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‘1947 में हम अमेरिका के बराबर थे, फिर गड़बड़ी कहां हुई?’ दावे पर बहस; आंकड़ों में क्या है सच्चाई

नई दिल्ली: भारत की आजादी के समय आर्थिक स्थिति की तुलना अमेरिका से करने वाला दावा एक बार फिर चर्चा में है। “1947 में हम अमेरिका के बराबर थे, फिर गड़बड़ी कहां हुई?” जैसे दावे सोशल मीडिया और राजनीतिक-आर्थिक बहसों में सामने आते रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि स्वतंत्रता के समय भारत और अमेरिका आर्थिक रूप से बराबर स्थिति में नहीं थे। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले से थी कहीं बड़ी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका दुनिया की सबसे मजबूत औद्योगिक और वित्तीय शक्तियों में शामिल था। इसके विपरीत भारत 1947 में औपनिवेशिक शासन से बाहर आया था और देश के सामने गरीबी, कम औद्योगिक उत्पादन, सीमित बिजली व्यवस्था, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं और कम साक्षरता जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। प्रति व्यक्ति आय में भी था बड़ा अंतर भारत और अमेरिका के बीच अंतर केवल कुल अर्थव्यवस्था का नहीं था। प्रति व्यक्ति आय और उत्पादकता के मामले में भी अमेरिका भारत से काफी आगे था। इसलिए दोनों देशों को 1947 में आर्थिक रूप से बराबर बताना ऐतिहासिक आंकड़ों का सरलीकरण माना जाएगा। रुपये और डॉलर की बराबरी का दावा भी विवादित सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि 1947 में एक रुपया और एक डॉलर बराबर थे। लेकिन ऐतिहासिक विनिमय दर से जुड़े उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि ऐसा सीधा 1:1 संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता। उस समय भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ी मौद्रिक व्यवस्था के तहत चलता था। फिर भारत पीछे क्यों दिखाई दिया? आजादी के बाद भारत ने नियोजित अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक क्षेत्र और आयात नियंत्रण आधारित मॉडल अपनाया। इस मॉडल के समर्थकों का कहना है कि इससे औद्योगिक आधार और सार्वजनिक संस्थान खड़े करने में मदद मिली, जबकि आलोचकों का तर्क है कि लाइसेंस-परमिट व्यवस्था, सीमित प्रतिस्पर्धा और धीमे सुधारों ने कई दशकों तक आर्थिक वृद्धि को सीमित किया। 1991 के बाद बदली आर्थिक दिशा 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत ने उदारीकरण, निजी निवेश और वैश्विक व्यापार के लिए अर्थव्यवस्था को ज्यादा खोला। इसके बाद सेवा क्षेत्र, IT, विनिर्माण, विदेशी निवेश और निर्यात में तेजी आई और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ। सवाल तुलना का नहीं, विकास की गति का विशेषज्ञों के अनुसार असली सवाल यह नहीं है कि भारत 1947 में अमेरिका के बराबर था या नहीं, बल्कि यह है कि अलग-अलग दशकों में भारत की विकास दर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और उत्पादकता कैसे बदली। भारत ने स्वतंत्रता के बाद बुनियादी ढांचे, कृषि, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास के कई संकेतकों में अभी भी विकसित अर्थव्यवस्थाओं से अंतर बना हुआ है। ऐतिहासिक तुलना में संदर्भ जरूरी 1947 के भारत की तुलना आज के भारत या तत्कालीन अमेरिका से करते समय जनसंख्या, युद्धोत्तर आर्थिक संरचना, औपनिवेशिक विरासत और अलग-अलग विकास मॉडल को ध्यान में रखना जरूरी है। बिना इन संदर्भों के “भारत अमेरिका के बराबर था” जैसा दावा अधूरा और भ्रामक तस्वीर पेश कर सकता है। source – भारत सरकार के संसदीय रिकॉर्ड / ऐतिहासिक आर्थिक आंकड़े / World Bank संदर्भ जय राष्ट्र न्यूज़

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