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पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश! 21,000 जीवित पौधों से बनाई गई भगवान गणेश की प्रतिमा

अनाकापल्ली, 17 सितंबर 2026: Andhra Pradesh के Anakapalli district में Ganesh festival के दौरान पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश दिया गया है। Parawada mandal के Sirasapalli गांव स्थित Sri Chintamani Ganapathi Datta Kshethram में भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा 21,000 जीवित पौधों और saplings की मदद से तैयार की गई है। इस eco-friendly creation को ‘Sasya Ganapathi’ नाम दिया गया है। 21,000 Living Plants से तैयार ‘Sasya Ganapathi’ इस विशेष Ganesh idol को मिट्टी, plaster या अन्य conventional materials के बजाय हजारों जीवित पौधों से आकार दिया गया है। हरे-भरे पौधों से तैयार पूरी आकृति भगवान गणेश का स्वरूप बनाती है और श्रद्धालुओं के बीच इस वर्ष के Ganesh celebrations का प्रमुख attraction बनी हुई है। Devotion के साथ Environment का Message Temple organisers के मुताबिक इस initiative का उद्देश्य केवल अलग तरह की Ganesh प्रतिमा बनाना नहीं, बल्कि लोगों को पेड़-पौधों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। आयोजकों का कहना है कि religious celebrations को greenery बढ़ाने और festival waste कम करने के संदेश से जोड़ा जा सकता है। Odisha Governor ने किए दर्शन Odisha Governor Dr Kambhampati Hari Babu ने भी Sri Chintamani Ganapathi Datta Kshethram पहुंचकर Sasya Ganapathi के दर्शन किए और special rituals में हिस्सा लिया। उन्होंने लोगों की शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना की। Anakapalli MLA भी रहे मौजूद Anakapalli MLA Konathala Ramakrishna, temple trustees, local representatives और आसपास के गांवों से आए devotees भी celebrations में शामिल हुए। स्थानीय स्तर पर इस green Ganesh installation ने बड़ी संख्या में visitors को आकर्षित किया है। Eco-Friendly Festivals को बढ़ावा देने की कोशिश Organisers का कहना है कि Ganesh उत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में environment-friendly ideas अपनाकर waste को कम किया जा सकता है। 21,000 plants से तैयार यह प्रतिमा इसी सोच का प्रतीक है कि आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ा जा सकता है। source – India Today / Chennai Online जय राष्ट्र न्यूज़

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रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधकर जंगल बचाने का संकल्प; लोहरदगा में वनकर्मियों और ग्रामीणों की अनोखी पहल

लोहरदगा: रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए झारखंड के लोहरदगा जिले में वनकर्मियों और ग्रामीणों ने पेड़ों को राखी बांधकर उनकी आजीवन रक्षा का संकल्प लिया। लोहरदगा वन प्रमंडल की ओर से कुड़ू-लोहरदगा मुख्य मार्ग पर स्थित कड़ाक जंगल में ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने पेड़ों को परिवार के सदस्य की तरह सुरक्षित रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान वनकर्मियों और ग्रामीणों ने हाथों में रक्षा सूत्र लेकर जंगल के पेड़ों को राखियां बांधीं। आयोजन का उद्देश्य सिर्फ रक्षाबंधन की परंपरा निभाना नहीं, बल्कि लोगों में जंगल और पेड़ों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव पैदा करना और वन संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाना था। कड़ाक जंगल में हुआ ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ लोहरदगा वन प्रमंडल ने रक्षाबंधन के अवसर पर कुड़ू-लोहरदगा मुख्य पथ स्थित कड़ाक जंगल में यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। जंगल में लगाए गए बैनर पर ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ लिखा था। ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा का वचन लिया। कार्यक्रम के जरिए संदेश दिया गया कि जिस तरह रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच सुरक्षा और जिम्मेदारी के रिश्ते का प्रतीक है, उसी तरह इंसानों को प्रकृति और पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। साल के पेड़ को राखी बांधकर हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत उपप्रमुख ऐनुल अंसारी ने साल के एक पेड़ को रक्षा सूत्र बांधकर की। उन्होंने कहा कि पेड़ को राखी बांधना केवल प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का संकल्प है। उन्होंने पेड़ों से मिलने वाली ऑक्सीजन और छाया का जिक्र करते हुए लोगों से उनकी रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। ‘झारखंड की पहचान उसके जंगलों से’ कार्यक्रम के दौरान जंगलों के महत्व पर भी जोर दिया गया। ऐनुल अंसारी ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जंगलों और लोहरदगा की पहचान उसकी हरियाली से है। इसलिए जंगल की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि स्थानीय लोगों को भी सक्रिय रूप से इसके संरक्षण में हिस्सा लेना होगा। यह संदेश ऐसे समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब जंगलों पर अवैध कटाई, बढ़ती मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय दबाव को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। पेड़ों से भावनात्मक रिश्ता जोड़ना है उद्देश्य प्रभारी वनपाल पंकज कुमार सिंह ने बताया कि ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को जंगल और पेड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बहन अपने भाई को राखी बांधकर सुरक्षा के रिश्ते को मजबूत करती है, उसी भावना के साथ पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया गया। उन्होंने ग्रामीणों से वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों की सुरक्षा करने और प्रत्येक पेड़ को परिवार के सदस्य की तरह देखने की अपील की। वन विभाग के साथ ग्रामीणों की भागीदारी इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें केवल Forest Department के कर्मचारी नहीं बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए। कार्यक्रम में संदीप कुमार राम, राजी अंसारी, मनौव्वर अंसारी, प्रयाग महली, गौतम राम, देवेंद्र लोहरा, राजेश उरांव, इरशाद अंसारी, सिकंदर उरांव और बबलू खान सहित वनकर्मी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। Forest Department ने ग्रामीणों से कहा कि जंगलों को बचाने के लिए community participation बेहद जरूरी है। रक्षाबंधन को मिला पर्यावरण संरक्षण का संदेश रक्षाबंधन का त्योहार परंपरागत रूप से भाई-बहन के रिश्ते और एक-दूसरे की रक्षा के वचन से जुड़ा है। लोहरदगा में आयोजित इस कार्यक्रम में इसी भावना को प्रकृति से जोड़ते हुए पेड़ों की सुरक्षा का संकल्प लिया गया। आयोजकों का संदेश था कि पेड़ और जंगल मानव जीवन के लिए जरूरी प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। केवल पेड़ लगाना नहीं, उनकी रक्षा भी जरूरी पर्यावरण संरक्षण अभियानों में अक्सर पौधरोपण पर जोर दिया जाता है, लेकिन ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ कार्यक्रम के जरिए पहले से मौजूद पेड़ों और जंगलों की सुरक्षा पर ध्यान खींचा गया। कार्यक्रम में लोगों से Forest Department के साथ मिलकर जंगलों की रक्षा करने और पेड़ों को अपने परिवार का हिस्सा मानने की अपील की गई। यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि पौधा लगाने के साथ उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखना और मौजूदा जंगलों को बचाना भी उतना ही जरूरी है। Jharkhand के कई इलाकों में दिखी ऐसी पहल इस रक्षाबंधन पर झारखंड के कई दूसरे इलाकों से भी पेड़ों को राखी बांधकर वन संरक्षण का संकल्प लेने की खबरें सामने आईं। चाईबासा के बुन्डू गांव में ग्रामीणों ने Forest Department के साथ मिलकर पेड़ों को राखी बांधी और जंगल की सुरक्षा का वचन लिया। वहीं अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के वृक्ष रक्षा कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे रक्षाबंधन को पर्यावरण संरक्षण और community participation से जोड़ने का संदेश राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला। 29 August की Latest Situation आज 29 अगस्त 2026 तक इस पहल से जुड़ी verified जानकारी यह है: इसलिए इस खबर की सबसे accurate headline होगी: रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधकर जंगल बचाने का संकल्प; लोहरदगा में वनकर्मियों और ग्रामीणों ने मनाया ‘वृक्ष रक्षा बंधन’ नोट: यह कार्यक्रम झारखंड के लोहरदगा जिले में स्थित कड़ाक जंगल में आयोजित किया गया था। पेड़ों को राखी बांधने का उद्देश्य उन्हें प्रतीकात्मक रूप से भाई मानने के साथ स्थानीय लोगों को वन और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना था। स्रोत – प्रभात खबर, हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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