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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशांत भूषण के सवाल, बोले—पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अन्य वकीलों के साथ मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और शहर में व्यापक बैरिकेडिंग किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरे शहर की आवाजाही को प्रभावित करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उठा दिल्ली की आवाजाही पर प्रतिबंधों का मुद्दा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मुद्दा उठाया गया। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाओं को प्रभावित करने और व्यापक बैरिकेडिंग को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। प्रशांत भूषण ने पूछा—पूरी दिल्ली को बंद क्यों किया जा रहा है? प्रशांत भूषण ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए लक्षित और सीमित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही प्रभावित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और नागरिकों की सामान्य आवाजाही के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकारियों ने 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध या बंदी की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे प्रतिबंधों से छात्रों, कर्मचारियों, कारोबारियों और रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी थे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर भी उठे सवाल प्रदर्शन से पहले कुछ दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अंतरशहरी परिवहन सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित करने से आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर जताई चिंता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की टिप्पणियों में आवाजाही पूरी तरह रोकने और उसे नियंत्रित करने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों को ऐसा समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम जनता को कम से कम असुविधा हो। सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंधों पर सवाल सुनवाई के दौरान प्रतिबंधों की आनुपातिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी संभावित गड़बड़ी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम परिस्थिति के अनुरूप होने चाहिए। मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित आवाजाही की संभावनाओं पर विचार करने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के मद्देनजर 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली समेत कई इलाकों में 20 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। कुछ रिपोर्टों में तैनाती की संख्या लगभग 23 हजार से 25 हजार तक बताई गई। प्रशासन का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना था। सैकड़ों बसें और बॉडी कैमरे भी सुरक्षा योजना में शामिल रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने संभावित हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की थी। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल की योजना भी सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा थी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तैनाती की गई। प्रशांत भूषण पहले भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे 3 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशांत भूषण भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था इस मामले में प्रमुख सवाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। एक ओर प्रशासन को संभावित गड़बड़ी रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी होता है। व्यापक प्रतिबंधों के बजाय नियंत्रित आवाजाही पर जोर सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों ने इस बहस को केंद्र में ला दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान आवश्यक सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित किए बिना कैसे किया जा सकता है। प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में देखा गया। नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों ने नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशांत भूषण का मुख्य सवाल यही रहा कि किसी निर्धारित स्थान पर होने वाले प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही को किस हद तक प्रभावित किया जाना चाहिए। इस मामले ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ उनके दायरे और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। स्रोत: The Indian Express / Supreme Court proceedings /…

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BRICS Summit से पहले Delhi में करीब 30,000 Security Personnel तैनात, NSG और Anti-Drone Systems भी Active

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026: 18th BRICS Summit से पहले राष्ट्रीय राजधानी Delhi में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। करीब 25,000 security personnel और 4,800 traffic police personnel को summit और VVIP movement के लिए लगाया जा रहा है। इसके साथ 100 से ज्यादा NSG commandos और anti-drone systems भी security grid का हिस्सा हैं। 12–13 सितंबर को Bharat Mandapam में Summit India अपनी BRICS Chairship के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को New Delhi के Bharat Mandapam में 18th BRICS Summit की मेजबानी करेगा। VVIP Routes पर कड़ी सुरक्षा Visiting heads of state और delegations के movement को देखते हुए airport, diplomatic enclave, summit venue और प्रमुख hotels के आसपास multi-layer security लगाई गई है। Delhi Traffic Police ने 35 से ज्यादा महत्वपूर्ण routes पर restrictions और diversions की तैयारी की है। 100 से ज्यादा NSG Commandos तैनात Summit की security में 100 से अधिक NSG commandos, anti-drone systems और specialised security teams को शामिल किया गया है। VIP convoys की monitoring के लिए GPS tracking और sensitive locations पर enhanced surveillance का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। Putin के लिए Special Security Arrangements Russian President Vladimir Putin के 11 सितंबर को India पहुंचने की उम्मीद है। उनके hotel और travel routes पर additional senior police officers तैनात किए गए हैं। Russian security teams भी पहले ही Delhi पहुंच चुकी हैं। Xi Jinping की संभावित यात्रा पर भी नजर Chinese President Xi Jinping के भी summit में शामिल होने की व्यापक उम्मीद है और Delhi Police Special Cell उनकी संभावित यात्रा के लिए security arrangements संभाल रही है। हालांकि Reuters के मुताबिक Beijing ने 10 सितंबर तक Xi की यात्रा की औपचारिक पुष्टि नहीं की थी। Hotels के Staff का Background Verification जिन hotels में international leaders और delegations रुकेंगे, वहां कर्मचारियों का detailed background verification किया गया है। Security personnel hotels के ground floor से rooftops तक तैनात किए गए हैं, जबकि sensitive zones में surveillance बढ़ा दी गई है। Anti-Drone और AI Surveillance भी इस्तेमाल Possible aerial threats को देखते हुए anti-drone technology लगाई जा रही है। Reports के मुताबिक AI-enabled cameras और facial recognition systems का भी इस्तेमाल security monitoring के लिए किया जाएगा। Delhi में आने वाले दो दिनों में international delegations और heads of state के arrival के साथ VVIP movement बढ़ने की संभावना है, इसलिए traffic restrictions और security checks भी बढ़ सकते हैं। source – The Indian Express / PIB / Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रदर्शनों के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील इलाकों, प्रमुख सरकारी भवनों, प्रदर्शन स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग बढ़ाई है और आवश्यकतानुसार यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक ट्रैफिक और सुरक्षा सलाह का पालन करें। कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई दिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से— अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। कई स्थानों पर पुलिस की नियमित गश्त भी बढ़ा दी गई है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग कर रही है। कई संवेदनशील क्षेत्रों में— जैसे उपाय लागू किए गए हैं। यातायात पर भी असर सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर वैकल्पिक मार्गों की जानकारी जारी कर रही है। यात्रियों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। पुलिस की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष या हेल्पलाइन पर देने को कहा गया है। स्थिति पर लगातार नजर अधिकारियों के अनुसार राजधानी में स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बल भी तैनात किया जा सकता है। निष्कर्ष दिल्ली में प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल, आधुनिक निगरानी व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के जरिए राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। Source: Delhi Police | Ministry of Home Affairs (MHA) | PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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