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भारतीय पर्यटकों के लिए अबू धाबी का बड़ा ऑफर, पात्र यात्रियों को मिलेगी मुफ्त UAE एंट्री वीजा सुविधा

अबू धाबी: भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अबू धाबी ने एक नई वीजा पहल शुरू की है। इसके तहत पात्र भारतीय यात्रियों को UAE का complimentary entry visa दिया जाएगा। यह सुविधा उन यात्रियों के लिए है जो तय शर्तों के तहत अबू धाबी में होटल और रिटर्न फ्लाइट की बुकिंग करते हैं। इस पहल से भारत से अबू धाबी घूमने जाने वाले यात्रियों को यात्रा लागत कम करने में मदद मिल सकती है। किसे मिलेगा मुफ्त UAE वीजा? नई पहल के तहत ऐसे भारतीय पर्यटक पात्र हो सकते हैं जिनके पास अबू धाबी की कम से कम तीन रातों की होटल बुकिंग और वापसी की उड़ान की पुष्टि हो। हालांकि यह सुविधा सभी भारतीय यात्रियों के लिए स्वतः उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को कार्यक्रम में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा और वीजा आवेदन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। अबू धाबी ने क्यों शुरू की यह पहल? अबू धाबी लंबे समय से भारतीय पर्यटकों के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार के रूप में भारत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नई वीजा सुविधा का उद्देश्य भारतीय यात्रियों के लिए अबू धाबी की यात्रा को आसान और अधिक आकर्षक बनाना है। इससे पर्यटन, होटल और एयरलाइन क्षेत्र को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। 20,000 यात्रियों तक की सुविधा रिपोर्टों के मुताबिक इस पायलट कार्यक्रम के तहत अधिकतम 20,000 वीजा जारी किए जाने का प्रावधान है। यह पहल सीमित अवधि के लिए लागू की गई है और इसके तहत पात्र भारतीय पर्यटकों को अबू धाबी की यात्रा के दौरान वीजा शुल्क से राहत मिल सकती है। 31 अक्टूबर 2026 तक चल सकता है कार्यक्रम यह विशेष पहल 31 अक्टूबर 2026 तक चलने की योजना के साथ शुरू की गई है। यानी पात्र भारतीय यात्री इस अवधि के दौरान निर्धारित शर्तों के तहत इसका लाभ उठा सकते हैं। हालांकि यात्रियों को आवेदन करने से पहले मौजूदा नियमों और पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए, क्योंकि वीजा नियमों में बदलाव संभव है। होटल बुकिंग होगी अहम इस ऑफर में होटल बुकिंग की भूमिका महत्वपूर्ण है। पात्र यात्रियों को अबू धाबी में कम से कम तीन रातों के ठहरने की पुष्टि करनी होगी। इसके साथ रिटर्न फ्लाइट की जानकारी भी आवश्यक हो सकती है। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय होटल और फ्लाइट की बुकिंग से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होगा। भारतीय पर्यटकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑफर? UAE भारतीयों के बीच लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। दुबई के अलावा अबू धाबी भी अपनी आधुनिक वास्तुकला, समुद्र तटों, सांस्कृतिक स्थलों और मनोरंजन सुविधाओं के कारण तेजी से लोकप्रिय हुआ है। वीजा लागत में राहत मिलने से परिवार, कपल्स और अन्य पर्यटकों के लिए अबू धाबी ट्रिप का कुल खर्च कुछ कम हो सकता है। यात्रा से पहले नियम जरूर जांचें पर्यटकों को ध्यान रखना चाहिए कि complimentary visa का मतलब बिना किसी शर्त के UAE में प्रवेश नहीं है। वीजा पात्रता, पासपोर्ट की वैधता, होटल बुकिंग, रिटर्न टिकट और अन्य इमिग्रेशन नियम लागू रहेंगे। इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक वीजा और अबू धाबी पर्यटन स्रोतों से नवीनतम नियमों की पुष्टि करना जरूरी है। अबू धाबी टूरिज्म के लिए भारत बड़ा बाजार भारत अबू धाबी के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजारों में से एक है। भारतीय यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए अबू धाबी पर्यटन क्षेत्र लगातार भारत-केंद्रित प्रचार और यात्रा सुविधाओं पर जोर दे रहा है। नई पहल का उद्देश्य यात्रियों के लिए यात्रा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ अबू धाबी में भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ाना है। निष्कर्ष भारतीय पर्यटकों के लिए अबू धाबी का यह complimentary UAE entry visa offer यात्रा को अधिक आकर्षक बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि इसका लाभ सिर्फ पात्र यात्रियों को ही मिलेगा और इसके लिए होटल, फ्लाइट तथा अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। पायलट कार्यक्रम के तहत 20,000 तक वीजा की सुविधा और 31 अक्टूबर 2026 तक की अवधि इसे भारतीय यात्रियों के लिए खास अवसर बनाती है। यात्रा की योजना बनाने वालों को आवेदन से पहले पात्रता और मौजूदा वीजा नियमों की आधिकारिक पुष्टि जरूर करनी चाहिए। Source: Abu Dhabi Tourism / Latest Travel Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत–चीन ने सीमा मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति दोहराई, कूटनीतिक और सैन्य चैनलों से समाधान की दिशा में प्रयास तेज़

नई दिल्ली: भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित सीमा मुद्दों को कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत के माध्यम से सुलझाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं में इस बात पर सहमति बनी कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। दोनों पक्षों ने संवाद की प्रक्रिया जारी रखने और आपसी विश्वास बढ़ाने पर बल दिया। सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सीमा पर तनाव कम करने और किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचने के लिए स्थापित कूटनीतिक और सैन्य संवाद तंत्र का प्रभावी उपयोग जारी रखा जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि नियमित बैठकों और संपर्क व्यवस्था के माध्यम से जमीनी स्थिति पर लगातार चर्चा होती रहेगी। कूटनीतिक और सैन्य चैनलों की भूमिका भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कई दौर की कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता और Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की बैठकें पहले भी आयोजित होती रही हैं। दोनों देशों ने माना कि यही तंत्र भविष्य में भी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सीमा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद है। व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग तभी आगे बढ़ सकता है जब सीमा पर सामान्य स्थिति बनी रहे। चीन ने भी संवाद जारी रखने और मतभेदों को नियंत्रित रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग पर भी चर्चा सूत्रों के अनुसार वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने कहा कि मतभेदों को विवाद में बदलने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना दोनों देशों के हित में है। विशेषज्ञों की राय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित कूटनीतिक और सैन्य वार्ता सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने और आकस्मिक घटनाओं की संभावना घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनका कहना है कि विश्वास बहाली के उपायों और निरंतर संवाद से भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति संभव हो सकती है। निष्कर्ष भारत और चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता, कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य संवाद के माध्यम से ही खोजा जाएगा। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, विश्वास बढ़ाने और संवाद की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति दोहराई है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Africa Day कार्यक्रम में भारत–अफ्रीका साझेदारी पर दिया जोर, व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की अपील

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित Africa Day समारोह को संबोधित करते हुए भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकास साझेदारी पर आधारित हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में और मजबूत किया जाएगा। भारत–अफ्रीका संबंधों को बताया रणनीतिक साझेदारी अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। भारत अफ्रीकी देशों के साथ समानता, आपसी सम्मान और साझा विकास के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित करना है। व्यापार और निवेश बढ़ाने पर फोकस विदेश मंत्री ने दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बढ़ाने, नई निवेश परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा तथा बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियाँ अफ्रीका में निवेश बढ़ा रही हैं और आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। तकनीक और क्षमता निर्माण पर जोर जयशंकर ने कहा कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और आईटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों अफ्रीकी पेशेवरों को भारत में प्रशिक्षण दिया जा चुका है और यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा। रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत विदेश मंत्री ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, रक्षा प्रशिक्षण और शांति अभियानों में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है। Global South की आवाज़ मजबूत करने की अपील जयशंकर ने कहा कि भारत और अफ्रीका वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। निष्कर्ष Africa Day कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संदेश स्पष्ट था कि भारत और अफ्रीका के संबंध भविष्य की वैश्विक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और विकास सहयोग को नई गति देकर दोनों पक्ष साझा समृद्धि और स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। Source: Ministry of External Affairs (MEA) जय राष्ट्र न्यूज़

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बांग्लादेश ने शेख हसीना के प्रस्तावित नई दिल्ली संबोधन पर भारत से मांगा आधिकारिक स्पष्टीकरण, भारत ने कहा- कार्यक्रम से सरकार का कोई संबंध नहीं

नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नई दिल्ली से प्रस्तावित वर्चुअल संबोधन को लेकर भारत सरकार से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम किसी सरकारी संस्था द्वारा नहीं, बल्कि एक निजी संगठन द्वारा आयोजित किया जा रहा है और भारत सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है। बांग्लादेश ने क्यों जताई चिंता? ढाका का कहना है कि शेख हसीना के प्रस्तावित संबोधन से दोनों देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। बांग्लादेश सरकार ने भारत से पूछा कि क्या इस कार्यक्रम को आधिकारिक अनुमति प्राप्त है और इस मामले में भारत का क्या रुख है। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि बांग्लादेश पहले से ही शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करता रहा है। भारत सरकार का जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रस्तावित कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा आयोजित नहीं किया जा रहा है और न ही इसका किसी सरकारी एजेंसी से कोई संबंध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक निजी संस्था का कार्यक्रम है और सरकार इसमें व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती। कार्यक्रम किसके द्वारा आयोजित किया जा रहा है? जानकारी के अनुसार यह वर्चुअल कार्यक्रम Foreign Correspondents’ Club of South Asia (FCCSA) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें शेख हसीना छात्र आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर ऑनलाइन संबोधित करने वाली हैं। यह उनके भारत आने के बाद पहला बड़ा सार्वजनिक संबोधन माना जा रहा है। द्विपक्षीय संबंधों पर नजर भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के वर्षों में व्यापार, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर साझेदारी रही है। हालांकि शेख हसीना का भारत में रहना और उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश इस मामले को कूटनीतिक संवाद के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करेंगे। निष्कर्ष शेख हसीना के प्रस्तावित नई दिल्ली संबोधन को लेकर उठे विवाद के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि कार्यक्रम से उसका कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। अब दोनों देशों की निगाहें आगे की कूटनीतिक बातचीत और इस मुद्दे पर होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। Source: Ministry of External Affairs (India) | Ministry of Foreign Affairs (Bangladesh) जय राष्ट्र न्यूज़

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बांग्लादेश ने शेख हसीना के प्रस्तावित नई दिल्ली संबोधन पर भारत से मांगा आधिकारिक स्पष्टीकरण, कूटनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रस्तावित नई दिल्ली से वर्चुअल संबोधन को लेकर भारत से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। ढाका का कहना है कि यदि भारत की धरती से किसी ऐसे व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधि करने की अनुमति दी जाती है, जिसके खिलाफ बांग्लादेश में गंभीर कानूनी मामले लंबित हैं, तो इसका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। बांग्लादेश की राज्य मंत्री (विदेश मामलों) शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार भारत की आधिकारिक स्थिति जानना चाहती है। शेख हसीना के 5 अगस्त को नई दिल्ली से ऑनलाइन संबोधन की खबरों के बाद ढाका ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया है। बांग्लादेश का कहना है कि वह भारत के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन ऐसे मामलों में स्पष्ट रुख आवश्यक है। राजनयिक संवेदनशीलता बढ़ी शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश में उनके खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही और प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग पहले से दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील विषय बनी हुई है। ऐसे में उनके प्रस्तावित सार्वजनिक संबोधन को लेकर नई कूटनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार समाचार लिखे जाने तक भारत सरकार ने इस नए अनुरोध पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी। हालांकि, इससे पहले भारत यह स्पष्ट कर चुका है कि शेख हसीना से जुड़े कानूनी और प्रत्यर्पण संबंधी मामलों पर निर्णय भारतीय कानून और द्विपक्षीय प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाएगा। द्विपक्षीय संबंधों पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे चल रहे हैं। ऐसे में यह घटनाक्रम दोनों देशों के कूटनीतिक संवाद पर असर डाल सकता है, हालांकि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं। निष्कर्ष शेख हसीना के प्रस्तावित नई दिल्ली संबोधन को लेकर बांग्लादेश द्वारा भारत से स्पष्टीकरण मांगना दोनों देशों के बीच चल रहे संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दों में एक नया अध्याय माना जा रहा है। अब निगाहें भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की राजनयिक बातचीत पर टिकी हैं। Source: Ministry of Foreign Affairs, Bangladesh | Ministry of External Affairs, India जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अपने नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यकता होने पर क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी

वॉशिंगटन: मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के बीच अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) ने अपने नागरिकों के लिए नया सुरक्षा परामर्श (Security Advisory) जारी किया है। अमेरिका ने क्षेत्र में मौजूद नागरिकों से उच्च सतर्कता (High Vigilance) बरतने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और स्थिति बिगड़ने पर व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से क्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। अमेरिकी दूतावासों ने कई मध्य-पूर्वी देशों में जारी सुरक्षा अलर्ट में कहा है कि क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल सकते हैं। संभावित सैन्य तनाव, हवाई क्षेत्र बंद होने, उड़ानों में रद्दीकरण और यात्रा बाधित होने की आशंका को देखते हुए नागरिकों को अपनी यात्रा योजनाओं की लगातार समीक्षा करने के लिए कहा गया है। ईरान से जुड़े तनाव बना प्रमुख कारण अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में ईरान से जुड़े तनाव और संभावित अप्रत्याशित घटनाओं के कारण सुरक्षा वातावरण जटिल बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन ने नागरिकों से भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचने, आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा है। दूतावासों ने जारी किए विशेष निर्देश अमेरिकी दूतावासों ने विभिन्न देशों में मौजूद नागरिकों से अपने पासपोर्ट, आवश्यक दस्तावेज और यात्रा संबंधी व्यवस्था तैयार रखने की सलाह दी है। साथ ही STEP (Smart Traveler Enrollment Program) में पंजीकरण कराने की भी अपील की गई है, ताकि आपात स्थिति में अमेरिकी प्रशासन उनसे तुरंत संपर्क कर सके। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, हवाई यातायात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। कई देशों ने भी अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह (Travel Advisory) अपडेट की है। निष्कर्ष मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को अतिरिक्त सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर क्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं और समय-समय पर नई सलाह जारी की जा रही है। Source: U.S. Department of State | U.S. Embassies in the Middle East जय राष्ट्र न्यूज़

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पाकिस्तान में हिमस्खलन की चपेट में आए विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की मौत, बचाव अभियान समाप्त

इस्लामाबाद: विश्व प्रसिद्ध नेपाली मूल के पर्वतारोही निर्मल “निम्स” पुर्जा (Nirmal Purja) की पाकिस्तान के ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर आए भीषण हिमस्खलन में मृत्यु की पुष्टि हो गई है। उनके अभियान संचालक Elite Exped ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दुखद घटना की जानकारी दी। हिमस्खलन में कुल 10 पर्वतारोहियों की जान गई, जिनमें नेपाल, पाकिस्तान, अमेरिका, चीन और ओमान के नागरिक शामिल थे। यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पर्वतारोहण त्रासदियों में से एक मानी जा रही है। हिमस्खलन पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र स्थित 8,051 मीटर ऊँचे ब्रॉड पीक पर शिखर अभियान के दौरान आया। खराब मौसम और अत्यधिक बर्फबारी के कारण कई दिनों तक बचाव अभियान जारी रहा, लेकिन अंततः किसी भी लापता पर्वतारोही के जीवित बचने की उम्मीद समाप्त हो गई। दुनिया के महान पर्वतारोहियों में थी पहचान 43 वर्षीय निर्मल पुर्जा ने वर्ष 2019 में दुनिया की सभी 14 आठ-हज़ारी चोटियों (8,000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाली) को केवल 6 महीने 6 दिन में फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी इस उपलब्धि पर आधारित नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री “14 Peaks: Nothing Is Impossible” ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई थी। अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में शोक निर्मल पुर्जा के निधन की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के पर्वतारोहियों, खेल संगठनों और प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया। उन्हें आधुनिक पर्वतारोहण का सबसे प्रेरणादायक चेहरा माना जाता था। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साहस एवं उपलब्धियों को याद किया। पाकिस्तान में चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान पाकिस्तान सेना, स्थानीय बचाव दल और अनुभवी पर्वतारोहियों ने कई दिनों तक हेलीकॉप्टर और ड्रोन की सहायता से खोज अभियान चलाया। अत्यधिक ऊँचाई, लगातार खराब मौसम और हिमस्खलन के खतरे के कारण राहत कार्य बेहद कठिन रहा। निष्कर्ष निर्मल पुर्जा का निधन पर्वतारोहण जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अपने साहस, अद्भुत उपलब्धियों और मानव क्षमता की सीमाओं को चुनौती देने वाले कारनामों के कारण वे हमेशा दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे. Source: Elite Exped | Alpine Club of Pakistan | Pakistan Army जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिकी उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार नई शुल्क व्यवस्था कुछ भारतीय निर्यात श्रेणियों पर लागू होगी, जबकि कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों और उत्पादों को छूट भी दी गई है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष समाधान निकालने के लिए संपर्क बनाए हुए हैं। किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर? विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ का प्रभाव मुख्य रूप से उन निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है जहाँ भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। इनमें— शामिल हो सकते हैं। हालांकि दवाइयाँ, स्मार्टफोन, स्टील, एल्युमिनियम और कुछ अन्य प्रमुख उत्पादों को छूट मिलने से इन क्षेत्रों पर तत्काल प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। भारत का रुख भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बातचीत कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए रचनात्मक संवाद जारी रखेगा और भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करेगा। निवेशकों और उद्योग की प्रतिक्रिया उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि दीर्घकालिक व्यापार समझौता जल्द हो जाता है तो अनिश्चितता कम होगी। शेयर बाजार में भी निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का क्या परिणाम निकलता है और क्या भविष्य में शुल्क व्यवस्था में और बदलाव होते हैं। विशेषज्ञों की राय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अल्पकाल में कुछ निर्यात क्षेत्रों पर दबाव आ सकता है, लेकिन भारत की विविध निर्यात संरचना और वैकल्पिक बाजारों के कारण समग्र प्रभाव सीमित रह सकता है। उनका कहना है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है। निष्कर्ष अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% टैरिफ की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और आने वाले समय में नीति में बदलाव की संभावना बनी हुई है। उद्योग और निवेशक अब आगे की कूटनीतिक और व्यापारिक वार्ताओं पर नजर बनाए हुए हैं। Source: Ministry of Commerce & Industry | Office of the United States Trade Representative (USTR) जय राष्ट्र न्यूज़

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यूक्रेन–रूस संघर्ष के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका पर वैश्विक फोकस, शांति प्रयासों में बढ़ी अहमियत

नई दिल्ली: यूक्रेन–रूस युद्ध को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की संतुलित विदेश नीति, दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता और शांति स्थापित करने के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। भारत ने शुरुआत से ही स्पष्ट किया है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार युद्ध समाप्त करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया है कि भारत का रुख शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून और सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है। दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक विशेषता यह रही है कि उसने रूस और यूक्रेन—दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर समय-समय पर दोनों देशों के नेताओं से बातचीत करते रहे हैं। भारत ने कई अवसरों पर यह भी कहा है कि वह किसी भी रचनात्मक शांति पहल का समर्थन करेगा, यदि दोनों पक्ष इसके लिए तैयार हों। मानवीय सहायता जारी युद्ध के दौरान भारत ने यूक्रेन को दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य मानवीय सहायता की कई खेप भेजी हैं। इसके साथ ही युद्ध की शुरुआत में ऑपरेशन गंगा के माध्यम से हजारों भारतीय छात्रों को सुरक्षित वापस लाया गया था। सरकार का कहना है कि संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहयोग उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका हाल के महीनों में G20, BRICS और अन्य बहुपक्षीय बैठकों में भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रमुखता से उठाया है। कई देशों ने माना है कि भारत की निष्पक्ष और संतुलित नीति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्थिक और ऊर्जा हित भी महत्वपूर्ण भारत रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के बीच संतुलित नीति अपनाई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी हुई है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विश्वसनीयता इस बात से बढ़ी है कि उसने किसी भी पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय संवाद, शांति और कूटनीतिक समाधान पर लगातार जोर दिया। यदि भविष्य में शांति वार्ता आगे बढ़ती है, तो भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि फिलहाल किसी औपचारिक मध्यस्थता की घोषणा नहीं की गई है। निष्कर्ष यूक्रेन–रूस संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संतुलन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। संवाद, मानवीय सहायता और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित भारत का रुख उसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Government of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद राहत अभियान जारी, मृतकों की संख्या बढ़ी

टोक्यो: जापान के दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस आपदा में कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों, सड़कों और औद्योगिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भूकंप के बाद सबसे अधिक नुकसान कशिमा स्थित एयॉन शॉपिंग मॉल में हुआ, जहां झटकों के बाद गैस विस्फोट होने से इमारत का एक हिस्सा ढह गया। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स, दमकल विभाग और आपदा राहत एजेंसियों के हजारों जवान राहत कार्य में जुटे हुए हैं। बिजली, पानी और परिवहन प्रभावित भूकंप के कारण हजारों घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। कई रेलवे सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं, जबकि कुछ घरेलू उड़ानों को भी रद्द किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। लगातार आ रहे हैं आफ्टरशॉक्स जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं और आने वाले दिनों में भी तेज झटके महसूस किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने भूस्खलन, कमजोर इमारतों के ढहने और अन्य संभावित जोखिमों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उद्योगों पर भी पड़ा असर कुमामोटो क्षेत्र जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। भूकंप के बाद टोयोटा, सोनी, टीएसएमसी, होंडा और अन्य बड़ी कंपनियों ने अपने कई संयंत्रों में उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है ताकि संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया जा सके। इससे आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की प्रतिक्रिया जापान की प्रधानमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर, भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रशासन ने कहा है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रहेगा। निष्कर्ष जापान में आए इस विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर देश की आपदा प्रबंधन क्षमता की कठिन परीक्षा ली है। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जबकि सरकार प्रभावित नागरिकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स के खतरे को देखते हुए आने वाले कुछ दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे। Source: Japan Meteorological Agency (JMA) | Japan Fire and Disaster Management Agency | Government of Japan जय राष्ट्र न्यूज़

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