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Trump ने रूस पर प्रतिबंधों को लेकर 60 दिन के रिव्यू का संकेत दिया, रूसी तेल आयात पर भारत को फिलहाल राहत

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ पर अंतिम फैसला लेने से पहले उनके आर्थिक प्रभावों की समीक्षा करने का रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 60 दिन तक का समय लग सकता है। इस समीक्षा से भारत के रूसी तेल आयात पर संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ को लेकर फिलहाल राहत की उम्मीद बनी है।

रुबियो बोले—अंतिम फैसले से पहले होगा असर का आकलन

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस से संबंधित प्रतिबंधों और टैरिफ पर निर्णय लेने से पहले उनके व्यापक प्रभावों का आकलन करना चाहता है। इसमें वैश्विक ऊर्जा कीमतों, घरेलू महंगाई और रणनीतिक साझेदार देशों पर पड़ने वाले असर जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, समीक्षा की प्रक्रिया में लगभग 60 दिन लग सकते हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की किसी भी योजना का असर भारतीय तेल रिफाइनरियों, आयात लागत और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

प्रस्तावित अमेरिकी उपायों को लेकर समीक्षा से फिलहाल अतिरिक्त शुल्क की आशंकाओं पर कुछ राहत मिली है। हालांकि, किसी विशेष छूट की कानूनी स्थिति और उसके लागू होने की शर्तों को संबंधित अमेरिकी आदेशों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है।

100% तक टैरिफ की आशंका

रिपोर्टों में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। ऐसे कदम से भारत सहित अन्य आयातक देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, संभावित टैरिफ की अधिकतम सीमा और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर है। किसी शुल्क का लागू होना संबंधित कानून, कार्यकारी आदेश और प्रशासन के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

वैश्विक तेल कीमतें भी अहम कारक

रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंधों से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अमेरिकी प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर ईंधन लागत, परिवहन और महंगाई पर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रतिबंधों से जुड़े फैसलों में आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं का आकलन महत्वपूर्ण है।

भारत पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं

समीक्षा की प्रक्रिया को भारत के रूसी तेल आयात को स्थायी मंजूरी मिलने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका की आगे की नीति और संभावित टैरिफ संबंधी फैसले भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों तथा भारत की ऊर्जा खरीद रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

अगले 60 दिन रहेंगे महत्वपूर्ण

अब नजर अमेरिकी प्रशासन की समीक्षा और उसके बाद होने वाले फैसले पर रहेगी। अंतिम निर्णय से भारत की कच्चे तेल की आयात लागत, घरेलू महंगाई, रुपये और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रभाव की दिशा और सीमा अंतिम नीति तथा वैश्विक तेल बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

स्रोत: Reuters, The Indian Express

जय राष्ट्र न्यूज़

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