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India-US Trade Deal लगभग Final: अमेरिकी राजदूत Sergio Gor बोले—‘In Principle’ ज्यादातर समझौता पूरा

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रहा Bilateral Trade Agreement अब अंतिम चरण के बेहद करीब पहुंच गया है। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि समझौते के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों पर दोनों देशों के बीच “in principle” सहमति बन चुकी है और अब मुख्य रूप से कानूनी तथा तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देने का काम बाकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। Gor ने भरोसा जताया कि बाकी तकनीकी काम पूरा होने के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। Sergio Gor ने Trade Deal पर क्या कहा? Economic Times World Leaders Forum में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि India-US Trade Deal के अधिकांश हिस्सों पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब बातचीत बड़े नीतिगत मतभेदों को सुलझाने के बजाय मुख्य रूप से legal और technical language को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है। समझौते के कुछ हिस्सों के text को दोबारा तैयार किया जा रहा है। Gor ने समझौते को लेकर आशावादी रुख दिखाया और संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अब बड़ी बाधाओं के बजाय अंतिम दस्तावेजी प्रक्रिया पर काम चल रहा है। क्यों बदला जा रहा Trade Agreement का कुछ Text? Sergio Gor ने कार्यक्रम में बताया कि पहले एक समय दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुंच चुके थे, लेकिन अमेरिका में हुए कानूनी घटनाक्रम के बाद deal के कुछ हिस्सों की भाषा को दोबारा तैयार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि Washington अब agreement के कुछ text को “reconfigure” कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इससे पूरी trade negotiation दोबारा शुरू नहीं हुई है और अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा चरण में दोनों पक्ष नए सिरे से पूरा समझौता नहीं बना रहे, बल्कि पहले तय किए गए framework को कानूनी रूप से लागू करने योग्य रूप देने पर काम कर रहे हैं। India-US Trade तेजी से बढ़ा अमेरिकी राजदूत ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक करीब 15 साल पहले दोनों देशों के बीच bilateral trade लगभग 20 अरब डॉलर था, जबकि आज यह बढ़कर करीब 240 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत और अमेरिका ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए tariff barriers कम करना, market access बढ़ाना और दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार करना आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Trade Deal से भारत को क्या फायदा हो सकता है? India-US Trade Agreement का अंतिम स्वरूप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए सभी sector-wise benefits को निश्चित रूप से बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन किसी व्यापक trade deal से भारतीय exporters को अमेरिकी बाजार में बेहतर access मिलने, कुछ products पर tariffs कम होने और investment flows बढ़ने की संभावना रहती है। अमेरिका भारत के सबसे महत्वपूर्ण export markets में शामिल है। ऐसे में textiles, engineering goods, pharmaceuticals, electronics और अन्य manufacturing sectors के लिए किसी tariff relief का बड़ा प्रभाव हो सकता है। हालांकि किन products को कितनी राहत मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब final agreement जारी होने के बाद ही मिलेगा। Russian Oil खरीदने वाले देशों पर 100% Tariff की भी चर्चा Sergio Gor ने कार्यक्रम में एक अलग मुद्दे पर भी स्थिति स्पष्ट की। अमेरिकी संसद में ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत tariff लगाने के प्रस्ताव की चर्चा चल रही है जो रूस से तेल खरीदते हैं। भारत दुनिया के बड़े Russian crude buyers में शामिल रहा है, इसलिए ऐसे किसी प्रस्ताव का भारत पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि Gor ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी Congress में bipartisan स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है और इसे सीधे President Donald Trump या White House की घोषित नीति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि Trump administration की प्राथमिकता Russia-Ukraine युद्ध को समाप्त कराने की दिशा में काम करना है। Trump-Modi संबंधों पर भी बोले Sergio Gor अमेरिकी राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रिश्तों को भी दोनों देशों की partnership के लिए महत्वपूर्ण बताया। Gor ने कहा कि Trump और Modi के बीच गहरा व्यक्तिगत संबंध और आपसी भरोसा है। उनके मुताबिक दोनों नेता तेजी से परिणाम चाहते हैं और bilateral relationship को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि India-US relationship केवल trade तक सीमित नहीं है, बल्कि defence, energy, technology और Indo-Pacific cooperation जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है। Marco Rubio अक्टूबर में फिर आ सकते हैं भारत India-US संबंधों में बढ़ती diplomatic engagement का संकेत देते हुए Sergio Gor ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio अक्टूबर में भारत का दौरा कर सकते हैं। यह Rubio की इस साल भारत की दूसरी यात्रा होगी। इससे पहले वह मई में पांच दिन के दौरे पर भारत आए थे। Gor ने कहा कि अमेरिकी सरकार के शीर्ष अधिकारियों की लगातार भारत यात्राएं यह दिखाती हैं कि Washington भारत के साथ रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देता है। क्या Trade Deal अब Final हो चुकी है? फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि India-US Trade Deal पूरी तरह final और लागू हो चुकी है। Sergio Gor के मुताबिक मुख्य मुद्दों पर “in principle” सहमति लगभग पूरी है, लेकिन legal और technical drafting अभी जारी है। इसके बाद दोनों सरकारों को final text पर औपचारिक सहमति देनी होगी और agreement को लागू करने के लिए जरूरी administrative और legal processes पूरी करनी होंगी। इसलिए वर्तमान स्थिति को “लगभग अंतिम चरण में पहुंचा समझौता” कहना ज्यादा सटीक होगा। India-US संबंधों के लिए बड़ा संकेत Trade deal का पूरा होना दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि अमेरिका उसका प्रमुख trading और strategic partner है। दोनों देशों की कंपनियों के बीच technology, energy, pharmaceuticals, manufacturing और defence sectors में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Sergio Gor…

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अंतरराष्ट्रीय | US–India Trade Tension: रूस से तेल खरीद पर भारत पर 100% तक टैरिफ का खतरा, अमेरिकी सीनेट के कदम से बढ़ा व्यापारिक तनाव

नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव के बीच रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर संभावित 100% तक अतिरिक्त टैरिफ का मुद्दा शनिवार, 8 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय व्यापार चर्चा में प्रमुख बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दी है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत पर 100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। विधेयक को आगे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा और इसके बाद राष्ट्रपति के स्तर पर इसके इस्तेमाल का फैसला होगा। अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक को दी मंजूरी अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act को मंजूरी दी। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकता है। विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा आय को सीमित करना बताया जा रहा है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इस प्रस्ताव के संभावित प्रभाव के दायरे में आ सकते हैं। भारत पर सीधे 100% टैरिफ अभी नहीं लगा है इस घटनाक्रम को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100% टैरिफ की खबर को तत्काल लागू शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाना है। रिपोर्टों के अनुसार, सदन की अगली प्रक्रिया अगस्त के अंत में होने की उम्मीद है। कानून बनने के बाद भी टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिकी प्रशासन के अधिकार और नीति पर निर्भर करेगा। रूस से तेल खरीद बना भारत-अमेरिका विवाद का केंद्र यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है। रूस से मिलने वाले तेल की कीमत और भारत की रिफाइनिंग क्षमता के कारण यह खरीद देश की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। अमेरिका रूस की ऊर्जा आय को युद्ध से जोड़कर देखता है और प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से भारत की रूसी तेल खरीद अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा बन गई है। भारतीय निर्यातकों के लिए बढ़ सकती है चिंता यदि भविष्य में अमेरिका भारत के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका सीधा असर अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की कीमत और प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ सकता है। अमेरिका भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा बाजार है। इसलिए भारी अतिरिक्त शुल्क की स्थिति में कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न-जवाहरात, रसायन और अन्य अमेरिकी बाजार-निर्भर क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी नजर अमेरिकी टैरिफ की आशंका के बीच भारतीय निवेशकों की नजर सोमवार को खुलने वाले शेयर बाजार पर रहेगी। खासतौर पर ऐसी कंपनियां जिनका अमेरिका को निर्यात ज्यादा है, उनके शेयरों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, रूस से तेल खरीद में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में भारत के लिए वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल खरीदने की जरूरत बढ़ सकती है। इससे आयात बिल, रुपये और महंगाई पर भी असर पड़ने की संभावना होगी। तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर रूस दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। यदि प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह में बड़ी बाधा आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बन सकता है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी से भारत की ऊर्जा लागत और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है। भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के बीच संतुलन की चुनौती भारत के लिए यह मामला केवल अमेरिका के साथ व्यापार का नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जुड़ा है। एक ओर भारत को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराने वाले स्रोतों की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध भी भारतीय निर्यात और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सरकार के सामने दोनों हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। अब आगे क्या होगा? अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक की स्थिति होगी। इसके बाद यह भी देखा जाएगा कि अमेरिकी प्रशासन इस कानून का इस्तेमाल किस तरह करता है और किन देशों को संभावित अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में रखा जाता है। भारत की ओर से भी इस घटनाक्रम पर कूटनीतिक और व्यापारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल बाजार और कारोबारी वर्ग किसी तत्काल 100% शुल्क के बजाय आगे की अमेरिकी विधायी प्रक्रिया और भारत की प्रतिक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। निष्कर्ष रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर 100% तक संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है। अमेरिकी सीनेट द्वारा रूस प्रतिबंध विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दिए जाने के बाद भारतीय कारोबार और बाजारों में चिंता बढ़ी है। हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। विधेयक को आगे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से गुजरना है। आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद की कार्रवाई, व्हाइट हाउस का रुख और भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। Source: Reuters, Economic Times, Hindustan Times, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिकी उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार नई शुल्क व्यवस्था कुछ भारतीय निर्यात श्रेणियों पर लागू होगी, जबकि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों और उत्पादों को छूट भी दी गई है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष समाधान निकालने के लिए संपर्क बनाए हुए हैं। किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर? विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ का प्रभाव मुख्य रूप से उन निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है जहाँ भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। इनमें— शामिल हो सकते हैं। हालांकि दवाइयाँ, स्मार्टफोन, स्टील, एल्युमिनियम और कुछ अन्य प्रमुख उत्पादों को छूट मिलने से इन क्षेत्रों पर तत्काल प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। भारत का रुख भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए रचनात्मक संवाद जारी रखेगा और भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करेगा। निवेशकों और उद्योग की प्रतिक्रिया उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि दीर्घकालिक व्यापार समझौता जल्द हो जाता है तो अनिश्चितता कम होगी। शेयर बाजार में भी निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का क्या परिणाम निकलता है और क्या भविष्य में शुल्क व्यवस्था में और बदलाव होते हैं। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अल्पकाल में कुछ निर्यात क्षेत्रों पर दबाव आ सकता है, लेकिन भारत की विविध निर्यात संरचना और वैकल्पिक बाजारों के कारण समग्र प्रभाव सीमित रह सकता है। उनका कहना है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है। निष्कर्ष अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और आने वाले समय में नीति में बदलाव की संभावना बनी हुई है। उद्योग और निवेशक अब आगे की कूटनीतिक और व्यापारिक वार्ताओं पर नजर बनाए हुए हैं। Source: Ministry of Commerce & Industry | Office of the United States Trade Representative (USTR) जय राष्ट्र न्यूज़

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