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SIR में हटाए गए voters के लिए Maharashtra ने EC से Form 6 बदलने की मांग, “new voter” declaration पर आपत्ति

मुंबई, 18 अक्टूबर 2026: Maharashtra सरकार ने Election Commission से मांग की है कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान voter list से हटाए गए लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form 6 में खुद को “new voter” घोषित न करना पड़े। राज्य का कहना है कि जो व्यक्ति पहले से registered voter था, उसे technical deletion के बाद फिर से “new elector” मानना उचित नहीं है। Maharashtra ने क्या बदलाव मांगा? राज्य ने EC से Form 6 में ऐसा विकल्प जोड़ने को कहा है जिससे पहले से registered लेकिन SIR में हटाए गए voter यह बता सकें कि वे re-enrolment या restoration के लिए आवेदन कर रहे हैं, न कि पहली बार voter बन रहे हैं। “New voter” declaration पर क्यों आपत्ति? Maharashtra का तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम पहले electoral roll में था और बाद में SIR के दौरान हट गया, तो Form 6 में उसे “new voter” बताना तथ्यात्मक रूप से गलत हो सकता है। इससे affidavit/declaration से जुड़े legal complications भी पैदा हो सकते हैं। SIR के बाद बढ़ी re-enrolment की जरूरत Special Intensive Revision के बाद कई ऐसे voters सामने आए जिनके नाम electoral rolls से हट गए थे और अब उन्हें दोबारा inclusion के लिए application देना पड़ रहा है। इसी background में Form 6 की wording को लेकर सवाल उठे हैं। EC के सामने practical issue Election Commission को अब यह तय करना है कि existing Form 6 format को बदला जाए, अलग category बनाई जाए या deleted voters के लिए अलग restoration mechanism दिया जाए। इससे verification process भी ज्यादा clear हो सकता है। विपक्ष भी उठा रहा है voter deletion का मुद्दा SIR को लेकर opposition parties पहले से ही large-scale voter deletions पर सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि genuine voters को list से बाहर किया जा रहा है, जबकि Election Commission ऐसी राजनीतिक bias वाली शिकायतों को खारिज करता रहा है। आगे क्या? अगर EC Maharashtra का सुझाव मानता है, तो SIR में हटाए गए voters के लिए re-registration आसान हो सकता है और उन्हें गलत तरीके से “first-time voter” declaration नहीं देना पड़ेगा। source – The Indian Express, Election Commission developments जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC और Election Commissioners को मिली immunity पर Supreme Court सख्त, Centre और Election Commission को जारी किया notice

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: Supreme Court ने Chief Election Commissioner (CEC) और Election Commissioners को कानूनी कार्यवाही से मिली व्यापक immunity को चुनौती देने वाली याचिका पर Centre और Election Commission of India (ECI) को notice जारी किया है। मामला Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की Section 16 से जुड़ा है, जो पद पर रहते हुए किए गए आधिकारिक कार्यों को लेकर commissioners को civil और criminal proceedings से protection देता है। ADR ने Section 16 को दी चुनौती यह याचिका Association for Democratic Reforms (ADR) ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि Section 16 CEC और Election Commissioners को जरूरत से ज्यादा व्यापक और लंबे समय तक protection देती है, जिससे accountability प्रभावित हो सकती है। Supreme Court ने Centre और ECI से मांगा जवाब Supreme Court ने याचिका पर सुनवाई करते हुए Union Government और Election Commission से जवाब मांगा है। Court ने इस मामले को पहले से लंबित उन petitions के साथ जोड़ दिया है जिनमें इसी provision की constitutional validity को चुनौती दी गई है। मौजूदा और पूर्व Commissioners पर भी लागू होती है protection याचिका में खास तौर पर उस provision पर आपत्ति जताई गई है जिसके तहत official duty के दौरान किए गए acts को लेकर वर्तमान ही नहीं बल्कि पूर्व CEC और Election Commissioners को भी proceedings से protection मिल सकती है। ADR ने Court से इस legal shield की सीमा की समीक्षा करने की मांग की है। इससे पहले भी Supreme Court पहुंच चुका है immunity का मुद्दा CEC और Election Commissioners की immunity को लेकर Supreme Court पहले भी petitions पर सुनवाई कर चुका है। January 2026 में Lok Prahari की याचिका पर भी Centre और ECI को notice जारी किया गया था, हालांकि Court ने उस समय provision पर interim stay लगाने से इनकार कर दिया था। Election Commission की accountability पर बढ़ी बहस यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब Election Commission की powers, उसके फैसलों और CEC की accountability को लेकर कई कानूनी चुनौतियां Supreme Court में लंबित हैं। नई याचिका के बाद अब Court यह जांचेगा कि constitutional authority को दी गई immunity की सीमा कितनी होनी चाहिए और क्या मौजूदा कानून judicial scrutiny की कसौटी पर खरा उतरता है। source – Supreme Court proceedings, India Today, LiveLaw जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में महारैली, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी समेत INDIA bloc के कई बड़े नेता शामिल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA bloc के नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने बड़ा मार्च निकाला। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े आरोपों की न्यायिक समीक्षा की मांग उठाई। Supreme Court की ओर निकला बड़ा मार्च INDIA bloc के नेताओं और समर्थकों ने मध्य दिल्ली से Supreme Court की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की और आवाजाही को नियंत्रित किया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को अदालत तक पहुंचने से पहले रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर याचिका दाखिल करने की कार्रवाई की। राहुल गांधी ने संभाला मोर्चा कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रदर्शन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा। उन्होंने युवाओं से भी इन विषयों पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। प्रियंका गांधी भी रहीं साथ प्रियंका गांधी वाड्रा भी मार्च में राहुल गांधी के साथ दिखाई दीं। इससे पहले भी वह मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल मार्च में INDIA bloc से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शन में अलग-अलग दलों की भागीदारी ने इसे विपक्ष के साझा राजनीतिक अभियान के रूप में सामने रखा। नेहा बोरा और छात्र संगठनों की मौजूदगी प्रदर्शन में छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हाल के दिनों में CEC और SIR विरोधी आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। दिल्ली में हुए विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान छात्र नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मुख्य मांग—ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा विपक्ष और CJP से जुड़े समूहों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट प्रविष्टियों सहित अपात्र नामों को हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है। 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने को लेकर विवाद Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया। इनमें मृत, दूसरी जगह स्थानांतरित और सत्यापन में नहीं मिल सके मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियां शामिल बताई गईं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने का विकल्प उपलब्ध है। नाम हटाए जाने के आंकड़े और उनके प्रभाव को समझने के लिए संबंधित राज्य, समयावधि और आधिकारिक आंकड़ों का संदर्भ महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए आरोप राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान सरकार पर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और बार-बार हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक विवरण को इनके साथ अलग से देखना जरूरी है। दिल्ली मेट्रो की सेवाओं पर पड़ा असर प्रदर्शन के मद्देनजर मध्य दिल्ली के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को लेकर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड सहित छह स्टेशनों का उल्लेख किया गया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित करना बताया गया। Batman मास्क बने प्रदर्शन का प्रतीक मार्च के दौरान Batman मास्क भी चर्चा में रहे। रिपोर्टों के अनुसार, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मास्क वितरित किए और राहुल गांधी ने भी Batman मास्क के साथ अपनी तस्वीर साझा की। प्रदर्शनकारियों ने इन मास्कों को अपने राजनीतिक संदेश और विरोध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। CJI से मुलाकात नहीं हो सकी विपक्षी नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से अपनी लड़ाई जारी रखेगा। Supreme Court में याचिका दाखिल मार्च के दौरान चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर Supreme Court में याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। विपक्ष न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, याचिका दाखिल होना और अदालत द्वारा आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष देना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कई शहरों में विरोध प्रदर्शनों से बढ़ी राजनीतिक हलचल दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और पुलिस की तैनाती को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। इस मुद्दे ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को बढ़ाया है। आरोपों पर अंतिम फैसला बाकी विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता है और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर जोर देता है। फिलहाल, किसी न्यायिक निष्कर्ष के अभाव में इन आरोपों को आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। स्रोत: Reuters / The Indian Express / Loksatta / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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शत्रुघ्न सिन्हा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले—“चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का पूरा फायदा उठाया गया”

आसनसोल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP ने चुनाव आयोग का “पूरा फायदा” उठाया है और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उसे लाभ मिला। सिन्हा ने कहा कि वह लंबे समय तक BJP में रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। “BJP चुनाव आयोग का पर्याय बन गई” शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP और चुनाव आयोग के बीच अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह वर्षों तक BJP में रहे हैं और इस दौरान पार्टी के नेताओं तथा उनकी कार्यशैली को करीब से समझा है। ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर लगाया आरोप TMC सांसद ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का फायदा उठाया है। हालांकि, सिन्हा ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। 2024 के बाद के चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल सिन्हा ने 2024 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें गैर-कानूनी बताया। यह उनका राजनीतिक दावा है। किसी अदालत द्वारा 2024 के बाद हुए सभी चुनावों को अवैध घोषित किए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के रुख का समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों से सहमति जताई। SIR विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से BJP को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP, कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की खबरें सामने आईं। BJP ने आरोपों को खारिज किया BJP ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान में कहा था कि BJP की मदद “ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी” कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया। BJP का दावा—संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र BJP का कहना है कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी पार्टी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रही हैं। CJP आंदोलन से गरमाया विवाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का यह दावा कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का “पूरा फायदा” उठाया, एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्थापित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने BJP को अनुचित चुनावी लाभ पहुंचाया है। BJP और चुनाव आयोग पक्षपात के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। स्रोत: पत्रिका, नवभारत टाइम्स, रॉयटर्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान हिरासत में, मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

मुंबई | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ उनकी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन और अभिनेत्री जायन मैरी भी अगस्त क्रांति मैदान के बाहर प्रदर्शन में शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में 400 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे थे इमरान खान अभिनेता इमरान खान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। यह प्रदर्शन दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था। पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान इमरान खान समेत कई अन्य लोग भी पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए। लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी भी हिरासत में इमरान खान के साथ लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, जायन मैरी ने बाद में पुलिस वैन के अंदर से एक वीडियो साझा किया, जिसमें हिरासत के दौरान की स्थिति दिखाई गई। मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में मुंबई में विभिन्न स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान से ही करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि हुतात्मा चौक और अन्य स्थानों पर एकत्र हुए समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। तुषार गांधी भी लिए गए हिरासत में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी 10 अक्टूबर को बांद्रा से हिरासत में लिया गया था। वह ‘हम भारत के लोग’ के माध्यम से लोगों से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला मुंबई पुलिस के अनुसार, अगस्त क्रांति मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं माना गया था और वहां प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। CJP और उसके समर्थकों ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और हेरफेर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये आरोप विवादित हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। रिहाई के बाद इमरान खान ने कहा ‘जय हिंद’ रिपोर्टों के अनुसार, कुछ घंटों की हिरासत के बाद इमरान खान, लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को रिहा कर दिया गया। बाहर निकलने के बाद इमरान खान ने मीडिया के सामने संक्षेप में “जय हिंद” कहा और वहां से चले गए। जायन मैरी ने चोट लगने का दावा किया 12 अक्टूबर को जायन मैरी ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें चोटें आईं। यह उनका आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में चोट लगने की परिस्थितियों पर पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं था। फिल्मी हस्तियों ने भी दी प्रतिक्रिया प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार, विजय वर्मा, हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने प्रदर्शन और असहमति जताने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट साझा किए। मुंबई के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई अगस्त क्रांति मैदान के अलावा शिवाजी पार्क समेत कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत जमावड़े को रोकना और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना था। दिल्ली से कई शहरों तक फैला आंदोलन 10 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के अलावा बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शनों और हिरासत की खबरें सामने आईं। हिरासत में लिया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं इमरान खान और अन्य प्रदर्शनकारियों को एहतियाती हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया। किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाना अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन मुंबई में भी तेज, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया

मुंबई: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में चल रहा CJP आंदोलन अब मुंबई में भी तेज हो गया है। शहर में प्रदर्शन के लिए जुटे कई activists और supporters को Mumbai Police ने हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि gathering को निर्धारित permission नहीं मिली थी और law-and-order बनाए रखने के लिए preventive action किया गया। मुंबई में CJP समर्थकों का प्रदर्शन CJP और उससे जुड़े activists ने मुंबई में Election Commission और SIR process के खिलाफ प्रदर्शन करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग उठाई और electoral rolls से जुड़े कथित irregularities पर सवाल किए। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया Protest शुरू होने के दौरान Mumbai Police ने कई लोगों को preventive detention में लिया। Reports के मुताबिक protesters को police vehicles में बैठाकर local police stations ले जाया गया और बाद में प्रक्रिया पूरी होने पर कई लोगों को छोड़ दिया गया। Permission नहीं मिलने का हवाला Mumbai Police का कहना है कि protest को formal permission नहीं दी गई थी। Authorities ने crowd movement, traffic disruption और public order concerns का हवाला देते हुए gathering को रोकने की कार्रवाई की। “लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक” का आरोप दूसरी तरफ CJP supporters ने police action की आलोचना की। उन्होंने कहा कि peaceful protest करना constitutional right है और preventive detentions के जरिए dissent को दबाया जा रहा है। यह protesters का आरोप है। Pune के बाद Mumbai में भी कार्रवाई महाराष्ट्र में CJP protest को लेकर सिर्फ Mumbai में ही नहीं, Pune में भी police action हुआ है। Pune में भी 80 से ज्यादा protesters को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे साफ है कि Maharashtra के कई शहरों में आंदोलन तेज हुआ है। SIR को लेकर क्या है CJP की मांग? CJP का आरोप है कि Special Intensive Revision के दौरान voter lists में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। संगठन SIR को रोकने और CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और revision exercise को electoral rolls को अधिक accurate बनाने की प्रक्रिया बताता है। Delhi से शुरू हुआ आंदोलन कई शहरों तक पहुंचा 10 अक्टूबर को Delhi के Jantar Mantar protest के बाद CJP ने दूसरे शहरों में भी demonstrations जारी रखने की बात कही थी। इसके बाद Mumbai, Pune और अन्य जगहों पर supporters के जुटने और detentions की खबरें सामने आईं। Mumbai Police की अतिरिक्त तैनाती Protest को देखते हुए sensitive locations पर police deployment बढ़ाया गया। Authorities ने किसी भी unauthorized march या बड़ी gathering को रोकने के लिए barricading और monitoring बढ़ाई। आंदोलन और तेज करने का दावा CJP leaders का कहना है कि detentions के बावजूद agitation जारी रहेगा। उनका दावा है कि यह केवल एक शहर या एक दिन का protest नहीं, बल्कि electoral accountability को लेकर nationwide campaign है। आरोप और आधिकारिक पक्ष दोनों अहम Protesters police action को democratic rights पर restriction बता रहे हैं, जबकि authorities इसे public order बनाए रखने के लिए preventive measure बता रही हैं। SIR और Election Commission को लेकर लगाए जा रहे आरोप अभी राजनीतिक और कानूनी विवाद का हिस्सा हैं और इनके अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र जांच या judicial scrutiny से ही तय होंगे। source – The Times of India / Reuters / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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पुणे में भी CJP आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, 80 से 85 प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुणे | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में चल रहे CJP आंदोलन पर पुणे में भी पुलिस ने कार्रवाई की। रविवार को फर्ग्यूसन कॉलेज रोड स्थित कलाकार कट्टा और गुड लक चौक के पास प्रदर्शन के लिए जुटे करीब 80 से 85 कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई की गई। बिना अनुमति जुटे प्रदर्शनकारी CJP ने पुणे में SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। आयोजकों ने डेक्कन पुलिस स्टेशन में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद रविवार शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शनकारी कलाकार कट्टा के आसपास एकत्र होने लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया गया पुणे पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान करीब 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में 85 लोगों का उल्लेख है, जबकि द इंडियन एक्सप्रेस ने लगभग 80 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है। शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाए गए प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस वैन से शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले के अनुसार, आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रदर्शनकारियों को उसी रात करीब 8 बजे रिहा कर दिया गया। लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई पुणे में CJP समर्थकों के खिलाफ यह लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई थी। इससे पहले शनिवार को शानिवारवाड़ा से पुणे कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश के दौरान भी 80 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उस मार्च को भी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जुटे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर लश्कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया। गुड लक चौक के पास कुछ देर तनाव रविवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पास के गुड लक होटल में भी चले गए, जिससे वहां कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल CJP कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक बताया। संगठन से जुड़े हर्षल लोणकर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने के कुछ ही समय बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रिहाई के बाद कुछ समर्थकों ने फर्ग्यूसन कॉलेज के मुख्य द्वार तक मार्च किया। पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई बताया पुणे पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोगों के एकत्र होने और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के चलते कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच मतभेद सामने आए हैं। CEC के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग पुणे में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग उठाई। आंदोलन से जुड़े समूहों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। मुंबई और पुणे में भी प्रदर्शन CEC और SIR के विरोध में महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे समेत विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं के बीच आंदोलन का दायरा दिल्ली से बाहर भी चर्चा में आया है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और हिरासत की घटनाओं के बाद विभिन्न शहरों में आंदोलन जारी रहने से चुनावी सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हुई है। स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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चुनावी खर्च का खुलासा: 5 राज्यों में कांग्रेस ने खर्च किए ₹136.94 करोड़, उम्मीदवारों पर गया सबसे ज्यादा पैसा

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनावी खर्च को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग (Election Commission of India) को सौंपी गई खर्च संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित खर्च पर गया, जबकि स्टार प्रचारकों की यात्राओं और मीडिया विज्ञापनों पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पांच राज्यों में ₹136.94 करोड़ का कुल खर्च चुनाव आयोग को सौंपे गए व्यय विवरण के अनुसार, कांग्रेस ने पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के दौरान कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इसमें पार्टी के केंद्रीय संगठन और उम्मीदवारों से संबंधित विभिन्न चुनावी मदों का खर्च शामिल है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पार्टी ने अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर लगाया। उम्मीदवारों पर खर्च हुए ₹96.42 करोड़ कांग्रेस के कुल चुनावी खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित मद का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में पार्टी ने ₹96.42 करोड़ खर्च किए। इसमें से करीब ₹95.29 करोड़ उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान के रूप में दिए गए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की जरूरतों और उनके प्रचार से जुड़े खर्चों के लिए पार्टी ने बड़ी राशि आवंटित की। सामान्य प्रचार पर ₹40.51 करोड़ खर्च पार्टी ने सामान्य चुनाव प्रचार पर करीब ₹40.51 करोड़ खर्च किए। इस श्रेणी में विज्ञापन, स्टार प्रचारकों की यात्राओं और अन्य प्रचार गतिविधियों से संबंधित खर्च शामिल थे। चुनाव के दौरान मतदाताओं तक पहुंचने और पार्टी का संदेश प्रसारित करने के लिए इन गतिविधियों पर संसाधन लगाए गए। स्टार प्रचारकों की यात्राओं पर ₹21.78 करोड़ कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की यात्रा पर लगभग ₹21.78 करोड़ खर्च किए। चुनावी सभाओं, जनसंपर्क कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों में पार्टी के प्रमुख नेताओं की भागीदारी के लिए यात्रा खर्च एक महत्वपूर्ण मद रहा। मीडिया विज्ञापनों पर करीब ₹11.95 करोड़ मीडिया प्रचार पर भी पार्टी ने बड़ी राशि खर्च की। रिपोर्ट के अनुसार, अखबारों, टेलीविजन, डिजिटल माध्यमों और अन्य विज्ञापन गतिविधियों से जुड़े खर्च पर करीब ₹11.95 करोड़ लगाए गए। मीडिया विज्ञापन चुनावी अभियान के दौरान पार्टी की नीतियों, उम्मीदवारों और राजनीतिक संदेशों को मतदाताओं तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम रहे। रैलियों और जनसभाओं पर ₹1.23 करोड़ रिपोर्ट में सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और रैलियों पर करीब ₹1.23 करोड़ खर्च दर्ज किया गया। यह राशि पार्टी के अन्य प्रमुख प्रचार खर्चों की तुलना में कम रही। हालांकि, चुनावी गतिविधियों के अलग-अलग मदों में खर्च का वर्गीकरण पार्टी की ओर से दाखिल विवरण पर आधारित है। वर्चुअल प्रचार पर भी खर्च कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए वर्चुअल प्रचार गतिविधियों पर भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में करीब ₹1.13 करोड़ का खर्च दर्ज किया गया। डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रचार करना भी चुनावी अभियानों का हिस्सा रहा। राज्य इकाइयों को हस्तांतरित किए गए ₹83.2 करोड़ रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के केंद्रीय संगठन ने विभिन्न राज्य इकाइयों को कुल ₹83.2 करोड़ हस्तांतरित किए। यह राशि चुनाव संबंधी गतिविधियों और संगठनात्मक जरूरतों के लिए दी गई थी। राज्य इकाइयों के खर्च में चुनावी क्षेत्र की परिस्थितियों, उम्मीदवारों की जरूरतों और स्थानीय प्रचार गतिविधियों के अनुसार अंतर दिखाई दिया। केरल कांग्रेस इकाई का खर्च सबसे ज्यादा राज्य इकाइयों के खर्च के आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित राज्य इकाइयों का कुल खर्च ₹102.48 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें केरल कांग्रेस इकाई ने करीब ₹59.28 करोड़ खर्च किए। यह पांच राज्यों और पुडुचेरी के चुनावी अभियानों में केरल इकाई के खर्च का बड़ा हिस्सा होने को दर्शाता है। असम, तमिलनाडु, बंगाल और पुडुचेरी का खर्च रिपोर्ट में अन्य राज्य इकाइयों के खर्च का विवरण भी दिया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस इकाइयों का चुनावी खर्च अलग-अलग रहा। चुनावी चक्र के अंत में ₹85.48 करोड़ का बैलेंस रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित चुनावी चक्र के अंत में कांग्रेस के पास करीब ₹85.48 करोड़ का बैलेंस बचा था। यह आंकड़ा पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को प्रस्तुत किए गए व्यय विवरण में दर्ज किया गया था। BJP के खर्च से तुलना उस समय संभव नहीं थी रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भाजपा का तुलनीय चुनावी व्यय विवरण उपलब्ध नहीं था। इसलिए उस समय दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खर्च की सीधी तुलना करना संभव नहीं था। किसी भी तुलना के लिए दोनों दलों के समान अवधि, समान चुनावों और समान खर्च श्रेणियों के आंकड़ों का उपलब्ध होना जरूरी है। चुनावी खर्च में पारदर्शिता क्यों जरूरी? राजनीतिक दलों को चुनाव के बाद निर्धारित नियमों के तहत अपने चुनावी खर्च का विवरण चुनाव आयोग को देना होता है। ऐसे विवरणों से यह समझने में मदद मिलती है कि पार्टियां उम्मीदवारों, विज्ञापनों, नेताओं की यात्राओं और संगठनात्मक गतिविधियों पर अपने संसाधन किस तरह खर्च करती हैं। कांग्रेस के ₹136.94 करोड़ के खर्च का यह विवरण चुनावी अभियानों में उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर होने वाले खर्च की तस्वीर पेश करता है। अन्य दलों के तुलनीय आंकड़े उपलब्ध होने पर चुनावी खर्च के विभिन्न पहलुओं का बेहतर आकलन किया जा सकता है। स्रोत: The Indian Express / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP के मंच पर पहुंचे ध्रुव राठी, बोले—“यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई”; SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

बेंगलुरु: YouTuber ध्रुव राठी ने 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के Freedom Park में आयोजित CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। ध्रुव राठी ने मंच से कहा कि वह किसी सरकार को बदलने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने के लिए आए हैं। Freedom Park में हुआ बड़ा प्रदर्शन CJP ने बेंगलुरु के Freedom Park में “People’s Tribunal” और प्रतीकात्मक “चप्पल प्रदर्शन” आयोजित किया। इसमें ध्रुव राठी के साथ अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और सौरव दास समेत कई लोग शामिल हुए। “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” ध्रुव राठी ने प्रदर्शन से पहले भी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया और बेंगलुरु के साथ-साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में भी लोगों से पहुंचने की अपील की थी। “Regime change के लिए नहीं आया” CJP के मंच से ध्रुव राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार बदलना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने आए हैं। Election Commission पर उठाए सवाल ध्रुव राठी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं। वहीं, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बताता रहा है। SIR से कथित रूप से प्रभावित लोगों ने रखी बात People’s Tribunal में ऐसे लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए। आयोजकों ने इन बयानों के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों को सामने रखने की कोशिश की। प्रकाश राज भी पहुंचे मंच पर अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने SIR को समाप्त करने और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग का समर्थन किया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP और प्रदर्शन में शामिल अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान “SIR रद्द करो” और “ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो” जैसे नारे भी लगाए गए। अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी से न डरने को कहा CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से कहा कि वे 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी से न डरें। उन्होंने आंदोलन को मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ा। 10 अक्टूबर के Delhi protest की तैयारी बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। CJP और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने लोगों से दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन को मिला नया चेहरा ध्रुव राठी और प्रकाश राज की मौजूदगी से CJP के प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। सोशल मीडिया पर दोनों की भागीदारी और प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी तेजी से प्रसारित हुए। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कथित भूमिका को लेकर प्रदर्शनकारी कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड, आधिकारिक जांच और न्यायिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकता है। Source – The Indian Express, India Today, The Times of India, Jansatta, Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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