प्रमुख खबरें

INDIA गठबंधन का Election Commission तक मार्च, राहुल गांधी-अखिलेश समेत कई बड़े नेता शामिल; पुलिस ने रास्ते में रोका

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को और तेज हो गया। INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने संसद से Election Commission headquarters की ओर मार्च निकाला। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए, लेकिन भारी सुरक्षा और barricading के बीच पुलिस ने मार्च को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले ही रोक दिया। संसद से शुरू हुआ विपक्ष का मार्च INDIA bloc के सांसदों को सुबह Parliament House के Makar Dwar के पास जुटने के लिए कहा गया था। इसके बाद विपक्षी सांसद Election Commission headquarters की ओर बढ़े। मार्च का मुख्य मुद्दा electoral rolls की Special Intensive Revision प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोप थे। राहुल गांधी ने मांगा CEC का इस्तीफा मार्च के दौरान Leader of Opposition राहुल गांधी ने Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने एक placard भी दिखाया जिस पर लिखा था, “Gyanesh, it’s done bro, time to resign.” यह नारा प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी INDIA bloc के मार्च में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि voter-list revision की प्रक्रिया में transparency और impartiality को लेकर गंभीर सवाल हैं और Election Commission को इन पर जवाब देना चाहिए। खरगे बोले- लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई Congress अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य democratic principles और voters के अधिकारों की रक्षा करना है। पुलिस ने Election Commission पहुंचने से पहले रोका Opposition march Election Commission headquarters तक नहीं पहुंच सका। पुलिस ने barricades लगाकर नेताओं और सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं बैठकर विरोध दर्ज कराया। करीब 4,000 सुरक्षाकर्मी तैनात मार्च को देखते हुए Central Delhi में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। Delhi Police और Central Armed Police Forces के करीब 4,000 personnel को New Delhi district में तैनात किया गया। Connaught Place, Patel Chowk, Parliament Street और Election Commission के आसपास traffic restrictions भी लगाई गईं। SIR विवाद है प्रदर्शन की बड़ी वजह Opposition parties Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि voter lists में बदलाव की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission और BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ा राजनीतिक दबाव पिछले कई दिनों से Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। Student groups, activists और political parties अलग-अलग जगहों पर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। Delhi में विरोध का यह पांचवां दिन था। BJP ने विपक्ष पर लगाया राजनीति करने का आरोप BJP ने Congress और INDIA bloc के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष Election Commission जैसी constitutional institution को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। BJP spokesperson Sambit Patra ने Congress पर Form 6 और electoral process को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का आंदोलन आगे भी रहेगा जारी Congress ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। 8 अक्टूबर तक district-level padyatras, 10 से 20 अक्टूबर तक block-level meetings और इसके बाद state-level rallies आयोजित करने की योजना बनाई गई है। SIR को लेकर राष्ट्रपति से भी मुलाकात INDIA bloc नेताओं का एक delegation राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करने वाला है। विपक्ष SIR और Election Commission की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति के सामने रखने की तैयारी में है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कथित कोशिश, BJP BLA के खिलाफ FIR; कोर्ट ने search warrant भी जारी किया

बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम electoral roll से हटवाने की कथित कोशिश को लेकर BJP के Booth Level Agent (BLA) और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला BJP corporator और BLA-1 T. Srinivas Mothkur से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम में बल्लारी की एक अदालत ने पुलिस को उनके दफ्तर की तलाशी के लिए search warrant भी जारी किया है। 1 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR Brucepet Police Station में यह FIR 1 अक्टूबर को Congress BLA Goutham S की शिकायत पर दर्ज की गई थी। FIR में T. Srinivas Mothkur के अलावा Ballari City Corporation के Assistant Commissioner Nandish, BLO Sumalatha और case worker Sharanabasava के नाम भी शामिल हैं। 7,561 वोटरों की re-verification की मांग मामले की शुरुआत 21 सितंबर को हुई, जब Srinivas ने Ballari City Assembly constituency के 7,561 मतदाताओं की दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इनमें कुछ मतदाता क्षेत्र छोड़ चुके हैं, अनुपस्थित हैं या दूसरे स्थान पर भी registered हैं। अधिकारियों ने पहले खारिज किया था अनुरोध चुनाव अधिकारियों ने शुरुआती request को पर्याप्त दस्तावेज या supporting information न होने के कारण स्वीकार नहीं किया। इसके बाद Srinivas ने इन मतदाताओं के खिलाफ Form 7 objections दाखिल करने की कोशिश की। Form 7 का इस्तेमाल electoral roll में किसी नाम के inclusion पर objection या deletion की मांग के लिए किया जाता है। Bulk Form 7 submissions पर सवाल Election authorities ने Srinivas को बताया था कि BLA एक दिन में एक BLO के पास सीमित संख्या में applications दे सकता है। अगर claims-and-objections period में किसी BLA की applications 30 से अधिक होती हैं, तो ERO या Assistant ERO द्वारा व्यक्तिगत cross-verification जरूरी हो जाता है। शिकायत में 98.08% minority voters का दावा Congress BLA की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिन 7,561 voters को target किया गया, उनमें लगभग 98.08% minority communities से थे। यह शिकायतकर्ता का आरोप है और पुलिस जांच में इसकी सत्यता की जांच की जानी है। चुनाव अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप शिकायत में आरोप है कि कुछ election officials ने पहले objection reject होने के बावजूद बाद में इन voters की re-verification शुरू की। इसी आधार पर election officials को भी FIR में आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने BJP BLA के दफ्तर की तलाशी की अनुमति दी मामले में अब एक नया development सामने आया है। Ballari court ने पुलिस को Srinivas Mothkur के Talur Road स्थित office की तलाशी लेने की अनुमति दी है। जांच टीम Form 7 applications की तैयारी और submission से जुड़े records और अन्य material की जांच करना चाहती है। Karnataka CEO ने bulk deletion complaints पर जांच का भरोसा दिया Karnataka के Chief Electoral Officer V. Anbukumar ने bulk Form 7 applications से जुड़ी शिकायतों की जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा दिया है। राज्य के दूसरे हिस्सों से भी कथित mass voter-deletion applications की शिकायतें सामने आई हैं। BJP ने FIRs पर उठाए सवाल BJP और JD(S) नेताओं ने इन FIRs का विरोध किया है। उनका कहना है कि genuine Form 7 objections दाखिल करने वाले party workers को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। BJP ने यह भी तर्क दिया है कि bulk objections दाखिल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। Congress ने लगाया voter suppression का आरोप दूसरी ओर Congress नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान eligible voters, विशेषकर minorities, के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। इन आरोपों को BJP ने खारिज किया है और कहा है कि voter list verification का उद्देश्य केवल गलत, duplicate या ineligible entries की पहचान करना है। जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविकता फिलहाल 7,561 voters के नाम वास्तव में हटाए गए थे, इसका दावा स्थापित नहीं हुआ है। मामला कथित deletion attempt और Form 7 submissions से जुड़ा है। पुलिस जांच, electoral records और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। source – The News Minute / Hindustan Times / The Indian Express / IANS / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ MNS और शिवसेना (UBT) का प्रदर्शन, चुनाव आयोग और SIR को लेकर जताई नाराजगी

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) ने मुंबई में संयुक्त प्रदर्शन किया। इस ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने किया। प्रदर्शन में हजारों लोग तिरंगा लेकर शामिल हुए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ सड़क पर उतरना रहा। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मार्च का नेतृत्व किया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। यह दोनों ठाकरे गुटों की हाल के समय में महत्वपूर्ण संयुक्त राजनीतिक कार्रवाई मानी जा रही है। SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग MNS और शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी दलों का आरोप है कि voter-list revision में पारदर्शिता की कमी है और बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा रहा। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा विवादों के बीच CEC को पद छोड़ना चाहिए। चुनाव आयोग ने विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। पार्टी झंडों की जगह तिरंगा इस मार्च की एक खास बात यह रही कि कार्यकर्ताओं से पार्टी के झंडे और प्रतीक नहीं लाने को कहा गया। प्रदर्शन में तिरंगा प्रमुख रूप से दिखाई दिया। आयोजकों ने इसे किसी एक पार्टी के बजाय चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकार से जुड़ा आंदोलन बताने की कोशिश की। हजारों प्रदर्शनकारी हुए शामिल रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और दक्षिण मुंबई की सड़कों पर मार्च किया। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार हजारों प्रदर्शनकारी तिरंगा और चुनाव आयोग के खिलाफ लिखे placards लेकर BMC मुख्यालय तक पहुंचे। Paper Ballot की मांग भी उठी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने EVM के बजाय ballot paper से चुनाव कराने की मांग भी उठाई। विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ा, जबकि चुनाव आयोग लंबे समय से EVM की सुरक्षा और विश्वसनीयता का बचाव करता रहा है। कांग्रेस और NCP (SP) के नेता भी पहुंचे प्रदर्शन में केवल MNS और शिवसेना (UBT) ही नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे के अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के प्रतिनिधियों ने भी मोर्चे में हिस्सा लिया। CJP ने भी किया समर्थन Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी MNS-शिवसेना (UBT) के प्रदर्शन का समर्थन किया। CJP founder अभिजीत दीपके ने लोगों से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। BJP ने विपक्ष पर किया पलटवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे बंधुओं के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक निराशा से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यह BJP का राजनीतिक पक्ष है। SIR विवाद पर देशभर में बढ़ रहा विरोध ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विरोध केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। दिल्ली समेत कई शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं और विपक्षी दल 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर संयुक्त विरोध की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक टकराव तेज एक ओर विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता, SIR और voter-list revision पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए revision को मतदाता सूची साफ करने की प्रक्रिया बताता है। इस विवाद के चलते आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

केरल | मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी 20 साल पुरानी जांच फिर चर्चा में, 2006 के मामले में Vigilance probe के आदेश

तिरुवनंतपुरम: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा करीब 20 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केरल सरकार ने 2006 के उस मामले में Vigilance and Anti-Corruption Bureau से जांच कराने का आदेश दिया है, जो उनके केरल के Public Works Department यानी PWD में सचिव रहते हुए सामने आया था। मामला एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की मौत और Kerala State Transport Project से जुड़े कथित भ्रष्टाचार आरोपों से संबंधित है। 2006 का है मामला यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में PWD सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस समय Kerala State Transport Project के तहत MC Road के upgradation का काम चल रहा था और एक Indo-Malaysian consortium PATI-BEL इस project से जुड़ा हुआ था। मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा केस मामला मलेशियाई civil engineer Lee See Been की मौत से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार वह project के chief project manager थे और बाद में उनकी मौत suicide के रूप में दर्ज की गई। कथित suicide note में कुछ अधिकारियों और project से जुड़े विवादों का उल्लेख होने की बात सामने आई थी। कथित suicide note में ज्ञानेश कुमार का नाम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार Lee See Been द्वारा छोड़े गए कथित suicide note में उस समय PWD Secretary रहे ज्ञानेश कुमार का नाम भी सामने आया था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि नहीं हुई है और नई जांच का उद्देश्य इन्हीं पुराने तथ्यों और पूर्व जांच की प्रक्रिया की समीक्षा करना है। केरल के गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मामले में Vigilance जांच का आदेश दिया है। सरकार यह भी देखना चाहती है कि पिछली जांच निष्पक्ष तरीके से हुई थी या उस पर किसी तरह का बाहरी प्रभाव पड़ा था। ‘यह CEC पद के खिलाफ जांच नहीं’ केरल सरकार के एक मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच मौजूदा Chief Election Commissioner के संवैधानिक पद के खिलाफ नहीं बल्कि ज्ञानेश कुमार के पूर्व PWD Secretary के कार्यकाल से जुड़े आरोपों पर है। इसलिए जांच का दायरा 2006 के administrative decisions और संबंधित project तक सीमित बताया जा रहा है। पुराने भ्रष्टाचार आरोप भी जांच के दायरे में नई Vigilance inquiry में कथित भ्रष्टाचार और criminal misconduct से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी। जांच एजेंसी पुराने documents, project files, statements और पहले हुई जांच के records को दोबारा देख सकती है। उस समय क्या हुआ था? Kerala State Transport Project के तहत सड़क निर्माण और upgradation से जुड़े contractual और financial disputes सामने आए थे। इसी दौरान Lee See Been की मौत हुई और मामले ने राजनीतिक तथा प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया। बाद में जांच हुई, लेकिन अब राज्य सरकार ने लगभग दो दशक बाद इसे फिर से जांचने का फैसला किया है। SIR विवाद के बीच फिर चर्चा में मामला ज्ञानेश कुमार पहले से Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। इसी माहौल में केरल की पुरानी जांच दोबारा खुलने से मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आरोप साबित होना अभी बाकी Vigilance inquiry शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। जांच एजेंसी को अब उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय करना होगा कि मामले में किसी तरह की आपराधिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है या नहीं। आगे क्या होगा? Vigilance and Anti-Corruption Bureau पुराने case records की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। अगर जांच में prima facie criminal misconduct या भ्रष्टाचार के प्रमाण सामने आते हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है। source – The Indian Express / The Economic Times / Times of India / NDTV / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई में CJP का प्रदर्शन, SIR विवाद फिर केंद्र में

मुंबई: Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने मुंबई में Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया है। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित इस प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई, हालांकि मुंबई पुलिस ने कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी। CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा। शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से अपने विरोध अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और आगे गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन किए जाएंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP की मुख्य मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन का आरोप है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। ये आरोप CJP और अन्य प्रदर्शनकारी समूहों के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग का इस पर अलग आधिकारिक रुख रहा है। SIR प्रक्रिया को रोकने की भी मांग CJP ने Special Intensive Revision प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई है। संगठन चाहता है कि पिछली मतदाता सूची को बहाल किया जाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। मुंबई पुलिस ने नहीं दी अनुमति मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी। पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था, ट्रैफिक और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। इसके बावजूद प्रदर्शन की घोषणा के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई। दादर स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ी प्रदर्शन को देखते हुए दादर रेलवे स्टेशन पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। Railway Protection Force और अन्य स्टाफ की संख्या बढ़ाई गई ताकि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके। दिल्ली में भी हुआ विरोध मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। जंतर-मंतर के आसपास भारी सुरक्षा तैनात की गई और पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे कई लोगों को हिरासत में लिया। इससे SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया। विपक्षी दल भी उठा रहे SIR का मुद्दा SIR विवाद केवल CJP तक सीमित नहीं है। INDIA Bloc समेत कई विपक्षी दल और छात्र संगठन भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने अलग-अलग शहरों में विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। दूसरे शहरों में भी आंदोलन की तैयारी CJP ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत कई शहरों में मार्च और प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। संगठन का कहना है कि CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। SIR विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज SIR को लेकर चुनाव आयोग और विरोधी दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपों और कानूनी मांगों की अंतिम स्थिति संबंधित संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं से तय होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / India Today / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

कर्नाटक में voter deletion विवाद पर DK शिवकुमार ने जांच की मांग की, CEO ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे संभावित आपराधिक साजिश बताते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद राज्य के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि झूठी जानकारी या फर्जी declarations के आधार पर दाखिल Form 7 मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाए। Form 7 के कथित बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर सवाल विवाद उन शिकायतों के बाद बढ़ा जिनमें आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में pre-printed Form 7 जमा कर मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की गई। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का संगठित तरीके से दुरुपयोग हुआ। DK शिवकुमार ने criminal probe की मांग की मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित Chief Electoral Officer के कार्यालय पहुंचकर मामले की जांच की मांग की। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों के साथ धरना भी दिया और कहा कि कथित फर्जी Form 7 applications की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप शिवकुमार ने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग बयानों में उन्होंने संभावित रूप से लाखों मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का दावा किया है। ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। CEO ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों को दिया निर्देश कर्नाटक के Chief Electoral Officer वी. अनबुकुमार ने सभी District Election Officers, Electoral Registration Officers और संबंधित municipal commissioners को निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक Form 7 applications पर कार्रवाई से पहले औपचारिक जांच की जाएगी और जानबूझकर झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे बाद खत्म हुआ धरना CEO के आदेश के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रियों ने करीब छह घंटे तक चला धरना समाप्त कर दिया। शिवकुमार ने इसे अपनी मांगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि मामला पूरी तरह सुलझने तक राजनीतिक और कानूनी प्रयास जारी रहेंगे। तीन FIR दर्ज होने की भी जानकारी रिपोर्टों के अनुसार कथित फर्जी voter deletion applications से जुड़े मामलों में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें Mysuru, Bidar और Belagavi से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस और चुनाव अधिकारी submissions की जांच कर रहे हैं। Belagavi में BJP नेता पर भी FIR Belagavi जिले में एक BJP नेता और अन्य लोगों के खिलाफ 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने की खबर है। यह मामला भी Form 7 submissions से जुड़ा है और जांच जारी है। आरोपों की अंतिम सत्यता पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तय होगी। चुनाव आयोग ने false declarations पर सख्ती के संकेत दिए Election authorities ने साफ किया है कि Forms 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में गलत या फर्जी submissions को रोकना बताया गया है। SIR के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव कर्नाटक में यह विवाद Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के बीच सामने आया है। कांग्रेस इसे मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, जबकि आरोपों में जिन राजनीतिक दलों के नाम लिए गए हैं, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच से ही होगी। source – The Indian Express / The New Indian Express / The Times of India / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

INDIA Bloc की बैठक में विपक्षी एकता पर जोर, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत नेताओं ने आगे की रणनीति पर चर्चा की

नई दिल्ली: SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA Bloc के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में बैठक कर विपक्षी एकता और आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और संयुक्त विरोध कार्यक्रमों पर रहा। दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक INDIA Bloc की इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP(SP), शिवसेना (UBT), RJD, JMM और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर एक साझा राजनीतिक रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करना था। राहुल गांधी और ममता बनर्जी रहे प्रमुख चेहरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बैठक के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। दोनों नेताओं ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी चिंतियां सामने रखीं और विपक्षी दलों के संयुक्त अभियान की जरूरत पर जोर दिया। विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। SIR बना बैठक का मुख्य मुद्दा Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। INDIA Bloc के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने pre-SIR electoral rolls बहाल करने और बाहर हुए मतदाताओं के लिए प्रभावी appeal mechanism की मांग भी रखी। Paper Ballot की मांग फिर उठी बैठक में विपक्षी दलों ने EVM की जगह paper ballot से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बैठक में शामिल दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि भारत में EVM की वैधता और उपयोग पर चुनाव आयोग का अलग आधिकारिक रुख रहा है। 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध की रणनीति बैठक के बाद INDIA Bloc ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की। विपक्ष ने अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रदर्शन, जनसभाएं और मार्च आयोजित करने की योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों का केंद्र SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे रहेंगे। चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी INDIA Bloc के सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की भी योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के जरिए विपक्ष अपने सवाल और मांगें सीधे चुनाव आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष की रणनीति आने वाले दिनों में SIR विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखने की है। CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी चर्चा बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की, जबकि इससे पहले उनके खिलाफ संसदीय कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार विपक्ष इस विकल्प को फिलहाल टाल भी सकता है। विपक्षी एकता दिखाने की कोशिश बैठक को INDIA Bloc के लिए राजनीतिक एकता दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं, लेकिन SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर कई दल साझा मंच पर दिखाई दिए। आगे भी जारी रह सकता है संयुक्त अभियान INDIA Bloc ने संकेत दिया है कि उसका अभियान केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले हफ्तों में विपक्ष अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम आयोजित कर सकता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

SIR विवाद पर INDIA गठबंधन का बड़ा ऐलान, 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन; 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे। 2 अक्टूबर से शुरू होगा देशव्यापी अभियान INDIA गठबंधन ने तय किया है कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे और विपक्षी दल SIR प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के हालिया फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां जनता के बीच ले जाएंगे। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च आंदोलन के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक 6 अक्टूबर को दिल्ली में होगा। INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आयोग के सामने उठाएंगे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं। SIR को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल INDIA गठबंधन का आरोप है कि Special Intensive Revision की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है। विपक्ष ने हाल में सामने आई उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। INDIA गठबंधन ने रखीं छह प्रमुख मांगें बैठक के बाद विपक्षी दलों ने छह प्रमुख मांगों और आगे की राजनीतिक रणनीति की घोषणा की। इनमें SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग, चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की योजना भी शामिल है। राष्ट्रपति से मिलने की भी तैयारी INDIA गठबंधन के नेताओं ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगने की बात कही है। विपक्षी नेता चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना बना रहे हैं। राहुल गांधी ने विपक्षी एकता पर दिया जोर बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता मिलकर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने विपक्ष की इस लड़ाई को किसी एक नेता या दल के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। यह विपक्ष का राजनीतिक पक्ष है और इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं तथा सत्तारूढ़ पक्ष की अलग प्रतिक्रिया रही है। ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर साधा निशाना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। BJP ने विपक्ष के अभियान पर किया पलटवार INDIA गठबंधन की घोषणा के बाद BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और आंदोलन को राजनीतिक बताया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के ‘Save Democracy’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए इसे राजनीतिक परिवारों को बचाने की कोशिश बताया। यह BJP का राजनीतिक जवाब है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा आंदोलन बता रहा है। अक्टूबर-नवंबर में बड़ी रैलियों की भी योजना INDIA गठबंधन सिर्फ एक सप्ताह के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष ने अक्टूबर और नवंबर में अलग-अलग स्थानों पर बड़ी रैलियां आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची, SIR और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे कथित ‘vote chori’ के आरोप प्रमुख मुद्दे रहेंगे। SIR विवाद पर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर के चुनाव आयोग मार्च के चलते SIR विवाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष जहां मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं इस मुद्दे पर लगाए गए आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं तथा अदालतों की प्रक्रिया से तय होगी। source – Reuters / India Today / The Statesman / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

AAP के Donations में 68% गिरावट, BJD ने घोषित किया Zero Contribution

नई दिल्ली: राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग को सौंपे गए 2025-26 के contribution reports में फंडिंग को लेकर बड़े बदलाव सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस वित्त वर्ष में करीब ₹12.09 करोड़ का चंदा घोषित किया, जो पिछले वर्ष के ₹38.10 करोड़ की तुलना में करीब 68% कम है। वहीं बीजू जनता दल (BJD) ने ₹20,000 से अधिक की श्रेणी में कोई contribution घोषित नहीं किया। AAP का चंदा ₹38 करोड़ से घटकर ₹12 करोड़ AAP ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब ₹38.10 करोड़ के donations घोषित किए थे। 2025-26 में यह राशि घटकर लगभग ₹12.09 करोड़ रह गई। यानी एक साल के भीतर पार्टी की घोषित contribution receipts में करीब 68% की गिरावट दर्ज हुई। दो Donors से आए ₹10 करोड़ AAP को मिले कुल contributions में सबसे बड़ा हिस्सा Prudent Electoral Trust और Trident Limited का रहा। दोनों ने पार्टी को ₹5-₹5 करोड़ दिए। इस तरह सिर्फ इन दो donors से AAP को कुल ₹10 करोड़ मिले, जो पार्टी की कुल घोषित राशि का बड़ा हिस्सा है। Trident Limited का नाम चर्चा में Trident Limited की स्थापना पंजाब के कारोबारी राजिंदर गुप्ता ने की थी। गुप्ता पहले AAP से राज्यसभा सदस्य रहे और बाद में BJP में शामिल हो गए। Contribution report के मुताबिक Trident Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 में AAP को ₹5 करोड़ का donation दिया। Ashutosh Ranka ने भी दिया Donation रिपोर्ट में CJP के मौजूदा सह-संयोजक आशुतोष रांका का नाम भी donor के रूप में दर्ज है। AAP के पूर्व प्रवक्ता रहे रांका ने पार्टी को ₹21,100 का contribution दिया था। BJD ने क्यों दिखाया Zero Contribution? ओडिशा की बीजू जनता दल ने 2025-26 की contribution report में ₹20,000 से अधिक का कोई donation घोषित नहीं किया। यहां “zero contribution” का अर्थ यह नहीं है कि पार्टी के पास कोई आय या पैसा नहीं था। Contribution report मुख्य रूप से कानून के तहत रिपोर्ट किए जाने वाले राजनीतिक donations से संबंधित होती है। पिछले साल BJD को मिले थे ₹60 करोड़ 2024-25 में BJD ने करीब ₹60 करोड़ के contributions घोषित किए थे। उस वर्ष Vedanta Limited पार्टी का सबसे बड़ा donor था और उसने करीब ₹25 करोड़ का योगदान दिया था। इसके मुकाबले 2025-26 में reportable contributions का nil होना बड़ा बदलाव है। सत्ता से बाहर होने के बाद पहला पूरा वित्त वर्ष BJD ने ओडिशा में करीब 24 साल तक सरकार चलाई थी, लेकिन 2024 विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। 2025-26 सत्ता से बाहर रहने के बाद पार्टी का पहला पूरा वित्त वर्ष था। हालांकि donation में आई गिरावट के कारण को लेकर contribution report स्वयं कोई निष्कर्ष नहीं देती। TDP को मिले ₹58.25 करोड़ अन्य क्षेत्रीय दलों की बात करें तो Telugu Desam Party (TDP) ने 2025-26 में करीब ₹58.25 करोड़ के contributions घोषित किए। इसमें अकेले Prudent Electoral Trust से करीब ₹45 करोड़ मिले। YSRCP ने घोषित किए ₹24.30 करोड़ आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी YSR Congress Party ने करीब ₹24.30 करोड़ के donations घोषित किए। इसमें सबसे बड़ा ₹10 करोड़ का contribution Chennai स्थित Goodwood Sanctuary Pvt Ltd से आया। LJP (Ram Vilas) को मिले ₹3.23 करोड़ चिराग पासवान की Lok Janshakti Party (Ram Vilas) ने करीब ₹3.23 करोड़ के contributions दर्ज किए। इसमें ₹1 करोड़ Prudent Electoral Trust से मिला, जबकि बाकी राशि विभिन्न कंपनियों और अन्य donors से आई। BJP-Congress की Reports अभी सार्वजनिक नहीं चुनाव आयोग ने अभी तक BJP, Congress और कुछ अन्य राष्ट्रीय दलों की 2025-26 contribution reports सार्वजनिक नहीं की थीं। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सभी प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों की funding की सीधी तुलना फिलहाल पूरी तरह संभव नहीं है। Political Funding के आंकड़ों पर बढ़ी चर्चा AAP के donations में 68% गिरावट और BJD के nil contributions ने राजनीतिक फंडिंग को फिर चर्चा में ला दिया है। ये आंकड़े दलों द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए contribution reports पर आधारित हैं और इन्हें पार्टी की कुल संपत्ति, कुल आय या सभी प्रकार की funding के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। source – Election Commission of India / The Indian Express / Times of India / The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर Removal Notice की तैयारी, SIR विवाद पर विपक्ष का विरोध तेज

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया Removal Notice लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव का मसौदा कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और विपक्ष इसे लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में उठाने की योजना बना रहा है। इस मुद्दे पर INDIA bloc के नेताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। संसद में नया Notice लाने की तैयारी विपक्षी दलों की योजना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस देने की है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने पर बातचीत चल रही है। हालांकि अभी संसद में नया नोटिस औपचारिक रूप से स्वीकार या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है। SIR विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision को लेकर बढ़ा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और verification के नियमों को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, AAP, DMK और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की है। आयोग के भीतर आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, Form-6, डेटा प्रबंधन और SIR से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कई औपचारिक आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए जा रहे थे। Election Commission ने मतभेद के दावे को किया खारिज चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा है कि किसी multi-member constitutional body में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक SIR समेत अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्त अंतिम फैसलों का हिस्सा थे। Voter Roll Software की समीक्षा भी शुरू विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े अपने software system की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। आयोग ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा discrepancies वाले मतदाताओं तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच बेहतर करने जैसे कदमों पर काम शुरू किया है। Congress ने देशभर में तेज किए प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने कई राज्यों और जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए CEC को हटाने की मांग की। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा हिरासत की घटनाएं भी सामने आई हैं। BJP और NDA ने किया Election Commission का बचाव BJP और NDA के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के पक्ष में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इसके बाद ही राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। विपक्षी बैठक पर नजर INDIA bloc के नेताओं की बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC को हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग आने वाले दिनों में उनके अभियान का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है। SIR विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष CEC को हटाने की तैयारी कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। फिलहाल नए Removal Notice पर संसद की औपचारिक कार्रवाई सामने आने का इंतजार है। source – The Indian Express / Reuters / India Today / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

आगे और पढ़ें
Translate »