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भारत की NavIC प्रणाली को मिली नई ताकत, ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह

श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अगली पीढ़ी के नौवहन उपग्रह NVS-03 का सफल प्रक्षेपण कर भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को नई मजबूती दी है। उपग्रह को GSLV-F18 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया और उसे निर्धारित भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

GSLV-F18 की 20वीं उड़ान

इसरो के अनुसार यह भारत के भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी GSLV की 20वीं उड़ान थी। मिशन को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से अंजाम दिया गया।

अगली पीढ़ी का तीसरा NavIC उपग्रह

NVS-03 नई पीढ़ी की NavIC श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इससे पहले NVS-01 को मई 2023 और NVS-02 को जनवरी 2025 में प्रक्षेपित किया गया था।

इसरो का लक्ष्य नई पीढ़ी के NVS उपग्रहों के जरिए NavIC सेवाओं की निरंतरता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

स्वदेशी परमाणु घड़ी से लैस NVS-03

NVS-03 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी स्वदेशी परमाणु घड़ी शामिल है। इसके साथ कुछ विदेशी परमाणु घड़ियां भी लगाई गई हैं।

परमाणु घड़ियां उपग्रह नौवहन प्रणाली में बेहद सटीक समय उपलब्ध कराती हैं, जिससे स्थान और दिशा की सटीक गणना संभव होती है।

L1 संकेत भी देगा उपग्रह

NVS-03 में पहले से मौजूद L5 और S-बैंड संकेतों के साथ L1 संकेत की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे NavIC को ज्यादा उपकरणों और नागरिक उपयोगों के लिए अपनाना आसान हो सकता है।

भारत और सीमा से 1,500 किलोमीटर बाहर तक सेवा

NavIC भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली है। इसकी सेवाएं पूरे भारत के साथ-साथ भारतीय भूभाग की सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर बाहर तक उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई हैं।

GPS पर निर्भरता कम करने में मदद

NavIC को विकसित करने का उद्देश्य भारत को विदेशी उपग्रह नौवहन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।

इसका इस्तेमाल सड़क परिवहन, समुद्री नौवहन, विमानन, मानचित्रण, सर्वेक्षण, दूरसंचार, समय समन्वय और आपदा चेतावनी जैसी सेवाओं में किया जा सकता है।

रक्षा क्षेत्र के लिए भी अहम

NavIC का मजबूत होना भारत की रणनीतिक क्षमताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वतंत्र और सटीक नौवहन प्रणाली रक्षा बलों को उन परिस्थितियों में भी भरोसेमंद स्थान और समय संबंधी जानकारी उपलब्ध करा सकती है, जब विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता जोखिम बन सकती है।

NVS-02 के बाद महत्वपूर्ण मिशन

जनवरी 2025 में प्रक्षेपित NVS-02 अपने निर्धारित अंतिम कक्षीय स्थान तक नहीं पहुंच सका था, हालांकि वह सीमित नौवहन सेवा देने में सक्षम रहा। ऐसे में NVS-03 का सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में पहुंचना NavIC के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को सफल मिशन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि NVS-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी NavIC प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इससे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

आम लोगों को कहां मिलेगा फायदा?

NavIC का इस्तेमाल भविष्य में मोबाइल फोन, वाहन नेविगेशन, रेलगाड़ियों की वास्तविक समय निगरानी, समुद्री जहाजों की स्थिति, भू-टैगिंग, आपातकालीन चेतावनी और अन्य स्थान आधारित सेवाओं में बढ़ सकता है।

इसरो और सरकार इसे नागरिक तथा रणनीतिक दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक की दिशा में बड़ा कदम

NVS-03 का सफल प्रक्षेपण केवल एक उपग्रह मिशन नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्र नौवहन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। स्वदेशी परमाणु घड़ी और नई पीढ़ी की तकनीक से लैस यह उपग्रह NavIC को अधिक विश्वसनीय और उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्रोत – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, प्रेस सूचना ब्यूरो, प्रधानमंत्री कार्यालय

जय राष्ट्र न्यूज़

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