प्रमुख खबरें
Navkar Mantra

नवकार मंत्र: आत्मशुद्धि और मोक्ष का दिव्य पथ 

भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में जैन धर्म का विशेष स्थान है। इस धर्म में नवकार मंत्र (Navkar Mantra) को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। नवकार मंत्र न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का मार्ग भी है। इसे “पंच परमेष्ठी” की आराधना कहा जाता है, जिसमें पांच महान आत्माओं को वंदना की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है नवकार मंत्र, इसका महत्व और इसे जपने से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। क्या है नवकार मंत्र? नवकार मंत्र (Navkar Mantra) जैन धर्म (Jain Dharma) का सबसे प्राचीन और पवित्र मंत्र है। नवकार महामंत्र जैन धर्म से गहराई से जुड़ा हुआ है। सरल शब्दों में कहें तो जैन धर्म (Jain Dharma) के अनुयायी इस पवित्र मंत्र का जप सामूहिक रूप से करते हैं। इस मंत्र का उच्चारण विशेष ध्यान और एकाग्रता के साथ किया जाता है। नवकार महामंत्र को ‘नमस्कार मंगल’ या ‘परमेष्ठी मंत्र’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मंत्र जैन धर्म के संतों—जैसे साधु-साध्वी और मुनियों—की वंदना स्वरूप होता है और उनके प्रति गहन श्रद्धा को प्रकट करता है। नवकार मंत्र का अर्थ और भाव इस मंत्र का अर्थ केवल वंदना करना नहीं है, बल्कि यह आत्मा की ऊँचाई तक पहुँचने की प्रेरणा देता है। नवकार मंत्र हमें बताता है कि जीवन में सच्चा आदर्श क्या है और किसे अपना गुरु मानना चाहिए। यह मंत्र यह भी सिखाता है कि किसी धर्म विशेष के प्रति भक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति। इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर नवकार मंत्र कितनी बार जपें? जैन धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का जाप विषम और सम—दोनों प्रकार की गिनती में किया जा सकता है। साधक अपनी सुविधा और साधना के स्तर के अनुसार 1 से 25 बार तक इसका जप कर सकते हैं। हालांकि, इस मंत्र का जप करते समय मन की एकाग्रता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। इसलिए, जप से पहले ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन को शांत करना और फिर मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, जिससे इसका पूर्ण प्रभाव प्राप्त हो सके। नवकार मंत्र का ऐतिहासिक महत्व इतिहास में नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का उल्लेख कई प्राचीन शिलालेखों में मिलता है। शुरुआती शिलालेखों में ‘नमो अरहंताणं’ और ‘नमो सवे सिद्धाणं’ जैसे अंश मिलते हैं, जबकि समय के साथ शिलालेखों में पूरे नवकार मंत्र का उल्लेख मिलने लगा। यह मंत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसे व्यक्ति अकेले या समूह में सामूहिक रूप से भी जप सकते हैं। नवकार मंत्र को ‘सिद्धिकारक मंत्र’ माना जाता है, यानी यह मंत्र न केवल आत्मिक शुद्धि करता है, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना से जुड़ा हुआ है। Latest News in Hindi Today Hindi News  Navkar Mantra #NavkarMantra #JainMantra #SpiritualPath #Moksha #SelfPurification #MantraChanting #PeaceMantra #DivineWisdom #Jainism #SacredChant

आगे और पढ़ें
Surya Gochar 2025

सूर्य गोचर 2025: 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करते ही चमकेंगी इन 3 राशियों की किस्मत 

साल 2025 में 14 अप्रैल को सूर्य देवता अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस खगोलीय घटना को ज्योतिष शास्त्र में “सूर्य गोचर” (Surya Gochar) कहा जाता है, जिसका सीधा प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। लेकिन इस बार सूर्य के राशि परिवर्तन से विशेष रूप से तीन राशियों के लिए समय बहुत ही शुभ रहने वाला है। इन जातकों के लिए आने वाला समय तरक्की, सफलता और समृद्धि से भरपूर रहेगा। सूर्य का राशि परिवर्तन – एक विशेष घटना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी में प्रवेश करते हैं, लेकिन जब वे अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव और महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल सूर्य का यह विशेष गोचर 14 अप्रैल 2025 को होगा। सूर्य देव का मेष राशि में प्रवेश न केवल व्यक्ति के जीवन में, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आता है। सूर्य की मेष राशि में उच्चता का क्या है महत्व? मेष राशि सूर्य की उच्च राशि मानी जाती है। जब सूर्य मेष में आते हैं, तो उनका तेज, ऊर्जा और प्रभाव सबसे अधिक होता है। यह समय आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, निर्णय शक्ति और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए आदर्श माना जाता है। विशेष रूप से उन लोगों को लाभ होता है जो प्रशासन, राजनीति, सरकारी सेवा, व्यापार या नेतृत्व से जुड़े क्षेत्र में कार्यरत हैं। इन 3 राशियों (Zodiac Signs) के लिए शुरू हो रहे हैं सुनहरे दिन: मेष राशि14 अप्रैल को सूर्य (Surya Gochar) के मेष राशि में उच्च स्थिति में प्रवेश से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। यह गोचर आपकी बौद्धिक क्षमता को निखारेगा और समाज व परिवार में आपके विचारों को सराहा जाएगा। करियर से जुड़ी अड़चनें दूर होंगी और आप काम में पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस दौरान आप अपने सभी कार्य समय से पहले पूरे कर पाएंगे। साथ ही, कार्य संबंधी यात्राएं होंगी जो लाभदायक सिद्ध होंगी। इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर कर्क राशिसूर्य (Surya) जब आपके दशम भाव में उच्च स्थिति में आएंगे, तब यह समय आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा। इस भाव में सूर्य का होना दिग्बली माना जाता है, जिससे करियर में उन्नति के योग बनते हैं। अप्रैल से मई के मध्य तक आपको नई नौकरी या प्रमोशन मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में भी सौहार्द और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। पिताजी या किसी बुजुर्ग की सलाह आपके लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। आर्थिक समस्याओं से राहत मिलेगी और आप परिवार तथा प्रोफेशनल ज़िंदगी में एक कुशल नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएंगे। धनु राशिसूर्य (Surya Gochar) जब आपके पंचम भाव में प्रवेश करेंगे, तो यह शिक्षा, प्रेम और रचनात्मकता के क्षेत्रों में प्रगति का संकेत देगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। स्कूल या कॉलेज के छात्र अपनी प्रतिभा से सबका ध्यान आकर्षित करेंगे। यह समय प्रेम जीवन के लिए भी अनुकूल है—आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। आपकी बातों में सच्चाई और गहराई होगी, जिससे लोग आप पर भरोसा करेंगे। सामाजिक पहचान बढ़ेगी, और अगर आप लेखन, संगीत या कला क्षेत्र से जुड़े हैं तो आपकी कोई रचना लोगों के बीच प्रसिद्ध हो सकती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Surya Gochar #SuryaGochar2025 #SunTransit2025 #AriesTransit #LuckyZodiacSigns #Astrology2025 #Horoscope2025 #April14SuryaGochar #SunInAries #ZodiacLuck #AstroUpdate

आगे और पढ़ें
Remedies to Remove Shani Effects

हनुमान जन्मोत्सव 2025: हनुमान जयंती पर जरूर करें ये उपाय, ढैय्या-साढ़ेसाती का असर होगा दूर

आज देशभर में आस्था और श्रद्धा के साथ हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav) मनाया जा रहा है।  इस वर्ष यह पर्व शनिवार को पड़ रहा है, जो और भी अधिक शुभ माना गया है क्योंकि शनिवार और हनुमान जी का विशेष संबंध है। माना जाता है कि शनिवार के दिन हनुमान जी (Hanuman Ji) की उपासना करने से शनि से संबंधित समस्त दोष जैसे साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि पीड़ा से राहत मिलती है। इस दिन भक्त विशेष उपाय और पूजा-अर्चना करके बजरंगबली की विशेष कृपा पा सकते हैं। हनुमान जन्मोत्सव का महत्व हनुमान जी (Hanuman Ji)को संकटमोचन कहा गया है, जो अपने भक्तों की हर पीड़ा को हर लेते हैं। वे रामभक्त, बल-बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और हनुमान जी को उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। शनिवार और हनुमान जी का विशेष संबंध धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हनुमान जी (Hanuman Ji) के सच्चे भक्तों पर शनि देव अपनी कड़ी दृष्टि नहीं डालते। इसी कारण शनि से जुड़े दोषों और कष्टों को दूर करने के लिए हनुमान जी की पूजा को सबसे प्रभावी माना जाता है। इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव शनिवार के दिन आ रहा है, जो एक शुभ और दुर्लभ योग है। ऐसे में यदि आप इस विशेष दिन पर कुछ खास उपाय अपनाते हैं, तो न केवल जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है, बल्कि शनि की दशा, महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या जैसे कष्टों का प्रभाव भी कम हो सकता है। इस दिन अवश्य करें ये उपाय इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर विशेष भोग: जो बनेंगे कृपा का माध्यम हनुमान जी (Hanuman Ji) को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग जैसे बेसन के लड्डू, बूंदी, इमरती, गुड़-चना, केला और खीर अर्पित करें। यह मान्यता है कि इन वस्तुओं का भोग लगाने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन से संकट दूर हो जाते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Hanuman Janmotsav #HanumanJayanti2025 #HanumanJanmotsav #ShaniDosh #SadeSatiRemedy #HanumanRemedies #SpiritualTips #DhaiyyaRelief #HanumanPuja #RemoveNegativity #ShaniRemedies

आगे और पढ़ें
Hanuman Jayanti Rituals

हनुमान जन्मोत्सव 2025: बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर

हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन श्री हनुमान जी के जन्म वर्ष 2025 में हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Jayanti) की शुभ तिथि 12 अप्रैल को तय की गई है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, और मंदिरों में जाकर श्री हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन अगर विधिपूर्वक पूजा कर हनुमान जी को प्रिय भोग अर्पित किया जाए, तो उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। हनुमान जन्मोत्सव का महत्व हनुमान जी (Hanuman Ji) को हिंदू धर्म में वीरता, भक्ति, और सेवा का प्रतीक माना जाता है। वे भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं और उनका जन्म त्रेता युग में अंजनादेवी और केसरी के घर हुआ था, इसलिए उन्हें अंजनीपुत्र और केसरीनंदन भी कहा जाता है। रामायण में उनकी भूमिका सबसे प्रमुख रही है — चाहे वह लंका जलाना हो, संजीवनी बूटी लाना हो, या फिर श्रीराम की भक्ति में लीन रहना हो। यह दिन केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि अपने जीवन में हनुमान जी के गुणों — साहस, निष्ठा, और सेवा भावना — को अपनाने का भी अवसर होता है। हनुमान जी को प्रिय हैं ये विशेष भोग हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Jayanti) के शुभ अवसर पर यदि आप अपने आराध्य श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो उन्हें उनके प्रिय भोग अर्पित करना न भूलें। यह न सिर्फ़ आपकी भक्ति को पूर्ण करता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और शांति भी लाता है। बेसन के लड्डूहनुमान जी को बेसन से बने लड्डू बेहद प्रिय हैं। इसलिए इस खास दिन पर उन्हें ये लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सफलता के नए द्वार खुलते हैं। बूंदी के लड्डूबजरंगबली को बूंदी या बूंदी के लड्डू चढ़ाना भी बेहद फलदायी माना गया है। यह भोग लगाने से भक्त को उनका मनचाहा वरदान प्राप्त होता है, चाहे वह स्वास्थ्य हो, करियर या परिवारिक सुख। इमरतीहनुमान जी को इमरती का मीठा भोग अर्पित करना उनकी कृपा प्राप्त करने का एक उत्तम उपाय माना जाता है। मान्यता है कि इमरती चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। गुड़ और चनाहनुमान जी (Hanuman Ji) को गुड़ और भुना हुआ चना अर्पित करना मंगल दोष और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होता है। यह एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली भोग माना जाता है। केलाहनुमान जी को फलों में सबसे प्रिय है केला। उन्हें केला अर्पित करने से विशेष कृपा मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस दिन केले का भोग ज़रूर लगाना चाहिए। खीरखीर का भोग लगाने से हनुमान जी की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि खीर चढ़ाने से न केवल आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि भी बनी रहती है। इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील पूजा विधि हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Jayanti) के दिन सुबह स्नान कर लाल या केसरिया रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद हनुमान जी की मूर्ति या चित्र का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और तुलसी पत्र अर्पित करें। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें। पूजा के अंत में हनुमान जी को गुड़-चना या लड्डू का भोग लगाकर सभी को प्रसाद वितरित करें। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news Hanuman Jayanti #HanumanJayanti2025 #BajrangbaliBlessings #HanumanBhog #RemoveNegativity #HanumanDevotees #HanumanJayantiCelebration #PowerfulBhog #SpiritualRemedies #HanumanPuja2025 #BajrangbaliKripa

आगे और पढ़ें
7 Vastu Plants to Bring Positivity and Prosperity at Home

वास्तु के अनुसार घर में लगाएं ये 7 पौधे

वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति की एक ऐसी विद्या है जो भवन निर्माण और उसमें रहने वालों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने में सहायक होती है। यदि घर में वास्तु दोष होता है तो इसका प्रभाव घर के वातावरण, मानसिक शांति, स्वास्थ्य, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपायों के माध्यम से वास्तु दोष को दूर किया जा सकता है, उनमें से एक प्रभावी उपाय है—घर में शुभ पौधों को लगाना। घर में पौधे क्यों जरूरी हैं? प्रकृति से जुड़ाव न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि यह वातावरण को शुद्ध करके सकारात्मक ऊर्जा भी फैलाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष पौधे (Vastu plants) घर में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रवाह बढ़ता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ पौधों के बारे में जो वास्तु दोष को दूर करने के साथ-साथ सुख-शांति और समृद्धि भी लाते हैं। 1. तुलसी का पौधा तुलसी को हिंदू धर्म में देवी का स्थान प्राप्त है और यह न केवल धार्मिक दृष्टि से पूजनीय है, बल्कि आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर भी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा घर के उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) को बढ़ाता है। रोज सुबह तुलसी में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। 2. मनी प्लांट मनी प्लांट (Money Plant) को समृद्धि और धन-संपत्ति से जोड़कर देखा जाता है। यह पौधा घर के दक्षिण-पूर्व कोने में लगाने की सलाह दी जाती है, जो कि वास्तु में ‘अग्नि कोण’ कहलाता है। यह दिशा धन की दिशा मानी जाती है और यहां मनी प्लांट लगाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। ध्यान रखें कि इसे कभी भी बाथरूम में या सूखने की स्थिति में न रखें, वरना इसका प्रभाव उल्टा हो सकता है। 3. बांस का पौधा (लकी बैम्बू) फेंग शुई और वास्तु दोनों में लकी बैम्बू पौधे (Bamboo Plant) को शुभ माना जाता है। यह पौधा घर में सौभाग्य, समृद्धि और दीर्घायु का प्रतीक है। इसे मुख्य दरवाजे के पास या ड्राइंग रूम में रखा जा सकता है। यह पौधा जितना अधिक तना वाला होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है। यह पौधा रिश्तों में मिठास लाने और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है। 4. पारिजात वृक्ष पारिजात वृक्ष को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसमें स्वयं माता लक्ष्मी और भगवान नारायण का वास होता है। इसे घर की उत्तर दिशा में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि पारिजात के फूल माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय होते हैं। यदि इसे वास्तु अनुसार घर में लगाया जाए, तो न केवल वास्तु दोष समाप्त होता है, बल्कि घर में समृद्धि और सुख-शांति भी बनी रहती है। यह पौधा धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति में सहायक माना जाता है। 5. एलोवेरा एलोवेरा न केवल सौंदर्य और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह वास्तु दोष निवारण में भी प्रभावशाली है। यह पौधा नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसे घर की पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। इसका नियमित देखभाल करना बेहद जरूरी होता है। इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील 6. आंवला  वास्तु शास्त्र (Vastu plants) के अनुसार आंवला का पेड़ अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है। इसे घर में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। ऐसी मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का निवास होता है। आंवला के पेड़ को यदि उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाया जाए तो यह अत्यधिक शुभ परिणाम देता है। इस पेड़ को नियमित जल अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और विभिन्न प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। 7. पीपल और नीम का पौधा हालांकि पीपल और नीम जैसे पौधे बड़े होते हैं, लेकिन यदि आपके पास बगीचा है, तो इन पौधों को वहां लगाया जा सकता है। पीपल और नीम दोनों ही पर्यावरण को शुद्ध करने वाले पौधे हैं और घर के आसपास के वातावरण को पवित्र बनाए रखते हैं। नीम के पेड़ को घर के पश्चिम दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news Vastu plants #VastuPlants #HomeVastuTips #LuckyPlants #IndoorPlantsVastu #PositiveEnergy #VastuShastra #HomeDecor #VastuForHome #ProsperityPlants #PeacefulHome

आगे और पढ़ें
The Muslim Devotee of Krishna's Divine Love

जब एक मुसलमान बन गया कृष्ण भक्त: रसखान की भक्ति ने रचा इतिहास

भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में कोई भी ऐसी महान विभूतियाँ हुई हैं जिन्होंने जाति, धर्म और सीमाओं के बंधनों को तोड़कर केवल प्रेम, भक्ति और इंसानियत को अपनाया। उनमें से एक ऐसे भी अद्भुत भक्त थे, रसखान (Ras Khan) जिनका वास्तविक नाम सैयद इब्राहीम था। उनका जीवन इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि सच्ची भक्ति का कोई धर्म नहीं होता — यह तो आत्मा से ईश्वर के प्रति उठने वाला प्रेम होता है। रसखान (Ras Khan) का जन्म 16वीं शताब्दी में दिल्ली के एक प्रतिष्ठित मुस्लिम परिवार में हुआ था। वे फारसी, अरबी और हिंदी भाषा में निपुण थे। शुरूआती जीवन में वे एक दरबारी जीवनशैली में लिप्त रहे, लेकिन एक समय ऐसा आया जब वे भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की भक्ति में पूरी तरह डूब गए। इतना माना जाता है कि रसखान (Ras Khan) ने श्रीमद्भागवत गीता और कृष्ण (Krishna) से संबंधित अन्य धार्मिक ग्रंथों का गहरा अध्ययन किया और फिर वृंदावन गये जहां राधा-कृष्ण की लीलाओं को साक्षात अनुभव किया। उन्होंने अपने भक्ति भाव को व्यक्त करने के लिए ब्रजभाषा को माध्यम बनाया। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रसखान रचनावली है, जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के बालरूप, रासलीलाओं और वृंदावन की अनुपम सुंदरता का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया है। इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील उनकी एक मशहूर कृति में वह लिखते हैं: “मानुष हौं तो वही रसखान बसौं ब्रज गोकुल गांव के ग्वारन।जो पशु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मझारन॥” इस दोहे में रसखान (Ras Khan) अपने भाव व्यक्त करते हैं कि क्या उनको मानव रूप में जन्म मिलता, तो वे गोकुल के किस ग्वाले के घर जन्म लेना चाहेंगे, और यदि वे पशु होंगे, तो नंद बाबा की गायों के साथ विचरण करना अच्छा लगेगा। उनका पूरा जीवन प्रेम, भक्ति और समर्पण का प्रमाण बन गया। उन्होंने सिद्ध किया कि ईश्वर की आराधना न धर्म से होती है, न जाति या भाषा से। हालांकि वे इस्लाम धर्म के अनुयायी थे, किंतु श्रीकृष्ण के प्रति उनका गहरा प्रेम उन्हें वृंदावन की पवित्र गलियों तक ले गया, जहां उन्होंने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करी।वृंदावन में उनकी समाधि है, जो यह संदेश देती है कि भक्ति में कोई भेदभाव या दीवार नहीं होती। रसखान की जीवनगाथा यह सिखाती है कि यदि श्रद्धा सच्ची हो और प्रेम निष्कलंक हो, तो ईश्वर हर दिल में वास करते हैं — फिर चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से क्यों न हो।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Ras Khan #Raskhan #KrishnaDevotee #BhaktiMovement #HinduMuslimUnity #SpiritualPoet #KrishnaBhakt #IndianHistory #RaskhanPoetry #BhaktiEra #SufiSaint

आगे और पढ़ें
Vastu Turtle Placement

वास्तु के अनुसार कछुआ रखने से घर में होगी धन की बरसात, जानें कछुए रखने की सही दिशा और महत्व

वास्तु शास्त्र में कछुआ (Tortoise) को बेहद शुभ और समृद्धि लाने वाला प्रतीक माना गया है। यह दीर्घायु, स्थिरता और धन का प्रतीक है। घर में लकड़ी या क्रिस्टल का कछुआ रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन का प्रवाह बढ़ता है। लेकिन, इसे सही दिशा और सही तरीके से रखना जरूरी है, नहीं तो इसका प्रभाव कम हो सकता है।  क्यों होता है कछुआ शुभ? कछुए (Tortoise) को भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हिंदू धर्म में कछुए को भगवान विष्णु का कूर्म अवतार माना जाता है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने कछुए का रूप धारण किया था, जिससे यह जीव शक्ति, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक बन गया। फेंगशुई में भी कछुआ एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे जीवन में स्थिरता, दीर्घायु और आर्थिक समृद्धि लाने वाला माना जाता है। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार, घर या कार्यालय में कछुए को रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। लकड़ी और क्रिस्टल का कछुआ क्यों है खास? विभिन्न प्रकार के कछुए (Tortoise) बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन लकड़ी और क्रिस्टल से बने कछुए को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कछुआ रखने की सही दिशा इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील घर में कछुआ रखने के लाभ घर में कछुआ (Tortoise) रखने को वास्तु शास्त्र में अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल सौभाग्य और समृद्धि लाने वाला होता है, बल्कि घर के वातावरण को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। आइए जानते हैं, कछुआ रखने के प्रमुख लाभ: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Tortoise #VastuTips #TurtleForWealth #VastuRemedies #HomeVastu #TortoiseDirection #ProsperityTips #FengShuiVastu #SpiritualHome #WealthVastu #LuckyTurtle

आगे और पढ़ें
Swapna Shastra

क्या आपको भी आते हैं ये 5 सपने? स्वप्न शास्त्र के अनुसार जल्द मिल सकती है बड़ी सफलता!

हिंदू धर्म के स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, सपने न सिर्फ हमारे अवचेतन मन की भावनाओं को दर्शाते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत भी देते हैं। अगर आपको बार-बार कूड़ा-कचरा, सांप, फूल, सोना या पानी से जुड़े सपने दिख रहे हैं, तो यह आपके लिए शुभ संकेत हो सकता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ये स्वप्न (Dream) आने वाले समय में धनलाभ, करियर में सफलता या रिश्तों में मधुरता की ओर इशारा करते हैं। आइए जानते हैं कि कौन-से सपने क्या संकेत देते हैं और कैसे आप इनका पूरा लाभ उठा सकते हैं। स्वप्न शास्त्र क्या कहता है? स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने (Dream) का कोई न कोई अर्थ होता है। कुछ सपने हमारे मन की उलझनों को दर्शाते हैं, जबकि कुछ भविष्य में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर संकेत करते हैं। प्राचीन ग्रंथों जैसे “स्वप्न चिंतामणि” और “बृहत्संहिता” में विभिन्न स्वप्नों का विस्तृत विश्लेषण मिलता है। यदि आपको ये 5 सपने बार-बार दिख रहे हैं, तो तैयार रहें – बड़ी सफलता आपके कदम चूमने वाली है! 1. कूड़ा-कचरा देखना (Dream of Garbage) स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आप अपने सपने में कूड़ा-कचरा देखते हैं, तो यह संकेत है कि आपके जीवन से नकारात्मकता दूर हो रही है। इसका फल यह हो सकता है कि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और पुराने झगड़े समाप्त हो जाएंगे। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुबह उठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और घर से कचरा साफ कर दें। 2. सपने में सिक्का लिए स्त्री दिखना स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, अगर सपने में कोई स्त्री हाथ में सिक्के लिए दिखाई दे, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा सपना करियर में जल्द ही तरक्की मिलने का इशारा करता है। इस सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए स्वप्न शास्त्र में एक उपाय बताया गया है — निकट भविष्य में मां लक्ष्मी को लाल फूल अर्पित करें। इससे घर में धन की आवक बनी रहती है और समृद्धि का वास होता है। 3. सपने में बुजुर्गों का आशीर्वाद पाना स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, यदि आप सपने में अपने बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा सपना इस बात का संकेत देता है कि आपको जल्द ही नौकरी में तरक्की मिल सकती है। इस शुभ संकेत को और प्रभावी बनाने के लिए केले के पेड़ में जल अर्पित करें और इस सपने के बारे में किसी को न बताएं। ऐसा करने से आपको सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील 4. सपने में लकड़ी काटते देखना: समस्याओं के अंत का संकेत स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, यदि आप सपने में खुद को लकड़ी काटते हुए देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आपके काम में आ रही बाधाएं जल्द ही समाप्त हो सकती हैं। ऐसे शुभ संकेत मिलने के बाद सलाह दी जाती है कि न तो इस सपने के बारे में और न ही अपने काम को लेकर किसी से चर्चा करें। 5. सपने में कचरा फेंकना: मन के बोझ से मुक्ति का संकेत स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, सपने में कचरा फेंकना शुभ माना जाता है। यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में व्यक्ति के मन का बोझ हल्का होगा और भीतर की नकारात्मक भावनाएं समाप्त होंगी। ऐसा सपना देखने के बाद व्यक्ति को भावनात्मक रूप से खुद को मुक्त करने और जीवन में सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।  Latest News in Hindi Today Hindi news   Swapna Shastra #DreamMeaning #SapnaShastra #DreamsOfSuccess #SpiritualDreams #IndianDreamScience #SuccessSigns #DreamInterpretation #LuckyDreams #LifeChangingDreams #DreamMessages

आगे और पढ़ें
Police Warns of Cyber Fraud

इस दिन से शुरू होने वाली है Char Dham Yatra 2025, साइबर ठगी से बचने हेतु पुलिस ने श्रद्धालुओं से की यह खास अपील

आज के इस डिजिटल युग में साइबर ठगी बड़ी आम हो गई है। साइबर ठग लोगों को ठगने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं। कभी बैंक अकाउंट की केवाईसी अपडेट करने के नाम पर तो कभी लॉटरी के। ऐसे में सभी लोगों को साइबर ठगों से सावधान रहने की जरूरत है। वैसे भी 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2025) की शुरुआत होने वाली है। दरअसल, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा के साथ चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी बद्रीनाथ, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। प्रशासन अभी से तैयारियों में जुटा हुआ है। कहने की जरूरत नहीं, प्रशासन के साथ-साथ साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार साइबर पुलिस और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने साइबर ठगों से निपटने हेतु कमर कस ली है। पुलिस ने किसी भी बुकिंग के लिए यात्रियों से आधिकारिक वेबसाइट का प्रयोग करने की सलाह दी है। इस बीच यात्रा के दौरान जब धाम (Char Dham Yatra 2025) के कपाट खुलेंगे, तब केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवाएं भी (2 मई से) शुरू होंगी। इस सेवा का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया 8 अप्रैल से शुरू हो रही है। यूकाडा और आईआरसीटीसी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। ठग फर्जी वेबसाइट्स के जरिये यात्रियों को ठगने (Char Dham Yatra 2025) के काम में लग जाते हैं बता दें कि हेली सेवाओं की बुकिंग के लिए आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in पर जाना होगा। इस पूरे मामले पर यूकाडा के अधिकारी ने बताया कि “इस बार सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके। पिछले वर्ष भी साइबर ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई थी। गौरतलब हो कि हर साल केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए हेली सेवाओं का संचालन होता है। यही वजह जो, ठग फर्जी वेबसाइट्स के जरिये यात्रियों को ठगने (Char Dham Yatra 2025) के काम में लग जाते हैं। इसे रोकने के लिए उत्तराखंड साइबर सेल ने प्राथमिकता के आधार पर कई कदम उठाए हैं। कोई किसी भी तरह की ठगी का शिकार न हो सके इसलिए साइबर पुलिस ने अपील की है कि यात्री सिर्फ उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही बुकिंग करें। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jai.rashtranews) इसे भी पढ़ें:- सक्सेसफुल बिजनेसमैन एंड साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट Arif R.B. Khan ने डिजिटल सेक्टर में “VAATU Enterprises LLP” की शुरुआत की पिछले साल चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2025) के नाम पर ठगी करने वाली 80 फर्जी वेबसाइट्स को बंद किया गया था जानकारी के मुताबिक पिछले साल चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra 2025) के नाम पर ठगी करने वाली 80 फर्जी वेबसाइट्स को बंद किया गया था और 30 से अधिक फेक फेसबुक विज्ञापनों को हटाया गया था। यही नहीं, 50 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया गया था। इस मामले में साइबर पुलिस ने कई ठगों को गिरफ्तार भी किया। उनके पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुए थे। पुलिस द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए साइबर ठगों पर पैनी नजर बनाई हुई है। पुलिस ने लोगों से संदेह होने पर साइबर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी है। पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि ऑनलाइन आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। इसके साथ ही पुलिस ने टिकट बुकिंग से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचने और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने की गुजारिश की है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Char Dham Yatra 2025 #CharDhamYatra2025 #CharDhamYatra #CyberSafety #OnlineFraudAlert #Pilgrimage2025 #SpiritualJourney #UttarakhandTourism #CyberCrimeAwareness #TravelAlertIndia #YatraUpdates

आगे और पढ़ें
Mesh Sankranti 2025

मेष संक्रांति 2025: समाप्त होगा खरमास, शुभ कार्यों की फिर होगी शुरुआत

हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उस समय को संक्रांति कहा जाता है। वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, जिनमें से मेष संक्रांति का विशेष महत्व है। यह संक्रांति तब होती है जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। इस वर्ष, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2025, सोमवार को मनाई जाएगी, और इसी दिन खरमास का समापन होगा, जिससे विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से हो सकेगी। खरमास का समापन और शुभ कार्यों की बहाली खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, वह अवधि है जब सूर्य देव गुरु की राशियों—धनु या मीन—में गोचर करते हैं। इस दौरान, विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। वर्ष 2025 में, खरमास 14 मार्च से प्रारंभ होकर 13 अप्रैल तक रहेगा। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा, और शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो सकेगी । मेष संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व मेष संक्रांति को हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस दिन को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे पंजाब में बैसाखी, ओडिशा में पना संक्रांति, केरल में विषु, और तमिलनाडु में पुथांडु। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है, और गंगा स्नान, दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है । सूर्य गोचर 2025आत्मा के प्रतीक माने जाने वाले सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद, 14 अप्रैल को तड़के 3 बजकर 21 मिनट पर वे मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव का यह गोचर 14 मई तक मेष राशि में रहेगा। जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, खरमास की समाप्ति हो जाएगी और इसके साथ ही सभी शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। मेष संक्रांति 2025: शुभ मुहूर्त और योग मेष संक्रांति के दिन पुण्यकाल प्रातः 05:57 से लेकर दोपहर 12:22 तक रहेगा। इसी दिन महापुण्य काल का समय सुबह 05:57 से 08:05 तक निर्धारित है। इस विशेष अवधि में सूर्य देव की आराधना और उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे भी पढ़ें:- माता के इस चमत्कारी मंदिर में 100 साल से लगातार जल रही है अखंड ज्योति: डाट काली मंदिर का अद्भुत चमत्कार मेष संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म में मेष संक्रांति को अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। इस दिन उपवास करना, सूर्य देव की विधिपूर्वक पूजा करना और दान-पुण्य करना अत्यधिक शुभ और फलदायक माना जाता है। भारत के कई क्षेत्रीय पंचांग जैसे तमिल, बंगाली, ओड़िया, पंजाबी और मलयालम कैलेंडर में यह दिन नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि मेष संक्रांति के साथ सूर्य की उत्तरायण यात्रा पूर्ण होती है। मीन संक्रांति से शुरू होने वाला खरमास (मलमास) मेष संक्रांति पर समाप्त होता है। इसी कारण, इस दिन के बाद सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। खरमास के दौरान निषेध और समाप्ति के बाद शुभ कार्य खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यह अवधि सूर्य के मीन राशि में गोचर करने से प्रारंभ होती है और मेष राशि में प्रवेश करने पर समाप्त होती है। 14 अप्रैल 2025 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो सकेगी । Latest News in Hindi Today Hindi News मलमास #MeshSankranti2025 #KharmaasEnds #AuspiciousStart #HinduFestivals #Sankranti2025 #HinduNewYear #ReligiousEvents #SankrantiCelebration #EndOfKharmaas #SpiritualAwakening

आगे और पढ़ें
Translate »