CJP का दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन: शिक्षा सुधार और भर्ती पारदर्शिता को लेकर उठी आवाज

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन ने देशभर में चर्चा पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नौकरी अभ्यर्थी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। आंदोलन का मुख्य फोकस शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रहा। जंतर-मंतर पर जुटे छात्र और युवा प्रदर्शन के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। अभिजीत दिपके ने रखा पक्ष CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के विषय पर व्यापक चर्चा और सुधार की आवश्यकता है। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा पिछले कुछ समय में CJP को सोशल मीडिया पर काफी ध्यान मिला है। विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर युवाओं द्वारा शिक्षा, रोजगार और परीक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसी के चलते दिल्ली का यह प्रदर्शन भी व्यापक चर्चा का विषय बना। पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। युवाओं के मुद्दे केंद्र में विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे लंबे समय से युवाओं के बीच चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में इन विषयों पर होने वाले आंदोलनों और चर्चाओं को व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है। आगे क्या? CJP नेताओं का कहना है कि वे शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाते रहेंगे। वहीं, आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों और संभावित कार्यक्रमों पर भी नजर रहेगी। jairashtranews.com

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भारत की जीडीपी वृद्धि 7.7% पहुंची, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना देश

Indian GDP Growth: भारत की अर्थव्यवस्था दौड़ी रॉकेट की रफ्तार से! FY26 में GDP ग्रोथ पहुंची 7.7% India’s GDP Growth Reaches 7.7%, Remains Fastest Growing Major Economy नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमान से अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार निर्माण, कृषि, बुनियादी ढांचा और निजी निवेश में वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक वृद्धि का स्वागत करते हुए कहा कि यह उपलब्धि देशवासियों की मेहनत और आर्थिक सुधारों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ते निवेश और मजबूत घरेलू मांग से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि महंगाई और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। Key Highlights • FY 2025-26 GDP Growth: 7.7% • January-March Quarter Growth: 7.8% • Construction and Infrastructure Sectors Lead Growth • India Continues to be Fastest Growing Major Economy English Summary India’s economy recorded a strong 7.7% growth in FY 2025-26, while the January-March quarter expanded by 7.8%. Analysts attribute the growth to robust investment, infrastructure expansion, and strong domestic demand. Despite global uncertainties, India continues to remain one of the fastest-growing major economies in the world. (जय राष्ट्र न्यूज़)

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भारत ने चीन को पछाड़ा: दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनने की कहानी

जय राष्ट्र न्यूज रिपोर्टर वेबसाइट | 06 जनवरी 2026 | कृषि संवाददाता भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनने का गौरव प्राप्त कर लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में इसकी घोषणा की। 2025 में भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा। यह पहली बार है जब भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ा है। यह खबर न केवल भारतीय किसानों के लिए गर्व की बात है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। चावल भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। करोड़ों लोग चावल पर निर्भर हैं, और यह देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने चावल उत्पादन में तेजी से प्रगति की है। लेकिन चीन को पछाड़ना एक बड़ी मील का पत्थर है। आइए जानते हैं कि यह कैसे संभव हुआ, इसके पीछे क्या कारण हैं, और इसका क्या असर पड़ेगा। चावल उत्पादन का इतिहास: भारत और चीन की तुलना चावल उत्पादन में चीन लंबे समय से दुनिया का лидер रहा है। 2020 तक चीन का सालाना उत्पादन लगभग 210 मिलियन टन paddy (कच्चा चावल) था, जबकि भारत का 180 मिलियन टन के आसपास। लेकिन milled rice (प्रोसेस्ड चावल) में भी चीन आगे था। हालांकि, भारत ने धीरे-धीरे अपनी उत्पादकता बढ़ाई। 2024-25 के फसल वर्ष में भारत का उत्पादन 150.18 मिलियन टन milled rice तक पहुंच गया, जो चीन के 145.28 मिलियन टन से अधिक है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। भारत सरकार की नीतियां, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों की मेहनत का नतीजा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने 3,236 उच्च उपज वाली फसल किस्में विकसित की हैं, जो 1969 से 2014 तक की कुल 3,969 से अधिक हैं। ये किस्में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ मजबूत हैं और अधिक उत्पादन देती हैं। चीन में चावल उत्पादन स्थिर रहा, लेकिन भारत ने नई तकनीकों से आगे निकल गया। चीन की कुछ समस्याएं जैसे भूमि प्रदूषण और जल संकट ने भी इसमें भूमिका निभाई हो सकती है, लेकिन मुख्य कारण भारत की प्रगति है। कैसे हुआ यह चमत्कार? मुख्य कारण भारत के चावल उत्पादन में वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। सबसे महत्वपूर्ण है उच्च उपज वाली बीज किस्मों का विकास। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “यह मील का पत्थर उच्च उपज वाले बीज किस्मों और कृषि विज्ञान में प्रगति से संभव हुआ है। भारत अब वैश्विक चावल बाजारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुका है।” 5 जनवरी को मंत्री ने 184 नई फसल किस्मों का अनावरण किया, जो 25 विभिन्न फसलों से संबंधित हैं। इनमें 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना किस्में, 24 कपास किस्में, और जूट व तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं। ये किस्में उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई हैं। चावल की कुछ प्रमुख नई किस्में हैं: सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन नई किस्मों को जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जाए। इसके अलावा, कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया है। भारत ने पश्चिमी बाजारों से वैध रूप से इन किस्मों को लाइसेंस लिया है, जबकि चीन पर जासूसी और बौद्धिक संपदा चोरी के आरोप लगते रहे हैं। पूर्वी भारत में ‘ग्रीन रिवोल्यूशन इन ईस्टर्न इंडिया’ पहल चल रही है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सब्सिडी, प्रोत्साहन और उच्च गुणवत्ता वाले खाद दिए जा रहे हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि पंजाब की सफलता को पूर्वी भारत में दोहराया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पानी की कमी और पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय समस्याएं हो सकती हैं। PAU बाढ़ सहनशील चावल किस्में विकसित कर रहा है, जो पूर्वी क्षेत्रों की बाढ़ वाली जमीनों के लिए उपयोगी होंगी। ये प्रयास जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगे। आर्थिक और वैश्विक प्रभाव यह उपलब्धि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है। भारत अब चावल का निर्यातक बन चुका है। 2024-25 में कृषि निर्यात रिकॉर्ड 450,840 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें चावल का हिस्सा लगभग 24% है, यानी 105,720 करोड़ रुपये। भारत 172 देशों को चावल निर्यात कर रहा है। पिछले दशक में निर्यात दोगुना होकर 20 मिलियन टन से अधिक हो गया है। वैश्विक स्तर पर, यह खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा। मंत्री चौहान ने कहा, “भारत की गोदाम भरे हुए हैं, और हम दुनिया को चावल सप्लाई कर रहे हैं।” जलवायु संकट और खाद्य असुरक्षा के दौर में भारत की भूमिका बढ़ेगी। निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। किसानों की आय बढ़ेगी। नई किस्में कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन देंगी। सरकार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता के लिए भी प्रयास हो रहे हैं, ताकि आयात कम हो। चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं सफलता के साथ चुनौतियां भी हैं। बढ़ते उत्पादन से पानी की कमी हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर गिर रहा है। पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है। पूर्वी भारत में बाढ़ और सूखे की समस्या है। इसलिए, सतत कृषि पर जोर देना जरूरी है। सरकार की योजना है कि दालों और तिलहनों पर फोकस किया जाए। वैज्ञानिकों को निर्देश दिए गए हैं कि आयात निर्भरता कम करने के लिए काम करें। जलवायु सहनशील बीजों से कृषि में क्रांति आएगी। भविष्य में भारत चावल उत्पादन को 200 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रख सकता है। निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा कमाई जाएगी। किसानों को ट्रेनिंग, सब्सिडी और बाजार पहुंच प्रदान की जाएगी। निष्कर्ष: गर्व का पल भारत का चीन को चावल उत्पादन में पछाड़ना एक बड़ी जीत है। यह किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों की बुद्धिमत्ता और सरकार की नीतियों का परिणाम है। इससे देश आत्मनिर्भर बनेगा और दुनिया में अपनी जगह मजबूत करेगा। लेकिन सतत विकास पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी… Read More

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जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अपडेट

जय राष्ट्र न्यूज़ पर ताजा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अपडेट

दिनांक: 31 दिसंबर 2025 मुख्य समाचार दुनिया भर में नए साल 2026 का स्वागत: आतिशबाजी और उत्साह के साथ विदाई 2025 को नई दिल्ली: दुनिया भर में आज रात नए साल 2026 का जोर-शोर से स्वागत किया जा रहा है। सिडनी में आतिशबाजी के शानदार प्रदर्शन के साथ नए साल की शुरुआत हुई, जहां बॉन्डी बीच हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में लाखों लोग जमा होकर बॉल ड्रॉप का इंतजार कर रहे हैं। लंदन, पेरिस, टोक्यो और दुबई में भी भव्य आतिशबाजी हो रही है। भारत में दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में लोग पार्टियों और परिवार के साथ नए साल का जश्न मना रहे हैं। ठंड के बावजूद उत्साह कम नहीं है। ईरान में बड़े प्रदर्शन: महंगाई के खिलाफ सड़कों पर लोग तेहरान: ईरान में मुद्रास्फीति की भयंकर मार से जनता आक्रोशित है। रियाल की कीमत गिरने से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब विश्वविद्यालयों तक फैल गए हैं। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। यूक्रेन-रूस युद्ध: रूसी ड्रोन हमले, ओडेसा बंदरगाह प्रभावित कीव: रूस ने यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर रात भर ड्रोन हमले किए। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि शांति वार्ता में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना शामिल है। युद्ध अब चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। इज़राइल-गाज़ा: सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध, यमन पर सऊदी हमले यरुशलम: इज़राइल ने गाज़ा में 24 से अधिक सहायता एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमले किए। मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। अमेरिका: ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियां, फ्लू का कहर वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में कड़ी आव्रजन और व्यापार नीतियां जारी हैं। इस साल फ्लू से 81,000 अस्पताल में भर्ती और 3,100 मौतें हुई हैं। नए साल में शांति की उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रीय समाचार प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: 2026 में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ें नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित कर कहा कि भारत 2026 में नई उम्मीदों और उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों का जिक्र किया। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण चरम पर: कई जगहों पर ‘गंभीर’ स्तर नई दिल्ली: दिसंबर में दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बेहद खराब हो गया है। कई स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बाहर निकलते समय सावधानी बरतें। इंडिगो संकट के बाद उड़ानें सामान्य: DGCA की सख्ती मुंबई: दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की हजारों उड़ानें रद्द होने के बाद अब स्थिति सामान्य हो रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर कार्रवाई की थी। खेल: ओसमान डेम्बेले बने फीफा प्लेयर ऑफ द ईयर पेरिस: फ्रेंच फुटबॉलर ओसमान डेम्बेले को 2025 का फीफा मेंस प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया। मौसम: उत्तर भारत में ठंड का कहर, कोहरा और शीतलहर नई दिल्ली: नए साल की पूर्व संध्या पर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कोहरे से ट्रेन और उड़ानें प्रभावित। जय राष्ट्र न्यूज़ की ओर से सभी दर्शकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! नया साल खुशियां और सफलता लाए।

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यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 7 बसें और 3 कारें टकराईं, 4 की मौत, 25 घायल

यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 7 बसें और 3 कारें टकराईं, 4 की मौत, 25 घायल

दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के घना कोहरा बड़ा हादसा लेकर आया। मथुरा जिले के बलदेव थाना क्षेत्र में माइलस्टोन-127 के पास एक के बाद एक कई बसें और कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहनों में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में चार की मौत, 25 घायलSSP श्लोक कुमार ने बताया कि इस दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं. घायलों को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है. मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। कैसे हुआ हादसा?जानकारी के मुताबिक, बसें आगरा से नोएडा की तरफ जा रही थीं। तभी पीछे से एक कार कोहरे के कारण आगे चल रही बस से टकरा गई।इसके बाद चेन रिएक्शन की तरह कुल 7 बसें और 3 कारें आपस में भिड़ गईं। टक्कर के बाद वाहनों में आग लग गई, जिससे हालात और बिगड़ गए। राहत और बचाव कार्यघटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन ने अस्पतालों को घायलों के बेहतर इलाज के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। यातायात प्रभावितहादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर मार्ग को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया और वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट किया गया। आग बुझने और क्षतिग्रस्त बसों को हटाने के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य किया गया। जांच और प्रत्यक्षदर्शियों का बयानअधिकारियों ने कहा कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गाड़ियों की टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऐसा लगा जैसे कोई धमाका हुआ हो। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई थी और लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। फिलहाल बचाव कार्य जारी है।

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ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

भारत ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात 38% घटाया: ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 दिसंबर 2025 भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल का आयात मूल्य के हिसाब से 38 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 31 प्रतिशत तक कम कर दिया। यह 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर सबसे ज़्यादा निर्भरता दिखाने वाले भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल क्रूड आयात में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उसका हिस्सा सितंबर 2025 के 40 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर में करीब 35 प्रतिशत रह गया। दूसरी तरफ इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका से आयात में तेज़ उछाल देखा गया है। पिछले तीन साल का ट्रेंड उलट गया 2022 के बाद से रूस भारत को औसतन 1.5 से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बेच रहा था। उस समय पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी उराल ग्रेड क्रूड ब्रेंट से 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था। भारतीय रिफाइनरियों (खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा वाडिनार) ने इसका भरपूर फायदा उठाया था। लेकिन अक्टूबर 2025 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गिरावट के पांच बड़े कारण रिफाइनरियों पर क्या असर? रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बताया कि रूसी भारी-खट्टा क्रूड (उराल) की जगह अब वे इराकी बसरा हेवी, सऊदी अरेबियन मीडियम और अमेरिकी WTI मिडलैंड क्रूड ले रहे हैं। इनमें सल्फर कम है और रिफाइनिंग मार्जिन 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल बेहतर मिल रहा है। नायरा एनर्जी (रूस की रोसनेफ्ट में हिस्सेदार) ने भी कहा कि वह अब स्पॉट मार्केट से मध्य-पूर्व का तेल खरीद रही है। रोसनेफ्ट से लंबे अनुबंध अभी भी जारी हैं, लेकिन मात्रा में 25-30 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। अर्थव्यवस्था को फ़ायदा भारत-रूस संबंधों पर असर? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला “100 प्रतिशत व्यावसायिक” है। रूस के साथ 15 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य अभी भी बरकरार है। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा में S-400 की अतिरिक्त रेजीमेंट, ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात और न्यूक्लियर पावर प्लांट के समझौते हुए हैं। तेल की मात्रा कम होने से द्विपक्षीय संबंधों पर कोई ठेस नहीं पहुँची है। आगे की राह: हरित ऊर्जा और विविधीकरण सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी साल गुजरात और राजस्थान में 50 गीगावाट के सोलर पार्क और 30 गीगावाट के ग्रीन हाइड्रोजन हब को मंजूरी मिली है। लेकिन अभी भी तेल भारत की कुल ऊर्जा मांग का 33 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए अगले 10-15 साल तक विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते कहा था,“हमारा लक्ष्य है कि 2035 तक किसी एक देश से 25 प्रतिशत से ज़्यादा तेल न लें।” निष्कर्ष अक्टूबर 2025 की 38 प्रतिशत कटौती कोई अस्थायी घटना नहीं है। यह भारत की नई ऊर्जा रणनीति का पहला ठोस संकेत है। सस्ता तेल चाहिए, लेकिन सुरक्षित और विविध स्रोतों से। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक कीमतें 65 डॉलर से नीचे चली गईं, तो फिर रूसी तेल की वापसी हो सकती है। लेकिन तब भी पुरानी मात्रा शायद ही लौटे। भारत अब ऊर्जा के खेल में सिर्फ़ खरीदार नहीं, एक स्मार्ट रणनीतिकार बनकर उभरा है। जय राष्ट्र न्यूज़ – भारत की खबर, भारत की आवाज़Instagram: @jairashtranewsYouTube: @JaiRashtraNewsवेबसाइट: jairashtranews.com RussianOilCut #IndiaEnergyPolicy #JaiRashtraNews

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समस्तीपुर से होगा PM मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

समस्तीपुर से होगा प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी शंखनाद, 24 अक्टूबर को शाह भी करेंगे महागठबंधन पर वार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की जुबानी जंग तेज हो गई है. एनडीए ने अपना ‘मिशन बिहार’ चरम पर पहुंचा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को बिहार के दौरे पर पहुंचेंगे और समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम से प्रधानमंत्री मोदी चुनावी शंखनाद करेंगे. यह उनका चुनाव घोषणा के बाद पहला दौरा होगा, जो एनडीए के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. उसी दिन वे बेगूसराय में भी एक चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार में सक्रिय रहेंगे, जो सीवान और बक्सर में रैलियां करेंगे. दोनों नेताओं का यह समन्वित प्रयास एनडीए की मजबूत पकड़ को दर्शाता है. समस्तीपुर: हारी हुई सीटों पर पीएम का फोकस समस्तीपुर का चयन सोच-समझकर किया गया है. 2020 के चुनाव में इस जिले की 10 विधानसभा सीटों पर एनडीए और महागठबंधन ने 5-5 सीटें जीती थीं. एनडीए के रणनीतिकार अब उन 5 हारी हुई सीटों – हसनपुर, मोरवा, उजियारपुर, समस्तीपुर और विभूतिपुर – पर नजरें गड़ाए हैं. कर्पूरी ग्राम में रैली का आयोजन सामाजिक न्याय के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ाव को मजबूत करेगा. उम्मीदवारों में जेडीयू के राजकुमार राय (हसनपुर) से लेकर रवीना कुशवाहा (विभूतिपुर) तक एनडीए मजबूत दावेदार उतार चुका है. पीएम मोदी की उपस्थिति से इन सीटों पर बहुजन वोटों को एकजुट करने की उम्मीद है. बेगूसराय में रैली पूर्वी बिहार के मतदाताओं को लुभाने का प्रयास होगा. शाह की रणनीति: सीवान-बक्सर में पकड़ मजबूत अमित शाह का यह दूसरा दौरा होगा. हाल ही में वे छपरा के तारैया में रैली कर चुके हैं. 24 अक्टूबर को सीवान और बक्सर की सभाओं के बाद 25 अक्टूबर को वे नालंदा, मुंगेर और खगड़िया जाएंगे. भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने महागठबंधन को ‘महालठबंधन’ कहकर तंज कसा, दावा किया कि माहौल एनडीए के पक्ष में है. एनडीए ने सीट बंटवारा पूरा कर लिया है, हालांकि हम और आरएलएसपी के साथ शुरुआती खींचतान हुई. दूसरी ओर, 30 अक्टूबर को पीएम मोदी मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां करेंगे. विपक्ष (India) में हलचल: डैमेज कंट्रोल की कोशिश महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच तनाव चरम पर है. दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं. 23 अक्टूबर को पटना में अशोक गहलोत और तेजस्वी यादव की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जो डैमेज कंट्रोल का प्रयास है. जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीन नेताओं के पर्चे वापस कराने का आरोप लगाया. एनडीए का स्लोगन ‘2025 में एनडीए 225’ जोर पकड़ रहा है, जबकि विपक्ष को एकजुट होने की चुनौती है. बिहार की 243 सीटों पर यह जंग दिलचस्प मोड़ ले रही है. कुल मिलाकर, 24 अक्टूबर एनडीए के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

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कोलकाता से श्रीनगर जा रही इंडिगो की फ्लाइट में फ्यूल लीक, वाराणसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

कोलकाता से श्रीनगर जाने वाली इंडिगो की एक नियमित विमान बुधवार को अचानक इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. उड़ान के दौरान जब चालक दल को फ्यूल लीक का पता चलने के बाद, विमान को वाराणसी हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी. अधिकारियों ने बताया कि विमान, 6E-6961, जिसमें 166 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे, शाम 4.10 बजे लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा. सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर आगमन हॉल में ले जाया गया. किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. वाराणसी पुलिस और एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, फ्यूल लीक का पता चलने पर पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित किया. एलबीएसआई एयरपोर्ट के निदेशक पुनीत गुप्ता ने मीडिया को बताया, “कोलकाता से श्रीनगर जा रही इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान संख्या 6961 के पायलट को फ्यूल लीक का पता चला, जिसके बाद उन्होंने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) वाराणसी से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग का अनुरोध किया.” निरीक्षण के बाद फिर से भरेगी उड़ान मंज़ूरी मिलने के बाद, विमान शाम लगभग 4:10 बजे रनवे पर सुरक्षित उतर गया. अधिकारियों ने बताया कि संबंधित एयरलाइंस आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं. एयरपोर्ट के अधिकारी और तकनीकी दल घटना की जांच कर रहे हैं. स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और एयरपोर्ट पर सामान्य ऑपरेशन फिर से शुरू हो गया है. उतरने के बाद तकनीकी टीम ने ज़रूरी मरम्मत के लिए विमान का निरीक्षण किया. इस बीच, सभी यात्री मरम्मत पूरी होने और उड़ान के लिए तैयार होने तक आगमन हॉल में बैठे रहे. आवश्यक निरीक्षण और मरम्मत के बाद विमान श्रीनगर के लिए अपनी यात्रा के लिए फिर से उड़ान भरेगी.

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कुरनूल में पीएम मोदी बोले- 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की होगी

कुरनूल में पीएम मोदी बोले- 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म दादा सोमनाथ की धरती गुजरात में हुआ. मुझे बाबा विश्वनाथ की धरती काशी में सेवा करने का अवसर मिला और आज श्री शैलम का आशीर्वाद मिल रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि आंध्र प्रदेश गौरव और समृद्ध संस्कृति की भूमि है. यह विज्ञान और नवाचार का केंद्र भी है. इस राज्य में असीम संभावनाएं और अपार क्षमताएं हैं. आंध्र को सही दृष्टिकोण की आवश्यकता थी. चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के नेतृत्व में राज्य को अब वह दृष्टिकोण और केंद्र सरकार का समर्थन दोनों प्राप्त हैं. उन्होंने आगे कहा कि 2047 में आजादी के जब 100 साल होंगे, तब ‘विकसित भारत’ होकर रहेगा. मैं विश्वास से कहता हूं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की होने वाली है. 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की सदी होने वाली है. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. डबल इंजन वाली सरकार की ताकत से राज्य अभूतपूर्व विकास का गवाह बन रहा है. दुनिया भारत को 21वीं सदी के नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रही प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज सड़क, बिजली, रेलवे, राजमार्ग और व्यापार से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है. इन पहलों से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और लोगों का जीवन आसान होगा. इन परियोजनाओं से कुरनूल और आसपास के क्षेत्रों को बहुत लाभ होगा. मैं इन विकासों के लिए कुरनूल और पूरे राज्य के लोगों को बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि तेज विकास के बीच हमें अतीत की स्थिति को नहीं भूलना चाहिए. लगभग 11 साल पहले, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब प्रति व्यक्ति बिजली की खपत औसतन 1000 यूनिट से भी कम थी. देश को अक्सर ब्लैकआउट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, और हमारे कई गांवों में बिजली के खंभे तक नहीं थे. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया आज भारत को 21वीं सदी के नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रही है. इस सफलता का सबसे बड़ा आधार है आत्मनिर्भर भारत का विजन. हमारा आंध्र प्रदेश आत्मनिर्भर भारत का प्रमुख केंद्र बन रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से प्राप्त करने के लिए देश भर में मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. हमारा ध्यान गांवों से शहरों और शहरों से बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है. पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि तकनीक के मामले में हमारा आंध्र प्रदेश और उसके युवा हमेशा आगे रहते हैं. डबल इंजन वाली सरकार के तहत हम इस क्षमता को और मजबूत कर रहे हैं. आज पूरी दुनिया भारत और आंध्र प्रदेश, दोनों की गति देख रही है. गूगल भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब यहीं हमारे आंध्र प्रदेश में स्थापित कर रहा है. नए रिफॉर्म के जरिए नागरिकों के जीवन को आसान बना रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि हमारी सरकार का विजन है, नागरिक-केंद्रित विकास. हम लगातार नए रिफॉर्म के जरिए नागरिकों के जीवन को आसान बना रहे हैं. देश में 12 लाख रुपए तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो चुकी हैं. सस्ती दवाइयां, सस्ता इलाज, बुजुर्गों के लिए आयुष्मान जैसी अनगिनत सुविधाओं से इजी ऑफ लिविंग का नया अध्याय शुरू हुआ है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश की क्षमता को नजरअंदाज किया, जिससे न केवल राज्य को, बल्कि पूरे देश को नुकसान हुआ. वह राज्य जो भारत के विकास को गति दे सकता था, उसे अपने विकास के लिए संघर्ष करना पड़ा. अब, एनडीए सरकार के तहत, आंध्र प्रदेश की स्थिति बेहतर हो रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि निम्मलुरु में उन्नत नाइट विजन उत्पादों का कारखाना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा. इससे नाइट विजन उपकरणों में भारत की क्षमता बढ़ेगी और यहां निर्मित उत्पाद भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हम भारत में निर्मित उपकरणों की ताकत देख चुके हैं.

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‘भ्रष्टाचार, आतंकवाद और भगोड़ों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’, CBI सम्मेलन में अमित शाह का ऐलान

‘भ्रष्टाचार, आतंकवाद और भगोड़ों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’, CBI सम्मेलन में अमित शाह का ऐलान

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘भगोड़ों के प्रत्यर्पण पर सम्मेलन: चुनौतियां और रणनीतियां’ को संबोधित किया. इस सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा किया गया. उन्होंने (Amit Shah) कहा कि हम करप्शन, संगठित अपराध और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाते हैं. गृह मंत्री ने क्या कहा? गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा, “भारत में अब भ्रष्टाचार, अपराध और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है. सिर्फ देश में बैठे अपराधियों पर ही नहीं बल्कि बाहर से देश में अपराध कराने वालों पर भी जीरो टॉलरेंस होना चाहिए. जो लोग देश के बाहर बैठकर भारत में अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद फैलाने की कोशिश करते हैं, उन्हें भी कानून के दायरे में लाने के लिए एक सुनिश्चित तंत्र बनाना हमारी जिम्मेदारी है. भगोड़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई गृह मंत्री (Amit Shah) ने बताया, “भारत सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए ‘भारतपोल’ और तीन नए आपराधिक कानूनों में ट्रायल इन एब्सेंशिया (बिना आरोपी की मौजूदगी के मुकदमे की सुनवाई और फैसला किया जाना) जैसी व्यवस्था की है. इन प्रावधानों के माध्यम से कोई भी भगोड़ा चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो उसे हम अदालत के सामने पेश करने में सक्षम होंगे.” गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि अपराध और अपराधी की चाल चाहे कितनी भी तेज क्यों न हो, न्याय की पहुंच उससे भी अधिक गतिमान होनी चाहिए. भगोड़ों को न्याय के कटघरे में खड़ा करेगी सरकार गृहमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है जब हर भगोड़े के खिलाफ रुथलेस अप्रोच अपनाने की जरूरत है, चाहे वह आर्थिक अपराधी हो, साइबर अपराधी, आतंकी या किसी संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा. उन्होंने कहा कि ऐसे सभी अपराधियों को भारतीय न्याय व्यवस्था के समक्ष खड़ा करना ही सरकार का संकल्प है. भगोड़ों को अब नहीं मिलेगा वैश्विक स्तर पर शरण अमित शाह (Amit Shah) ने यह भी कहा कि भारत की एजेंसियां अब एकीकृत और तकनीक आधारित तंत्र के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भगोड़ों का पता लगाने और उन्हें भारत लाने में सक्षम हो रही हैं. अमित शाह का विजन इसी कड़ी में अमित शाह (Amit Shah) ने आगे कहा, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य एक मजबूत भारत है, जो सीमाओं की सुरक्षा, कानून के शासन और स्मार्ट डिप्लोमेसी के माध्यम से विश्व में अपनी भूमिका को और सशक्त बनाएगा. आज हम ग्लोबल ऑपरेशन्स, स्ट्रांग कोऑर्डिनेशन और स्मार्ट डिप्लोमेसी इन तीनों क्षेत्रों के संयोजन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं.”

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