चमोली/देहरादून: उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में 30 अक्टूबर को हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई थी। अब 1 नवंबर 2026 की सुबह जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि सभी छह शव दुर्घटनास्थल से बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए ऋषिकेश स्थित एम्स भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा था हेलीकॉप्टर
हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांस भारत एविएशन कर रही थी। यह बदरीनाथ से पांच यात्रियों को लेकर देहरादून लौट रहा था, तभी जोशीमठ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हादसे में पायलट हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक से आए पांच यात्रियों की जान चली गई।
दुर्गम इलाके के कारण शव निकालने में लगा समय
दुर्घटनास्थल बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में था और निकटतम सड़क से लगभग 20 से 22 किलोमीटर दूर था। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने कठिन परिस्थितियों में शवों को बाहर निकाला।
ज्योतिर्मठ के अस्पताल लाए गए शव
सभी शवों को दुर्घटनास्थल से निकालकर चाईं गांव के पास सड़क तक लाया गया और वहां से ज्योतिर्मठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच में खराब मौसम के अलावा दूसरे कारण भी
शुरुआती रिपोर्ट में हादसे के समय खराब मौसम का जिक्र किया गया था, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर से पहले और बाद में भी उसी क्षेत्र से कुछ अन्य हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी और वे सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच गए। इसलिए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसा केवल मौसम के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी या परिचालन कारण भी था।
हादसे से आठ मिनट बाद भी उड़ा था एक हेलीकॉप्टर
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने के सिर्फ आठ मिनट बाद एक अन्य हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से रवाना हुआ था और वह सुरक्षित पहुंच गया।
एक अन्य उड़ान करीब एक घंटे बाद हुई और वह भी सुरक्षित रही। इसी वजह से स्थानीय मौसम की स्थिति और दुर्घटनाग्रस्त विमान की तकनीकी अवस्था की विस्तार से जांच की जा रही है।
जांच टीम पहुंची दुर्घटनास्थल
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम दुर्घटनास्थल पहुंच चुकी है। टीम हेलीकॉप्टर के बचे हुए हिस्सों को इकट्ठा कर दुर्घटना से पहले की घटनाओं का क्रम समझने का प्रयास कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक मलबा काफी हद तक नष्ट हो चुका है और केवल पीछे का हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित मिला है।
अभी नहीं मिला ब्लैक बॉक्स
जांच अधिकारियों ने बताया कि अभी तक हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं हुआ है। इसके मिलने पर उड़ान से जुड़े तकनीकी आंकड़ों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी की जांच की जा सकेगी।
मौसम विभाग ने जारी किया था ऑरेंज अलर्ट
30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसमें कुछ स्थानों पर आंधी, बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की चेतावनी दी गई थी।
चार्टर उड़ानों में अब सह-पायलट अनिवार्य
हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने मौजूदा यात्रा सत्र के शेष समय के लिए चार्टर हेलीकॉप्टर उड़ानों में सह-पायलट को अनिवार्य करने का फैसला किया है।
अब एक पायलट के साथ चार्टर हेलीकॉप्टर संचालन की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया है।
हादसे की असली वजह जांच के बाद होगी साफ
फिलहाल खराब मौसम को शुरुआती संभावित कारणों में माना गया है, लेकिन जांच एजेंसियों ने किसी एक वजह को अंतिम नहीं माना है।
अन्य हेलीकॉप्टरों के सुरक्षित उड़ान भरने, स्थानीय मौसम, विमान की तकनीकी स्थिति और पायलट के उड़ान संबंधी फैसलों समेत सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
स्रोत – जिला प्रशासन चमोली, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, इंडियन एक्सप्रेस
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