Jio's New Prepaid Plan with Hotstar Subscription

Jio का नया किफायती प्रीपेड प्लान: JioHotstar सब्सक्रिप्शन के साथ शानदार डील

भारत में टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच रिलायंस जियो अपने ग्राहकों के लिए एक नया और किफायती प्रीपेड रिचार्ज प्लान लेकर आया है। इस नए प्लान की खासियत यह है कि इसमें न केवल डेटा और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, बल्कि जियो के नए ओटीटी प्लेटफॉर्म JioHotstar का कॉम्प्लीमेंट्री सब्सक्रिप्शन भी शामिल है। हाल ही में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय के बाद इस नई स्ट्रीमिंग सर्विस को लॉन्च किया गया था, जिससे भारतीय यूजर्स को बेहतर कंटेंट देखने का अनुभव मिल सके। Jio के नए प्लान की खासियत रिलायंस जियो ने अपने प्रीपेड ग्राहकों के लिए एक 100 रुपये का विशेष रिचार्ज प्लान लॉन्च किया है, जो 90 दिनों की वैधता के साथ आता है। इस प्लान के तहत ग्राहकों को JioHotstar का Ad-Supported सब्सक्रिप्शन फ्री में मिलेगा। यानी, यूजर्स बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के JioHotstar पर उपलब्ध कंटेंट का आनंद ले सकते हैं। 5GB हाई-स्पीड डेटा बेनिफिट इस प्लान में JioHotstar सब्सक्रिप्शन के अलावा 5GB हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा भी मिलता है। हालांकि, इस डेटा की खपत पूरी होने के बाद स्पीड घटकर 64kbps हो जाएगी। यह प्लान उन ग्राहकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जो कम कीमत में हाई-स्पीड डेटा और ओटीटी कंटेंट का लाभ उठाना चाहते हैं। JioHotstar के अन्य प्लान्स Jio का दावा है कि इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 3 लाख घंटे से अधिक की फिल्में, टीवी शो, एनीमे और लाइव स्पोर्ट्स उपलब्ध हैं, जिससे यह एक बेहतरीन एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म बन गया है। हाई वैल्यू प्लान: ज्यादा डेटा के साथ बेहतर सुविधा अगर आप अधिक डेटा की तलाश में हैं, तो 195 रुपये का हाई-वैल्यू प्लान एक शानदार विकल्प हो सकता है। इस प्लान को क्रिकेट डेटा पैक (Credit Data Pack) के रूप में पेश किया गया है और इसमें यूजर्स को 15GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जो स्ट्रीमिंग, ब्राउजिंग और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। अगर आपके लिए वॉयस कॉलिंग और SMS भी जरूरी हैं, तो 195 रुपये का प्लान सही रहेगा क्योंकि इसमें डेटा के साथ-साथ ये सुविधाएं भी मिलती हैं। इसे भी पढ़ें:-  दुबई में सस्ता क्यों हैं सोना? विदेश से सोना लाने के क्या हैं नियम? Jio का यह प्लान क्यों है खास? रिलायंस जियो का यह नया प्रीपेड प्लान उन यूजर्स के लिए एक शानदार विकल्प है, जो कम कीमत में ओटीटी कंटेंट और हाई-स्पीड डेटा का लाभ उठाना चाहते हैं। JioHotstar के कॉम्प्लीमेंट्री सब्सक्रिप्शन के साथ यह प्लान न केवल मनोरंजन का शानदार जरिया है, बल्कि किफायती भी है। अगर आप OTT स्ट्रीमिंग और डेटा कनेक्टिविटी दोनों का बेहतरीन अनुभव चाहते हैं, तो यह प्लान आपके लिए एक बेस्ट डील साबित हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news JioHotstar #JioPrepaid #JioHotstar #JioRecharge #HotstarSubscription #JioDeals #AffordablePlans #JioOffers #PrepaidPlan #JioStreaming #BestRecharge

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Lord Krishna’s Lost City Submerged in the Sea

द्वारका नगरी की कहानी: श्रीकृष्ण का भव्य साम्राज्य जिसे समुद्र ने निगल लिया

भारत की पौराणिक कथाओं में कई नगरों का वर्णन मिलता है, लेकिन कुछ नगर ऐसे हैं जो इतिहास और रहस्य के धुंध में लुप्त हो गए। इन्हीं में से एक है द्वारका नगरी, जिसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) ने बसाया था। यह नगर अपने वैभव, उन्नति और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन एक दिन समुद्र की लहरों ने इसे अपने भीतर समा लिया। द्वारका के डूबने के पीछे क्या कारण था? क्या यह प्राकृतिक आपदा थी, या फिर यह किसी श्राप का परिणाम था? श्रीकृष्ण के द्वारका जाने की कथा धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण (Shri Krishna) को द्वारका जाने की आवश्यकता तब पड़ी जब उन्होंने अपने अत्याचारी मामा और मथुरा के राजा कंस का वध किया। कंस के ससुर और मगध के राजा जरासंध ने इस घटना का प्रतिशोध लेने का संकल्प लिया और मथुरा पर बार-बार आक्रमण करने लगा। वह 17 बार आक्रमण कर चुका था, लेकिन श्रीकृष्ण को पराजित नहीं कर सका। हालांकि, निरंतर युद्धों से न केवल आर्थिक हानि हो रही थी, बल्कि यादवों की सुरक्षा भी संकट में थी। इसे देखते हुए, श्रीकृष्ण (Shri Krishna) ने मथुरा छोड़कर यादवों के लिए एक नए सुरक्षित स्थान की स्थापना का निर्णय लिया। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को भव्य नगर द्वारका के निर्माण का आदेश दिया। विश्वकर्मा ने समुद्र के ऊपर केवल एक रात में इस अद्भुत नगरी का निर्माण कर दिया, जहां यादवों को बसाया गया। इसके बाद श्रीकृष्ण “द्वारकाधीश” के नाम से प्रसिद्ध हुए। कैसी थी द्वारका नगरी? द्वारका (Dwarka), जिसका अर्थ है ‘द्वारों का नगर’, भगवान श्रीकृष्ण (Shri Krishna) की राजधानी थी। द्वारका एक भव्य और अद्भुत नगरी थी, जिसमें छह विशाल दरवाजे और भव्य प्रासाद थे। इसकी गलियां मोतियों और बहुमूल्य पत्थरों से सजी हुई थीं, जिससे यह एक स्वर्गीय नगर जैसी प्रतीत होती थी। इस अद्वितीय नगरी का निर्माण मय दानव की असाधारण वास्तुकला से हुआ था, जिसने इसे अद्भुत स्वरूप प्रदान किया। महाभारत में द्वारका का वर्णन ‘सोने से बनी नगरी’ के रूप में किया गया है, जो इसकी विलक्षण सुंदरता और समृद्धि को दर्शाता है। यह नगर सात टीलों पर स्थित था और एक मजबूत किलेबंदी से सुरक्षित था, जिससे यह बाहरी आक्रमणों से संरक्षित रह सके। 4000 साल पहले किसने दिया द्वारका को डूबने का श्राप? शास्त्रों में द्वारका (Dwarka) को कुशस्थली के रूप में वर्णित किया गया है, जो एक समृद्ध और खुशहाल नगरी थी। यहां के लोग प्रेम और भाईचारे के साथ रहते थे, और स्वयं श्रीकृष्ण इस नगर का संचालन कर रहे थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सबकुछ इतना सुंदर और अद्भुत था, तो फिर द्वारका डूबी कैसे? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वारका के डूबने के पीछे दो श्रापों का बड़ा योगदान था। यह पवित्र नगरी, जो आज हिंदुओं के चारधाम और सप्तपुरी में शामिल है, कठोर श्रापों का शिकार हुई। आइए जानते हैं, कौन-कौन से श्रापों ने इस दिव्य नगरी को जलमग्न कर दिया। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? द्वारका के जलमग्न होने का सबसे प्रसिद्ध श्राप ऋषि दुर्वासा और स्वयं श्रीकृष्ण के वचन से जुड़ा है। महाभारत का युद्ध विनाशकारी था, जिसमें कौरवों का अंत हो गया और पांडवों ने विजय प्राप्त की। युद्ध के बाद युधिष्ठिर का हस्तिनापुर में राजतिलक हुआ, जहां श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) भी मौजूद थे। इसी दौरान, कौरवों की माता गांधारी ने श्रीकृष्ण को इस युद्ध का सबसे बड़ा दोषी मानते हुए श्राप दिया कि जैसे उनके कुल का विनाश हुआ, वैसे ही श्रीकृष्ण के सामने ही उनके वंश का नाश होगा। ऐसा माना जाता है कि द्वारका के डूबने का एक प्रमुख कारण यही श्राप था। महाभारत युद्ध के 36 साल बाद, समुद्र में पूरी द्वारका नगरी समा गई। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि विश्वामित्र, देव ऋषि नारद और कण्व ऋषि द्वारका नगरी पहुंचे थे। वहीं, कुछ यादव बालकों ने उनके साथ उपहास करने की योजना बनाई, जिसमें श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी शामिल थे। उन्होंने सांब को स्त्री वेश में ऋषियों के सामने प्रस्तुत किया और मज़ाक में कहा कि यह स्त्री गर्भवती है, कृपया बताएं कि इसके गर्भ में पलने वाला शिशु कौन होगा।  यह अपमान ऋषियों को सहन नहीं हुआ, और उन्होंने श्राप दिया कि इस गर्भ से एक मुसल (गदा जैसा हथियार) जन्म लेगा, जो पूरे यदुवंश के नाश का कारण बनेगा। इसके बाद यादवों के बीच कलह और संघर्ष बढ़ने लगे, और अंततः वे आपस में लड़-लड़कर खत्म हो गए। बलराम ने भी अपने शरीर का त्याग कर दिया, और श्रीकृष्ण को एक शिकारी के तीर से अनजाने में चोट लग गई, जिसके बाद वे अपने दिव्य लोक में चले गए। जब पांडवों को द्वारका (Dwarka) की स्थिति का पता चला, तो अर्जुन वहां पहुंचे और श्रीकृष्ण के बचे हुए परिजनों को इंद्रप्रस्थ ले आए। इसके बाद द्वारका नगरी धीरे-धीरे समुद्र में डूब गई और हमेशा के लिए विलुप्त हो गई। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Dwarka #DwarkaMystery #LordKrishna #LostCityDwarka #AncientIndia #Mythology #HinduHistory #KrishnaLegend #SubmergedCity #IndianHeritage #HistoricalMystery

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King Kohli Eyes More Records

Virat Kohli retirement: अभी रिटायरमेंट नहीं लेंगे किंग कोहली, तोड़ने हैं कई रिकार्ड्स

टीम इंडिया ने रविवार को दुबई के इंटरनेशनल ग्राउंड में न्यूजीलैंड को पटखनी देते हुए चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया है। बेशक टीम इंडिया का दमखम देखने लायक था। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह कि फाइनल मुकाबले से पहले विराट कोहली और रोहित के संन्यास को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। लाखों फैंस इस उम्मीद में थे कि ख़िताब जीतने के बाद संभवतः विराट कोहली और रोहित शर्मा संन्यास ले लें। इस बात की आशंका थी कि खिताब जीतने के बाद हो सकता है दोनों खिलाड़ी वनडे फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दें। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भारत के धाकड़ बल्लेबाज विराट ने पुष्टि की है कि वह अभी रिटायरमेंट (Virat Kohli retirement) नहीं लेंगे। वो देश के लिए खेलते रहेंगे। उन्होंने तत्काल संन्यास की कोई घोषणा नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि “चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में न्यूजीलैंड पर भारत की जीत के बाद टीम अच्छे हाथों में है।” खैर, मैच खत्म होने के बाद कोहली से संन्यास का सवाल तो नहीं पूछा गया, लेकिन कोहली ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। जब आप टीम छोड़ते हैं, तो आप टीम को बेहतर स्थिति में छोड़ना चाहते हैं (Virat Kohli retirement)  विराट ने टीम इंडिया की शानदार जीत पर कहा कि “यह अद्भुत है। हम ऑस्ट्रेलिया के मुश्किल दौरे के बाद वापसी करना चाहते थे। हम एक बड़ा टूर्नामेंट जीतना चाहते थे। इसलिए चैंपियंस ट्रॉफी जीतना अद्भुत है। ड्रेसिंग रूम में बहुत प्रतिभा है और वे अपने खेल को और आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनकी मदद करने और अपना अनुभव साझा करने के लिए खुश हैं। और यही बात इस भारतीय टीम को मजबूत बनाती है। सभी खिलाड़ियों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। हम एक अद्भुत टीम का हिस्सा रहे हैं। प्रैक्टिस सेशन में हमने जितना काम किया है, उसके बाद खिताब जीतकर बहुत अच्छा लगता है।” रिटायरमेंट (Virat Kohli retirement) को स्पष्ट करते हुए कोहली ने कहा कि “जब आप टीम छोड़ते हैं, तो आप टीम को बेहतर स्थिति में छोड़ना चाहते हैं। मुझे लगता है कि हमारे पास एक ऐसी टीम है जो अगले आठ सालों तक दुनिया का सामना करने के लिए तैयार है। शुभमन ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेयस ने कुछ बेहतरीन पारियां खेली हैं। केएल ने हमारे लिए मैच फिनिश किए हैं और हार्दिक ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया है।” कोहली ने आगे कहा कि “टीम दुनिया का सामना करने के लिए तैयार है।” इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास रिटायरमेंट की तमाम अटकलों (Virat Kohli retirement) को चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने के बाद कर दिया खारिज  इस तरह कोहली ने अपने कैरियर को लेकर लगाई जा रही तमाम अटकलों (Virat Kohli retirement) को रविवार को चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने के बाद खारिज कर दिया। इसके अलावा एक वायरल वीडियो सामने आया है जिसमें रोहित शर्मा जश्न मनाने के दौरान विराट कोहली से अपने रिटायरमेंट को लेकर बात करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि रोहित कहते हैं कि “भाई हम रिटायर नहीं हो रहे हैं।” कहने की जरूरत नहीं, न सिर्फ कोहली के फैंस बल्कि टीम इंडिया को भी किंग कोहली से काफी उम्मीदें हैं। देखना यह दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कोहली अपने बल्ले से कितने रिकॉर्ड तोड़ते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Virat Kohli retirement #ViratKohli #KingKohli #KohliRecords #ViratKohliRetirement #CricketLegend #KohliMilestones #IndianCricket #GoatKohli #KohliEra #RunMachine

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Spain Pakistani arrests

Pakistani arrests in Spain: स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार

स्पेन के बार्सिलोना में एक संगठन के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन किया गया। खबर के मुताबिक कैटेलोनिया पुलिस, स्पेनिश राष्ट्रीय पुलिस और इतालवी पुलिस के संयुक्त अभियान में बार्सिलोना में 10 और इतालवी शहर पियासेंज़ा में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इन पर अपने विरोधियों की हत्या और सिर कलम करने के लिए उकसाने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक जांच में पता चला कि संदिग्ध किसी ऐसे संगठित आपराधिक संगठन से जुड़े थे, जो मैसेजिंग ग्रुप के जरिए हिंसक आदेश जारी करते थे। दरअसल, बार्सिलोना में बीती रात कई मस्जिदों पर आतंकवाद रोधी दस्ते ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस को शक था कि इन मस्जिदों से आतंकी गतिवधियां संचालित की जा रही हैं। मजे की बात यह कि इस छापेमारी के एक दिन पहले बार्सिलोना में ही 10 पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिर क्या था इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबलों ने कई मस्जिदों में अचानक छापेमारी की।  यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था (Pakistani arrests in Spain) इस छापेमारी पर स्पेनिश पुलिस बलों द्वारा जारी किये गए बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन 3 मार्च की रात को किया गया था और जांच के बाद 2022 में 5 और 2023 में 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस बीच सोमवार को सैंट एड्रिया डे बेजोस, मोंटकाडा आई रेसच, सांता कोलोमा डे ग्रामेनेट और सबडेल में 10  (Pakistani arrests in Spain) गिरफ्तारियां हुईं। जांच में पता चला कि संगठन एक चरमपंथी समूह से जुड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार, यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था। ये मैसेजिंग ऐप के माध्यम से विरोधियों के खिलाफ हिंसक संदेश फैलाने का काम करता था। इस दौरान कुछ व्यक्तियों ने यूरोप में विशिष्ट लोगों को संभावित लक्ष्य के रूप में पहचान करनी शुरू कर दी थी। ध्यान देने वाली बात यह कि इस संगठन के पोस्ट में उन व्यक्तियों की भी प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने ईशनिंदा के आरोप में यूरोप और पाकिस्तान में हमले किए थे। समूह का उद्देश्य न सिर्फ चरमपंथी विचारों का प्रचार करना था बल्कि संभावित लक्ष्यों की पहचान करना भी था ताकि भविष्य में सटीक कार्रवाई की जा सके। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष किया गया पेश  खैर, यह भी पता चला है कि गिरफ्तार महिलाओं में से एक के नेतृत्व वाले मैसेजिंग समूह में सिर्फ महिलाएं ही शामिल थीं। जांच अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का संबंध आतंकवादी संगठन से है। जिसे अपने आर्थिक समर्थन के लिए अपने सदस्यों से ही दान मिला करता था। जानकारी के लिए बता दें कि 6 मार्च को, दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। उन पर आतंकवाद की सहायता, उसे बढ़ावा देने, आर्थिक मदद करने और भर्ती करने के साथ-साथ संभावित लक्ष्यों की पहचान करने हेतु प्रारंभिक कदम उठाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई उपर्युक्त अदालत के न्यायाधीश की देखरेख में हो रही है। खबर के मुताबिक न्यायाधीश ने स्पेन के राष्ट्रीय न्यायालय के लोक अभियोजक कार्यालय के सहयोग से चार लोगों को हिरासत में लेने का आदेश दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistani arrests in Spain #SpainTerrorAction #PakistanArrests #TerrorismCrackdown #SpainPolice #GlobalSecurity #BreakingNews #TerrorSuspects #InternationalCrime #LawEnforcement #SecurityAlert

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Mark Carney होंगे कनाडा के नये प्रधानमंत्री, क्या सुधरेंगे भारत से संबंध?

ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी को देश के नया प्रधानमंत्री चुनने को कह दिया था। हालांकि अब जाकर कनाडा के नए प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगी है। मार्क कार्नी, जी हाँ मार्क कार्नी (Mark Carney) कनाडा के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कनाडा के पीएम की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा था। वर्तमान पीएम जस्टिन ट्रूडो के उत्तराधिकारी के रूप में मार्क कार्नी के नाम ठप्पा लगा दिया है। रविवार को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने उन्हें अपना नेता चुना। दरअसल, ट्रूडो के खिलाफ अपने ही नेताओं ने मोर्चा खोल लिया था, जिसके बाद ट्रूडो ने इस्तीफे का ऐलान किया था। खैर, नाम के ऐलान के कार्नी जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे। वैसे तो मार्क कार्नी कनाडा की राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन इस बीच इस बीच उन्हें मौके कई बार मिले। साल 2012 में ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने वित्त मंत्री बनने का मौका दिया था, लेकिन उनके प्रस्ताव को उन्होंने नकार दिया था। बता दें कि कार्नी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं औऱ वह दुनिया के दो बड़े देशों में गवर्नर रह चुके हैं। मार्क कार्नी (Mark Carney) को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है बात करें मार्क कार्नी की तो वे (Mark Carney) 59 वर्ष के हैं। 16 मार्च, 1965 को नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़ के फ़ोर्ट स्मिथ में जन्मे कार्नी का पालन-पोषण एडमॉन्टन, अल्बर्टा में हुआ था। मार्क कार्नी एक प्रसिद्ध कनाडाई आर्थिक विशेषज्ञ हैं। कार्नी को केंद्रीय बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 2008 से साल 2013 तक बैंक ऑफ कनाडा और 2013 से 2020 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड का संचालन भी किया है। यही नहीं कार्नी गोल्डमैन सैक्स के पूर्व कार्यकारी भी रहे हैं। साल 2003 में बैंक ऑफ कनाडा के डिप्टी गवर्नर नियुक्त होने से पहले उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो और टोरंटो में 13 साल तक काम किया। उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं है।उन्हें विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने, केंद्रीय बैंकों की भूमिका को पुनः परिभाषित करने में माहरत हासिल है। रही बात उनकी शिक्षा की तो साल 1988 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास मार्क कार्नी (Mark Carney) रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है  ऐसे में बड़ा सवाल यह कि भारत के प्रति मार्क कार्नी (Mark Carney) का क्या रुख होगा। क्योंकि जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों को बदतर करने में कोई कोर असर नहीं छोड़ी थी। हालांकि मार्क कार्नी रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है। दरअसल,कार्नी ही वह शख्स हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि “भारत के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने चाहिए।” यहां जानकारों की माने तो मार्क कार्नी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पसंद नहीं करते। वो बात और है कि उन्होंने कभी खुल कर मुख़ालफ़त नहीं की। कनाडा पर ट्रंप की बदनीयत के बाद कार्नी के सामने न सिर्फ इकोनॉमी को मजबूत करने बल्कि देश के लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती होगी। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कनाडा इस समय कई संकटों से घिरा है। जिसमें अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर सबसे ऊपर है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mark Carney #MarkCarney #CanadaPM #CanadaIndiaRelations #JustinTrudeau #Diplomacy #GlobalPolitics

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Champions Trophy 2025

IND vs NZ: भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास

भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) ने 12 साल के लंबे इंतजार के बाद चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (Champions Trophy 2025) पर आखिकार कब्जा कर ही लिया। इसके साथ ही भारत दुनिया की पहली टीम बन गई जिसने तीन बार यह खिताब अपने नाम किया है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम (Dubai International Cricket Stadium) में खेले गए फाइनल मुकाबले में रोहित शर्मा की अगुवाई में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर जीत हासिल की है। भारत और न्यूजीलैंड के मुबीच आज मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट खोकर 251 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने एक ओवर शेष रहते 254 रन बनाकर शानदार जीत दर्ज की। 10 महीनों में भारत का दूसरा ICC खिताब भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के लिए यह जीत बेहद खास रही क्योंकि यह पिछले 10 महीनों में उनका दूसरा ICC खिताब था। जून 2024 में टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) जीता था और अब चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (Champions Trophy 2025) भी अपने नाम कर लिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और किसी भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। इससे पहले भारत ने 2002 में सौरव गांगुली की कप्तानी और 2013 में महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में यह ट्रॉफी जीती थी। अब रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के नेतृत्व में टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया। जडेजा ने दिलाई जीत, राहुल का अहम योगदान फाइनल मुकाबले के आखिरी पलों में रवींद्र जडेजा ने विनिंग चौका लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उन्होंने केएल राहुल के साथ मिलकर नाबाद साझेदारी निभाई और टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। केएल राहुल ने 34 रन बनाकर टीम को स्थिरता दी, वहीं जडेजा ने 6 गेंदों में नॉटआउट 9 रन बनाए। इससे पहले श्रेयस अय्यर (48 रन) और अक्षर पटेल (29 रन) की अहम पारियों ने भारत की जीत की नींव रखी। रोहित-गिल की शानदार ओपनिंग साझेदारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और शुभमन गिल (Shubman Gill) ने शानदार शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए 105 रनों की साझेदारी की। हालांकि, शुभमन गिल 31 रन बनाकर आउट हो गए, जिसके बाद भारत की पारी थोड़ी लड़खड़ा गई। विराट कोहली (Virat Kohli) केवल 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। रोहित शर्मा, जो शानदार लय में दिख रहे थे, 76 रन की जबरदस्त पारी खेलकर आउट हो गए। उन्होंने 7 चौके और 3 छक्के लगाए। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने मुश्किल समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया और टीम को जीत तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड ने दिया था कड़ा मुकाबला न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया। धीमी पिच पर भारतीय स्पिनरों ने बेहतरीन गेंदबाजी की, जिससे न्यूजीलैंड की पारी पूरी तरह से खुलकर नहीं खेल पाई। डेरिल मिचेल ने 101 गेंदों में 63 रन बनाए, जबकि माइकल ब्रेसवेल ने 40 गेंदों में तेजतर्रार 53 रन जोड़े। न्यूजीलैंड ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने शानदार वापसी कराते हुए 38 ओवरों के भीतर 5 महत्वपूर्ण विकेट चटका दिए। कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती ने 2-2 विकेट झटके, जबकि रवींद्र जडेजा को भी एक सफलता मिली। इसे भी पढ़ें:- India vs New Zealand match में मोहम्मद शमी पर रहेंगी सभी की निगाहें, रिकॉर्ड बहुत कुछ करते हैं बयां भारत ने चुकता किया 25 साल पुराना हिसाब इस खिताबी जीत के साथ भारतीय टीम ने 25 साल पुराना बदला भी पूरा कर लिया। वर्ष 2000 में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर ट्रॉफी जीती थी। इस बार भारत ने जीत दर्ज कर पुरानी हार का हिसाब बराबर कर लिया। इसके अलावा, 2019 के वनडे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और 2021 की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में न्यूजीलैंड से मिली हार का भी यह करारा जवाब था। भारतीय टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की इस चैंपियंस ट्रॉफी (Champions Trophy) जीत ने एक बार फिर से टीम इंडिया की विश्व क्रिकेट में मजबूती को दर्शाया है। रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट के दौरान कोई भी टीम उन्हें हरा नहीं पाई। भारतीय टीम का यह अजेय अभियान क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। यह जीत न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी गर्व का क्षण है। टीम इंडिया ने साबित कर दिया कि वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में भी जीत हासिल करने का माद्दा रखते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Champions Trophy 2025 #ChampionsTrophy #ChampionsTrophy2025 #RohitShrama #ICC #IndianCricketTeam

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Yuyutsu in Mahabharata

महाभारत युद्ध के बाद जीवित रहने वाला कौरव: युयुत्सु की अनसुनी कहानी

महाभारत (Mahabharata) का महाकाव्य भारतीय संस्कृति और इतिहास का एक अहम हिस्सा है। यह कथा न केवल धर्म, न्याय और कर्तव्य के बारे में है, बल्कि इसमें मानवीय भावनाओं, संघर्ष और जीवन के गहरे सबक भी छिपे हैं। महाभारत के युद्ध में कौरवों और पांडवों के बीच भीषण संग्राम हुआ, जिसमें अधिकांश कौरव मारे गए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धृतराष्ट्र (Dhritarashtra) की एक संतान ऐसी भी थी, जो इस युद्ध के बाद भी जीवित रही? आइए, जानते हैं उस कौरव की कथा, जिसने महाभारत के युद्ध में अपनी जान बचाई और आगे चलकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धृतराष्ट्र की संतान: कौरवों का परिचय धृतराष्ट्र,( Dhritarashtra) हस्तिनापुर के महाराज विचित्रवीर्य के पुत्र थे, लेकिन जन्म से ही अंधे होने के कारण वे राजगद्दी पर नहीं बैठ सके। उनकी पत्नी गांधारी से उन्हें 100 पुत्र और एक पुत्री प्राप्त हुईं, जिन्हें कौरव के नाम से जाना जाता है। इनमें सबसे बड़े पुत्र दुर्योधन थे, जो कौरवों के नेता बने। महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ने वाले अधिकांश योद्धा युद्ध में मारे गए, लेकिन धृतराष्ट्र की एक संतान ऐसी थी, जो इस युद्ध के बाद भी जीवित रही। कौरवों का 101वां भाई कौन था? धृतराष्ट्र (Dhritarashtra) और गांधारी के 100 पुत्रों के अलावा, उनका एक और पुत्र था, जिसका जन्म गांधारी की दासी सुगाधा से हुआ था। इस पुत्र का नाम युयुत्सु (Yuyutsu) था, जो दुर्योधन का सौतेला भाई था। युयुत्सु (Yuyutsu) को भी वैसे ही शिक्षित और पाला गया जैसा कि धृतराष्ट्र के अन्य पुत्रों को, लेकिन दुर्योधन ने कभी उसे अपना भाई नहीं माना और न ही उसे सम्मान दिया। इस कारण युयुत्सु कौरवों से अधिक पांडवों के प्रति झुकाव रखते थे और अंततः महाभारत युद्ध में उन्होंने पांडवों का साथ दिया। युयुत्सु का निर्णय: पांडवों का साथ जब कुरुक्षेत्र युद्ध की घोषणा हुई, तब युयुत्सु (Yuyutsu) ने इसे रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। शुरुआत में वे कौरवों की ओर थे, लेकिन जब युद्ध का पहला दिन आया, तो युधिष्ठिर ने घोषणा की कि यह धर्मयुद्ध है, और जो भी धर्म का पक्ष लेना चाहता है, वह अपनी सेना बदल सकता है। युधिष्ठिर की इस बात को सुनकर युयुत्सु (Yuyutsu) ने सत्य और धर्म का साथ देने का निर्णय लिया। उन्होंने कौरवों की सेना छोड़कर पांडवों की सेना में शामिल होने का फैसला किया। उनके इस फैसले से दुर्योधन बहुत क्रोधित हुआ, लेकिन युयुत्सु ने धर्म के मार्ग को चुना और पांडवों के साथ युद्ध में शामिल हुए। युद्ध में युयुत्सु की भूमिका युयुत्सु (Yuyutsu) अत्यंत बुद्धिमान और कुशल प्रबंधक थे। उनकी इस क्षमता को देखते हुए पांडवों ने उन्हें सीधा युद्ध करने के बजाय सैन्य प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी। वे पांडवों की सेना के लिए भोजन, पानी और हथियारों की व्यवस्था करने का कार्य संभालते थे, जिससे युद्ध के दौरान सैन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसे भी पढ़ें:- कल्कि अवतार: कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? युद्ध के बाद युयुत्सु का जीवन महाभारत (Mahabharata) के युद्ध के बाद, जब पांडवों ने हस्तिनापुर का शासन संभाला, तो युयुत्सु ने भी उनके शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युधिष्ठिर ने युयुत्सु को अपना सलाहकार और मंत्री बनाया। युयुत्सु की न्यायप्रियता और बुद्धिमत्ता ने उन्हें पांडवों के शासन में एक विश्वसनीय सहयोगी बना दिया। उन्होंने हस्तिनापुर के पुनर्निर्माण और प्रजा के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। युयुत्सु का चरित्र और सीख युयुत्सु (Yuyutsu) का चरित्र महाभारत (Mahabharata) की कथा में एक महत्वपूर्ण सीख देता है। वे इस बात का उदाहरण हैं कि न्याय और धर्म का साथ देना कितना महत्वपूर्ण है, चाहे उसके लिए अपने परिवार या समाज के विरुद्ध ही क्यों न जाना पड़े। युयुत्सु ने दिखाया कि सही और गलत के बीच फर्क करना और धर्म के मार्ग पर चलना ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Mahabharata #Mahabharata #KurukshetraWar #Yuyutsu #Kauravas #MahabharatFacts #HinduMythology #DharmYudh #EpicStories #AncientIndia #MahabharatSecrets

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Pradosh Vrat

फाल्गुन प्रदोष व्रत 2025: महत्व, पूजा विधि और कथा

हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। इनमें से एक महत्वपूर्ण व्रत है प्रदोष व्रत, जो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और यह व्रत भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। जानते हैं कि प्रदोष व्रत का क्या महत्व है, इसकी पूजा विधि क्या है और इससे जुड़ी कथा क्या है। कब है फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 11 मार्च को सुबह 8:12 बजे शुरू होगी और 12 मार्च को सुबह 9:11 बजे समाप्त होगी। इसलिए, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) 11 मार्च को रखा जाएगा। चूंकि यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। यह मार्च महीने का पहला और फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत का महत्व प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष पूजा की जाती है और उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। इस व्रत को करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह व्रत भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस व्रत को करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) की पूजा विधि अत्यंत सरल और पवित्र मानी जाती है। इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें: इसे भी पढ़ें:  ब्रह्मा जी ने कैसे की सृष्टि की रचना? जानिए क्या है पौराणिक कहानी प्रदोष व्रत के लाभ प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा पाने का एक उत्तम साधन माना जाता है। इसे रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। प्रदोष व्रत के माध्यम से भक्त अपने पापों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं। यह व्रत न केवल आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है, बल्कि मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी देता है। साथ ही, इसे करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Pradosh Vrat #PradoshVrat2025 #LordShiva #PradoshVrat #ShivaPuja #IndianFestivals #HinduRituals #SpiritualJourney #DivineBlessings #PradoshVratKatha #IndianCulture #FaithAndDevotion #ShivaBhakt #VratAndPuja #SpiritualPeace #IncredibleIndia

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Champions Trophy 2025 Final between India and New Zealand

Champions Trophy 2025 Final में क्या 25 साल पुरानी अपनी हार का बदला लेगी टीम इंडिया?

9 मार्च को दुबई के इंटरनेशनल मैदान पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी 2025 फाइनल (Champions Trophy 2025 Final) का मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों के पास अनुभवी खिलाड़ियों की अपनी फ़ौज है। कहने की जरूरत नहीं है, दोनों के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो चंद गेंदों में ही मैच का रुख बदल सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि भारतीय टीम लगातार तीसरा चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलेगी। बता दें कि भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का फाइनल विराट कोहली की कप्तानी में खेला था। लेकिन तब टीम इंडिया को हार का मुंह देखना पड़ा था। पाकिस्तान ने टीम इंडिया को 180 रनों से मात दी थी। अब एक बार फिर टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मुकाबला खेलने के लिए तैयार बैठी है। यह तो ठीक, लेकिन गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि टीम इंडिया में चार खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जो पिछले चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भी खेले थे।  चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल (Champions Trophy 2025 Final) में भी इनका खेलना लगभग है तय  बता दें कि विराट कोहली, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा और हार्दिक पांड्या पाकिस्तान के खिलाफ साल 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला खेले थे। और गौर करने वाली बात यह कि न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल (Champions Trophy 2025 Final) में भी इनका खेलना लगभग तय ही है। बड़ी बात यह कि रोहित मौजूदा भारतीय टीम के कप्तान हैं और उनकी कप्तानी में ही टीम इंडिया बिना एक भी मैच हारे चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में पहुंची है। खैर, बात करें विराट कोहली के फॉर्म की तो वो शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ शतक लगाया था। यही नहीं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में भी दमदार प्रदर्शन किया था। वह भारतीय बैटिंग ऑर्डर की रीढ़ बने हुए हैं। हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा ने भी अभी तक मौजूदा टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। न सिर्फ शानदार प्रदर्शन किया है बल्कि टीम के लिए मैच विनर भी बनकर उभरे हैं। अच्छी बात यह कि हार्दिक तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ मिलकर बढ़िया गेंदबाजी कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- India vs New Zealand match में मोहम्मद शमी पर रहेंगी सभी की निगाहें, रिकॉर्ड बहुत कुछ करते हैं बयां चैंपियंस ट्रॉफी 2000 के फाइनल मैच में टीम इंडिया को मिली थी करारी शिकस्त (Champions Trophy 2025 Final) भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी में यह दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। इससे पहले दोनों टीमों के बीच चैंपियंस ट्रॉफी 2000 का फाइनल मैच हुआ था। तब न्यूजीलैंड की टीम ने 4 विकेट से जीत दर्ज की थी। इस मैच में भारत की तरफ से सौरव गांगुली ने शतकीय पारी खेलते हुए शानदार 117 रन बनाए थे। लेकिन न्यूजीलैंड के क्रिस केन्स ने 102 रन बनाकर गांगुली के शतक पर पानी फेर दिया। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल (Champions Trophy 2025 Final) मुकाबले में 25 साल पुरानी अपनी हार का बदला लेगी? इसका जवाब तो 9 मार्च को होने वाले मैच के दौरान ही  पता लग सकेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Champions Trophy 2025 Final #ChampionsTrophy2025 #TeamIndia #INDvsPAK #CricketFinal #CricketRevenge #CT2025Final #IndiaWins #CricketFever #BCCI #RohitSharma

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Rahul Gandhi on Gujarat elections: राहुल गांधी ने बताया इसलिए गुजरात में सत्ता से बाहर है कांग्रेस

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं। ताजा उदहारण है, गुजरात के अहमदाबाद का। जहां जाने अनजाने में ही सही दिल की बात जुबां पर आ ही गई। दरअसल, राहुल गांधी दो दिन के गुजरात दौरे पर हैं। शनिवार को उन्होंने अहमदाबाद के जेड हॉल में प्रदेश के करीब 2 हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस की लीडरशीप में दो तरह के लोग हैं। उनमें बंटवारा है। एक हैं जो जनता के साथ खड़े हैं, जिनके दिल में कांग्रेस की विचारधारा है। दूसरे वे हैं, जो जनता से कटे हुए हैं, दूर बैठते हैं और उनमें से आधे बीजेपी से मिले हुए हैं।” राहुल ने आगे कहा कि “मेरी जिम्मेदारी है कि जो ये दो ग्रुप हैं इनको छांटना है। कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं है। बब्बर शेर हैं लेकिन पीछे से चेन लगी हुई है तो वे चेन से बंधे हैं। यहां रेस के घोड़ों को बारात में बांध दिया जाता है। यदि 30-40 लोगों को निकालना पड़े तो ये भी करेंगे। बीजेपी के लिए अंदर से काम कर रहे हो, जाओ बाहर जाकर करो।” खैर, उन्होंने गुजरात में कांग्रेस की स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी। अपनी बात कहते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बीते 30 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और इसका कारण पार्टी की अपनी कमजोरियां हैं।  उन्होंने कहा कि “हर बार गुजरात में चुनावों की चर्चा होती है। साल 2007, 2012, 2017, 2022 और 2027 लेकिन सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं है। गुजरात की जनता हमें तभी सत्ता में लाएगी जब हम अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएंगे।  अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की दी नसीहत  असल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की नसीहत देते हुए कहा कि “गुजरात आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन वह फंसा हुआ महसूस करता है। और मैं साफ कहूं तो गुजरात कांग्रेस भी उसे रास्ता नहीं दिखा पा रही है। मैं यह बिना किसी शर्म और डर के कह रहा हूं कि हमारी पार्टी के नेता, प्रदेश अध्यक्ष और खुद मैं भी गुजरात की जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं।” यही नहीं राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि “कांग्रेस को आजादी दिलाने में गुजरात की अहम भूमिका थी।” इस दौरान उन्होंने कहा कि “जब कांग्रेस को ब्रिटिश हुकूमत का सामना करना पड़ा तब हमें नेतृत्व की तलाश थी। वह नेतृत्व हमें दक्षिण अफ्रीका से नहीं बल्कि गुजरात से मिला। गांधीजी ने हमें संघर्ष करने सोचने और आगे बढ़ने की राह दिखाई।” राहुल ने यह भी कहा कि “अगर कांग्रेस को भविष्य में सत्ता में आना है तो उसे गुजरात से ही सीखना होगा।” इसे भी पढ़ें:-  देश से भी ज्यादा राज्य की विकास दर, प्रति व्यक्ति आय में महाराष्ट्र चौथा नंबर पर, अजित पवार ने बताएं विकास के आंकड़े पार्टी के नेता केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें (Rahul Gandhi on Gujarat elections) इस दौरान राहुल गाँधी पार्टी नेताओं से कहा (Rahul Gandhi on Gujarat elections) कि “वे केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिस दिन कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी निभाएगी जनता खुद उसे समर्थन देगी। वैसे उनका यह बयान कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए ही था। खैर, वो कहते हैं न राजनीति कितनी भी कटु और चुनौतीपूर्ण हो लेकिन कई बार नेताओं की जुबान पर सच्चाई आ जाती है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि गुजरात में कांग्रेस के कार्यकर्त्ता उनके इस बयान के प्रति कितनी तल्लीनता दिखाते हैं और संगठन किस दिशा में जाता है। बता दें कि गुजरात में बीते चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi on Gujarat elections #RahulGandhi #Congress #GujaratElections #BJP #AAP #ElectionResults #PoliticalAnalysis #IndianPolitics

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