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आज की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाए! दिल्ली में समर्थन में उतरे संगठन

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग उठी है। दिल्ली में अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े संगठनों के साथ ग्लोबल वैश्य फेडरेशन, यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और अन्य संगठनों ने प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के कामकाज का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देकर उन्हें भारत रत्न देने की मांग की। दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन 27 सितंबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया गया। एक कार्यक्रम मंदिर मार्ग स्थित हिंदू महासभा भवन के सामने हुआ, जबकि जंतर-मंतर पर भी अग्रवाल और वैश्य समाज से जुड़े लोगों ने तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का विरोध किया। भारत रत्न देने की रखी मांग प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन देने की बात भी सामने आई है। संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR में ज्ञानेश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और इसी आधार पर वे उनके सम्मान की मांग कर रहे हैं। जय भगवान गोयल ने की CEC की तारीफ प्रदर्शन में शामिल जय भगवान गोयल ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। गोयल ने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित रूप से अयोग्य नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे महत्वपूर्ण काम बताया। हालांकि मतदाता सूची से बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिकों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने संबंधी उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं की गई है। विपक्ष पर भी साधा निशाना प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी नारे लगाए। संगठनों का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बना रहा है। यह प्रदर्शनकारी संगठनों का राजनीतिक आरोप है। अप्रैल में हिमंत बिस्वा सरमा भी कर चुके हैं ऐसी मांग यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग उठी है। अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कहा था कि SIR में योगदान के लिए ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उनका बयान राजनीतिक प्रचार के दौरान दिया गया था। दूसरी ओर CEC के खिलाफ भी जारी है विरोध ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग ऐसे समय उठी है जब दूसरी ओर विपक्षी दल और कुछ नागरिक संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक विवाद बढ़ा है। ज्ञानेश कुमार के समर्थन और विरोध में अलग-अलग प्रदर्शन भी हुए हैं। इसलिए भारत रत्न की मौजूदा मांग को भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। मांग से तेज हुई नई राजनीतिक बहस एक तरफ ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने वाले समूह प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थक अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग लेकर सामने आए हैं। फिलहाल यह कुछ संगठनों और राजनीतिक समर्थकों की मांग है। भारत रत्न देने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से ज्ञानेश कुमार के नाम पर किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। source – Dainik Jagran / Navbharat Times / ABP News / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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शिवाजी पार्क में CJP के 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं, अभिजीत दीपके ने किया ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिली है। मुंबई पुलिस ने कहा कि मौजूदा अदालती आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत वह शिवाजी पार्क में इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए अधिकृत नहीं है। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े सुधारों की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित करना चाहती थी। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में होना था प्रदर्शन CJP ने गांधी जयंती के दिन मुंबई से अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की योजना शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अपनी मांगें उठाने की थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के लिए आवेदन 26 सितंबर को कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे की ओर से जमा किया गया था। इसके बाद शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ने आयोजकों को लिखित जवाब भेजा। पुलिस ने 2013 के हाई कोर्ट आदेश का दिया हवाला मुंबई पुलिस ने अपनी प्रतिक्रिया में 4 जनवरी 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। पुलिस का कहना है कि शिवाजी पार्क का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है और वहां सार्वजनिक कार्यक्रमों पर सीमाएं लागू हैं। आयोजकों ने मैदान के इस्तेमाल के लिए आवश्यक BMC अनुमति भी जमा नहीं की थी। ट्रैफिक और ‘साइलेंस जोन’ भी बना वजह पुलिस ने कहा कि शिवाजी पार्क एक आवासीय क्षेत्र और silence zone के अंतर्गत आता है। बड़े प्रदर्शन से ध्वनि प्रदूषण और यातायात जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने यह भी कहा कि भीड़ और ट्रैफिक के कारण आसपास के अस्पतालों तक मरीजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। आयोजकों को मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। अभिजीत दीपके ने जताई नाराजगी CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं दिया जाता है तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। यह CJP का राजनीतिक आरोप और घोषित विरोध कार्यक्रम है। ‘2 अक्टूबर को आंदोलन होकर रहेगा’ अनुमति नहीं मिलने के बाद भी CJP ने प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस लेने की घोषणा नहीं की है। दीपके ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कार्यकर्ता गिरफ्तारी देंगे। 28 सितंबर को उन्होंने दोबारा पोस्ट कर “Jail Bharo Andolan in Mumbai, October 2, Shivaji Park” का ऐलान किया। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा संगठन ने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से जुड़ी पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग भी रखी है। CJP ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में संस्थागत सुधार की भी मांग की है। ये संगठन की राजनीतिक मांगें हैं। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद इस पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न प्रक्रियात्मक मुद्दों पर कई बार लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और प्रमुख SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। अब 2 अक्टूबर पर नजर मुंबई पुलिस ने आयोजकों को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी है, जबकि CJP ने शिवाजी पार्क से ही जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2 अक्टूबर को CJP अपने घोषित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ती है या प्रशासन और आयोजकों के बीच किसी वैकल्पिक स्थल पर सहमति बनती है। फिलहाल शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति उपलब्ध नहीं है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Mumbai Police जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बोले- ‘पक्षपात से BJP को मिला अनुचित फायदा’

मुजफ्फरपुर: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” से भारतीय जनता पार्टी को चुनावों में अनुचित लाभ मिला है। किशोर ने चुनावी खर्च, प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए। ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। SIR विवाद के बीच आया प्रशांत किशोर का बयान प्रशांत किशोर ने 25 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग पर ये आरोप लगाए। उनसे हाल में सामने आई उस रिपोर्ट को लेकर सवाल किया गया था, जिसमें Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का दावा किया गया था। ‘2021 में ही उठाया था आयोग की निष्पक्षता का सवाल’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर पहली बार सवाल अब नहीं उठाया है। उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय भी BJP को चुनाव आयोग के कथित पक्षपात का फायदा मिला था। किशोर उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो पश्चिम बंगाल में BJP का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह किशोर का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी आधिकारिक जांच ने स्थापित नहीं किया है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण किशोर ने हाल के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उदाहरण भी दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और BJP द्वारा बड़े पैमाने पर चुनावी खर्च की अनदेखी की गई। किशोर ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां न होतीं तो उनकी जीत का अंतर और बड़ा होता। इससे पहले उन्होंने पटना के SSP की कथित “पक्षपातपूर्ण भूमिका” को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत भी दर्ज कराई थी। पैसे, नौकरशाही और वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव में धन के इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों की भूमिका और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबलों में आयोग का कथित पक्षपात परिणाम पर असर डाल सकता है। इन आरोपों को चुनाव आयोग या किसी अदालत ने प्रमाणित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग में कथित समस्याएं केवल मौजूदा CEC के कार्यकाल से शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों और पद छोड़ने के बाद मिली जिम्मेदारियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ quid pro quo का उनका आरोप प्रमाणित तथ्य नहीं है। चुनाव आयोग में कथित मतभेद की रिपोर्ट क्या है? The Indian Express की जांच में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR समेत विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर कई लिखित टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों और कुछ NDA सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी? चुनाव आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, सुझाव और लिखित टिप्पणियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR से संबंधित अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से थे। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पूछ चुका है सवाल दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को “logical discrepancy” से जुड़े नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कुछ नोटिसों के लगभग “mechanical” तरीके से जारी होने पर चिंता जताते हुए आयोग से उनकी प्रक्रिया और आधार समझाने को कहा। चुनाव आयोग पर राजनीतिक बहस तेज प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। एक ओर प्रशांत किशोर और विपक्ष के कई नेता आयोग पर निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और संस्थागत नियमों के तहत संचालित हो रही हैं। फिलहाल किशोर के आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। source – PTI / The Indian Express / Times of India / The Federal जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR के खिलाफ प्रकाश राज ने जताया विरोध, बोले- ‘हर योग्य मतदाता का नाम सूची में रहना चाहिए’

बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) का विरोध करते हुए प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। 1 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ मार्च में प्रकाश राज समेत कई नागरिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। मार्च के दौरान बेंगलुरु पुलिस ने प्रकाश राज और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। ‘SIR वापस लिया जाए’- प्रकाश राज प्रदर्शन के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि SIR प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि नागरिक संगठनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। अभिनेता किशोर भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। ‘Election Commission Chalo’ अभियान का किया था ऐलान प्रकाश राज ने 25 अगस्त को ही घोषणा कर दी थी कि नागरिक संगठनों के साथ 1 सितंबर को बेंगलुरु में Election Commission Chalo अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी समय है तो इतनी बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने की जरूरत क्यों है। उन्होंने दावा किया कि इससे आम मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रकाश राज का नाम भी ‘Shifted’ कैटेगरी में आया था इस विवाद से पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। हालांकि कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम ‘permanently shifted’ कैटेगरी में इसलिए रखा गया क्योंकि Booth Level Officer की जांच में वह पिछले चार वर्षों से अपने पुराने पंजीकृत पते पर नहीं रह रहे थे। चुनाव अधिकारी ने कहा कि प्रकाश राज का नाम पहले शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सक्रिय था और वह अपने वर्तमान पते पर Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। एक करोड़ से ज्यादा नाम ASDDO कैटेगरी में कर्नाटक में SIR के दौरान चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता शामिल रहे। आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं, उन्हें नोटिस और दावा-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का किया बचाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत आयोजित किए जाते हैं और राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों के प्रतिनिधि विभिन्न चरणों में प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। BJP और JD(S) भी उठा चुके हैं सवाल कर्नाटक में SIR को लेकर केवल प्रकाश राज या कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। BJP और JD(S) ने भी जुलाई में चुनाव आयोग के सामने प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। दोनों दलों ने कुछ क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जवाब में कहा था कि SIR चुनाव आयोग के निर्देशों और कानून के अनुसार किया जा रहा है। SIR को लेकर जारी है राजनीतिक और कानूनी बहस कर्नाटक में SIR को लेकर मतदाता सूची से संभावित नाम हटने, दस्तावेज सत्यापन और प्रक्रिया की समयसीमा जैसे विषयों पर लगातार बहस चल रही है। प्रकाश राज और प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सत्यापन किया जा रहा है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर 25 सितंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने AISA से जुड़े छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक नेताओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। AISA और सिविल सोसाइटी समूहों ने किया प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन All India Students’ Association (AISA) की दिल्ली इकाई और कुछ सिविल सोसाइटी समूहों ने किया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” जैसे नारे भी लगाए गए। कई प्रदर्शनकारी हिरासत में रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए या पुलिस द्वारा रोके गए प्रमुख लोगों में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और CPI(ML) Liberation के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। मनोज झा और प्रशांत भूषण भी प्रदर्शन में शामिल आयोजकों के मुताबिक प्रदर्शन में RJD सांसद मनोज झा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और कई अन्य लोग भी शामिल हुए। इसके अलावा SFI और Indian Youth Congress से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अलग-अलग विरोध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कोई आवेदन या अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें। SIR विवाद बना प्रदर्शन की बड़ी वजह यह विरोध प्रदर्शन चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी हालिया रिपोर्ट्स के बाद हुआ। The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और electoral roll data management से जुड़े कुछ मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। युवा कांग्रेस ने भी किया विरोध इसी दिन भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर मार्ग पर रोक दिया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत को लेकर भी उठा विवाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस की ओर से कहा गया कि कार्रवाई अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कारण की गई। हिरासत की परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं। चुनाव आयोग पर जारी है राजनीतिक बहस CEC ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को तय कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। ऐसे में जंतर-मंतर का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। source – Hindustan / ThePrint / The Tribune / Amar Ujala / ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह अल्टीमेटम 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था। 26 सितंबर को समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अब 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। SIR विवाद को लेकर CJP ने खोला मोर्चा CJP ने यह कदम मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। CJP का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ये CJP के आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। 48 घंटे में इस्तीफा देने की रखी मांग 24 सितंबर को CJP ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं तो संगठन देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा। अभिजीत दिपके ने दिल्ली में फिर से बड़े प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ तक ले जाने की बात कही थी। आगामी चुनाव रोकने की भी मांग CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की। संगठन ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची को पहले की स्थिति में बहाल करने जैसी मांगें भी रखीं। India Today के मुताबिक संगठन ने SIR से जुड़े रिकॉर्ड को स्वतंत्र निगरानी में रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी की। चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद यह अल्टीमेटम उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में विभिन्न मामलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form 6, electoral database तक पहुंच और SIR प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए। चुनाव आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए कुछ पत्र किसी नीति विवाद से नहीं, बल्कि एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। SIR प्रक्रिया पर आयोग ने दी सफाई चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी चरणबद्ध कार्यक्रमों को भी आयोग ने सामूहिक रूप से मंजूरी दी। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान नागरिकों को दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही हैं। 48 घंटे की समयसीमा खत्म, अब 2 अक्टूबर से आंदोलन CJP का दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम 26 सितंबर को खत्म हो गया। इसके बाद संगठन ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई का आजाद मैदान संभावित स्थल है, हालांकि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति अभी अंतिम रूप से सुनिश्चित नहीं हुई है। CJP का कहना है कि मुंबई से शुरू होने वाला आंदोलन बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। चुनाव आयोग विवाद पर राजनीतिक बहस तेज SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर CJP के अलावा कई विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपने फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। फिलहाल CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। आगे इस विवाद का असर चुनावी और राजनीतिक बहस में किस तरह दिखाई देता है, इस पर नजर रहेगी। source – India Today / Hindustan Times / The Economic Times / The Statesman जय राष्ट्र न्यूज़

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Mamata Banerjee Supreme Court पहुंचीं; TMC का नाम और ‘Jora Ghas Phul’ Symbol Freeze करने के EC फैसले को चुनौती

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026: Former West Bengal Chief Minister और Trinamool Congress founder Mamata Banerjee ने Supreme Court का रुख किया है, जहां उन्होंने Election Commission के उस interim order को चुनौती दी है जिसमें All India Trinamool Congress का नाम और उसका ‘Flowers and Grass’ यानी ‘Jora Ghas Phul’ चुनाव चिन्ह temporarily freeze कर दिया गया था। उनकी writ petition 18 सितंबर को दाखिल की गई। 17 September को EC ने Freeze किया था Name और Symbol Election Commission ने 17 September को TMC में चल रहे factional dispute के बीच interim order जारी किया था। Commission ने कहा कि Mamata Banerjee और Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले दोनों factions खुद को असली Trinamool Congress बता रहे हैं, इसलिए final decision होने तक original party name और reserved symbol किसी भी faction को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। Mamata Faction को मिला ‘Football Player’ Symbol Interim arrangement के तहत Mamata Banerjee-led faction को “Mamata All India Trinamool Congress” नाम और ‘Football Player’ election symbol दिया गया है। Ritabrata Banerjee-led rival faction को “Democratic Trinamool Congress” नाम और ‘Envelope’ symbol allot किया गया है। 6 October के Bypolls के लिए लागू है व्यवस्था Election Commission की यह temporary arrangement 6 October को होने वाले Nandigram और Rejinagar bypolls समेत आगामी चुनावों के लिए लागू होगी। EC ने साफ किया है कि नए नाम और symbols का allotment original Trinamool Congress पर ownership का final फैसला नहीं है। मुख्य विवाद पर अलग से सुनवाई होगी। Supreme Court में EC और Rival Faction को बनाया Respondent Mamata Banerjee की petition में Election Commission of India और Ritabrata Banerjee को respondents बनाया गया है। Petition में EC के interim order को challenge करते हुए original party name और ‘Jora Ghas Phul’ symbol के इस्तेमाल पर लगी रोक के खिलाफ relief मांगी गई है। Mamata ने फैसले को बताया ‘Unconstitutional’ Mamata Banerjee ने EC के फैसले की आलोचना करते हुए इसे “unconstitutional, illegal and undemocratic” बताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए “black day” भी कहा। ये Mamata Banerjee के आरोप और राजनीतिक आकलन हैं; Election Commission ने अपना कदम rival claims के बीच interim व्यवस्था के रूप में बताया है। Paragraph 15 के तहत होगा Final फैसला Original TMC name और symbol किस faction को मिलेगा, इसका final determination Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के Paragraph 15 के तहत किया जाना है। इस प्रक्रिया में Election Commission organisational और legislative support समेत दोनों camps द्वारा पेश किए गए documents और claims पर विचार करेगा। source – Supreme Court Proceedings / Election Commission / The Indian Express / LiveLaw जय राष्ट्र न्यूज़

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Election Commission ने Mamata Banerjee faction को दिया नया नाम; ‘Football Player’ होगा Election Symbol

नई दिल्ली: Election Commission of India ने Trinamool Congress के भीतर चल रहे factional dispute के बीच Mamata Banerjee के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ election symbol आवंटित किया है। वहीं rival group को अलग नाम और symbol दिया गया है। यह फैसला आगामी bypolls से पहले आया है। Mamata faction को मिला ‘Football Player’ Symbol Election Commission के 18 September 2026 के order के मुताबिक Mamata Banerjee के नेतृत्व वाले group को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम दिया गया है। इस faction का चुनाव चिन्ह अब ‘Football Player’ होगा। आयोग ने इसे West Bengal, Meghalaya और Tripura में recognised political party के तौर पर treat करने की बात कही है। Mamata faction के MP Kalyan Banerjee ने भी पुष्टि की कि उन्हें नया नाम और football player symbol आवंटित किया गया है। Rival faction को मिला ‘Envelope’ Symbol दूसरे faction, जिसका नेतृत्व Arup Roy कर रहे हैं, को Election Commission ने ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम दिया है। इस group का election symbol ‘Envelope’ होगा। दोनों factions अब आगामी चुनावी प्रक्रिया में अलग-अलग नाम और symbols के साथ हिस्सा ले सकेंगे। Original TMC Name और Symbol हुआ था Freeze इससे एक दिन पहले Election Commission ने ‘All India Trinamool Congress’ नाम और उसके ‘Flowers and Grass’ यानी Jora Phool symbol को interim तौर पर freeze कर दिया था। इसका मतलब है कि leadership dispute पर अंतिम फैसला आने तक कोई भी faction original party name और reserved symbol का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। आयोग ने दोनों groups से नए नाम और उपलब्ध free symbols के विकल्प मांगे थे, जिसके बाद अलग-अलग identities आवंटित की गईं। क्यों सामने आया TMC में Symbol Dispute? Trinamool Congress में leadership और organisational control को लेकर दो rival groups ने original party name और symbol पर दावा किया था। इसी dispute के बाद Election Commission ने मामले की सुनवाई शुरू की और interim arrangement के तौर पर original name और symbol को freeze किया। यह व्यवस्था फिलहाल factional dispute पर Commission के final adjudication से पहले लागू की गई है। October Bypolls से पहले बड़ा बदलाव नई identities का तत्काल असर आगामी 6 October के Nandigram और Rejinagar bypolls पर पड़ेगा, जहां दोनों factions अलग-अलग नाम और election symbols के तहत उम्मीदवार उतार सकेंगे। Election Commission का यह interim arrangement voters और election authorities के सामने दोनों factions की अलग पहचान सुनिश्चित करता है, जबकि original TMC name और symbol पर विवाद की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। 1998 में बनी थी All India Trinamool Congress Mamata Banerjee ने 1998 में Congress से अलग होकर All India Trinamool Congress की स्थापना की थी और लंबे समय तक पार्टी की chairperson रहीं। अब factional dispute के बाद पहली बार Mamata-led group एक अलग नाम और symbol के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। आगे Election Commission के final decision से यह तय होगा कि original All India Trinamool Congress नाम और ‘Flowers and Grass’ symbol पर स्थायी अधिकार किस group को मिलता है। फिलहाल दोनों factions के लिए अलग identities लागू रहेंगी। Source – Election Commission Order / The Week / Hindustan Times / NDTV / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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Shiv Sena Symbol Row पर Supreme Court में आज सुनवाई; Uddhav Faction ने Shinde गुट को ‘Real Shiv Sena’ मानने के EC फैसले को दी चुनौती

नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: Supreme Court आज Uddhav Thackeray-led Shiv Sena (UBT) की उन petitions पर सुनवाई करेगा, जिनमें Election Commission के Eknath Shinde faction को ‘real Shiv Sena’ मानने और ‘Bow and Arrow’ चुनाव चिन्ह देने के फैसले को चुनौती दी गई है। यह मामला Supreme Court की आज की cause list में शामिल है और final arguments पहले से जारी हैं। 2023 के Election Commission Order को Challenge Election Commission ने 17 February 2023 को Eknath Shinde-led faction को original Shiv Sena के रूप में मान्यता देते हुए पार्टी का नाम और ‘धनुष-बाण’ (Bow and Arrow) symbol आवंटित किया था। Uddhav Thackeray faction का कहना है कि Election Commission ने पार्टी के organisational structure और internal support को पर्याप्त महत्व दिए बिना legislative majority पर ज्यादा भरोसा किया। August से चल रही Final Hearing Supreme Court ने इस विवाद पर 5 August 2026 से final hearings शुरू की थीं। मामला Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V Mohana की bench के सामने सुनवाई में रहा है। Uddhav Faction का क्या तर्क? Senior Advocate Kapil Sibal ने Uddhav faction की ओर से दलील दी है कि केवल MLAs की संख्या के आधार पर legislature party, मूल political party पर नियंत्रण नहीं कर सकती। उनका तर्क है कि party organisation का फैसला legislative wing पर प्रभावी होना चाहिए और pending disqualification proceedings को भी Election Commission के फैसले से अलग करके नहीं देखा जा सकता। Shinde Faction ने उठाया Party Constitution का मुद्दा Eknath Shinde faction ने Supreme Court में तर्क दिया है कि Uddhav Thackeray के नेतृत्व में 2018 में Shiv Sena के organisational structure में बड़े बदलाव किए गए और party chief के हाथ में ज्यादा powers केंद्रित कर दी गईं। Supreme Court ने पिछली hearings में party constitution और internal democracy से जुड़े सवालों पर भी दोनों पक्षों से जवाब मांगे थे। Symbol Freeze करने की भी मांग Uddhav faction ने हाल में Supreme Court से मांग की है कि अगर dispute पर तत्काल final decision नहीं होता है तो Shiv Sena का नाम और Bow-and-Arrow symbol freeze करने पर विचार किया जाए। Faction का कहना है कि prolonged legal dispute के दौरान एक पक्ष को original party name और symbol का लाभ मिलना fairness के सवाल खड़े करता है। Maharashtra Politics पर पड़ सकता है बड़ा असर Supreme Court का eventual फैसला केवल Shiv Sena के नाम और symbol तक सीमित नहीं रहेगा। यह political parties में splits, legislative majority, party organisation और Election Commission की powers से जुड़े महत्वपूर्ण constitutional questions पर भी असर डाल सकता है। आज की hearing में arguments आगे बढ़ने की उम्मीद है; final verdict अभी नहीं आया है। source – Supreme Court of India / The Indian Express / India Today / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का गंभीर सवाल; चुनाव आयोग से जवाब की मांग

भुवनेश्वर, 6 सितंबर 2026: पूर्व Chief Election Commissioner S.Y. Quraishi ने Election Commission की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस exercise के दौरान देशभर में करीब 14–15 करोड़ मतदाताओं के नाम electoral rolls से बाहर हुए और Election Commission से पूछा कि SIR के जरिए आखिर कितने illegal immigrants की पहचान की गई। ‘कितने Illegal Immigrants मिले, आंकड़ा बताए EC’ Quraishi ने कहा कि SIR के उद्देश्यों में electoral rolls को साफ करना और ineligible voters की पहचान करना शामिल था। उन्होंने Election Commission से मांग की कि वह publicly बताए कि इस प्रक्रिया में कितने कथित illegal immigrants पाए गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आयोग को इस आंकड़े को सामने लाना चाहिए, ताकि देश को SIR की वास्तविक सफलता का पता चल सके। 14–15 करोड़ नाम हटने का किया दावा पूर्व CEC ने दावा किया कि SIR के बाद अलग-अलग राज्यों की draft electoral rolls में कुल मिलाकर करीब 14 से 15 करोड़ नाम कम हुए हैं। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि किसी genuine voter का नाम गलत तरीके से हटना भी Election Commission की accountability पर सवाल खड़ा करता है। Voting को बताया Constitutional Right Quraishi ने कहा कि voter list में eligible नागरिक का नाम होना कोई “charity” नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि केवल procedural या bureaucratic कारणों के आधार पर किसी eligible citizen को voting rights से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। SIR को बताया ‘Illogical और Arbitrary’ Quraishi ने voter deletions की प्रक्रिया को “illogical, unreasonable, arbitrary and mischievous” बताया। उन्होंने large-scale deletions को लेकर independent scrutiny और Election Commission की जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। Election Commission का क्या कहना है? Election Commission का कहना रहा है कि draft voter list से नाम बाहर होना final deletion नहीं होता और eligible citizens claims तथा objections process के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar ने हालिया SIR criticism के बीच कहा है कि आयोग की impartiality और integrity बरकरार है और सभी eligible Indian citizens का नाम electoral rolls में होना चाहिए। हालांकि Quraishi के illegal immigrants वाले सवाल पर कोई specific आंकड़ा सार्वजनिक किए जाने की पुष्टि नहीं मिली है। source – ANI / PTI / Hindustan Times / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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