमत? V4 Pro को DeepSeek ने अपने comparatively lightweight V4 Flash से काफी महंगा रखा है। नई pricing के अनुसार: Reuters के अनुसार output pricing V4 Flash की तुलना में लगभग 14 गुना ज्यादा है, जबकि input pricing लगभग 9 गुना ज्यादा है। यह संकेत देता है कि DeepSeek V4 Pro को अब low-cost model के बजाय ज्यादा capable premium flagship AI model के रूप में position कर रहा है। API के जरिए Developers को मिलेगा Access V4 Pro को DeepSeek के API, web interface और app के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। Developers इसे अपने applications और AI-powered products में integrate कर सकते हैं। यह DeepSeek के लिए महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि कंपनी अब केवल consumer chatbot market तक सीमित नहीं रहना चाहती। Open-Weight Strategy भी जारी DeepSeek की सबसे बड़ी खासियतों में से एक उसका relatively open approach रहा है। V4 Pro family के model weights को MIT license के तहत जारी किया गया है, जिससे developers और researchers को model को लेकर ज्यादा flexibility मिलती है। यह strategy DeepSeek को proprietary AI systems से अलग पहचान देती है। Global AI Race में DeepSeek की वापसी DeepSeek ने 2025 में अपने R1 reasoning model के बाद global AI industry में बड़ा प्रभाव डाला था। इसके बाद OpenAI, Google, Anthropic और कई Chinese AI companies के बीच competition लगातार बढ़ा है। इस बार DeepSeek को Moonshot AI, Zhipu AI, MiniMax, Alibaba और ByteDance जैसी कंपनियों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। V4 Pro का launch इसी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हुआ है। API Pricing में भी बड़ा बदलाव DeepSeek ने V4 models के API pricing structure में भी बदलाव की घोषणा की है। कंपनी peak और off-peak pricing शुरू करने जा रही है। Reuters के अनुसार नई pricing में अलग-अलग models और token types के आधार पर कीमतों में 50% से लेकर 1,100% तक की वृद्धि हो सकती है। इससे साफ है कि DeepSeek अब AI inference की बढ़ती मांग और operational costs को ध्यान में रखते हुए अपने commercial model को बदल रहा है। AI Industry पर क्या असर होगा? DeepSeek V4 Pro का launch AI industry में कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, यह दिखाता है कि Chinese AI companies frontier-level AI capabilities की race में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। दूसरा, DeepSeek का open-weight approach developers को proprietary models के विकल्प देता है। तीसरा, agentic AI और coding पर बढ़ता focus बताता है कि आने वाले समय में AI competition केवल chatbot quality पर नहीं बल्कि AI agents की वास्तविक काम करने की क्षमता पर भी होगी। निष्कर्ष DeepSeek V4 Pro का official launch कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण upgrade है। नया मॉडल 1.6 trillion parameters, 1 million-token context window, बेहतर agentic capabilities और software-engineering focus के साथ पेश किया गया है। हालांकि V4 Pro की कीमत V4 Flash से काफी ज्यादा है, लेकिन DeepSeek इसे ज्यादा powerful flagship model के रूप में position कर रहा है। अब इसकी असली चुनौती यह होगी कि बेहतर benchmark performance को developers और businesses के बड़े पैमाने पर adoption में कैसे बदला जाए। Source: DeepSeek के model release details, Reuters और independent AI benchmarking reports. Original Report: DeepSeek ने V4 Pro का official production version जारी किया है, जिसमें AI agents और software engineering capabilities पर विशेष ध्यान दिया गया है। Jai Rashtra News

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HCL के सह-संस्थापक का बड़ा खुलासा, सिर्फ ₹1.87 लाख और 6 लोगों से शुरू हुआ था भारत का बड़ा टेक सफर

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेक कंपनियों में शामिल HCL की शुरुआत कितने छोटे स्तर से हुई थी, इसका दिलचस्प खुलासा कंपनी के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने किया है। HCL के 50 साल पूरे होने के मौके पर चौधरी ने 1976 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि महज 6 लोगों और ₹1.87 लाख की पूंजी से एक ऐसा सपना शुरू हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर बदल दी। छह लोगों ने छोड़ी नौकरी और शुरू किया अपना सफर अजय चौधरी के मुताबिक, साल 1976 में छह युवा इंजीनियरों ने अपनी नौकरियां छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा, डीएस पुरी और अजय चौधरी शामिल थे। उस समय भारत में आज की तरह स्टार्टअप संस्कृति, वेंचर कैपिटल या टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क नहीं था। इसके बावजूद इन लोगों को भरोसा था कि माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया बदल देंगे। ₹1.87 लाख जुटाकर शुरू किया कारोबार चौधरी ने बताया कि छह संस्थापकों ने मिलकर शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹1.87 लाख जुटाए थे। इस रकम को बचत, उधार और दूसरे निजी संसाधनों से जुटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूंजी को इकट्ठा करने के लिए एक संस्थापक ने अपनी कार तक बेच दी थी। आज के हजारों करोड़ रुपये के टेक कारोबार को देखते हुए यह शुरुआती रकम बेहद छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय इसी सीमित पूंजी से छह लोगों ने भारत में कंप्यूटर बनाने का सपना देखा था। दिल्ली के छोटे से ऑफिस से शुरू हुआ सपना HCL का शुरुआती सफर दिल्ली के गोल्फ लिंक इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे से शुरू हुआ। उस समय कंपनी का नाम Microcomp रखा गया था। इन छह लोगों का लक्ष्य भारत में अपना कंप्यूटर तैयार करना था। लेकिन शुरुआत में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास कंप्यूटर बनाने के लिए आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उस दौर में कंप्यूटर भारत के लिए नई चीज था 1970 के दशक में कंप्यूटर आज की तरह आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। भारत में कंप्यूटर तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और बहुत कम लोगों को इसकी वास्तविक संभावनाओं का अंदाजा था। छह संस्थापकों ने इसी दौर में यह समझ लिया था कि माइक्रोप्रोसेसर आधारित तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका लक्ष्य केवल कंप्यूटर बेचने का नहीं था, बल्कि भारत में कंप्यूटर तकनीक विकसित करने का था। HCL ने आगे चलकर रचा टेक इतिहास छोटी शुरुआत के बाद HCL ने भारतीय कंप्यूटर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, 1978 में HCL ने भारत में स्वदेशी कंप्यूटर HCL 8C तैयार किया, जिसे कंपनी अपने शुरुआती तकनीकी मील के पत्थरों में गिनती है। इसके बाद HCL ने कंप्यूटर शिक्षा, UNIX आधारित सिस्टम, डेटाबेस तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भारत से निकलकर वैश्विक टेक बाजार तक पहुंचा। 50 साल बाद संस्थापक ने याद की शुरुआत HCL के पांच दशक पूरे होने के मौके पर अजय चौधरी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने इस सफर की शुरुआत को केवल एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने की कहानी बताया। उनके मुताबिक, उस समय छह लोगों के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन भविष्य को लेकर विश्वास और कुछ नया करने की इच्छा थी। छोटी पूंजी, बड़ा सपना HCL की शुरुआती कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किसी बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। छह लोगों ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और आगे चलकर भारतीय टेक उद्योग में अपनी पहचान बनाई। अजय चौधरी ने अपनी पोस्ट के अंत में युवाओं को बड़े सपने देखने, जोखिम लेने और लगातार आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। निष्कर्ष ₹1.87 लाख, छह लोग और एक बड़ा सपना—यही HCL की शुरुआती कहानी थी। 1976 में एक छोटे से दिल्ली ऑफिस से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण कहानियों में शामिल है। HCL के सह-संस्थापक अजय चौधरी द्वारा साझा की गई पुरानी यादों ने एक बार फिर दिखाया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत कभी-कभी बेहद छोटे संसाधनों से होती है। छह संस्थापकों का वह प्रयोग आगे चलकर भारतीय तकनीकी क्षेत्र की एक बड़ी कहानी बन गया। Source: India Today / HCL Group जय राष्ट्र न्यूज़

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Amazon Great Freedom Sale 2026 में Samsung, OnePlus और Xiaomi समेत कई स्मार्टफोन्स पर बड़े डिस्काउंट

नई दिल्ली: Amazon Great Freedom Sale 2026 के दौरान स्मार्टफोन खरीदारों के लिए कई आकर्षक offers देखने को मिल रहे हैं। Samsung, OnePlus, Xiaomi और अन्य प्रमुख smartphone brands के कई models पर discounts, bank offers और exchange benefits उपलब्ध हैं। Sale के दौरान कुछ smartphones की effective price में बड़ी कमी दिखाई दे रही है, जिससे customers के लिए नए फोन खरीदने का यह एक महत्वपूर्ण shopping opportunity बन गया है। हालांकि, अलग-अलग models पर मिलने वाला discount stock, variant, bank offer और exchange value के आधार पर बदल सकता है। इसलिए किसी भी smartphone की final कीमत खरीदारी के समय Amazon पर check करना जरूरी है। Samsung Smartphones पर Deals Great Freedom Sale में Samsung के कई लोकप्रिय smartphones पर offers चर्चा में हैं। Galaxy series के अलग-अलग models पर discount के साथ bank offers और exchange benefits भी मिल सकते हैं। Samsung के premium और mid-range दोनों segments में customers को offers मिलने की संभावना है। खासतौर पर उन buyers के लिए sale महत्वपूर्ण है जो Galaxy smartphone खरीदने की योजना बना रहे हैं। OnePlus पर भी बड़ी बचत का मौका OnePlus के smartphones भी sale में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कंपनी के flagship और mid-range devices पर discounts के साथ अतिरिक्त bank और exchange offers उपलब्ध हो सकते हैं। OnePlus के smartphones अपनी performance और fast charging capabilities के कारण भारतीय बाजार में लोकप्रिय हैं। Sale के दौरान इन devices की effective purchase price कम होने से buyers को फायदा मिल सकता है। Xiaomi और Redmi Smartphones पर Offers Xiaomi और Redmi के smartphones पर भी Great Freedom Sale के दौरान कई deals देखने को मिल रही हैं। कंपनी के budget और mid-range smartphones पहले से competitive pricing के लिए जाने जाते हैं। Sale offers के साथ इनकी effective price और कम हो सकती है, जिससे budget-conscious customers को फायदा मिल सकता है। Bank Offers से बढ़ सकती है बचत Amazon sale में smartphone की listed sale price के अलावा bank card discounts और instant offers भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ customers को eligible bank cards के जरिए अतिरिक्त discount मिल सकता है। इसके अलावा EMI और no-cost EMI जैसी payment options भी कुछ products पर उपलब्ध हो सकती हैं। इसलिए smartphone खरीदने से पहले केवल product price देखने के बजाय available payment offers को भी check करना जरूरी है। Exchange Offer से पुराना फोन बनेगा काम का अगर customer के पास पहले से smartphone है, तो exchange offer के जरिए final purchase cost और कम हो सकती है। पुराने smartphone की exchange value उसके model, condition और eligibility पर निर्भर करती है। अलग-अलग devices के लिए exchange amount अलग हो सकता है। इस वजह से buyers को sale के दौरान अपने पुराने फोन की exchange value भी check करनी चाहिए। क्या यह Permanent Price Cut है? Sale के दौरान दिखाई देने वाली कम कीमत को हमेशा smartphone का permanent price cut नहीं माना जाना चाहिए। Amazon पर दिखाई देने वाली effective price में sale discount, bank offer, coupon और exchange benefit शामिल हो सकते हैं। Sale समाप्त होने के बाद इनमें से कुछ offers उपलब्ध नहीं रह सकते। इसलिए buyers को product की original price और final payable amount दोनों की तुलना करनी चाहिए। किसके लिए Sale सबसे ज्यादा फायदेमंद? Great Freedom Sale उन customers के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है जो अगले कुछ महीनों में smartphone upgrade करने की योजना बना रहे हैं। अगर किसी buyer को Samsung, OnePlus या Xiaomi का कोई specific model पहले से पसंद है, तो sale के दौरान उसके current price, bank offer और exchange value की तुलना करना बेहतर रहेगा। Premium से Budget Segment तक Options Sale में smartphone deals केवल premium segment तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग price categories में customers को options मिल रहे हैं। Premium smartphone खरीदने वाले buyers flagship models पर offers देख सकते हैं, जबकि budget customers Redmi, Samsung Galaxy और अन्य affordable smartphones की deals पर नजर रख सकते हैं। खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान Smartphone खरीदने से पहले customers को कुछ महत्वपूर्ण चीजों की जांच करनी चाहिए: निष्कर्ष Amazon Great Freedom Sale 2026 में Samsung, OnePlus और Xiaomi समेत कई smartphone brands के devices पर discounts और additional offers buyers का ध्यान खींच रहे हैं। Bank offers और exchange benefits को मिलाकर कुछ models की effective purchase price काफी कम हो सकती है। हालांकि, sale के दौरान दिखाई देने वाले discounts को permanent price cuts नहीं माना जाना चाहिए। Smartphone खरीदने से पहले customers को final payable price, bank offer, exchange value और product variant की पूरी जानकारी जांचनी चाहिए। Source: Amazon Great Freedom Sale 2026 / Technology market reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | PM Modi ने IIT Delhi में emerging technologies पर दिया जोर, बोले—देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर करें innovation

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों और युवा इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विकास में innovation, research और emerging technologies की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर और तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश की वास्तविक जरूरतों के समाधान के लिए भी करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के दौर में युवाओं को लगातार सीखते रहना होगा। उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने, सवाल पूछने और ऐसी समस्याओं के समाधान खोजने की सलाह दी जिनका कोई तैयार जवाब मौजूद नहीं है। करियर का आकलन सिर्फ सैलरी से न करें PM Modi ने IIT Delhi के graduating students से कहा कि वे अपने करियर के फैसले लेते समय केवल वेतन या व्यक्तिगत लाभ को आधार न बनाएं। उन्होंने युवाओं से यह सोचने को कहा कि उनके काम से देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी और समाज को उसका क्या लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की प्रगति में योगदान देने का मतलब केवल सरकारी क्षेत्र में काम करना नहीं है। निजी कंपनियों, startups, research institutions और technology-driven businesses के जरिए भी युवा राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘Out of syllabus’ समस्याओं के लिए तैयार रहें प्रधानमंत्री ने छात्रों को जीवन और करियर की चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिंदगी की कई कठिन परीक्षाएं ऐसी होती हैं जो ‘out of syllabus’ होती हैं। उनका संदेश था कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए किताबों में हमेशा तैयार उत्तर नहीं मिलते। ऐसे में युवाओं को परिस्थितियों के अनुसार सीखने, सोचने और समाधान निकालने की क्षमता विकसित करनी होगी। Emerging technologies में भारत की बड़ी संभावनाएं PM Modi ने कहा कि दुनिया तेजी से technological transformation के दौर से गुजर रही है। Artificial Intelligence, advanced computing, quantum technology और दूसरी emerging technologies आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करेंगी। ऐसे समय में भारत के लिए केवल नई तकनीकों का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा। देश को research, innovation और indigenous technology development पर भी जोर देना होगा, ताकि भारत अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर सके। Research को वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर जोर प्रधानमंत्री ने छात्रों और researchers से कहा कि उनकी research का उद्देश्य केवल academic achievement तक सीमित नहीं रहना चाहिए। Research को देश और समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं को ऐसे solutions विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत की बड़ी चुनौतियों जैसे infrastructure, energy, healthcare, education और technology access में उपयोगी साबित हो सकें। लगातार सीखते रहने की सलाह PM Modi ने graduating students से कहा कि degree हासिल करने के बाद learning खत्म नहीं होती। बदलती technology के दौर में professionals को लगातार अपने skills को update करना होगा। उन्होंने युवाओं से curiosity बनाए रखने और नए सवाल पूछने की आदत विकसित करने को कहा। उनके मुताबिक, तेजी से बदलती दुनिया में सीखने की क्षमता ही लंबे समय में सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक होगी। वैश्विक बदलावों को अवसर के रूप में देखें प्रधानमंत्री ने geopolitical बदलावों और technological transformation का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इन बदलावों के बीच भारत के सामने नई चुनौतियों के साथ-साथ बड़े अवसर भी मौजूद हैं। युवा engineers और technology professionals इन बदलावों को समझकर भारत को global technology ecosystem में मजबूत स्थिति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। IIT Delhi के graduates को मिला बड़ा संदेश IIT Delhi के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यह रहा कि देश की नई पीढ़ी केवल नौकरी पाने वाली workforce न बने, बल्कि problem solvers, innovators और technology creators के रूप में आगे बढ़े। उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और skills को देश की जरूरतों के साथ जोड़ने की अपील की। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत AI, semiconductor, quantum technology, space technology और अन्य advanced technology sectors में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। IIT Delhi में ‘Param Pragya’ का भी उल्लेख IIT Delhi के 57वें Convocation से जुड़े कार्यक्रम में institute की research और technology initiatives भी चर्चा में रहे। समारोह में ‘Param Pragya’ से जुड़े कार्यक्रम का भी उल्लेख हुआ, जो भारत की advanced computing और technology capabilities को मजबूत करने की दिशा से जुड़ा है। यह पहल इस व्यापक दिशा से जुड़ी है जिसमें भारत emerging technologies में research और indigenous capabilities को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। निष्कर्ष IIT Delhi के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा engineers और graduates को innovation, research और continuous learning पर जोर देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि career decisions लेते समय केवल salary को नहीं, बल्कि देश की जरूरतों और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब emerging technologies तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को बदल रही हैं। भारत के लिए आने वाले वर्षों में यह चुनौती होगी कि वह केवल नई technologies को अपनाए नहीं, बल्कि research और innovation के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताएं भी विकसित करे। Source: All India Radio / DD India, Hindustan Times, Indian Express, IIT Delhi Convocation-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | छात्र आंदोलन, NEET और सरकार पर विशाल ददलानी का व्यंग्यात्मक वीडियो; सोशल मीडिया पर तेज़ बहस

मशहूर गायक और संगीतकार विशाल ददलानी का एक व्यंग्यात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक और सरकार की भूमिका पर अपनी टिप्पणी की है। विशाल ददलानी ने कहा कि छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और कार्रवाई से ज्यादा चर्चा छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्दों पर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिक गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अहंकार कम कीजिए, पीआर कम कीजिए और खराब रील्स बनाना बंद कीजिए।” इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों के मुद्दों पर आवाज़ उठाने क�

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AI और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समीक्षा बैठकें तेज़, नई निवेश परियोजनाओं पर फोकस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी नई परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की समीक्षा तेज़ कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर AI आधारित डिजिटल सेवाओं, स्मार्ट प्रशासन और तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य AI के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्वदेशी AI मॉडल और नए निवेश को मिली गति हाल ही में सरकार ने 20 स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के प्रस्तावों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही AI अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 58 Centres of Excellence को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने का भी फैसला किया है, ताकि भारतीय स्टार्टअप, शोध संस्थान और उद्योग वैश्विक स्तर की AI तकनीक विकसित कर सकें। डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर MeitY के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त 700 से अधिक AI उपयोग मामलों और 760 से अधिक प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, परिवहन, शहरी विकास और प्रशासनिक सेवाओं में AI के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाएँ अधिक नागरिक-केंद्रित और डेटा-आधारित बनें। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए देश में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी तेज़ हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार जून तिमाही में संस्थागत निवेश का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर परियोजनाओं में गया, जिससे स्पष्ट है कि AI आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक अवसंरचना तेजी से विकसित की जा रही है। AI गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी ध्यान सरकार केवल तकनीकी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदार AI उपयोग के लिए AI Governance Framework और सुरक्षा मानकों पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञ समितियाँ AI से जुड़े नैतिक, गोपनीयता और पारदर्शिता संबंधी मुद्दों की समीक्षा कर रही हैं ताकि नई तकनीकों का उपयोग सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। निष्कर्ष भारत AI और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत सुधारों के माध्यम से वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी AI मॉडल, मजबूत डिजिटल अवसंरचना और जिम्मेदार AI गवर्नेंस के संयोजन से देश की प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को तलब किया, PM मोदी की पोस्ट और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट के अस्थायी रूप से हटाए जाने और ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी (Child Safety) से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए नई दिल्ली तलब किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ होने वाली इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की सुरक्षा, AI आधारित निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठा विवाद हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रही थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी व्यक्त किया। हालांकि, सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता से जुड़ी हैं, इसलिए कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण लिया जाना आवश्यक है। ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर सरकार सख्त बैठक का दूसरा प्रमुख मुद्दा प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा है। सरकार Meta से यह जानना चाहती है कि बच्चों के खिलाफ यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSAM), फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन ग्रूमिंग और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित बने रहें। AI और कंटेंट मॉडरेशन पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक सामग्री, फर्जी सूचनाओं की रोकथाम और Verified Accounts की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि Meta भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप अपनी नीतियों को और अधिक पारदर्शी बनाए तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर जोर भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में कार्यरत सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप बनाना है, ताकि उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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Meta की ग्लोबल टीम को भारत सरकार का समन, PM मोदी की Facebook पोस्ट और चाइल्ड सेफ्टी पर होगी जवाबदेही तय

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta (Facebook और Instagram) की वैश्विक टीम को 5 और 6 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के लिए तलब किया है। सरकार इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाने, प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM) से जुड़े मामलों, AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन और सत्यापित (Verified) अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब मांगेगी। PM मोदी की पोस्ट पर उठे सवाल सरकार की नाराज़गी उस समय सामने आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित हो गई थी। Meta ने बाद में इसे तकनीकी त्रुटि (Technical Error) बताते हुए पोस्ट को बहाल कर दिया और खेद भी जताया। हालांकि, सरकार का कहना है कि केवल “तकनीकी गलती” का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है और इस मामले में विस्तृत जवाबदेही तय की जाएगी। चाइल्ड सेफ्टी और CSAM पर सख्त रुख बैठक में सरकार Meta से यह भी पूछेगी कि उसके प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Exploitative and Abuse Material (CSAM) से जुड़े कंटेंट और विज्ञापनों को रोकने के लिए कौन-सी सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी Meta के प्लेटफॉर्म पर कथित CSAM विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की है। सरकार चाहती है कि कंपनी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक प्रभावी तकनीकी उपाय अपनाए। AI कंटेंट और Verified Accounts पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार बैठक में AI द्वारा तैयार किए गए कंटेंट, डीपफेक सामग्री, Verified Accounts की सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। सरकार का कहना है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को भारत के कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर सरकार का जोर आईटी मंत्रालय का मानना है कि करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उपयोगकर्ता सुरक्षा, बाल संरक्षण और निष्पक्ष कंटेंट मॉडरेशन भी सुनिश्चित करना होगा। इसी उद्देश्य से Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों को सीधे नई दिल्ली बुलाकर विस्तृत चर्चा की जा रही है। निष्कर्ष Meta की वैश्विक टीम के साथ होने वाली यह बैठक भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच डिजिटल सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भारत में संचालन करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को स्थानीय कानूनों, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Meta जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर निवेश को नई गति, कई परियोजनाओं पर तेजी से काम

नई दिल्ली: भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और AI नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें निजी कंपनियों तथा वैश्विक निवेशकों के साथ मिलकर नई उत्पादन इकाइयों और अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। AI मिशन को मिल रही नई गति सरकार के IndiaAI Mission के तहत देश में AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, अनुसंधान, स्किल डेवलपमेंट और डेटा प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश बढ़ा Semicon India Programme के अंतर्गत सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप पैकेजिंग और डिस्प्ले निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन निवेशों से भारत वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई दिशा मिलेगी। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में नई इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, सर्वर, डेटा सेंटर उपकरण और अन्य डिजिटल हार्डवेयर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और नई नीतियों का विस्तार किया जा रहा है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और स्टार्टअप्स को लाभ विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में हजारों उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित होंगे। साथ ही AI, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और चिप टेक्नोलॉजी से जुड़े भारतीय स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे। सरकार उद्योग, शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। निष्कर्ष AI, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निवेश भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। सरकार की नई पहलें देश को वैश्विक तकनीकी और विनिर्माण हब बनाने के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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