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बिजनेस | Gold Rate Today: 8 अगस्त को सोने के भाव में तेजी, 18K, 22K और 24K गोल्ड के रेट पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली: सोने की कीमतों में शनिवार, 8 अगस्त 2026 को तेजी देखने को मिली। देश में 24 कैरेट सोने का औसत भाव करीब ₹14,970 प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना करीब ₹13,712 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, शहर और स्थानीय बाजार के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बीच निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की नजर घरेलू बुलियन मार्केट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों और रुपये-डॉलर की चाल पर बनी हुई है। आज 18K, 22K और 24K सोने का भाव क्या है? 8 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रिटेल गोल्ड रेट के अनुसार 24K सोना लगभग ₹14,970 प्रति ग्राम, 22K सोना ₹13,712 प्रति ग्राम और 18K सोना करीब ₹11,227 प्रति ग्राम रहा। ये दरें प्रति ग्राम हैं और ज्वेलरी खरीदते समय अंतिम कीमत इससे अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्धता वाला होता है, जबकि 22 कैरेट का इस्तेमाल पारंपरिक भारतीय आभूषणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। 18 कैरेट सोना आमतौर पर डायमंड, व्हाइट गोल्ड और रोज गोल्ड जैसे आभूषणों में इस्तेमाल होता है। देश के अलग-अलग शहरों में क्यों बदलता है सोने का भाव? सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग समान आधार देती है, लेकिन भारत के अलग-अलग शहरों में अंतिम भाव अलग हो सकता है। इसके पीछे स्थानीय मांग, परिवहन और इंश्योरेंस लागत, ज्वेलर्स के मार्जिन और स्थानीय बाजार की परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं। उदाहरण के तौर पर 8 अगस्त को अमरावती में 24K सोने का भाव ₹15,235 प्रति ग्राम, 22K ₹13,965 प्रति ग्राम और 18K ₹11,426 प्रति ग्राम दर्ज किया गया। इससे साफ है कि शहर के हिसाब से सोने की कीमत में अंतर हो सकता है। दिल्ली में आज का गोल्ड रेट दिल्ली में 8 अगस्त के लिए 22K और 24K सोने की कीमतों को लेकर ताजा बाजार आंकड़े उपलब्ध हैं। Forbes Advisor के अनुसार दिल्ली के रेट को दिन के दौरान अपडेट किया गया और शहर में 22K तथा 24K सोने के भाव की अलग-अलग निगरानी की जा रही है। दिल्ली जैसे बड़े बुलियन बाजार में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत, रुपये की चाल और स्थानीय मांग का असर रिटेल कीमतों पर पड़ता है। सोने की कीमतों में तेजी के पीछे क्या कारण हैं? सोने की कीमत कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीदें, महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग शामिल हैं। जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखते हैं। इससे मांग बढ़ने पर कीमतों को समर्थन मिल सकता है। अगस्त में सोने ने पकड़ी तेजी NDTV के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अगस्त की शुरुआत से सोने के भाव में बढ़त दर्ज की गई है। 1 अगस्त को 24K सोना करीब ₹14,306 प्रति ग्राम था, जो 7 अगस्त तक बढ़कर ₹14,868 प्रति ग्राम पहुंच गया। इसी अवधि में 22K सोना ₹13,106 से बढ़कर ₹13,617 और 18K सोना ₹10,730 से बढ़कर ₹11,148 प्रति ग्राम हुआ। इससे अगस्त के शुरुआती दिनों में सोने के बाजार में सकारात्मक रुझान दिखाई देता है। ज्वेलरी खरीदते समय सिर्फ गोल्ड रेट न देखें ज्वेलरी खरीदते समय केवल 18K, 22K या 24K के प्रति ग्राम भाव को देखना पर्याप्त नहीं है। अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज, वेस्टेज/डिजाइन चार्ज और GST जैसी लागतें भी शामिल हो सकती हैं। इसी वजह से ऑनलाइन दिखने वाला गोल्ड रेट और ज्वेलरी दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है। खरीदारों को खरीदारी से पहले प्रति ग्राम रेट और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेनी चाहिए। हॉलमार्क और HUID जरूर जांचें सोने की ज्वेलरी खरीदते समय BIS हॉलमार्क, शुद्धता का निशान जैसे 22K 916 या 18K 750 और HUID की जांच करना महत्वपूर्ण है। इससे खरीदार को सोने की घोषित शुद्धता की पुष्टि करने में मदद मिलती है। निवेशकों की नजर बुलियन मार्केट पर सोने में हालिया तेजी के बीच निवेशकों की नजर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर बनी हुई है। सोने की कीमतों में आगे की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट, रुपये की चाल, ब्याज दरों और आर्थिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। हालांकि, केवल एक दिन की कीमत देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों को अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। निष्कर्ष 8 अगस्त 2026 को सोने के भाव में तेजी का रुख बना हुआ है और 18K, 22K तथा 24K गोल्ड की कीमतों पर खरीदारों और निवेशकों की नजर है। अगस्त की शुरुआत से घरेलू सोने की कीमतों में बढ़त दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। Source: NDTV Gold Rate, Forbes Advisor India, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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लोकसभा ने UPI लेनदेन पर संभावित MDR शुल्क का रास्ता खोलने वाला विधेयक पारित किया, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ी बहस

नई दिल्ली: लोकसभा ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों वाला Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित कर दिया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) सहित अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की अनुमति देने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग गया है। क्या बदलेगा? अब तक UPI भुगतान पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था और व्यापारियों पर भी MDR लागू नहीं था। नए संशोधन के बाद सरकार आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना जारी करके बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ श्रेणियों के UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। यह कदम डिजिटल भुगतान ढांचे को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है। क्या आम उपभोक्ता को भुगतान करना होगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित MDR उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों (Merchants) पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि आम लोग पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़े खर्चों के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है। छोटे लेनदेन पर असर नहीं सरकारी सूत्रों और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,000 तक के अधिकांश छोटे UPI भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहने की संभावना है। यदि भविष्य में MDR लागू किया भी जाता है, तो उसका दायरा मुख्यतः बड़े व्यापारी लेनदेन तक सीमित हो सकता है। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा। डिजिटल भुगतान उद्योग की प्रतिक्रिया बैंकिंग और फिनटेक उद्योग लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि पूरी तरह निःशुल्क UPI मॉडल के कारण भुगतान अवसंरचना (Infrastructure) को बनाए रखने की लागत लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि सीमित MDR व्यवस्था से बैंक, NPCI और भुगतान सेवा प्रदाता तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और नई सेवाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। दूसरी ओर कई व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि MDR लागू हुआ तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। राजनीतिक बहस विधेयक संसद में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह का महत्वपूर्ण कानून पर्याप्त चर्चा के बिना पारित किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल भविष्य के लिए कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराता है और किसी प्रकार का तत्काल शुल्क लागू नहीं करता। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा पारित संशोधन ने UPI पर संभावित MDR लागू करने का कानूनी रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है। भविष्य में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने के लिए केंद्र सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। Source: Ministry of Finance | Lok Sabha Proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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Q1 Earnings Season अपने चरम पर, कई बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर निवेशकों की नज़र

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में पहली तिमाही (Q1 FY2026–27) के नतीजों का सीज़न अपने चरम पर पहुँच गया है। इस सप्ताह कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियाँ अपने अप्रैल–जून तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर रही हैं। निवेशकों की नज़र विशेष रूप से कंपनियों की आय (Revenue), शुद्ध लाभ (Net Profit), मार्जिन, भविष्य के कारोबार (Guidance) और प्रबंधन की टिप्पणियों पर बनी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय होने की संभावना है। आज कई दिग्गज कंपनियों के नतीजे आज बाजार बंद होने के बाद और दिनभर के दौरान कई प्रमुख कंपनियाँ अपने Q1 परिणाम घोषित कर रही हैं। इनमें Siemens, Bata India, Honasa Consumer, Gland Pharma सहित विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियाँ शामिल हैं। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर की कंपनियों के नतीजों पर भी निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। बाजार की दिशा तय करेंगे कॉर्पोरेट नतीजे विश्लेषकों का मानना है कि इस तिमाही के नतीजे केवल कंपनियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घरेलू मांग, उपभोक्ता खर्च, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों के प्रभाव का भी संकेत देंगे। जिन कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर रहेंगे, उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस आईटी कंपनियों के लिए विदेशी ऑर्डर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI आधारित सेवाओं की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए घरेलू निवेश, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ और निर्यात के आंकड़े निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक होंगे। FMCG कंपनियों के नतीजों से ग्रामीण और शहरी मांग की स्थिति का भी अंदाज़ा लगाया जाएगा। विदेशी निवेशकों की भी नज़र विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) और घरेलू निवेशक (DIIs) दोनों ही कॉर्पोरेट नतीजों का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि केवल तिमाही लाभ पर नहीं, बल्कि कंपनी की भविष्य की रणनीति, नकदी प्रवाह, कर्ज की स्थिति और प्रबंधन के दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखकर निवेश संबंधी निर्णय लें। Q1 नतीजे पूरे वित्तीय वर्ष के संभावित प्रदर्शन का शुरुआती संकेत माने जाते हैं। निष्कर्ष Q1 Earnings Season भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में घोषित होने वाले प्रमुख कंपनियों के परिणाम बाजार की चाल, निवेशकों की धारणा और विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। Source: National Stock Exchange (NSE) | Bombay Stock Exchange (BSE) | Company Filings जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका के नए वीज़ा बॉन्ड नियम और वैश्विक व्यापार घटनाक्रम के बीच भारतीय बाजार की नजर कॉर्पोरेट नतीजों और निवेश रुझानों पर

मुंबई: वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों के बीच भारतीय शेयर बाजार की नजर इस समय दो प्रमुख कारकों पर टिकी हुई है—अमेरिका के नए वीज़ा बॉन्ड नियम और कॉर्पोरेट कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे। विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों घटनाओं का निवेशकों की धारणा (Investor Sentiment), विदेशी निवेश प्रवाह (FPI) और बाजार की दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने B-1 (Business) और B-2 (Tourist) वीज़ा श्रेणी के लिए वीज़ा बॉन्ड कार्यक्रम को स्थायी बनाने की घोषणा की है। इस व्यवस्था के तहत चयनित देशों के नागरिकों को वीज़ा जारी होने से पहले 20,000 अमेरिकी डॉलर तक का रिफंडेबल बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। हालांकि भारत इस 50 देशों की सूची में शामिल नहीं है, इसलिए भारतीय नागरिकों पर इस नियम का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। कॉर्पोरेट नतीजों पर बाजार की नजर भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियाँ अपने Q1 FY2026-27 के वित्तीय नतीजे जारी कर रही हैं। निवेशक कंपनियों के लाभ, राजस्व वृद्धि, भविष्य के मार्गदर्शन (Guidance) और मांग के रुझानों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। मजबूत नतीजों से बाजार को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि कमजोर प्रदर्शन से कुछ क्षेत्रों में दबाव बन सकता है। FPI और वैश्विक संकेत रहेंगे अहम बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियां, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल और वैश्विक व्यापार से जुड़े घटनाक्रम आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों और घरेलू मैक्रोइकोनॉमिक डेटा पर भी बनी हुई है। भारत पर प्रत्यक्ष असर सीमित विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी वीज़ा बॉन्ड नीति का भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है क्योंकि भारतीय नागरिक इस कार्यक्रम के दायरे में नहीं आते। फिर भी वैश्विक निवेशकों की धारणा और अंतरराष्ट्रीय नीति परिवर्तनों का अप्रत्यक्ष असर वित्तीय बाजारों पर देखा जा सकता है। निष्कर्ष भारतीय बाजार फिलहाल घरेलू कॉर्पोरेट आय, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक घटनाओं के मिश्रित प्रभाव का आकलन कर रहा है। निवेशकों को आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजों और अंतरराष्ट्रीय नीतिगत फैसलों पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है। Source: Ministry of Finance | U.S. Department of State जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी की, पूंजीगत खर्च और विकास कार्यों को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राज्यों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी (Tax Devolution) जारी की है। यह राशि 10 अगस्त को जारी होने वाली नियमित मासिक कर हिस्सेदारी के अतिरिक्त अग्रिम किस्त के रूप में दी गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस कदम से राज्यों को आधारभूत ढांचा (Infrastructure), पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और जनकल्याणकारी योजनाओं पर तेजी से खर्च करने में मदद मिलेगी। सरकार ने कहा कि यह अग्रिम वितरण राज्यों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा ताकि वे मानसून, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए समय पर संसाधन उपलब्ध करा सकें। यह निर्णय सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के अनुरूप राज्यों को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है। राज्यों को मिलेगा विकास कार्यों में बल वित्त मंत्रालय के अनुसार अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी करने का उद्देश्य राज्यों को— के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। पूंजीगत व्यय पर रहेगा फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम कर वितरण से राज्यों को वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इससे निर्माण गतिविधियों, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है। वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप व्यवस्था भारत में केंद्र द्वारा एकत्र किए गए करों का हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को नियमित रूप से वितरित किया जाता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्यों को विभाज्य कर पूल (Divisible Tax Pool) का 41% हिस्सा दिया जाता है। निष्कर्ष ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी करने का निर्णय राज्यों की विकास योजनाओं को गति देने और पूंजीगत निवेश बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राज्यों को वित्तीय संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और विभिन्न विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। Source: Ministry of Finance | Department of Expenditure जय राष्ट्र न्यूज़

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Q1 रिजल्ट सीज़न में आज कई बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजे, निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर

मुंबई: जून तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजों का सीज़न आज अपने सबसे व्यस्त चरण में पहुँच गया है। मारुति सुज़ुकी, ITC, इंडियन ऑयल (IOC), GAIL, ABB इंडिया, बजाज फिनसर्व, डिक्सन टेक्नोलॉजीज़, नेशनल एल्युमिनियम (NALCO), श्री सीमेंट समेत 100 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियाँ आज अपने अप्रैल–जून 2026 तिमाही परिणाम घोषित करेंगी। इन नतीजों पर घरेलू और विदेशी निवेशकों की विशेष नजर है क्योंकि इससे आने वाले महीनों के बाजार रुख का संकेत मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, ऊर्जा, पूंजीगत वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के नतीजे यह बताएंगे कि घरेलू मांग, कच्चे माल की लागत और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भारतीय कंपनियों पर कितना प्रभाव पड़ा है। खासकर मारुति सुज़ुकी और ITC के नतीजों को बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन कंपनियों पर रहेगी सबसे अधिक नजर आज जिन प्रमुख कंपनियों के परिणाम आने हैं, उनमें शामिल हैं— इन कंपनियों के नतीजे ऑटो, ऊर्जा, एफएमसीजी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक केवल मुनाफे और आय (Revenue) पर ही नहीं, बल्कि— जैसे संकेतकों पर भी ध्यान देंगे। इनसे यह स्पष्ट होगा कि कंपनियाँ आने वाली तिमाहियों के लिए कितनी आशावादी हैं। बाजार पर पड़ सकता है असर शेयर बाजार में आज कारोबार के दौरान इन परिणामों का सीधा असर देखने को मिल सकता है। जिन कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर रहेंगे, उनके शेयरों में तेजी आ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव देखने को मिल सकता है। हाल के दिनों में मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेश के चलते भारतीय बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। ऊर्जा और ऑटो सेक्टर पर विशेष फोकस ऊर्जा क्षेत्र में GAIL और इंडियन ऑयल के परिणाम गैस ट्रांसमिशन, रिफाइनिंग मार्जिन और ऊर्जा मांग की स्थिति को दर्शाएंगे। वहीं ऑटो सेक्टर में मारुति सुज़ुकी के नतीजों से घरेलू वाहन बिक्री और उपभोक्ता मांग का संकेत मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। निष्कर्ष Q1 रिजल्ट सीज़न का आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई दिग्गज कंपनियों के वित्तीय नतीजे आने से बाजार की दिशा तय होने की संभावना है। निवेशक अब यह देखेंगे कि कंपनियाँ बदलती वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू मांग के बीच कितना मजबूत प्रदर्शन करने में सफल रही हैं। Source: National Stock Exchange (NSE) | BSE India | Company Filings जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (Electronics Development Fund – EDF) के माध्यम से देश के 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों में ₹1,335.77 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकी निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित EDF एक Fund of Funds मॉडल पर कार्य करता है। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि पेशेवर वेंचर कैपिटल और एंजेल फंड्स (Daughter Funds) के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराता है। अब तक EDF ने आठ Daughter Funds में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है, जिन्होंने आगे 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश किया। उन्नत तकनीकी क्षेत्रों को मिला बढ़ावा सरकार के अनुसार EDF से समर्थित स्टार्टअप्स कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनमें— शामिल हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और नवाचार को बढ़ावा सरकार ने बताया कि EDF से समर्थित स्टार्टअप्स ने अब तक 23,600 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा 368 बौद्धिक संपदाएँ (Intellectual Properties – IPs) विकसित या अधिग्रहित की गई हैं। इससे भारत में घरेलू अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी ताज़ा जानकारी के अनुसार EDF से समर्थित 128 कंपनियों में से 90 स्टार्टअप कर्नाटक में स्थित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु और आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी इसी तरह का स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करना है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से हो रहा निवेश Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को नई गति देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ते निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का लक्ष्य सरकार ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार और निर्माण केंद्र बनाना है। इसके लिए निजी निवेश, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में नवाचार, रोजगार और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को नई गति मिलेगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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जुलाई में FPI निवेश ₹42,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, बाजार की नजर अब कॉर्पोरेट नतीजों पर

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPI) का भरोसा लगातार मजबूत होता दिख रहा है। जुलाई 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) ₹42,000 करोड़ के पार पहुंच गया है, जो इस वर्ष का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। मजबूत आर्थिक संकेतकों, स्थिर घरेलू मांग और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास ने भारतीय बाजार को आकर्षक बनाया है। (timesofindia.indiatimes.com) विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार विदेशी निवेश से बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। हालांकि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अब Q1 (पहली तिमाही) के कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। क्यों बढ़ा विदेशी निवेश? विश्लेषकों का मानना है कि FPI निवेश बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं— इन कारणों से विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। अब कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां अपने पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी। निवेशक विशेष रूप से इन क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं— यदि कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहते हैं, तो निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है। बाजार के लिए आगे क्या? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेश का मजबूत प्रवाह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। निवेशकों के लिए सलाह विशेषज्ञ निवेशकों को केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन, आय वृद्धि और दीर्घकालिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। निष्कर्ष जुलाई में ₹42,000 करोड़ से अधिक का विदेशी निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार में वैश्विक भरोसे का संकेत है। अब बाजार की अगली चाल काफी हद तक Q1 कॉर्पोरेट नतीजों और कंपनियों के भविष्य के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगी। Source: National Securities Depository Limited (NSDL) | Times of India | Market Experts जय राष्ट्र न्यूज़

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Q1 रिजल्ट सीज़न जारी, निवेशकों की नजर बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर

मुंबई: देश में पहली तिमाही (Q1 FY27) के कॉर्पोरेट नतीजों का सीज़न जारी है और शेयर बाजार की नजर अब बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर टिकी हुई है। आईटी, बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कई प्रमुख कंपनियां इस सप्ताह अपने अप्रैल-जून तिमाही के परिणाम जारी कर रही हैं। इन नतीजों के आधार पर निवेशक कंपनियों की आय, मुनाफे और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा अर्निंग्स सीज़न शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। बेहतर परिणाम देने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि उम्मीद से कमजोर नतीजे निवेशकों की धारणा पर असर डाल सकते हैं। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा नजर? इस बार निवेशकों का विशेष फोकस इन क्षेत्रों पर है— विशेषज्ञों के अनुसार इन सेक्टरों का प्रदर्शन पूरे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगा। निवेशक क्या देख रहे हैं? कंपनियों के तिमाही नतीजों में निवेशक मुख्य रूप से इन पहलुओं पर ध्यान दे रहे हैं— बाजार में उतार-चढ़ाव संभव बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Q1 परिणामों के दौरान शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। जिन कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर आएंगे, उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FII), कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की चाल भी घरेलू बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल तिमाही मुनाफा ही नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा दी गई भविष्य की कारोबारी गाइडेंस भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि कंपनियां आगामी तिमाहियों के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं, तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। निष्कर्ष Q1 अर्निंग्स सीज़न के बीच भारतीय शेयर बाजार की नजर बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जारी होने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि बाजार में तेजी का दौर जारी रहेगा या निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनानी होगी। Source: BSE | NSE | Company Exchange Filings | PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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Infosys के Q1 नतीजों और बढ़ते कच्चे तेल के बीच शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की नजर कॉर्पोरेट रिजल्ट्स पर

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसकी प्रमुख वजह Infosys के पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे, बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और जारी कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीज़न रहे। निवेशक बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों और उनके भविष्य के कारोबारी संकेतों (Guidance) का आकलन करने में जुटे रहे। आईटी, बैंकिंग और ऊर्जा सेक्टर के शेयरों में दिनभर खरीदारी और मुनाफावसूली का दौर चलता रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक आर्थिक संकेत भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। Infosys के नतीजों पर बाजार की नजर Infosys ने पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए, जिनमें कंपनी के राजस्व, लाभ और प्रबंधन द्वारा दिए गए भविष्य के अनुमान पर निवेशकों की विशेष नजर रही। आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी होने के कारण उसके नतीजों का असर पूरे आईटी इंडेक्स और टेक शेयरों पर देखने को मिला। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों के लिए कंपनी की गाइडेंस विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्रूड ऑयल महंगा होने से— इसी वजह से निवेशक वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। कॉर्पोरेट रिजल्ट्स बने बाजार का मुख्य ट्रिगर आज कई अन्य बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों का भी इंतजार रहा। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में बाजार की दिशा मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी— विशेषज्ञों की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि प्रमुख कंपनियों के परिणाम अनुमान से बेहतर आते हैं, तो बाजार को सकारात्मक समर्थन मिल सकता है। वहीं, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में लगातार तेजी बनी रहने पर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निष्कर्ष Infosys के Q1 नतीजों, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीज़न के बीच भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब आने वाले दिनों में अन्य बड़ी कंपनियों के नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। Source: BSE | NSE | Reuters | LiveMint | Company Exchange Filings जय राष्ट्र न्यूज़

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