Shubhanshu Shukla

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे शुभांशु शुक्‍ला, अब अंतरिक्ष में रहकर करेंगे रिसर्च 

भारत के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने Axiom Mission 4 (Ax-4) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरें और सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) 28 घंटे में अपने 3 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहुंच चुके हैं। यह मिशन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोधों की नींव रख रहा है, जो भविष्य में अंतरिक्ष में मानव जीवन और खेती को संभव बना सकते हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) को भारतीय वायुसेना से चयनित किया गया है और वे इस मिशन में 14 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर कुल सात प्रमुख प्रयोग करेंगे। ये सभी प्रयोग अत्यधिक वैज्ञानिक महत्व रखते हैं और भारत के गगनयान मिशन से लेकर भविष्य के अंतरिक्ष उपनिवेश की नींव तक जुड़ते हैं। अंतरिक्ष में  शुभांशु शुक्ला क्या-क्या करेंगे रिसर्च?  1. मायोजेनेसिस पर रिसर्च – अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहते हैं। ऐसे में शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) इस पर मायोजेनेसिस नाम का प्रयोग करेंगे, जो Institute of Stem Cell Science and Regenerative Medicine द्वारा प्रस्तावित है। इसका मकसद यह समझना है कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने वाले यात्रियों की मांसपेशियों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। यह रिसर्च ना केवल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, बल्कि धरती पर बुजुर्गों और मांसपेशी से जुड़ी समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए भी अहम हो सकता है। 2. फसलों के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी का असर- शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) अंतरिक्ष में छह अलग-अलग फसलों के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। खास बात यह है कि वे अपने साथ मूंग और मेथी के बीज ले गए हैं। इसका उद्देश्य यह जानना है कि बिना गुरुत्वाकर्षण के बीज कैसे अंकुरित होते हैं, उनमें कौन-कौन से जेनेटिक बदलाव होते हैं, उनकी पोषण क्षमता में क्या फर्क आता है और वे कितने सूक्ष्मजीव प्रतिरोधी बनते हैं। यह रिसर्च केरल कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है और इसका दीर्घकालिक उद्देश्य अंतरिक्ष में खेती को संभव बनाना है। एक ऐसी तकनीक जो भविष्य में मंगल या चंद्रमा जैसे ग्रहों पर मानव जीवन की कल्पना को साकार कर सकती है। 3. टार्डीग्रेड्स पर रिसर्च-  टार्डीग्रेड्स एक तरह का सूक्ष्म जीव होता हैजो अत्यंत विषम परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं, चाहे वह अत्यधिक गर्मी हो या ठंड हो। शुभांशु माइक्रोग्रैविटी में इन टार्डीग्रेड्स के जीवन चक्र, अनुकूलन क्षमता और व्यवहार का अध्ययन करेंगे। इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-कौन से जीव अंतरिक्ष में जीवन बनाए रख सकते हैं और क्या हम किसी प्रकार की जैविक अनुकूलता के जरिए दूसरे ग्रहों पर जीवन संभव कर सकते हैं। 4. माइक्रोएल्गी- शुभांशु अंतरिक्ष में तीन प्रकार की एककोशिकीय माइक्रोएल्गी (unicellular microalgae) पर अध्ययन करेंगे। इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या ये एल्गी माइक्रोग्रैविटी में भी सही रूप से बढ़ सकती हैं और क्या वे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पोषण, ऑक्सीजन रिसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन जैसी जरूरतों को पूरा कर सकती हैं। 5. सायनोबैक्टीरिया पर प्रयोग- शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) का अगला प्रयोग सायनोबैक्टीरिया की जैव रासायनिक प्रक्रियाओं पर आधारित है। ये जीव अपनी प्रकाश-संश्लेषण क्षमता के लिए जाने जाते हैं और ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकते हैं। माइक्रोग्रैविटी में इनकी क्रियाशीलता को समझकर लाइफ-सस्टेनेबिलिटी के लिए मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष में बायोसिस्टम बनाया जा सके। इसे भी पढ़ें:-  Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान 6. स्पेस स्क्रीन और आँखों पर प्रभाव- एक और अहम अध्ययन अंतरिक्ष में स्क्रीन टाइम और उसके मानसिक और शारीरिक असर से जुड़ा है। शुभांशु यह देखेंगे कि कंप्यूटर स्क्रीन का आंखों की गतिविधि, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और नींद पर क्या असर पड़ता है। यह प्रयोग गगनयान मिशन के लिए भी जरूरी है, क्योंकि अंतरिक्ष यात्रियों का ध्यान, थकावट और मानसिक संतुलन मिशन की सफलता के लिए बेहद अहम होते हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) की यह अंतरिक्ष यात्रा केवल भारत के लिए एक गर्व का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए विज्ञान, कृषि और जीवन प्रणाली की नई दिशा भी है। उनके प्रयोग अंतरिक्ष में जीवन को संभव बनाने, खेती करने और स्वास्थ्य को बनाए रखने की नींव रख सकते हैं। इस मिशन से यह समझा जा सकता है कि भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल नहीं, बल्कि अग्रणी भूमिका निभा रहा हैऔर शुभांशु शुक्ला इस वैज्ञानिक युग के आइडल भी बन चुके हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Shubhanshu Shukla #shubhanshushukla #internationalspacestation #indianinscience #spaceresearch #space2025 #issmission #indiaspace

आगे और पढ़ें
What is Truth Social?

क्या है Truth Social? पीएम मोदी और प्रेसिडेंट ट्रंप भी एक्टिव हैं इस अकाउंट पर

पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platform) न केवल बातचीत का माध्यम है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को भी दिशा दे रहे हैं। इसी संदर्भ में एक नाम तेजी से चर्चा में आया है और वह है ट्रुथ सोशल (Truth Social)। इस प्लेटफॉर्म पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भी अकाउंट बना हुआ है।   ट्रुथ सोशल (Truth Social) क्या है? ट्रुथ सोशल (Truth Social) एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  (Social Media Platform) है जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2021 में लॉन्च किया था। यह प्लेटफॉर्म ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (Trump Media & Technology Group {TMTG}) के अंतर्गत आता है। इस प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने का उद्देश्य था एक ऐसा मंच तैयार करना जो फ्री स्पीच (Free Speech) को प्राथमिकता दे और पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स  (Social Media Platforms) जैसे ट्विटर (X), फेसबुक (Facebook) आदि के मुकाबले एक अन्य विकल्प हो। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ट्विटर अकाउंट 2021 में अमेरिकी संसद पर हुए हमले के बाद स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने  ट्रुथ सोशल (Truth Social) की शुरुआत की। इस प्लेटफॉर्म को एक रूढ़िवादी विकल्प (Conservative alternative) के रूप में देखा गया, जो विशेष रूप से उन विचारधाराओं को मंच देने का दावा करता है जो मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स पर सेंसर हो सकती हैं। ट्रुथ सोशल (Truth Social) की क्या है खासियत?  पीएम मोदी भी हैं Truth Social पर एक्टिव   2025 में यह खबर सामने आई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भी ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि भारत सरकार भी वैकल्पिक सोशल मीडिया मंचों पर अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहती है। पीएम मोदी सोशल मीडिया (Social Media) के प्रभाव को समझने वाले नेताओं में से एक हैं। उन्होंने पहले भी ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।  ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर उनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार वैश्विक और वैकल्पिक मंचों पर भी सक्रिय रहना चाहती है, खासकर ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर जो फ्री-स्पीच को प्राथमिकता देते हैं। इसे भी पढ़ें:-  Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान ट्रंप और  ट्रुथ सोशल का क्या है रिश्ता?  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस प्लेटफॉर्म के संस्थापक और प्रमोटर हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल (Truth Social) को बिग टेक (Big Tech) के खिलाफ एक हथियार के रूप में खड़ा किया है। ट्रंप का आरोप रहा है कि ट्विटर, फेसबुक जैसी कंपनियां दक्षिणपंथी विचारों को दबाने का काम करती हैं। ट्रुथ सोशल के ज़रिए वे एक ऐसी जगह तैयार करना चाहते थे जहाँ उनके समर्थक बिना डर या सेंसरशिप के अपनी बात कह सकें। हालांकि ट्रंप को बाद में ट्विटर (अब एक्स) पर वापस बुला लिया गया, लेकिन उन्होंने अभी भी ट्रुथ सोशल (Truth Social) को बरकरार रखा है।  ट्रुथ सोशल (Truth Social) ने शुरुआत में बड़ी चर्चा बटोरी थी, लेकिन यह अभी भी ट्विटर या फेसबुक जैसी वैश्विक लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाया है। इसके सीमित यूज़रबेस, तकनीकी गड़बड़ियों और राजनीतिक विवादों ने इसकी गति को कुछ हद तक धीमा कर दिया। इसके अलावा यह मंच मुख्य रूप से अमेरिकी उपयोगकर्ताओं पर केंद्रित रहा है। लेकिन पीएम मोदी जैसे वैश्विक नेता का इस पर आना इस बात का संकेत हो सकता है कि यह प्लेटफॉर्म आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को स्थापित करने की कोशिश करेगा। ट्रुथ सोशल एक वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जो फ्री स्पीच (Free Speech) के विचार को आगे बढ़ाने का दावा करता है। डोनाल्ड ट्रंप की पहल से शुरू हुआ यह मंच अब वैश्विक नेताओं के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसमें शामिल होना इस दिशा में एक बड़ा संकेत है कि भारत वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहता है। ट्रुथ सोशल (Truth Social) का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह किस तरह खुद को ग्लोबली रिप्रेजेंट करता है और क्या यह अपने वादे के अनुसार वाकई एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मंच है या नहीं।  Latest News in Hindi Today Hindi Truth Social #truthsocial #PMModi #DonaldTrump #SocialMediaNews #TruthApp #ModiTrump #TrendingNews

आगे और पढ़ें
Shubhanshu Shukla's journey in Axiom-4 marks

भारत ने रचा अंतरिक्ष इतिहास: Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान

भारत की अंतरिक्ष यात्रा ने एक नया और ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। Axiom-4 मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला  (Indian astronaut Shubhanshu Shukla) और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर SpaceX का फाल्कन 9 रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया है। फ्लोरिडा के प्रतिष्ठित कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से लॉन्च हुआ यह मिशन न केवल भारत, बल्कि हंगरी और पोलैंड जैसे देशों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla), जो इस मिशन के पायलट हैं, भारत के लिए गौरव का प्रतीक बन चुके हैं, क्योंकि वे राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) के बाद अंतरिक्ष में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय हैं और पहले भारतीय हैं जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचेंगे। सफल लॉन्च और 28 घंटे की यात्रा SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट ने 24 जून की रात को लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से उड़ान भरी। इस रॉकेट के शीर्ष पर स्पेसएक्स का ही अंतरिक्ष यान ड्रैगन मौजूद है, जिसमें चारों अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। यह यान अब 28 घंटे की यात्रा पर है और उम्मीद है कि यह गुरुवार, 26 जून को शाम 4:30 बजे (भारतीय समयानुसार) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर डॉक करेगा। यह मिशन तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन लॉन्च की सफलता ने इस पूरी यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर दिया है। मिशन की टीम: अनुभव और विविधता का संगम Axiom-4 मिशन (Axiom Space) की टीम में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। भारत से शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) मिशन के पायलट हैं, जो ISRO (Indian Space Research Organisation) के प्रतिनिधि के रूप में इस मिशन में भाग ले रहे हैं। मिशन कमांडर हैं नासा (NASA) की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, जिन्हें अमेरिका की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री माना जाता है। उनके अनुभव ने इस मिशन को एक मजबूत नेतृत्व प्रदान किया है। इसके अलावा पोलैंड से स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी से टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ के रूप में टीम का हिस्सा हैं। यह मिशन न केवल विज्ञान की दृष्टि से बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दृष्टि से भी एक मिसाल है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 14 दिन का मिशन Axiom-4 मिशन (Axiom-4 Mission) के चारों सदस्य ISS पर लगभग 14 दिन बिताएंगे। इस दौरान वे 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। इनमें से सात प्रयोग भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं, जो अंतरिक्ष में जैविक, भौतिक और तकनीकी अनुसंधान से संबंधित हैं। इन प्रयोगों के परिणामों से न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को नई दिशा मिलेगी, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी। इसे भी पढ़ें:- भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज भरेंगे अंतरिक्ष की उड़ान Axiom Space और निजी अंतरिक्ष उड़ानों का नया युग Axiom-4 मिशन  (Axiom-4 Mission) चौथा निजी अंतरिक्ष मिशन है जिसे ह्यूस्टन स्थित कंपनी Axiom Space द्वारा नासा की साझेदारी में भेजा गया है। यह मिशन एक और संकेत है कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्राएं केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेंगी। निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष अनुसंधान और पर्यटन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Axiom Space का उद्देश्य है एक दिन पृथ्वी की कक्षा में एक पूर्णत: वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बनाना, जो वर्तमान ISS का स्थान ले सके। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jairashtranews) भारत के लिए महत्व: वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर नई पहचान भारत के लिए यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि यह दिखाता है कि देश अब वैश्विक अंतरिक्ष प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। शुभांशु शुक्ला की इस उड़ान ने भारत को उस क्लब में शामिल कर दिया है, जिसमें अब तक केवल कुछ ही देशों के नागरिक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचे हैं। यह न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की अंतरिक्ष नीतियों की दिशा में एक बड़ा कदम है। Axiom-4 मिशन (Axiom-4 Mission) ने भारत के अंतरिक्ष सफर में एक नया अध्याय जोड़ा है। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) की ऐतिहासिक उड़ान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक शोध और निजी कंपनियों की सक्रियता से यह मिशन भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए प्रेरणा बनेगा। यह मिशन साबित करता है कि भारत अब न केवल पृथ्वी पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी एक उभरती हुई महाशक्ति है। Latest News in Hindi Today Hindi Shubhanshu Shukla Axiom Space #shubhanshushukla #axiom4 #indiaspace #spacexmission #indianastronaut #spacehistory #axiomspace #nasacollab #indianews #spacetravel

आगे और पढ़ें
kya h digipin

क्या है DIGIPIN, क्या हैं इसके फायदे और क्या है यह सुरक्षित?

डिजिपिन (DIGIPIN) एक ऐसा डिजिटल एड्रेस सिस्टम है, जिसे भारत सरकार के पोस्टल डिपार्टमेंट द्वारा बनाया गया है। यह एक अलग जिओ-कोडेड एड्रेस सिस्टम है, जो लोकेशंस को पहचाने के लिए सही और स्टैंडर्ड तरीके को प्रदान करता है। यह सिस्टम कई क्षेत्रों के लिए फायदेमंद हो सकता है जैसे लॉजिस्टिक्स, एमर्जेन्सी सर्विसेज और अर्बन प्लानिंग आदि। डिजिपिन (DIGIPIN) का अर्थ है डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर (Digital Postal Index Number) और यह दस अक्षरों वाला अल्फान्यूमेरिक कोड है। इसको भारत डाक विभाग (India postal department) ने आईआईटी हैदराबाद और एनआरएससी, इसरो की मदद से बनाया है। आइए जानें डिजिपिन (DIGIPIN) के बारे में विस्तार से। यह भी जानें कि क्या डिजिपिन का इस्तेमाल सुरक्षित है? डिजिपिन कैसे काम करता है? डिजिपिन (DIGIPIN) हमारे देश को 4 मीटर x 4 मीटर ग्रिड में बांटता है और लैटीट्यूड व लोंगोटयूड कोऑर्डिनेट्स के अनुसार हर ग्रिड को एक अलग और अनोखा दस अक्षर वाला अल्फान्यूमेरिक कोड देता है। यह सिस्टम अधिक एक्यूरेट और लोकेशन के आधार पर एड्रेस प्रदान करता है, इसलिए यह दूसरे पिन कोड्स से अलग है। इसकी अन्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: डिजिपिन के फायदे डिजिपिन (DIGIPIN) एक आधुनिक, विश्वसनीय और फायदेमंद सर्विस है जिसका इस्तेमाल कई तरह से बेनेफिशियल हो सकता है। इसके कुछ फायदे इस प्रकार हैं:  डिजिपिन कैसे प्राप्त करें? इसे भी पढ़ें:- सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले क्या डिजिपिन का इस्तेमाल सुरक्षित है? डिजिपिन (DIGIPIN) को पूरी तरह से सुरक्षित माना गया है। दरअसल यह सिस्टम किसी का पर्सनल डाटा स्टोर नहीं करता है। यह सिर्फ जियोग्राफिक कोऑर्डिनेट्स के आधार पर डिजिटल अड्रेस प्रदान करता है। इसमें सुरक्षित प्रोटोकॉल और तकनीक का इस्तेमाल होता है और उपयोग हुए डाटा को सेफ रखा जाता है। इस सिस्टम को लोगों प्राइवेसी प्रोटेक्शन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसलिए, इसका इस्तेमाल करना न केवल फायदेमंद है बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित भी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi DIGIPIN #digipin #digitalbanking #bankingsecurity #securetransactions #fintechindia #digipinbenefits #digipinexplained

आगे और पढ़ें
online shopping scam

Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले

टेक्नोलॉजी के इस दौर में लोग अपनी सुविधा के मुताबिक ऑनलाइन शॉपिंग का इस्तेमाल करते हैं। देश में करोड़ों लोग हैं जो रोजाना ऑनलाइन आर्डर कर चीजें मंगवाते हैं। सुविधाजनक होने की वजह से दिनोंदिन लोगों में घर बैठे ऑनलाइन सामान खरीदने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। कारण यही जो ठगों ने अब ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को अपना टारगेट बनाना शुरू कर दिया है। इसके मदद्देनज़र सरकार की तरफ से ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए कुछ जरूरी सलाह दी गई (Govt Warns Online Shoppers) है। यदि सरकार की बात पर अमल करते हैं, तो संभवतः आप जालसाजी का शिकार होने से बच सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी के प्रति आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से सरकार साइबर दोस्त नामक एक पहल की है। साइबर दोस्त गृह मंत्रालय के अंर्तगत आता है। साइबर दोस्त के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स से पोस्ट शेयर किया गया है। इस पोस्ट में बताया गया है कि फर्जी साइट्स और फिशिंग डिलीवरी टेक्स्ट से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।  फेक साइट्स पर आंख बंद करके न (Govt Warns Online Shoppers) करें भरोसा  सरकार ने सलाह दी है कि फेक साइट्स पर आंख बंद करके भरोसा न (Govt Warns Online Shoppers) करें। सिर्फ ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही शॉपिंग करें। इस पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई है, जिसपर साफ़ लिखा नजर आ रहा है कि आपके कार्ट में पड़ा हर सामान सेफ नहीं है। आपका ऑर्डर होल्ड पर है। यहां क्लिक कर पेमेंट कंफर्म करें। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं यदि आप सरकार की सलाह को अनदेखा करते हैं तो ढग आपको अपने जाल में फंसकर आपका अकाउंट तक खाली कर सकते हैं। बड़ी बात यह कि ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को ठगी करने वाले कैशबैक,ऑफर्स, बंपर डिस्काउंट का लालच देकर जाल में फंसाते हैं। एक तरह से आप लोगों को फंसाने के लिए पूरा जाल बिछाया जाता है। आइए समझते हैं, किस तरह से ठगी करने वाले इस घटना को देते हैं अंजाम।  फर्जी विज्ञापन: फर्जी विज्ञापन के जरिए ठग न सिर्फ सोशल मीडिया पर लुभाने वाले ऑफर्स और डील्स से जुड़े विज्ञापन को शेयर करते (Govt Warns Online Shoppers) हैं बल्कि इसके साथ ही विज्ञापन के साथ लिंक भी शेयर करते हैं। जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करते हैं आप अन-वेरिफाइड साइट पर पहुंच जाते हैं और आपकी जानकारी चुराकर आपको आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है।  फेक साइट: ठग ठगी के लिए ऑरिजनल दिखने वाली साइट की हू-ब-हू साइट तैयार करते (Govt Warns Online Shoppers) हैं। ताकि यकीन हो सके कि आप ऑरिजनल साइट के जरिए ही शॉपिंग कर रहे हैं। मजे की यह कि जैसे ही आप ऑर्डर प्लेस करते हैं और पेमेंट करते हैं वैसे ही साइट गायब हो जाती है।  फिशिंग डिलीवरी टेक्स्ट: ठगी करने वाले एक नायाब तरीका खोज निकाला है। इसके तहत ठग आपको टेक्स्ट या ईमेल के जरिए बताते हैं कि आपका ऑर्डर होल्ड पर है और पेमेंट कंफर्मेशन की जरूरत है। और फिर मैसेज या ईमेल के जरिए लिंक भेजा जाता है। जैसे ही आप लिंक पर क्लिक करते हैं, आप एक फर्जी साइट पर पहुंच जाते हैं। और जैसे ही फर्जी साइट आप पेमेंट के लिए कार्ड डिटेल डालते हैं आपका डेटा चोरी कर लिया जाता है।  इसे भी पढ़ें:- मुंबई में 10 साल की नाबालिग बेटी के साथ माँ के प्रेमी ने दुष्कर्म कर गुप्तांग में डाला पेचकस बड़ा सवाल यह कि इससे बचने के लिए (Govt Warns Online Shoppers) क्या करें? Latest News in Hindi Today Hindi Govt Warns Online Shoppers #govtwarning #onlineshopping #cybersafety #fraudalert #digitalsafety

आगे और पढ़ें
Trump T1 phone

डोनाल्ड ट्रम्प ने लॉन्च किया अपना स्मार्टफोन ‘ट्रम्प टी1’, जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन

जैसे आजकल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं, वैसे ही उनके नाम का फोन भी लोगों में प्रसिद्ध हो रहा है। इस फोन का नाम है “ट्रम्प टी1 (Trump T1)”। जैसा की पता चल रहा है कि इस स्मार्टफोन (Smartphone) का नाम डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के नाम पर रखा गया है जिसमें टी1 का अर्थ है ट्रंप1। इस फोन को ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन द्वारा लॉन्च किया गया है और यह अपने फीचर्स और डिजाइन की वजह से लोगों को पसंद आ रहा है। इस फोन को बनाने का उद्देश्य अमेरिका में बनाए प्रोडक्ट्स को लोगों में पॉपुलर बनाना है। आइए जानें ट्रम्प टी1 (Trump T1) के बारे में विस्तार से। इसके फीचर्स के बारे में भी जानें। ट्रम्प टी1 (Trump T1) के बारे में जानकारी ट्रम्प टी1 (Trump T1) को “मेड इन यूएसए” टैगलाइन के साथ बाजार में उतारा गया है, ताकि लोग अमेरिकी उत्पादों के प्रति आकर्षित हों और उनका अधिक इस्तेमाल करें। आइए जानें क्या हैं इसके फीचर्स और क्यों है यह खास:   डिजाइन  ट्रम्प टी1 (Trump T1) का डिजाइन एकदम यूनिक और लाजवाब है। इसकी बॉडी गोल्डन रंग की है। अगर बात की जाए इसकी डिस्प्ले की, तो इस फोन की डिस्प्ले  6.8 इंच की है और यह AMOLED डिस्प्ले है। इससे यूजर हाई क्वालिटी की तस्वीरें और वीडियोज का मजा ले पाएंगे। इसके साथ ही इस स्मार्ट फोन में 120Hz का रिफ्रेश रेट भी है। गेमिंग के शौकीन लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है। अगर आप गेमर हैं तो इसे ट्राई कर सकते हैं।  कैमरा अगर आप फोटोग्राफर हैं या फोटोज खींचना व खिंचवाना आपको पसंद है, तो आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के नाम वाला यह स्मार्टफोन (Smartphone) 50MP का प्राइमरी रियर कैमरे के साथ आपको मिलेगा। 16MP का फ्रंट कैमरा की वजह से सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए भी इसका इस्तेमाल बेहतरीन माना गया है। बैटरी ट्रम्प टी1 (Trump T1) की बैटरी 5000mAh की है। इसका अर्थ है कि थोड़ी देर इसे चार्ज करके आप पूरा दिन इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। चार्जिंग की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप इस ट्रंप फोन को खरीद सकते हैं। थोड़ी ही देर में यह पूरा चार्ज हो जाता है और जल्दी डिस्चार्ज नहीं होता। स्टोरेज इस स्मार्टफोन (Smartphone) में 12GB रैम और 256GB की इंटरनल स्टोरेज मौजूद है। आप एक अलग मेमोरी कार्ड से इसे बढ़ा भी सकते हैं। इसकी स्टोरेज अच्छी है, जिसकी वजह से आप कुछ बिना खोये अपनी जरूरी फोटो, वीडियोज और अन्य डाक्यूमेंट्स को स्टोर कर के रख सकते हैं। ट्रम्प टी1 (Trump T1) स्मार्टफोन में एंड्रॉइड 15 है। यही नहीं इनमें  फिंगरप्रिंट सेंसर और एआई फेस अनलॉक जैसे अन्य कई फीचर्स  भी हैं। ट्रम्प टी1 (Trump T1) में केवल एक ही मोबाइल प्लान चलेगा जिसका नाम है द 47 प्लान। इसकी कीमत एक महीने की  47.45 डॉलर है। इस प्लान से यूजर को अनलिमिटेड टॉक, टेक्स्ट और डेटा मिलेगा। अगर बात की जाए इस फोन की कीमत की है तो इसकी कीमत 499 डॉलर यानी लगभग 43,000 रुपए है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक डिजाइन बेहतरीन और पावरफुल है ट्रम्प टी1 (Trump T1) फोन एक ऐसा स्मार्टफोन (Smartphone) है जिसका डिजाइन बेहतरीन है और यह पावरफुल है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह फोन एक अच्छा विकल्प है लेकिन आईफोन से इसकी तुलना नहीं की जा सकती है। क्योंकि, इसकी क्वालिटीज और मैनुफेक्चर क्वालिटी आईफोन के समान नहीं है। फिर भी यह एक अच्छा स्मार्टफोन (Smartphone) है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशंसक इस फोन को खरीद कर अमेरिकी फोन की खरीद को बढ़ावा दे सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Trump T1 #trumpt1 #donaldtrump #smartphonelaunch #trumptech #mobilespecs #latesttechnews #trumpphone #trends2025

आगे और पढ़ें
Motorola Edge 60

मोटोरोला एज 60 हुआ लांच: जानें इसकी कीमत, प्राइस और फीचर्स के बारे में

मोटोरोला (Motorola) एक अमेरिकी कंपनी है जो स्मार्टफोन (Smartphone) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस आदि का निर्माण करती है। यह कंपनी अपनी हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स और नई टेक्निक्स आदि के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि लोगों में यह कंपनी बहुत प्रसिद्ध है। मोटोरोला (Motorola) समय-समय पर नए प्रोडक्ट बाजार में लाती है। इन्ही में से एक है मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60), जिसे हाल ही में भारत में लांच किया गया है। इसे कस्टमर्स 18 जून से खरीद सकते हैं। अगर आप एक नया स्मार्टफोन ढूढ़ रहे हैं, तो आपके लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। आइए जानें मोटोरोला एज 60 के फीचर्स के बारे में। इसकी कीमत के बारे में भी जानना न भूलें। मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60): पाएं जानकारी मोटोरोला एज 60 न केवल अपने फीचर्स बल्कि परफॉरमेंस के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह स्मार्टफोन (Smartphone) लेदर फिनिश के साथ है और दो रंगों में उपलब्ध है एक पैनटोन जिब्राल्टर सी और दूसरा पैनटोन शमरॉक। यह दोनों ही रंग यूजर की पसंद के अनुसार बनाया गया है। आप अपनी पसंद का फोन चुन सकते हैं। इसकी कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं, जो इसे अन्य स्मार्टफोन से अलग बनाती हैं। यह फीचर्स इस प्रकार हैं: कैमरा मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60) ट्रिपल कैमरा सिस्टम के साथ आता है। इसमें 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है। इसके साथ ही इसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर और 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस भी है। इसमें 4के वीडियो रिकॉर्डिंग है। संक्षेप में कहा जाए तो अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो मोटोरोला (Motorola) का यह फोन आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है। वीडियो और रील्स आदि में भी यह अच्छे परिणाम प्रदान कर सकता है। डिस्प्ले मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60) में क्वाड-कर्व्ड डिस्प्ले है जो 6.7 इंच का है। यही नहीं, यह 4500 निट्स पीक ब्राइटनेस और 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ मिल रहा है। यानी, इस स्मार्टफोन से आप बेहतरीन और लग्जरी अनुभव  मिलता है। गेमिंग के अनुभव को भी यह स्मार्टफोन (Smartphone) बेहतरीन बना सकता है।  परफॉर्मेस अगर मोटोरोला (Motorola) के इस इस फोन की परफॉरमेंस के बारे में बात करें तो इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 7400 चिपसेट हैं। यही नहीं, इसमें 12 जीबी रैम और 256 जीबी स्टोरेज भी है। इसमें RAM बूस्ट 4.0 है जिससे यूजर्स को 24 जीबी तक की वर्चुअल रैम मिलेगी। इसकी बैटरी भी बहुत पावरफुल है। सिर्फ कुछ मिनटों तक चार्ज करने पर यह फोन पूरा दिन आपका साथ देगा। मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60) फोन में 68W टर्बोपावर चार्जर और 5500mAh की बैटरी आपको मिलेगी।  कीमत मोटोरोला का यह फोन केवल 25,999 रुपए है।  फ्लिपकार्ड या अन्य वेबसाइट्स पर यह आपको मिल जाएगा। इसके साथ ही रिटेल स्टोर्स में भी यह आसानी से उपलब्ध है। आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से इसे खरीद सकते हैं। इसके साथ ही कस्टमर्स को बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है, जो लिमिटेड समय के लिए ही है और कुछ ग्राहकों को ही मिलेगा। यह डिस्काउंट 1000 रुपए तक का है। यानी, इससे मोटोरोला एज 60 (Motorola Edge 60) आपको 25,999 रुपए की जगह 24,999 रुपए में मिल सकता है। यह ग्राहकों के लिए एक सुनहरे मौके की तरह है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक एक्सचेंज ऑफर्स के साथ भी इसे खरीद सकते हैं फोन  अगर आप चाहें तो आप एक्सचेंज ऑफर्स के साथ भी इसे खरीद सकते हैं। पुराने फोन के साथ एक्सचेंज कर के इसे खरीदने से भी आपको इसके लिए अधिक पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही आपको कंपनी इएमआई ऑफर्स भी  मिलेंगे। अधिक जानकारी के लिए आप मोटोरोला की ऑफिशियल वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Motorola Edge 60 #MotorolaEdge60 #MotorolaLaunch #Smartphone2025 #TechNews #Edge60Features

आगे और पढ़ें
data breach 2025

16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers: हैकरों का आतंक, 16 अरब लोगों के एपल और गूगल अकाउंट पासवर्ड किये लीक

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा बेहद जरूरी है अन्यथा पलक झपकते ही आप अपना सारा का सारा डेटा गंवा सकते हैं। आप अपनी सभी ख़ुफ़िया और निजी जानकारियों से हाथ धो सकते हैं। और यदि हम सतर्क रहते हुए सही समय पर सही कदम उठाएं, तो साइबर हमलों से खुद को बचा सकते हैं। खैर, आपको बता दें कि एक बहुत ही बड़े डेटा लीक की खबर आ रही है। यदि आप भी एप्पल, गूगल और फेसबुक जैसे अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो ये खबर खास आपके काम की हो सकती है। दरअसल, हालिया रिपोर्ट में एक खुलासा हुआ है कि 16 अरब लोगों का पासवर्ड और लॉग-इन क्रेडेंशियल लीक हो गए (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) हैं। चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक न सिर्फ डेटा लीक हो गए हैं बल्कि यह ऑनलाइन सेल के लिए उपलब्ध भी हैं। इसमें गूगल, टेलीग्राम, गिटहब, एपल, फेसबुक और अन्य सरकारी एजेंसियों के पासवर्ड और लॉग-इन क्रेंडिशियल शामिल हैं। ये अब तक की सबसे बड़ी चोरी मानी जा रही है। ऐसे में इस खबर ने लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या गूगल, फेसबुक और एपल जैसी कंपनियों के पास अकाउंट वाकई सुरक्षित हैं भी या नहीं? यह अब तक के सबसे बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघनों में से एक माना जा रहा (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है साइबर सिक्योरिटी रिसचर्स ने पाया कि 16 अरब से ज्यादा क्रेडेंशियल डार्क वेब पर ऑनलाइन सेल के लिए उपलब्ध हैं। यह अब तक के सबसे बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघनों में से एक माना जा रहा (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है। कहने की जरूरत नहीं इस लीक से करोड़ों यूजर्स की निजी और गोपनीय जानकारी मसलन, ईमेल, सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट्स तक खतरे में पड़ सकते हैं।  इससे जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वक्त रहते इससे निपटा नहीं गया तो लोगों को फिशिंग अटैक, आईडी थेफ्ट और यहां तक कि अकाउंट का कंट्रोल तक खोना पड़ सकता है। फोर्ब्स की रिपोर्ट की माने तो वर्ष 2025 की शुरुआत में शुरू हुई जांच में शामिल शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि बड़े पैमाने पर पासवर्ड लीक के लिए कई इन्फोस्टेलर मैलवेयर जिम्मेदार हैं। पासवर्ड का चोरी होना छोटी बात नहीं है, क्योंकि इससे कई बड़े खतरे हो सकते हैं। वजह यही जो गूगल ने अरबों यूजर्स को तुरंत अकाउंट का पासवर्ड चेंज करने और पासकी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। साथ ही एफबीआई ने चेतावनी दी है कि कोई भी अजनबी लिंक या ईमेल पर क्लिक न करें, खासकर वे जो लॉगिन डिटेल मांगते हैं।   इसे एक खास किस्म के मैलवेयर इन्फोस्टीलर्स की मदद से चुराया गया (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सिर्फ पुराना डेटा ही नहीं, बल्कि नई और अच्छी तरह से व्यवस्थित जानकारी है, जिसे एक खास किस्म के मैलवेयर इन्फोस्टीलर्स की मदद से चुराया गया (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) है। ये मैलवेयर चुपचाप आपके डिवाइस से यूजरनेम और पासवर्ड चुरा लेते हैं और हैकर तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद या तो हैकर खुद इस्तेमाल करता है या डार्क वेब पर बेच देता है। और तो और लीक हुई जानकारी को इस तरह रखी गई है कि वेबसाइट लिंक के साथ यूजरनेम और पासवर्ड भी दिया गया है। कारण यही जो हैकर्स के लिए इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान हो गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि ये पासवर्ड अब डार्क वेब पर बेहद सस्ते दाम पर मिल मिल रहे हैं। यानी कोई भी सामान्य व्यक्ति भी इन्हें खरीदकर गलत इस्तेमाल कर सकता है। बेशक बात  इंकार नहीं किया जा सकता कि इससे आम यूजर ही नहीं, कंपनियां और सरकारी संस्थान भी खतरे में हैं। ऐसे में  बड़ा सवाल यह कि इससे बचने के लिए करें क्या? इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे खुद को बचाने के लिए आपको तुरंत निम्नलिखित ये कदम (16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers) उठाने चाहिए Latest News in Hindi Today Hindi 16 Billion Apple & Google Passwords Leaked by Hackers #AppleHack #GooglePasswordLeak #DataBreach2025 #Cybersecurity #Hackers #16BAccountsLeaked #TechNews #PrivacyAlert

आगे और पढ़ें
Aircraft Maintenance Engineering

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए पाएं यह जरूरी जानकारी

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उड़ान सुरक्षा को लेकर कई चिंताएं जताई जा रही हैं। इस दुर्घटना में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। आपको बता दें कि विमानों की सुरक्षा और परफॉरमेंस को सुनिश्चित करने के लिए एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वो विमानों की देखभाल और रखरखाव करते हैं। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) यानी एएमई (AME) में अगर आप अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इसके लिए आपको एयरक्राफ्ट (Aircraft) इंडस्ट्री में विशेषज्ञता प्राप्त करनी होगी। इसके साथ ही जरूरी लाइसेंस और सर्टिफिकेट प्राप्त करना भी जरूरी है। आइए जानें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) या एएमई (AME) के बारे में। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के बारे में जानें जैसे की पहले ही बताया गया है कि क्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर की जिम्मेदारी होती है विमानों की सुरक्षा को पक्का करना और उसके रखरखाव में मदद करना। एएमई (AME) के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं: एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के लिए कौन से कोर्स किए जाते हैं? अगर आप एएमई (AME) में करियर बनाना चाहते हैं तो आपके लिए यह जानकारी जरूरी है कि आप इसके लिए कौन से कोर्स कर सकते हैं? यह विकल्प इस प्रकार हैं: कहां से करें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering)? एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) करने के लिए आप डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा अप्रूव्ड किसी भी इंस्टिट्यूट से कोर्स पूरा कर सकते हैं। यह कुछ इंस्टिट्यूट इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (Aircraft Maintenance Engineering) के लिए योग्यता इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए कुछ इंस्टिट्यूट एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं। उसमें उत्तीर्ण कैंडिडेट्स को इसमें प्रवेश दिया जाता है। कुछ इंस्टिट्यूट मेरिट के अनुसार दाखिला देते हैं। कई इंस्टिट्यूट इसमें लिए इंटरव्यू भी लेते हैं। अगर आप इसके बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो आप इन इंस्टीटूट्स की आधिकारिक वेबसाइट्स पर विजिट कर सकते हैं। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi B.E/B.Tech in Aircraft Maintenance Engineering #aircraftmaintenance #engineeringcareer #aviationjobs #ame #careeropportunities #aviationindustry #technicalcareers

आगे और पढ़ें
WhatsApp's new feature Username PIN

यूजरनेम पिन: सुरक्षित मैसेजिंग के लिए व्हाट्सऐप का नया फीचर

व्हाट्सऐप (Whatsapp) एक ऐसी ऐप है, जिसके यूजर्स लाखों नहीं बल्कि करोड़ों में हैं। चैट, वीडियो कॉल्स, शेयरिंग आदि के लिए यह एप्लीकेशन बेहतरीन मानी गई है। आजकल हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है और यह ऐप सबके जीवन है जरूरी भाग बन चुकी है। व्हाट्सऐप (Whatsapp) समय-समय पर अपने यूजर्स के लिए नए फीचर्स को लांच करता रहता है ताकि लोगों के लिए इसका इस्तेमाल और भी आसान हो और सेफ्टी में भी कोई समस्या न हो। अभी एक नया फीचर्स इसमें आने वाला है इसका नाम है यूजरनेम पिन (Username PIN)। आइए जानें क्या है व्हाट्सऐप का नया फीचर यूजरनेम पिन (WhatsApp’s new feature Username PIN) और पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी। व्हाट्सऐप का नया फीचर यूजरनेम पिन (WhatsApp’s new feature Username PIN) व्हाट्सऐप का नया फीचर यूजरनेम पिन (Username PIN) यूजर्स की प्राइवेसी और कंट्रोल को बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है। इसमें जब कोई व्यक्ति किसी को पहले बार मैसेज भेज रहा है, तो उसे इसके लिए एक पिन कोड डालना होगा। व्हाट्सऐप (Whatsapp) अभी इस नए फीचर पर काम कर रहा है जो यूजर की प्राइवेसी और नियंत्रण को बढ़ावा देगा। व्हाट्सऐप (Whatsapp) के इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे अनचाहे और स्पेम मैसेजिज को रोका जा सकता है। यही नहीं, इससे यूजर यह भी कंट्रोल कर पाएंगे कि उन्हें कौन मैसेज भेज सकता है और कौन नहीं।  इस फीचर का एक फायदा यह भी है कि इससे हम कम्युनिकेशन को कंट्रोल कर पाएंगे और सिर्फ अपने खास व ट्रस्टेड लोगों से ही बात करने में सक्षम होंगे। यानी अनचाहे कॉन्टेक्ट्स से मिलेगा पूरी तरह से छुटकारा उम्मीद है। कि यूजरनेम पिन (Username PIN) फीचर जल्द ही आएगा क्योंकि अभी यह बीटा टेस्टिंग के चरण में है। संक्षेप में कहा जाए तो यह पिन एक गेटकीपर की तरह काम करेगा जिसमें जो लोग पहले बार आपसे कांटेक्ट कर रहा है, उसके लिए इस पिन को होना जरूरी है। आइए जानें व्हाट्सऐप का नया फीचर यूजरनेम पिन (WhatsApp’s new feature Username PIN) कैसे काम करता है? इसे भी पढ़ें:- Lava Shark 5G: आईफोन जैसा डिजाइन, 5G कनेक्टिविटी और कीमत भी कम यूजरनेम पिन फीचर कैसे काम करेगा? यूजरनेम पिन (Username PIN) फीचर बहुत ही सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण फीचर साबित होगा। यूजरनेम पिन (Username PIN) फीचर इस तरह से काम करेगा:  यूजरनेम पिन (Username PIN) फीचर कैसे काम करता है और किस तरह से लोगों के लिए फायदेमंद साबित होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। बता दें कि यह फीचर जल्द ही सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक रिलीज डेट नहीं आई है। और रिलीज के बाद ही पता चल सकेगा कि आखिर WhatsApp का ये नया फीचर यूजर्स के लिए फायदेमंद है या नहीं और इस नय फीचर का इस्तेमाल करना लोगों के लिए कितना आसान और कितना कठिन होगा। Latest News in Hindi Today Hindi WhatsApp new features #WhatsAppnewfeatureusernamepin #usernamepinwhatsapp

आगे और पढ़ें
Translate »