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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, नई सरकारी योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर काम तेज़

नई दिल्ली: भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) और डिजिटल टेक्नोलॉजी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई योजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, मोबाइल निर्माण और डिजिटल हार्डवेयर के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। हाल के महीनों में विभिन्न नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहन योजनाओं के बाद घरेलू और विदेशी निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार सरकार सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर और उन्नत डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े कई नए निवेश प्रस्तावों पर राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और उच्च तकनीक आधारित रोजगार के अवसर पैदा करना है। स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा समर्थन सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF), स्टार्टअप इकोसिस्टम और अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को नई गति मिलने की उम्मीद है। घरेलू विनिर्माण पर विशेष जोर नई योजनाओं के तहत सरकार स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, डिस्प्ले, बैटरी, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दे रही है। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मोबाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा नई सरकारी योजनाओं और प्रस्तावित निवेशों के माध्यम से आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य भारत को उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना और वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नई सरकारी योजनाएँ भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश, रोजगार, निर्यात और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं पर काम तेज़, सरकार की कई निवेश योजनाएँ चर्चा में

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं और निवेश योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया है। हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और सेमिकॉन इंडिया 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना है। केंद्र सरकार के अनुसार नई योजनाओं के माध्यम से घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition), सप्लाई चेन को मजबूत करने, भारतीय ब्रांड विकसित करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड से स्टार्टअप्स को मिला बढ़ावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जानकारी दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 कंपनियों और स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश आठ वेंचर कैपिटल फंडों के जरिए किया गया है, जिससे डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को गति मिली है। मोबाइल और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव सरकार ने हाल ही में ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और ₹1,27,500 करोड़ की Semicon India 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। रोजगार और निवेश को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में अरबों रुपये का निवेश आकर्षित होगा और हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली ये परियोजनाएँ Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियान को नई गति देंगी। सरकार का मानना है कि मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निष्कर्ष नई इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल विनिर्माण परियोजनाएँ भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सरकार की निवेश योजनाएँ, स्टार्टअप समर्थन और सेमीकंडक्टर मिशन मिलकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश

नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, सेमीकंडक्टर, एम्बेडेड सिस्टम, IoT, रोबोटिक्स और उन्नत हार्डवेयर तकनीकों को बढ़ावा देना है। EDF योजना का संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत किया जा रहा है। यह फंड प्रत्यक्ष निवेश के बजाय Alternative Investment Funds (AIFs) के माध्यम से स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराता है, जिससे निजी निवेश भी आकर्षित हो रहा है। 128 स्टार्टअप्स को मिला लाभ सरकारी जानकारी के अनुसार EDF समर्थित स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन तकनीक और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन कंपनियों ने कई स्वदेशी तकनीकों का विकास किया है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से किया गया निवेश भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगा। यह पहल Digital India, Make in India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को भी गति दे रही है। निजी निवेश भी बढ़ा EDF मॉडल की खास बात यह है कि सरकारी निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र की पूंजी भी आकर्षित हो रही है। इससे शुरुआती चरण (Early Stage) के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिलने के साथ-साथ उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर फोकस सरकार ने हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। EDF इन्हीं प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भविष्य में अधिक स्टार्टअप्स को इससे जोड़ने की योजना है। निष्कर्ष 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे नवाचार, रोजगार और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Electronics Development Fund (EDF) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने ट्रायल रन में 145 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की, तेज माल परिवहन की दिशा में बड़ी छलांग

कोटा: भारतीय रेलवे ने माल परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली वंदे भारत फ्रेट (Freight EMU) ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा किया। राजस्थान के कोटा मंडल में हुए शुरुआती परीक्षण के दौरान ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की। यह भारत की अब तक की सबसे तेज मालगाड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है और इसका उद्देश्य ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस पार्सल तथा कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स को नई गति देना है। यह अत्याधुनिक फ्रेट ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विकसित की गई है। इसमें 16 कोच हैं और लगभग 397 टन तक माल ढोने की क्षमता है। ट्रायल के दौरान रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, स्थिरता और भार वहन क्षमता का परीक्षण किया। ई-कॉमर्स और कोल्ड-चेन को मिलेगा बड़ा लाभ भारतीय रेलवे के अनुसार यह ट्रेन विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों, एक्सप्रेस कार्गो, दवाइयों, कृषि उत्पादों और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के लिए तैयार की गई है। तेज गति के कारण समय-संवेदनशील सामान देश के विभिन्न हिस्सों तक पहले की तुलना में काफी कम समय में पहुँचाया जा सकेगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। आधुनिक तकनीक से लैस वंदे भारत फ्रेट EMU में आधुनिक इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) तकनीक का उपयोग किया गया है। यह पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में तेज़ एक्सेलेरेशन, बेहतर ऊर्जा दक्षता और कम परिचालन समय प्रदान करेगी। भविष्य में इसका लक्ष्य उच्च गति वाले माल परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनना है। रेलवे की बड़ी योजना भारतीय रेलवे की योजना आने वाले वर्षों में ऐसी कई हाई-स्पीड फ्रेट ट्रेनों को नेटवर्क में शामिल करने की है। सरकार का लक्ष्य PM Gati Shakti और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत रेल के माध्यम से माल परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इससे उद्योगों को तेज़ और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिलेगी तथा देश की सप्लाई चेन और अधिक मजबूत होगी। ट्रायल के बाद आगे की प्रक्रिया RDSO द्वारा सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद ट्रेन को अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से व्यावसायिक संचालन में शामिल किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भारत के माल परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति साबित हो सकती है। निष्कर्ष 145 किमी/घंटा की सफल ट्रायल स्पीड हासिल करने के साथ भारत की पहली वंदे भारत फ्रेट ट्रेन ने रेलवे के आधुनिकीकरण और तेज़ माल परिवहन की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो देश में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को बड़ा लाभ मिलेगा। Source: Research Designs & Standards Organisation (RDSO) | Indian Railways | Integral Coach Factory (ICF) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (Electronics Development Fund – EDF) के माध्यम से देश के 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों में ₹1,335.77 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकी निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित EDF एक Fund of Funds मॉडल पर कार्य करता है। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि पेशेवर वेंचर कैपिटल और एंजेल फंड्स (Daughter Funds) के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराता है। अब तक EDF ने आठ Daughter Funds में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है, जिन्होंने आगे 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश किया। उन्नत तकनीकी क्षेत्रों को मिला बढ़ावा सरकार के अनुसार EDF से समर्थित स्टार्टअप्स कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनमें— शामिल हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और नवाचार को बढ़ावा सरकार ने बताया कि EDF से समर्थित स्टार्टअप्स ने अब तक 23,600 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा 368 बौद्धिक संपदाएँ (Intellectual Properties – IPs) विकसित या अधिग्रहित की गई हैं। इससे भारत में घरेलू अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी ताज़ा जानकारी के अनुसार EDF से समर्थित 128 कंपनियों में से 90 स्टार्टअप कर्नाटक में स्थित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु और आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी इसी तरह का स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करना है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से हो रहा निवेश Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को नई गति देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ते निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का लक्ष्य सरकार ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार और निर्माण केंद्र बनाना है। इसके लिए निजी निवेश, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में नवाचार, रोजगार और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को नई गति मिलेगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की पॉलिमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट योजना चर्चा में, डिजिटल भुगतान और नई मुद्रा तकनीक पर फोकस

नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंकनोट योजना एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की अनुमति दी है। इस पहल का उद्देश्य नई मुद्रा तकनीक की उपयोगिता, टिकाऊपन और सुरक्षा का परीक्षण करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागज़ के नोटों को पूरी तरह हटाने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ (कुल 200 करोड़) पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों का उपयोग अलग-अलग जलवायु और परिस्थितियों में उनकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और सुरक्षा विशेषताओं का आकलन करने के लिए किया जाएगा। पॉलिमर नोट क्यों? RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर साबित हो सकते हैं— दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में पॉलिमर नोट पहले से सफलतापूर्वक प्रचलन में हैं। डिजिटल भुगतान पर क्या असर पड़ेगा? हाल के वर्षों में भारत में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि पॉलिमर नोटों का परीक्षण डिजिटल भुगतान का विकल्प नहीं, बल्कि नकद मुद्रा को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक तकनीकी कदम है। फील्ड ट्रायल के बाद ही इसके व्यापक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। कागज़ी नोट जारी रहेंगे वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान में कागज़ी नोटों को बंद करने या पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तभी आगे नियमित जारी करने पर विचार किया जाएगा। आगे क्या होगा? फील्ड ट्रायल के दौरान RBI अलग-अलग क्षेत्रों में नोटों के उपयोग, टिकाऊपन, सुरक्षा और जनता की प्रतिक्रिया का अध्ययन करेगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्गों में भी पॉलिमर नोट जारी करने पर विचार किया जा सकता है। निष्कर्ष RBI की पॉलिमर करेंसी योजना भारत की मुद्रा प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य नकद लेन-देन को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाना है। हालांकि डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल भारतीय मुद्रा प्रणाली में नई तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। Source: Reserve Bank of India (RBI) | Ministry of Finance | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में AI और डिजिटल गवर्नेंस को लेकर नई सरकारी परियोजनाओं पर काम तेज, तकनीक आधारित सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए कई नई परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है। विभिन्न मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां AI आधारित तकनीकों का उपयोग प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और नागरिक सेवाओं में बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। सरकार का मानना है कि AI और डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग से सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन, निर्णय प्रक्रिया में सुधार और नागरिकों तक सेवाओं की तेज़ पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है। किन क्षेत्रों में होगा AI का उपयोग? सरकारी परियोजनाओं के तहत AI का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में किया जा रहा है— डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा नया आयाम सरकार विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़कर नागरिकों को अधिक प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। ऑनलाइन प्रमाणपत्र, डिजिटल पहचान, ई-ऑफिस, डिजिटल भुगतान और AI आधारित शिकायत निवारण जैसी सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। स्टार्टअप और उद्योग को भी मिलेगा लाभ AI परियोजनाओं के विस्तार से भारतीय स्टार्टअप, आईटी कंपनियों और टेक उद्योग के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी AI समाधान विकसित करने के लिए उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ा रही है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AI का जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ उपयोग किया जाए, तो इससे सरकारी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बन सकती है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक होगा। निष्कर्ष AI और डिजिटल गवर्नेंस पर सरकार का बढ़ता फोकस भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं से नागरिक सेवाओं में सुधार, प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | IndiaAI Mission | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत ने विकसित किया पहला स्वदेशी 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का टर्बोजेट इंजन, रक्षा तकनीक में बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी रक्षा एवं एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी टर्बोजेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित किया है। यह इंजन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत Gas Turbine Research Establishment (GTRE) द्वारा विकसित किया गया है। इसे भविष्य में लॉन्ग-रेंज ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलों और अन्य मानव रहित रक्षा प्लेटफॉर्म में उपयोग किए जाने की योजना है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी इंजन तकनीक को नई दिशा देगी और विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम यह स्वदेशी टर्बोजेट इंजन भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। अब तक इस श्रेणी के इंजन के लिए भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नए इंजन के विकास से घरेलू रक्षा उत्पादन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। किन प्लेटफॉर्म में होगा उपयोग? विशेषज्ञों के अनुसार इस इंजन का उपयोग भविष्य में कई रक्षा प्रणालियों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं— रक्षा उद्योग को मिलेगा लाभ इस परियोजना से— विशेषज्ञों की राय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन तकनीक किसी भी एयरोस्पेस कार्यक्रम का सबसे जटिल हिस्सा होती है। ऐसे में स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का विकास भारत के लिए तकनीकी दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है और यह भविष्य में AMCA, ड्रोन तथा अन्य स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा। आगे क्या होगा? इंजन के विकास के बाद अब विभिन्न परीक्षणों और प्रमाणन (Certification) की प्रक्रिया जारी रहेगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे रक्षा प्लेटफॉर्म में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। निष्कर्ष 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के पहले स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का विकास भारत की रक्षा तकनीक और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी, बल्कि भविष्य की स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को भी नई गति मिलेगी। Source: DRDO | Ministry of Defence | PIB जय राष्ट्र न्यूज़

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MeitY ने स्वदेशी तकनीक और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए अपडेट जारी, AI और सेमीकंडक्टर मिशन पर जोर

नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आज देश में स्वदेशी तकनीक, डिजिटल नवाचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण अपडेट जारी किए। मंत्रालय ने कहा कि भारत को डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने के लिए नई पहलों पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। AI और डिजिटल इंडिया मिशन पर विशेष फोकस MeitY ने बताया कि IndiaAI Mission के तहत देशभर में AI आधारित अनुसंधान, स्टार्टअप, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास को मजबूत किया जा रहा है। मंत्रालय का लक्ष्य सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और उद्योगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत नागरिक सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वदेशी चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा मंत्रालय ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम जारी है। स्वदेशी प्रोसेसर, एम्बेडेड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर के विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और घरेलू उद्योग को नई गति मिले। स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को समर्थन MeitY ने नवाचार आधारित स्टार्टअप, डीप-टेक कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही है। मंत्रालय के अनुसार, नई तकनीकों के विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे रोजगार सृजन और तकनीकी उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी मंत्रालय ने जोर दिया है। सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणाली और महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) की सुरक्षा के लिए उन्नत सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार MeitY ने कहा कि भारत की Digital Public Infrastructure (DPI) को और मजबूत बनाने के लिए कई नई परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। डिजिटल पहचान, ऑनलाइन सेवाएं, क्लाउड प्लेटफॉर्म और सुरक्षित डेटा प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल अवसंरचना में निवेश से भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। इससे घरेलू उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है। निष्कर्ष MeitY की नई पहलें भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। AI, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार पर बढ़ते निवेश से आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल इकोसिस्टम, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। Source: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार। Original Report: MeitY द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट और डिजिटल प्रौद्योगिकी संबंधी घोषणाओं के आधार पर तैयार। जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक निवेश को मिल रही रफ्तार, भारतीय टेक सेक्टर की भी बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली, 5 जुलाई। दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर क्षमताओं के विस्तार को लेकर नई निवेश योजनाओं पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग और डिजिटल परिवर्तन की तेज़ रफ्तार के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ सकता है। AI बना निवेश का प्रमुख केंद्र जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग और स्वचालित डिजिटल समाधानों की बढ़ती मांग के चलते वैश्विक टेक उद्योग अपनी AI क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। नई तकनीकों के विकास के लिए उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम और आधुनिक डेटा सेंटर की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियां नए डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस सर्वर और उन्नत नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रही हैं। इससे व्यवसायों, सरकारी संस्थाओं और स्टार्टअप्स को अधिक सुरक्षित और तेज डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भारतीय टेक उद्योग को नए अवसर भारतीय आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र इन वैश्विक निवेश रुझानों पर करीबी नजर बनाए हुए है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि AI विकास, क्लाउड इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। डेटा सेंटर उद्योग में बढ़ेगी मांग AI आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते कई देशों में नए डेटा सेंटर स्थापित करने और मौजूदा सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल अर्थव्यवस्था, रोजगार, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी नई गति दे सकता है। भविष्य की दिशा आने वाले वर्षों में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक तकनीकी विकास के प्रमुख आधार बने रहेंगे। भारत के लिए भी यह क्षेत्र निवेश, नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारत वैश्विक टेक उद्योग में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है। स्रोत:वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग विश्लेषण, सार्वजनिक कॉर्पोरेट घोषणाएं एवं तकनीकी क्षेत्र से संबंधित उपलब्ध जानकारी। मूल रिपोर्ट:5 जुलाई 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक उद्योग रिपोर्टों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर। जय राष्ट्र न्यूज़

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