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‘नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा चलाओ’—बृजेश पाठक का बयान वायरल, विपक्ष ने साधा निशाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का रोजगार और स्वरोजगार को लेकर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान पाठक ने लोगों से कहा कि वे केवल नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि अपनी गाड़ी चलाकर कमाई करें और परिवार को भी समय दें। सोशल मीडिया पर उनके बयान को “नौकरी मत ढूंढो, ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में शेयर किया जा रहा है, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर युवाओं के रोजगार के मुद्दे को लेकर निशाना साधा है।

23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ कार्यक्रम में दिया बयान

यह बयान 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित ‘भारत टैक्सी’ सेवा के औपचारिक शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान दिया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत कई नेता मौजूद थे।

‘भारत टैक्सी’ एक cooperative-led ride-hailing platform है, जिसमें ड्राइवरों को ‘सारथी’ के रूप में सदस्य और हिस्सेदार बनाने की व्यवस्था है। सेवा उत्तर प्रदेश में लखनऊ के साथ गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी शुरू की गई।

बृजेश पाठक ने आखिर क्या कहा?

वायरल वीडियो में बृजेश पाठक लोगों को स्वरोजगार के फायदे बताते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी के चक्कर में ही न पड़े रहें, बल्कि कुछ घंटे अपनी गाड़ी चलाएं, कमाई करें और दोपहर में परिवार तथा बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्होंने दूसरे के अधीन नौकरी करने की तुलना में खुद का काम करने पर जोर दिया।

उनकी टिप्पणी का संदर्भ ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner model और स्वरोजगार से जुड़ा था। Times of India ने भी कार्यक्रम की रिपोर्ट में लिखा कि पाठक ने अपनी गाड़ी खुद चलाकर कमाई को स्थानीय परिवारों और अर्थव्यवस्था के भीतर रखने की बात कही थी।

क्या उन्होंने सीधे ‘ई-रिक्शा चलाओ’ कहा था?

कई सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ खबरों में बयान को “ई-रिक्शा चलाओ” के रूप में पेश किया गया है। हालांकि उपलब्ध विस्तृत रिपोर्ट में पाठक का सीधा उद्धरण “नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, अपना चार घंटा चलाओ” है और पूरा संदर्भ टैक्सी तथा अपनी गाड़ी चलाने से जुड़ा है।

‘भारत टैक्सी’ प्लेटफॉर्म में टैक्सी के साथ दो-पहिया और तीन-पहिया वाहन चालक भी जुड़ सकते हैं। इसलिए ई-रिक्शा वाली व्याख्या इसी व्यापक परिवहन मॉडल से जोड़ी जा रही है, लेकिन वायरल headline को पाठक का शब्दशः पूरा बयान मानना सही नहीं होगा।

सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने किया पलटवार

बृजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने तंज करते हुए कहा कि देश का युवा देश चलाएगा और यदि उपमुख्यमंत्री को रिक्शा चलाने में रुचि है तो वह उन्हें एक रिक्शा उपहार में भेज सकते हैं। यह विपक्षी नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है।

कांग्रेस ने भी बयान पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी वायरल वीडियो शेयर करते हुए बृजेश पाठक की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि क्या उपमुख्यमंत्री अपने परिवार के युवाओं को भी यही सलाह देंगे।

कांग्रेस की ओर से इस बयान को बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के मुद्दे से जोड़कर देखा गया, जबकि पाठक का मूल भाषण ‘भारत टैक्सी’ के जरिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के संदर्भ में था।

‘भारत टैक्सी’ क्या है?

केंद्र सरकार के अनुसार ‘भारत टैक्सी’ देश का पहला cooperative-led ride-hailing platform है। इसमें ड्राइवरों को केवल service provider नहीं बल्कि cooperative का stakeholder बनाने का मॉडल अपनाया गया है।

प्लेटफॉर्म zero-commission मॉडल पर काम करता है, यानी ऐप के जरिए मिली ride के किराये में से driver-partner से commission नहीं काटा जाता। सरकार इसे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल के रूप में पेश कर रही है।

उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में हुई शुरुआत

23 सितंबर को ‘भारत टैक्सी’ को उत्तर प्रदेश में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। लखनऊ के अलावा गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज में भी सेवा की शुरुआत हुई।

PIB के मुताबिक लॉन्च के समय उत्तर प्रदेश के लगभग 40 हजार ड्राइवर प्लेटफॉर्म से पंजीकृत हो चुके थे। कार्यक्रम में ड्राइवरों को cooperative model के जरिए आर्थिक भागीदारी देने पर जोर दिया गया।

वायरल क्लिप बनाम पूरा संदर्भ

बृजेश पाठक का बयान ऐसे समय वायरल हुआ है जब रोजगार और सरकारी नौकरियां उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय हैं।

विपक्ष उनके शब्दों को युवाओं को नौकरी की जगह रिक्शा या टैक्सी चलाने की सलाह के रूप में पेश कर रहा है। दूसरी ओर पूरा कार्यक्रम और आधिकारिक संदर्भ देखें तो पाठक ‘भारत टैक्सी’ के driver-owner मॉडल और स्वरोजगार के विकल्प की बात कर रहे थे।

इसलिए वायरल क्लिप का संदर्भ समझना जरूरी है—पाठक ने नौकरी के बजाय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात जरूर कही, लेकिन “ई-रिक्शा चलाओ” वाला वाक्य सोशल मीडिया और मीडिया headlines में की गई संक्षिप्त व्याख्या है।

source – PIB / Hindustan / ABP News / Times of India

जय राष्ट्र न्यूज़

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